"प्रॉमिसेस आर मेड टू बी ब्रोकन": कहीं दिल्ली में भी ऐसा ही तो नहीं होने जा रहा.?
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“प्रॉमिसेस आर मेड टू बी ब्रोकन”: कहीं दिल्ली में भी ऐसा ही तो नहीं होने जा रहा.?

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए अरविंद केजरीवाल ने नई गारंटियों और वादों का ऐलान किया है। लेकिन क्या ये योजनाएं वाकई लागू होंगी, या पंजाब की तरह केवल चुनावी लाभ के लिए बनाई गई हैं? जानिए, केजरीवाल की योजनाओं की हकीकत।

Written byप्रमोद कौशलप्रमोद कौशल
Jan 1, 2025, 04:03 pm IST
in भारत, मत अभिमत, दिल्ली
अरविन्द केजरीवाल

अरविन्द केजरीवाल

दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर से वादों और गारंटियों का पिटारा खोल दिया है। हालांकि इससे पहले पंजाब में भी आम आदमी पार्टी द्वारा ऐसी ही गारंटियों के दम पर सरकार बनाई गई थी परन्तु सत्ता में आए तीन साल पूरे होने को हैं लेकिन मातृशक्ति आज भी एक हजार रूपए प्रति महीने मिलने वाली राशि का इंतज़ार कर रही हैं। वादे तो होते ही तोड़ने के लिए हैं, (प्रोमेसिस आर मेड टू बी ब्रोकन….), कहीं, दिल्ली में भी ऐसा ही तो नहीं होने जा रहा, यह एक बड़ा सवाल है।

नए साल में दिल्ली में होने जा रहे विधानसभा चुनावों को लेकर तमाम सियासी दलों द्वारा तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और वादे व दावों का दौरा भी पूरे यौवन पर चल रहा है। इसी बीच रोचक बात यह सामने आ रही है कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री व आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल द्वारा एकाएक वादों और गारंटियों की झड़ी लगा दी गई है। दिल्ली की सत्ता पर बीते दस साल से काबिज आम आदमी पार्टी को शायद इस बार सिंहासन डगमगाता हुआ दिखाई दे रहा है कि शायद यही वजह है कि इस बात दस साल के कामों के दम पर आने का दम ना भरकर नए-नए शिगूफे छोड़ने का खेल खूब खेला जा रहा है लेकिन शायद दिल्ली की जनता इस बार वादों से पहले हकीकत की नज़रसानी ज़रूर करेगी।

बता दें कि दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल 23 फरवरी 2025 को खत्म होने जा रहा है और आने वाले दो महीनों में दिल्ली विधानसभा के चुनाव करवाए जा सकते हैं। पिछला चुनाव फरवरी 2020 में हुआ था जिसमें आम आदमी पार्टी ने 70 में से 62 सीटें जीती थीं। नए साल में दिल्ली को नई सरकार मिलने जा रही है इसमें कोई दो राय नहीं है लेकिन चुनावों से पहले अचानक ही वादों की जो झड़ी लगाई गई है उसके बाद अब पंजाब के लोग भी यह सोचने को मजबूर हैं कि आखिर दिल्ली वालों को ऐसा क्या मिलने जा रहा है जो पंजाब में पूर्ण बहुमत और एकाधिकार वाली सरकार उनको नहीं दे पा रही जबकि पार्टी और सुप्रीमो तो दोनों जगह एक ही हैं।

किए गए वादे-

30 दिसंबर : पुजारी ग्रंथी सम्मान योजना अरविंद केजरीवाल ने पुजारी ग्रंथी सम्मान योजना का ऐलान करते हुए कहा कि यदि उनकी सरकार बनती है तो वे इस योजना को शुरू करेंगे। इसके तहत मंदिर के पुजारियों और गुरुद्वारों के ग्रंथियों को 18 हजार हर महीने भत्ता दिया जाएगा।

18 दिसंबर : बुजुर्गों के लिए संजीवनी योजना अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की कि 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों का मुफ्त इलाज होगा। केजरीवाल ने साफ किया कि ये इलाज सभी बुजुर्गों के लिए मुफ्त होगा, चाहे वो किसी भी कैटेगरी में आते हों।

12 दिसंबर : महिलाओं के लिए महिला सम्मान योजना महिलाओं को हर महीने ₹1000 रुपए देने का ऐलान किया। इसे महिला सम्मान योजना नाम दिया गया है। 18 साल की उम्र पूरी करने वाली हर महिला इस स्कीम के दायरे में आएगी। चुनाव के बाद रकम को बढ़ाकर ₹2100 किया जाएगा।

