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संविधान में संस्कृति

भारतीय संविधान में धर्म और संस्कृति से जुड़े चित्रों को अंकित किया गया है। यानी हमारे संविधान निर्माता यह मानते हैं कि इस देश का प्राण-तत्व धर्म है। जो लोग संविधान और धर्म को अलग-अलग करके देखते हैं, उनकी मंशा सही नहीं है

Written byRajpal Singh RawatRajpal Singh Rawat
Jan 6, 2025, 10:52 am IST
in भारत, विश्लेषण, संविधान
लंका विजय के बाद सीता को मुक्त कराने का प्रसंग

लंका विजय के बाद सीता को मुक्त कराने का प्रसंग

आजकल कुछ लोग भारतीय संविधान को लेकर बड़ी बेकार बातें कर रहे हैं। ऐसे लोगों का कहना है, ‘‘भारतीय संविधान हमें धर्म और संस्कृति की बात करने की अनुमति नहीं देता है।’’ कह सकते हैं कि ऐसे लोग वैचारिक रूप से दिवालिया हैं। ऐसे लोगों को पता होना चाहिए कि भारतीय संविधान की मूल प्रति में ऐसे अनेक चित्र हैं, जो भारतीयता और संस्कृति से जुड़े हैं। कोई चित्र हमारी संस्कृति को परिलक्षित करता है, कोई हमारे धर्म के स्वरूप को बता रहा है। कोई हमारे गौरवशाली इतिहास को बताता है। कोई स्वतंत्रता आंदोलन के वीरों पर केंद्रित है। कोई भारतीय कला से जुड़ा है, तो कोई हमारे प्राकृतिक सौंदर्य की जानकारी दे रहा है। संविधान निर्माताओं ने बहुत ही उदारता के साथ संविधान में धर्म और संस्कृति को स्थान दिया है।

डी.के. दुबे
वरिष्ठ अधिवक्ता
सर्वोच्च न्यायालय

संविधान की प्रस्तावना से पहले एक पूरे पृष्ठ पर ‘सत्यमेव जयते’ के साथ तीन मुख वाले शेर का चित्र अंकित है। यह दर्शाता है कि भारत में स्वाधीन गणतंत्र होगा, भारत के ऊपर भारतीयों के अतिरिक्त और किसी का शासन नहीं होगा। प्रस्तावना की चारों ओर हाथी, घोड़ा, बैल, बाघ के चित्र उकेरे गए हैं। ये चित्र दर्शाते हैं कि भारत देश कैसा होगा और फिर उसके नागरिकों के साथ व्यवहार कैसा होगा। संविधान के प्रथम भाग में भारत की परिभाषा बताने से पहले ही पृष्ठ पर नंदी के चित्र के साथ कुछ पुरातन चिन्ह हैं। इनके माध्यम से बताया गया है कि भारत चिर-पुरातन संस्कृति वाला और सनातन राष्ट्र के उद्घोष के साथ चलने वाला देश है। संविधान के भाग दो में वैदिक काल के आश्रम यानी गुरुकुल का दृश्य दिखाया गया है। यह बताता है कि भारत शिक्षा देने वाले गुरु, हवन करने वाले साधु, भिक्षु, कुटिया में रहने वाले लोगों के तप पर चलता रहा है। इसके अतिरिक्त पशु, पक्षी तथा पर्यावरण के संरक्षक पेड़-पौधों का भारत है।

भाग तीन में मूल अधिकारों का वर्णन करने से पहले रामायण का दृश्य है। इसमें भगवान श्रीराम की लंका पर विजय और माता सीता का उद्धार चित्रित किया गया है। इसका अर्थ है कि भारत में राम राज्य के समान ही नागरिकों के मूल अधिकार होंगे और राम राज्य के समान ही शासन की जिम्मेदारी होगी। यही कारण है कि मूलभूत अधिकार राज्य के विरुद्ध दिए गए हैं। भाग चार में नीति निर्देशक तत्वों के पूर्व युद्ध क्षेत्र में धर्म की स्थापना के लिए अर्जुन को निर्देश देते और और कुरुक्षेत्र में गीता का पाठ पढ़ाते भगवान श्रीकृष्ण का चित्र है। इसके माध्यम से यह बताया गया है कि किसी भी नागरिक के अधिकारों का हनन नहीं करने दिया जाएगा।

भाग पांच में भारत संघ एवं सरकार के अधिकार-कर्तव्य, नियम-करम के ठीक पहले बुद्ध के जीवन की एक झांकी दिखाई गई है। भाग छह में भगवान महावीर के जीवन से जुड़ा चित्र दिया गया है। बुद्ध और महावीर के विचार जीव के प्रति दया और समानता पर जोर देते हैं। इसका अर्थ यह निकाला जा सकता है कि भारत संघ हर जीव के प्रति संवेदनशील है और एक प्रत्येक नागरिक के साथ समान व्यवहार करता है।

संविधान के भाग सात में सम्राट

अशोक द्वारा भारत और विदेश में बौद्ध मत के प्रसार को दर्शाता एक चित्र है। भाग आठ में केंद्र शासित प्रदेशों का उपयोग पूरे देश के लिए किस प्रकार हो, इस पर बात करने से पहले गुप्त काल की कला का एक चित्र है। इसमें हनुमान जी को संजीवनी बूटी लाते दर्शाया गया है।

भाग नौ में विक्रमादित्य के राजदरबार का चित्र अंकित है। भाग 10 में प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय पर बना एक चित्र उकेरा गया है। इसके माध्यम से बताया गया है कि भारत प्राचीन काल से शिक्षा का केंद्र रहा है।

भाग 11 में ओडिशा की एक मूर्तिकला उकेरी गई है। भाग 12 में वित्त, संपत्ति और अधिकार की विवेचना से पहले भगवान नटराज का चित्र अंकित है। भाग 13 में महाबलीपुरम मूर्तिकला का दृश्य है। इसमें भागीरथ का तप और गंगा के अवतरण को चित्रित किया गया है। भाग 14 में अकबर का चित्र और मुगल वास्तुकला को दर्शाया गया है।

भाग 15 में छत्रपति शिवाजी महाराज और गुरु गोबिंद सिंह जी के चित्र हैं। इसका संदेश है कि शिवाजी महाराज जैसे राजा और गुरु गोबिंद सिंह जैसे गुरु हों। सच में ऐसे राजा और गुरु भारत को मिल जाएं तो भारत दुनिया का सिरमौर बन सकता है। भाग 16 में अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ाई लड़ने वाली रानी लक्ष्मीबाई के चित्र को स्थान दिया गया है। इसका अर्थ है कि भारत वीरांगनाओं की धरती है और वह अपनी स्वतंत्रता के लिए सर्वस्व न्योछावर कर सकता है। भाग 17 में गांधी जी के दांडी मार्च और भाग 18 में नोआखली में गांधी के दौरे को दर्शाया गया है। भाग 19 में उन वीरों का चित्रण है, जिन्होंने भारत से बाहर भारत को स्वतंत्र कराने के प्रयास किए। इनमें मुख्य रूप से नेताजी सुभाष चंद्र बोस हैं। भाग 20 में हिमालय का दृश्य दिखाया गया है। इसके माध्यम से बताया गया है कि हमारी प्राकृतिक विशेषताएं कैसी हैं। भाग 21 और 22 में रेगिस्तान के दृश्य हैं।

इन चित्रों को देखने के बाद यह कैसे कहा जा सकता है कि भारत का संविधान धर्म और संस्कृति की बात नहीं करता है?

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