मोगादिशु । अमेरिकी सेना ने सोमालिया में इस्लामिक स्टेट (IS) के आतंकवादियों के खिलाफ समन्वित हवाई हमले किए हैं। यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान अफ्रीका में पहला बड़ा हमला है।
🔹 अमेरिकी सेना का बड़ा ऑपरेशन
अमेरिकी अफ्रीका कमांड (AFRICOM) के इन हमलों को ट्रंप ने अधिकृत किया। सोमालिया सरकार के सहयोग से किए गए इस मिशन में कई IS आतंकवादी मारे गए। पेंटागन ने कहा – इस ऑपरेशन में किसी भी नागरिक को किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ।
🔹 जानिए क्या कहा ट्रंप ने..?
ट्रंप ने कहा – “हमने उन गुफाओं को नष्ट कर दिया जहां वे छिपे थे, और कई आतंकवादियों को मार गिराया, बिना किसी नागरिक को नुकसान पहुंचाए। हम वर्षों से इस ISIS प्लानर को निशाना बना रहे थे, लेकिन बाइडेन की सुस्ती के कारण ऑपरेशन में देरी हुई। मैंने यह कर दिखाया!”
🔹 IS के खिलाफ अमेरिका की रणनीति
अमेरिका द्वारा IS के एक वरिष्ठ योजनाकार और नए भर्ती आतंकवादियों को निशाना बनाया गया। पेंटागन ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। वहीं व्हाइट हाउस ने अभी तक इस ऑपरेशन पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
🔹 सोमालिया में IS की बढ़ती मौजूदगी
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, IS के आतंकी उत्तरी सोमालिया में लगातार अपनी गतिविधियां बढ़ा रहे हैं। वे फिरौती के लिए अपहरण, ड्रोन से बचने की तकनीक और छोटे क्वाडकॉप्टर बनाने जैसे युद्धक कौशल सीख रहे हैं। वहीं अगर अंतरराष्ट्रीय संकट समूह (ICG) की माने तो , पुंटलैंड के काल मिस्कात पहाड़ों में सैकड़ों IS आतंकवादी छिपे हुए हैं।
🔹 अमेरिका का वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश
30 जनवरी को सीरिया में अमेरिकी हमलों में अल-कायदा से जुड़े एक आतंकवादी को मारा गया था। ट्रंप ने दो टूक कहा – ‘जो अमेरिकी नागरिकों को नुकसान पहुंचाएंगे, उन्हें हम ढूंढकर खत्म कर देंगे!’ वहीं CENTCOM ने भी पुष्टि की कि अमेरिका IS और अन्य आतंकी संगठनों के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगा।
बरहाल ये तो स्पष्ट है कि अमेरिकी सेना ने सोमालिया में IS के ठिकानों पर बड़ा हमला किया है। वहीं ट्रंप प्रशासन ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दते हुए आतंकियों से कहा है कि– ‘हम तुम्हें ढूंढ लेंगे और खत्म कर देंगे’। इसके अलावा सोमालिया और सीरिया में बढ़ती आतंकवादी गतिविधियों के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य नीति को ख़त किया है।
लेकिन अब भविष्क्याय में देखने वाली बात यह होगी कि क्या ट्रंप की आक्रामक सैन्य रणनीति वैश्विक आतंकवाद को रोकने में कारगर होगी..?