10 दिसंबर : ऑटो चालकों के लिए 4 ऐलान केजरीवाल ने ऑटो चालक की बेटी की शादी के लिए 1 लाख रुपए, होली-दिवाली पर वर्दी बनवाने के लिए ढाई-ढाई हजार रुपए, 10 लाख रुपए का लाइफ इंश्योरेंस और 5 लाख का एक्सीडेंटल इंश्योरेंस देने का ऐलान किया। बच्चों की कोचिंग का खर्च भी दिया जाएगा।

21 नवंबर : 5 लाख लोगों को हर महीने ₹2500 तक पेंशन बुजुर्गों की पेंशन स्कीम को दोबारा शुरू करने का ऐलान किया। स्कीम में 80 हजार नए बुजुर्गों को और जोड़ा गया है। पहले 4.50 लाख लोगों को इस स्कीम का फायदा मिलता था। अब पांच लाख से ज्यादा इसके दायरे में आएंगे।

अब इन ऐलानों को लेकर एक सवाल उठता है कि क्या ये वादे केवल चुनावी लाभ के लिए हैं या इसके पीछे वाकई जनता की भलाई का कोई ठोस उद्देश्य है। यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि अरविंद केजरीवाल ने ये घोषणाएं दिल्ली में तो कीं, लेकिन पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार होने के बावजूद उन योजनाओं का कोई ठोस उदाहरण नहीं दिखता।

1. दिल्ली और पंजाब में योजनाओं का अंतर

आम आदमी पार्टी (AAP) ने फरवरी 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनावों में भारी बहुमत से जीत हासिल की थी, और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उस जीत के बाद कई वादे किए थे। हालांकि दिल्ली में इस योजना को हाल ही में लागू करने की प्रक्रिया शुरू हुई, जैसे कि महिलाओं को ₹1000 महीना देने वाली महिला सम्मान योजना और बुजुर्गों के मुफ्त इलाज की योजना। लेकिन पंजाब में जहां उनकी पार्टी की सरकार भी है, इन योजनाओं का कोई ठोस पालन नहीं किया गया। यह एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि अगर ये योजनाएं आम आदमी पार्टी की असली प्राथमिकताएं हैं, तो पंजाब में उन्हें क्यों लागू नहीं किया गया, जबकि पंजाब एक पूर्ण राज्य है और वहाँ राज्य सरकार को पर्याप्त अधिकार हैं।

2. बुजुर्गों के लिए संजीवनी योजना का क्या हाल है?

अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों को मुफ्त इलाज देने की घोषणा की है। यह योजना उन बुजुर्गों के लिए है जो किसी भी श्रेणी में आते हैं। यह योजना एक बहुत बड़ा वादा है, लेकिन क्या इसे अन्य राज्यों, विशेष रूप से पंजाब में लागू किया गया है? पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार ने क्या इस योजना को लागू करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए हैं? इसका उत्तर नकारात्मक है। पंजाब में न तो इस प्रकार की कोई योजना शुरू की गई है, और न ही बुजुर्गों के लिए मुफ्त इलाज देने की कोई पहल दिखाई दी है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना के तहत भी बीते समय के दौरान इलाज इसलिए बंद कर दिया गया था क्योंकि पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा डॉक्टरों को किया जाने वाला भुगतान नहीं किया गया था। अब इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यहां केजरीवाल की पार्टी की खुद की सरकार पूर्ण बहुमत और पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त सूबे में काम कर रही है, वहां पर इस स्कीम का कोई अता पता नहीं तो फिर दिल्ली में ऐलान क्यों य़य़ जवाबः चुनाव।

3. महिला सम्मान योजना का प्रभाव

महिला सम्मान योजना के तहत, केजरीवाल ने घोषणा की थी कि दिल्ली की महिलाओं को हर महीने ₹1000 दिए जाएंगे, और चुनाव के बाद यह रकम ₹2100 तक बढ़ाई जाएगी।

यह एक अच्छा वादा था, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक कदम बताया गया था। इसके लिए आम आदमी पार्टी के वर्कर और कुछ प्राईवेट लोगों की मदद से रजिस्ट्रेशन किए जाने का काम तो शुरू कर दिया गया लेकिन दिल्ली सरकार द्वारा सार्वजनिक तौर पर विज्ञापन देकर ऐसी किसी भी स्कीम के ना होने की बात कही गई है।

