ईरान एक बार फिर अपने सख्त कानूनों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना है। हाल ही में, ईरान सरकार ने हिजाब पहनने से संबंधित नया कानून पारित किया है, जो न केवल विवादास्पद है बल्कि महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस कानून के तहत, अगर कोई महिला हिजाब पहनने के नियम का उल्लंघन करती है, तो उसे कठोरतम सजा—यहां तक कि मृत्युदंड—का सामना करना पड़ सकता है।
नए कानून की सख्ती
- नए कानून के अनुच्छेद 60 के तहत, महिलाओं पर हिजाब न पहनने के कारण जुर्माना, कोड़े, कठोर कारावास और मौत की सजा का प्रावधान है।
- पहली बार उल्लंघन पर जुर्माना या कोड़े मारे जा सकते हैं।
- बार-बार अपराध करने वालों को 15 साल तक की सजा या मृत्युदंड दिया जा सकता है।
- हिजाब पहनने के नियमों का प्रचार न करने वालों या विरोध करने वालों को भी 10 साल की जेल और भारी जुर्माना झेलना पड़ सकता है।
इतना ही नहीं, हिजाब के कानूनों को लागू करने में बाधा डालने वाले किसी भी व्यक्ति को सीधे जेल भेजने का प्रावधान है। ईरानी सरकार ने “हिजाब क्लीनिक” खोलने की भी घोषणा की है, जहां ड्रेस कोड का पालन न करने वाली महिलाओं को सुधारने के लिए भेजा जाएगा।
महसा अमिनी की मौत और विरोध प्रदर्शन
16 सितंबर 2022 को 22 वर्षीय महसा अमिनी की नैतिक पुलिस की हिरासत में मौत के बाद ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। महसा को “अनुचित तरीके” से हिजाब पहनने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उनकी मौत के बाद देशभर में विरोध की लहर फैल गई, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान गई और हजारों को गिरफ्तार किया गया।
महसा अमिनी की मौत ने दुनियाभर में हिजाब के नियमों और महिलाओं के अधिकारों पर बहस छेड़ दी। इन प्रदर्शनों के दौरान महिलाओं ने अपने हिजाब जलाकर ईरानी शासन के खिलाफ विरोध जताया। ईरान की सरकार का दावा है कि यह कानून “हिजाब की संस्कृति और पवित्रता” को बनाए रखने के लिए लागू किया गया है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनना अनिवार्य कर दिया गया था। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य “नग्नता को रोकना” और “इस्लामिक मूल्यों की रक्षा करना” है।
महसा अमिनी की मौत और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शनों ने यह साफ कर दिया कि ईरान की महिलाएं अब इस दमनकारी कानून को और बर्दाश्त नहीं करेंगी। सरकार के लिए यह एक चेतावनी थी कि बदलाव समय की मांग है। इसके बावजूद, इस नए और कठोर कानून को लागू करना सरकार के उस दमनकारी रवैये को दर्शाता है, जो न केवल जनता की आवाज को दबाने का प्रयास करता है, बल्कि देश में अस्थिरता को भी बढ़ावा दे सकता है।

















