भारत फिर बना संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना आयोग का सदस्य : वैश्विक शांति में रहेगा महत्वपूर्ण योगदान
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भारत फिर बना संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना आयोग का सदस्य : वैश्विक शांति में रहेगा महत्वपूर्ण योगदान

भारत को 2025-2026 के लिए संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना आयोग का सदस्य फिर चुना गया। भारतीय शांति सैनिकों का बलिदान और भारत का वैश्विक शांति में योगदान इसे एक अग्रणी भूमिका में रखता है।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Nov 29, 2024, 06:23 pm IST
inभारत, विश्व

भारत को एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना आयोग (Peacebuilding Commission – PBC) का सदस्य चुना गया है। 2025-2026 के कार्यकाल के लिए भारत का निर्वाचन वैश्विक शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। वर्तमान में भारत का कार्यकाल 31 दिसंबर को समाप्त हो रहा था, लेकिन सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से भारत को दोबारा इस महत्वपूर्ण भूमिका के लिए चुना। बता दें कि भारत संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में लंबे समय से योगदान देता आ रहा है और इसके संस्थापक सदस्य होने के नाते इस आयोग में उसकी भूमिका विशेष महत्व रखती है।

भारत का योगदान : वैश्विक शांति के लिए समर्पण

संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों में भारत की भूमिका ऐतिहासिक और प्रेरणादायक रही है। वर्तमान में, भारत के लगभग 6,000 सैन्य और पुलिसकर्मी विभिन्न संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में तैनात हैं।

तैनाती के प्रमुख क्षेत्र-

  • अबेई
  • मध्य अफ्रीकी गणराज्य
  • साइप्रस
  • कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य
  • लेबनान
  • पश्चिम एशिया
  • सोमालिया
  • दक्षिण सूडान
  • पश्चिमी सहारा

भारत के सैनिकों का सर्वोच्च बलिदान

शांति अभियानों के दौरान भारत के 180 शांति सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी है, जो किसी भी देश के मुकाबले सबसे अधिक है। यह भारत की प्रतिबद्धता और बलिदान का प्रतीक है।

क्या है संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना आयोग

संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना आयोग में 31 सदस्य देश होते हैं। ये महासभा, सुरक्षा परिषद और आर्थिक एवं सामाजिक परिषद द्वारा चुने जाते हैं। जिसमें में शीर्ष वित्तीय योगदान देने वाले देश शामिल होतें हैं।

भारत की प्राथमिकताएं

भारत, शांति स्थापना अभियानों में सैन्य और पुलिस बलों का सबसे बड़ा योगदानकर्ता होने के नाते, आयोग में अपनी भूमिका को बखूबी निभा रहा है। लेकिन इस बार भारत की प्राथमिकताओं में वैश्विक शांति को बढ़ावा देना, संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में स्थिरता और शांति बहाल करना। सैन्य और वित्तीय योगदान देकर अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर बेहतर सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना। युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाना एवं शांति प्रक्रिया में उनकी भूमिका को बढ़ावा देना। द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना और सदस्य देशों के साथ कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों को गहरा करना शामिल रहेगा

भारत के लिए यह उपलब्धि क्यों महत्वपूर्ण है..?

यह भारत की कूटनीतिक शक्ति और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रभाव को दर्शाता है। भारत की भूमिका विश्व शांति स्थापित करने में अहम है।यह भारत की विश्वसनीयता और उसके मूल्यों का प्रमाण है।

भारत का संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना आयोग में पुनर्निर्वाचन न केवल देश के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह विश्व शांति में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित करता है। भारत ने हमेशा शांति, स्थिरता और समावेशिता को प्राथमिकता दी है, और यह भूमिका इसे वैश्विक मंच पर और मजबूती से स्थापित करेगी।

Topics: भारत का वैश्विक नेतृत्वIndia elected to UN Peacebuilding CommissionIndian peacekeepers in UN missionsUN peacekeeping contributions by IndiaGlobal peace initiatives by Indiaसंयुक्त राष्ट्र में भारतIndia in United Nationsभारत संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना आयोगभारतीय शांति सैनिकUN शांति स्थापना मिशन
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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