दिल्ली सरकार जिसके मुखिया पहले केजरीवाल थे और अब आतिशी हैं, के दो विभागों द्वारा इस स्कीम को अफवाह बताया गया है। इसके साथ ही सवाल तो यह भी उठता है कि इस योजना का पंजाब में क्या हाल है? वहां पर महिलाओं के लिए किसी भी प्रकार की कोई समान योजना लागू नहीं की गई है, जबकि पंजाब में यह वादा चुनावों के दौरान किया गया था और सरकार बने तीन साल के करीब का समय हो गया है। जो यह दर्शाता है कि केवल दिल्ली के चुनावी फायदे के लिए यह योजना तैयार की गई है। यदि आम आदमी पार्टी की सरकार पंजाब में इस योजना को लागू करती, तो यह पार्टी के वास्तविक उद्देश्य को स्पष्ट करता।

4. ऑटो चालकों के लिए विशेष योजनाएं

केजरीवाल ने ऑटो चालकों के लिए कई ऐलान किए थे, जिनमें उनकी बेटियों की शादी के लिए ₹1 लाख की सहायता, होली और दिवाली पर वर्दी के लिए ढाई-ढाई हजार रुपए, 10 लाख रुपए का लाइफ इंश्योरेंस, 5 लाख का एक्सीडेंटल इंश्योरेंस, और बच्चों की कोचिंग के लिए खर्च का प्रावधान था। यह सब बहुत अच्छे वादे हैं, लेकिन पंजाब में तो ऑटो चालकों के लिए कोई ऐसा प्रावधान नहीं देखा गया। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार का क्या कारण था कि वे इन योजनाओं को लागू करने में विफल दिखाई दे रहे हैं। क्या यह केवल दिल्ली के चुनावों में मतदाताओं को लुभाने के लिए किए जाने वाले वादे तो नहीं य़ इसकी पड़ताल खुद आपको (दिल्ली वासियों को) ही करनी होगी।

5. बुजुर्गों की पेंशन स्कीम

दिल्ली में बुजुर्गों को हर महीने ₹2500 पेंशन देने की योजना की घोषणा के बाद, केजरीवाल ने इसे फिर से शुरू किया और इसमें 80 हजार नए बुजुर्गों को शामिल किया। लेकिन पंजाब में क्या यह पेंशन स्कीम लागू की गई? पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार होने के बावजूद इस स्कीम का कोई उदाहरण नहीं है, जो यह सिद्ध करता है कि यह योजना दिल्ली के चुनावी लाभ के लिए बनाई गई योजना थी। अगर पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार में यह योजना लागू नहीं हो सकती, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि पार्टी ने केवल दिल्ली में ही ऐसी योजनाएं बनाई हैं, जो केवल चुनावी लाभ के लिए थीं।

6. पुजारी ग्रंथी सम्मान योजना

30 दिसंबर को आम आदमी पार्टी के सुप्रीमों अरविंद केजरीवाल ने पुजारी ग्रंथी सम्मान योजना का ऐलान करते हुए कहा कि यदि उनकी सरकार बनती है तो वे इस योजना को शुरू करेंगे। इसके तहत मंदिर के पुजारियों और गुरुद्वारों के ग्रंथियों को 18 हजार हर महीने भत्ता दिया जाएगा। 31 दिसंबर से इस योजना का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया गया और साथ ही केजरीवाल द्वारा यह कहा जा रहा है कि इस योजना का विरोध करने वालों को पाप लगेगा।

सवाल यह है कि दिल्ली से ज्यादा पुजारी व ग्रंथी सिंह तो पंजाब में हैं, उनके लिए यह योजना आखिर शुरू करने में समस्या कहां है य़ दिल्ली में यदि वादे करने ही हैं तो उन्हें पहले पंजाब में लागू करके मिसाल पेश की जाए ताकि लोगों को पता चल सके कि केजरीवाल चुनावी वादे करके उन्हें गुमराह नहीं कर रहे चूंकि उन्होंने पंजाब में इन तमाम वादों को पहले ही लागू कर दिया है। लेकिन ऐसा कतई नहीं दिखाई दे रहा और पंजाब के लोग स्वयं हैरान हैं कि पंजाब में सरकार होने के बावजूद आम आदमी पार्टी यह सब पंजाब में लागू क्यों नहीं कर रही है।

हैरानी वाली बात है कि जिस दिन अरविंद केजरीवाल द्वारा इस स्कीम का ऐलान किया गया उसी दिन दिल्ली के मौलवी-मौलाना केजरीवाल की रिहायश के बाहर धरना दे रहे थे कि पिछले एक साल से ज्यादा समय से उन्हें उनका वेतन नहीं मिला है। ऐसे में इन वादों का क्या हशर होने वाला है, अंदाज़ा लगाना कोई ज्यादा मुश्किल काम नहीं होगा।

