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जो कहा सो नहीं किया

अनुसूचित जाति समुदाय से आआपा को अच्छा-खासा समर्थन मिलता था, लेकिन यह वर्ग अब असंतुष्ट नजर आ रहा है। इस वर्ग से वादाखिलाफी कहीं आआअपा को महंगा न पड़ जाए 

Written byडॉ. रौनक कुमार पाठकडॉ. रौनक कुमार पाठक
Feb 2, 2025, 10:11 am IST
inविश्लेषण, दिल्ली, पर्यावरण

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में अनुसूचित जाति समुदाय निर्णायक भूमिका निभा सकता है। कभी आम आदमी पार्टी का मुख्य समर्थन आधार माने जाने वाला यह समुदाय अब पार्टी से असंतुष्ट नजर आ रहा है। हाल ही में एक प्रेस कांफ्रेंस में सेवानिवृत्त न्यायाधीश एस.एन. ढींगरा ने इस असंतोष को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि आआपा ने अनुसूचित जाति समुदाय के हितों की उपेक्षा की है, जिससे उनकी नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं।

आआपा से खास तौर से रविदासिया और जाटव जैसी प्रमुख जातियां, जिन्होंने पहले पार्टी का समर्थन किया था, अब नाराज हैं। समुदाय के कई असंतुष्ट नेता पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं। स्वच्छता कर्मचारी, जो अनुसूचित जाति समुदाय का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, स्थायी रोजगार और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग कर रहे हैं। लेकिन आआपा सरकार ने न केवल उनकी मांगों, बल्कि उनकी समस्याओं की भी अनदेखी की है। ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले स्वच्छता कर्मचारियों के परिवारों के लिए एक करोड़ रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा भी कागजों तक सीमित रही। इसके अतिरिक्त, अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नौकरियां आउटसोर्सिंग के कारण छीनी जा रही हैं, जिससे सुरक्षित आजीविका की संभावनाएं सीमित हो रही हैं।

दिल्ली के कई अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव स्पष्ट दिखता है। दक्षिण दिल्ली के देवली स्थित नई बस्ती में सत्तारूढ़ स्थानीय विधायक की आलोचना हुई है, क्योंकि क्षेत्र में विकास का कोई काम ही नहीं हुआ। इसी तरह, बिजवासन के शाहाबाद-मोहम्मदपुर क्षेत्र में पानी की भारी कमी और रेलवे ओवरब्रिज नहीं होने से लोग समस्याओं से जूझ रहे हैं। इससे अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों के प्रति आआपा सरकार की उदासीनता को उजागर होती है।

नाम की योजनाएं 

दिल्ली ही नहीं, पंजाब में भी अनुसूचित जाति के मैट्रिक छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजना लागू करने में सरकार विफल रही है। छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए समय पर धनराशि जारी न करने के कारण छात्रों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। दिल्ली में तो सरकार की योजनाएं योजनाएं अक्सर लक्षित समूह तक प्रभावी तरीके से पहुंच ही नहीं पातीं। योजनाओं में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के कारण भी धनराशि जारी करने में देरी होती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के लिए दी जाने वाली सहायता अक्सर पर्याप्त नहीं होती। साथ ही, कुछ योजनाओं का लाभ केवल एक विशेष समूह तक सीमित होने के कारण समग्र सामाजिक समानता में कमी आती है। वहीं, केंद्र सरकार की योजनाएं राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक कवरेज और स्थायित्व प्रदान करती हैं, जबकि दिल्ली सरकार की योजनाएं अल्पकालिक और घोषणाओं तक सीमित रहती हैं। वास्तविक बदलाव के लिए दीर्घकालिक और व्यावहारिक योजनाओं की आवश्यकता है।

इस बार विधानसभा चुनाव में अनुसूचित जाति समुदायों के लिए अपनी आवाज बुलंद करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह चुनाव न केवल दिल्ली का राजनीतिक भविष्य तय करेगा, बल्कि यह भी साबित करेगा कि कौन सी पार्टी हाशिए पर मौजूद समुदायों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता निभा सकती है।
Topics: दिल्ली विधानसभा चुनावनाम की योजनाएंName schemesआम आदमी पार्टी
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