Bangladesh: 1971 में किए लाखों के कत्ल के पाप के लिए माफी मांगेगी कट्टर मुल्लावादी Jamaat-e-Islami!
August 6, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्व

Bangladesh: 1971 में किए लाखों के कत्ल के पाप के लिए माफी मांगेगी कट्टर मुल्लावादी Jamaat-e-Islami!

बांग्लादेश के आज के हालात में जमाते इस्लामी अपने लिए एक खास जगह देख रही है, वह कुलबुला रही है सत्ता की हिस्सेदारी करने के लिए

Written byPanchjanyaPanchjanya
Dec 4, 2024, 12:17 pm IST
inविश्व, विश्लेषण
जमाते-इस्लामी का प्रमुख नेता शफीकुर्रहमान

जमाते-इस्लामी का प्रमुख नेता शफीकुर्रहमान

1941 में जमाते-इस्लामी बनाई गई थी। बब्दुल आला मौदूदी ने हैदराबाद में इसकी शुरुआत की थी। तब भी इसका मकसद भारत में इस्लामी कायदों पर चलने वाला राज कायम करना था। वक्त बीतने के साथ जमाते इस्लामी राजनीतिक में घुसपैठ कर गई। 1947 में बंटवारे के बाद तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में अपना गढ़ जमाना शुरू कर दिया। और जैसा पहले बताया, 1971 के मुक्ति संग्राम में इसी जमाते इस्लामी ने बांग्ला राष्ट्रभाव की जमकर खिलाफत की थी। एक मुस्लिम मुल्क बनाने की पैरवी की थी। इसका पूरा झुकाव पश्चिमी पाकिस्तान के मजहबी आकाओं की तरफ था।


भारत के पड़ोसी इस्लामी मुल्क बांग्लादेश में 5 अगस्त 2024 के बाद से, आज जिस तरह के हालात दिख रहे हैं उसमें बेशक, वहां की कट्टर मजहबी जमात जमामे-इस्लामी का एक बहुत बड़ा हाथ है। जमात का एकमात्र मकसद बांग्लादेश को एक बार फिर से शरियत तले लाकर पाषाण युग में पहुंचाना दिखता है। इसी जमात और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बीएनपी पार्टी ने किसी ‘तीसरी ताकत’ के साथ मिलकर आज उस देश को गर्त में पहुंचाने की ठानी हुई है। इसमें हिन्दुओं का कत्लेआम और उनका नस्लीय परिमार्जन ‘मजहब का फरमान’ मानकर अंजाम दिया जा रहा है।

यही जमाते इस्लामी 1971 के मुक्ति संग्राम में सबसे बड़ी खलनायक पाई गई थी। उस काल में भी इसने हिन्दुओं और राष्ट्रभक्त पूर्वी पाकिस्तानियों का कत्लेआम मचाया था। परोक्ष रूप से तब भी जमात पाकिस्तान के मुल्लाओं की सरकार के साथ खड़ी थी और बांग्लादेश निर्माण के प्रयासों का विरोध कर रही थी। अपने इसी एजेंडे पर चलते हुए इसी ने लाखों लोगों की जान ली थी।

‘रजाकार’ अर्धसैनिक टुकड़ी

लेकिन आज अगर इसका नेता कहे कि यदि 1971 में इस जमात के किए काम गलत साबित होते हैं तो संगठन सार्वजनिक रूप से माफी मांगेगा। अपनी बात के साथ उस नेता यानी शफीकुर्रहमान ने अपनी बात के साथ ‘यदि’ शब्द लगाकर अपनी मंशा साफ कर दी है कि उसे नहीं लगता उसके संगठन ने तब और अब भी कोई ‘गलत काम’ किया है। लेकिन बांग्लादेश के आज हालात में जमाते इस्लामी अपने लिए एक खास जगह देख रही है, वह कुलबुला रही है सत्ता की हिस्सेदारी करने के लिए, उस देश में तालिबानी तर्ज का राज कायम करने के लिए।

जमाते-इस्लामी का प्रमुख नेता शफीकुर्रहमान ने बीते दिन कहा कि यदि 1971 में हुए मुक्ति संग्राम में उनके संगठन की ओर से जो भी कार्रवाई की गई वह गलत ठहरती है तो संगठन माफी मांगने को तैयार है। शफीकुर्रहमान को शायद अपने देश के इतिहास और 1971 में वहां जो कुछ घटा, और उस सबमें अपने कट्टरपंथी संगठन की करतूतें भूल चुकी हैं।

मुक्ति बाहिनी

5 अगस्त 2024 को जिस शेख हसीना को तख्तापलट करके प्रधानमंत्री की कुर्सी से हटने को मजबूर किया गया उनकी सरकार ने जमाते इस्लामी के कई नेताओं पर युद्ध अपराध के मुकदमे चलाए थे और कुख्यात मुल्लाओं को फांसी या उम्रकैद दी गई थी। अनेक गंभीर आरोपों में जेल में बंद किए गए थे। हालांकि यूनुस सरकार के आने के बाद सब के सब थोक के भाव छोड़ दिए गए। इनमें अनेक कुख्यात जिहादी तत्व भी हैं।

लेकिन राजनीति में घुसपैठ करने को बेताब जमाते-इस्लामी मासूमियत भरे अंदाज में ‘माफी मांगने’ की बात कर रही है तो इसके पीछे के गहरे मायने समझने जरूरी हैं। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया से सारे केस हटा लिए गए हैं, लंदन में बसे उनके पुत्र से सारे केस हटा लिए गए हैं। जनवरी 2024 के आम चुनावों का बहिष्कार करने वाले दोनों दलों, बीएनपी और जमात ने खुद को चुनाव से दूर रखा था, क्योंकि दोनों जानते थे कि बांग्लादेश की विकास को तरसती जनता उनकी काली करतूतें जानती है और उनके चुनाव में बुरी तरह पिटने के साफ आसार हैं।