बरहाल पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार होने के बावजूद इन योजनाओं का पालन न होना यह सिद्ध करता है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले किए गए ये सारे ऐलान केवल दिल्ली के मतदाताओं को लुभाने के लिए थे। पंजाब में तो पार्टी के पास यह बहाना भी नहीं है कि “हमें काम करने नहीं दिया गया”, क्योंकि पंजाब एक पूर्ण राज्य है और राज्य सरकार को सभी अधिकार प्राप्त हैं। इसलिए, यह सवाल उठता है कि अगर पंजाब में ये योजनाएं लागू नहीं हो सकतीं, तो दिल्ली में उन्हें लागू करने का क्या उद्देश्य था?

अरविंद केजरीवाल के ये वादे केवल दिल्ली चुनाव के लिहाज से बनाये गए प्रतीत होते हैं। दिल्ली में चुनावी लाभ के लिए ऐसी योजनाओं का ऐलान करना एक राजनीतिक रणनीति हो सकती है, लेकिन क्या यह वाकई लोगों के कल्याण के लिए था? पंजाब में इन योजनाओं का अनुपालन न होने से यह साफ दिखता है कि ये वादे केवल प्रचार और चुनावी रणनीति का हिस्सा थे। इससे यह भी प्रतीत होता है कि आम आदमी पार्टी की नीतियां और घोषणाएं राज्यों के हिसाब से बदलती हैं और चुनावों के समय ही ये घोषणाएं ज्यादा आकर्षक बनती हैं।

“जितने भी वादे दिल्ली में लोगों के साथ किए जा रहे हैं वो सिर्फ और सिर्फ डाटा क्लेक्शन का एक ज़रिया मात्र है। पंजाब की महिलाओं के साथ तीन साल पहले किया वादा जिसे खुद अरविंद केजरीवाल गारंटी का नाम देकर गए थे, को आज सरकार के तीन साल होने तक भी पूरा नहीं किया जा सका है। दूसरी बात की जाए पुजारी ग्रंथी स्कीम के ऐलान की तो संवेधानिक तौर पर ही यह चीज लागू नहीं हो सकती, इसमें कानूनी दिक्कत आएगी और स्कीम का ऐलान करने वालों को भी इस बात का पता होगा इसीलिए उन्होंने फटाफट इसका ऐलान कर दिया क्योंकि जब यह लागू करने की बात होगी तो तब कह दिया जाएगा कि कानूनी दिक्कत के चलते इसे लागू हीं किया जा सकता लेकिन तब तक तो लोगों के वोट ले लिए गए होंगे इसलिए लोगों को ऐसी स्कीमों की पहले खुद जांच करनी चाहिए उसके बाद किसी के बहकावे में आना चाहिए। यदि आम आदमी पार्टी हकीकत में ही यह सब लागू करना चाहती है और इस ऐलान के प्रति इमानदार है तो पंजाब में लागू कर दे ना इस स्कीम को, वहां क्या परेशानी है, सरकार है, बहुमत भी है, पूर्ण राज्य भी है, कोई रोक-टोक भी नहीं है…। यहां से इस स्कीम को लागू करके दिल्ली में उसकी मिसाल दी जा सकती है। इसके अलावा ग्रंथी सिंह और पुजारी, दिल्ली के मुकाबले में पंजाब में ज्यादा जरूरतमंद हैं इस स्कीम के लिए इसलिए केजरीवाल को चाहिए को वो पंजाब में इस स्कीम को लागू करने के लिए अपने मुख्यमंत्री को आदेश दें।

– सुखदेव सिंह, को-आर्डीनेटर, एलायंस ऑफ सिख आर्गेनाईज़ेशन्स

“ यदि केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की नीयत मे कोई खोट नहीं है तो वे लोग इन स्कीमों को पहले पंजाब में क्यों नहीं लागू करके दिखा देते। पंजाब में तो हमारी माताएं और बहनें पिछले करीब तीन सालों से आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा दिए जाने वाले एक हजार रूपए का इंतजार कर रही हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये लोग दिल्ली में अपने वादों को पूरा कैसे करेंगे क्योंकि पंजाब में इनकी पूर्ण बहुमत वाली सरकार है जहां ना तो केंद्र सरकार की दखलंदाज़ी है और ना ही एलजी का कोई दबाव लेकिन बावजूद इसके पंजाब में किए गए वादे अभी तक वफा नहीं हुए हैं। अब दिल्ली के लोगों के साथ धड़ाधड़ वादे किए जा रहे हैं क्योंकि केजरीवाल को पता चल चुका है कि उनके झूठों से लोग वाकिफ हो गए हैं और यही वजह है कि अब वादे पे वादा किए जा रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि उन्होंने कौन सा वादों को पूरा करना होता है। यह सब महज दिल्ली के लोगों को गुमराह करने और उनके वोट ऐंठने का तरीका है और रजिस्ट्रेशन के नाम पर लोगों को डाटा एकत्र करने के अलावा आपियों का कोई और मकसद नहीं है। आम आदमी पार्टी ने अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में झूठे वादों और लोगों को गुमराह करने के सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं।

– कृष्ण कुमार बावा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आल इंडिया वैरागी-स्वामी महांमंडल

“ हमारी पंजाब की माताएं और बहनें तीन सालों से केजरीवाल के वादे को वफा होते हुए देखने के लिए ललाहित हैं लेकिन वो खुशियों वाला दिन कब आएगा इस बात का पता तो शायद खुद केजरीवाल या उनकी पंजाब की सरकार के नुमाइंदों को नहीं। अब ये लोग दिल्ली के चुनावों को देखते हुए वहां पर ऐसी शुरलियां छोड़ने लग गए हैं ताकि दिल्ली के लोगों को एक बार दोबारा से गुमराह करके उनके वोट लिए जा सकें। पुजारी और ग्रंथी सिंहों के लिए 18 हजार रूपए प्रति महीना देने की बात करने वाले केजरीवाल ने चुनावों से पहले सारे पंजाब का सर्वे करवाया था, जैसा कि केजरीवाल खुद ही दावा करते रहे हैं, तो उन्हें यह भी पता होगा कि पंजाब में कितने ग्रंथी सिंह हैं जिनके लिए वाकई यह स्कीम जल्द से जल्द शुरू होनी चाहिए तो फिर देरी किस बात की है, पंजाब में तो यह स्कीम अब तक लागू हो जानी चाहिए थी ताकि दिल्ली में उसकी मिसाल दी जा सके क्योंकि पंजाब के लोगों को दिल्ली के स्कूलों और मोहल्ला क्लीनिकों की मिसाल भी तो दी ही जाती है ना, फिर ऐसी स्कीमों को पंजाब में लागू करके दिल्ली में उसकी मिसाल देने में आखिर दिक्कत ही क्या है ?
– अमरजीत सिंह संधू, को-आर्डीनेटर, गुरमति प्रचार सभा

“ दिल्ली में केजरीवाल द्वारा की गई घोषणा को मैंने भी सुना। उन्होंने कहा कि पुजारियों व ग्रंथियों के लिए हर महीने 18 हजार रूपए सम्मान राशि के तौर पर दिए जाएंगे। केजीरवाल जी, पहले ये बताईए कि पंजाब की हमारी माताओं बहनों के साथ किया गया वादा तीन साल बीतने के बाद भी पूरा नहीं किया जा रहा जबकि यहां तो राशि भी महज एक हजार रूपए प्रति महीना ही है, तो फिर ये वादे कब पूरे होंगे जो अब आप दिल्ली चुनावों के मद्देनजर किए जा रहे हैं। पुजारी भगवान की पूजा करते हैं, ग्रंथी सिंह श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी की सेवा में अपना जीवन लगा रहे हैं। इन महान विभूतियों के लिए आप योजना ला रहे हो, बहुत अच्छी बात है लेकिन आप यह तो बताएं कि हमारी पंजाब की माताएं बहनें जो एक हजार रूपए प्रति महीने का इंतजार कर रही हैं जब उनकी योजना को तीन साल में लागू नहीं किया जा सका तो इस योजना का क्या भविष्य है ? या फिर यूं कहें कि इस योजना के ऐलानमात्र से आप खुद का भविष्य संवारना चाहते हैं और बाद में हाल पंजाब जैसा, वादा तो किया लेकिन उसे लागू नहीं करेंगे। बताईए, कोई इस स्कीम पर यकीन क्यों करे?

– स्वामी पुष्पेंद्र स्वरूप, गद्दीनशीन, मिस्र कुटिया, प्रभुपुरम

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प्रमोद कौशल
प्रमोद कौशल
25+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ स्वतंत्र और टीम-आधारित काम में सक्षम। नेतृत्व, टीम विकास और प्रेरणा में सिद्ध कौशल। विशेषज्ञता: भारतीय व कनाडाई राजनीति। [Read more]
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