1941 में जमाते-इस्लामी बनाई गई थी। अब्दुल आला मौदूदी ने हैदराबाद में इसकी शुरुआत की थी। तब भी इसका मकसद भारत में इस्लामी कायदों पर चलने वाला राज कायम करना था। वक्त बीतने के साथ जमाते इस्लामी राजनीतिक में घुसपैठ कर गई। 1947 में बंटवारे के बाद तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में अपना गढ़ जमाना शुरू कर दिया। और जैसा पहले बताया, 1971 के मुक्ति संग्राम में इसी जमाते इस्लामी ने बांग्ला राष्ट्रभाव की जमकर खिलाफत की थी। एक मुस्लिम मुल्क बनाने की पैरवी की थी। इसका पूरा झुकाव पश्चिमी पाकिस्तान के मजहबी आकाओं की तरफ था।

मुक्ति बाहिनी की गिरफ्त में आया एक रजाकार

इसी जमात ने तब पश्चिमी पाकिस्तान के आकाओं के हुक्म पर मुक्ति बाहिनी के हजारों लड़ाकों को मारा, हिन्दुओं के लाखों परिवार उजाड़े, महिलाओं का बलात्कार कर काट डाला। पाकिस्तानी सेना के इशारे पर वहां रहकर मुक्ति संग्राम को कुचलने की कोशिश की। इसी जमात ने तब ‘रजाकार’ अर्धसैनिक टुकड़ी बनाई, जिसने कत्लों की झड़ी लगा दी। पूर्वी बंगाल के राष्ट्रभक्तों को चुन—चुनकर काट डाला।

एक आकलन के अनुसार इस पशुता के चलते 30 लाख से अधिक लोगों का कत्ल किया गया। जमाते इस्लामी के इन काले कारनामों को कौन नहीं जानता! तिस पर शफीकुर्रहमान की हिमाकत यह कि कहे ‘यदि काम गलत साबित हुए’ तो माफी मांगेंगे। जमात की छात्र इकाई ही थी जिसने रजाकार-अल-शम्स तथा अल-बद्र के साथी गुटों की बुनियाद रखी थी। जमाते इस्लामी के पाप इतने हैं कि गिनाए नहीं जा सकते। इसलिए शफीर्रहमान बड़ी धूर्तता के साथ आज अपना जो चेहरा दिखा रहा है, उस पर 1971 की इतनी गहरी कालिख लगी है कि जो किसी माफी से नहीं धुल पाएगी।

Topics: 1971जमाते इस्लामीRazakar1971 warMuslimmukti bahiniपाकिस्तानमुक्ति संग्रामPakistaneast bengalBangladeshhindu killingsislamicबांग्लादेशJamaat-e-Islami
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

Al Jazeera पर कथित बैन के दावे

PoJK में क्या छिपा रहा पाकिस्तान? पहले चलीं गोलियां, अब Al Jazeera पर कथित बैन के दावे

BIMSTEC बैठक में भारत के एनएसए अजीत डोवल

BIMSTEC का नेता भारत, New Delhi बैठक में NSA Doval ने कहा-खतरे अनेक समाधान एक-सहयोग और समन्वय

अमृतसर में आतंकी साजिश नाकाम, आईएसआई से जुड़े आरोपी के पास से हैंड ग्रेनेड और ग्लॉक पिस्तौल बरामद

विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रणधीर जायसवाल

PoJK में बवाल पर भारत की हुंकार, MEA ने पाकिस्तान को ठहराया जिम्मेदार; जानें पूरा मामला

अफगानिस्तान के कृषि मंत्री मौलवी अताउल्लाह ओमारी

“अपनों के बीच आ गया, हमारा DNA एक”, दिल्ली आए अफगान मंत्री ने की भारत की तारीफ, पाकिस्तान को लगेगी मिर्ची

पाकिस्तानी ड्रामा ज़ब्त का विवादित दृश्य

पाकिस्तानी ड्रामा ज़ब्त का एपिसोड क्यों हुआ यूट्यूब पर बैन?

Load More

ताज़ा समाचार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को 2013 रेप केस में दोषी ठहराया, गोवा ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा

UPI New Rules 2026

Explainer: UPI की छुपी लागत और नया बिल: क्यों बैंक और सरकार अब चार्ज लगाना चाहती हैं

पश्चिम बंगाल में ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: 2 दिनों में 1500 धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए गए

whatsapp

WhatsApp की ये 5 प्राइवेसी सेटिंग्स तुरंत करें ऑन, आपका अकाउंट रहेगा ज्यादा सुरक्षित

AI generated image

शिव पार्क कॉलोनी में किराये की दुकान में पढ़ी जा रही थी नमाज, हिंदू संगठनों ने किया विरोध, जांच में जुटी पुलिस

drugs

अब तो कुम्भकर्णी निद्रा से जागे आम आदमी पार्टी की सरकार, पंजाब के स्कूलों तक पहुंचा नशा

“धरती की भूख मिटानी है तो पेड़ लगाएं…मानवता खुशहाल होगी”: चिदानन्द सरस्वती जी महाराज

MoH Nitaynand rai Shaikshnik Shiksha

शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर दायरे में तंबाकू-शराब-गुटका बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध, केंद्र का बड़ा फैसला

नेशनल कॉन्फ्रेंस सांसद मोहम्मद रमजान ने PoJK पर बड़ा बयान दिया।

एनसी सांसद मोहम्मद रमजान का भारत के खिलाफ बयान, PoJK को अलग देश बताया

EPFO

PF क्लेम का पैसा नहीं आया? घबराने की बजाय सबसे पहले करें ये काम

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies