26/11 मुंबई अटैक: अगर दबाव में आता तो पाकिस्तान बेनकाब नहीं होता, उज्ज्वल निकम ने बताई पूरी कहानी
July 11, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत महाराष्ट्र

26/11 मुंबई अटैक: अगर दबाव में आता तो पाकिस्तान बेनकाब नहीं होता, उज्ज्वल निकम ने बताई पूरी कहानी

उज्ज्वल निकम ने कहा कि मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती थी, आतंकी अजमल कसाब के माध्यम से पाकिस्तान को बेनकाब करना

Written byPanchjanyaPanchjanya
Nov 25, 2024, 03:52 pm IST
in महाराष्ट्र
Ujjwal Nikam, Senior Advocate,

उज्ज्वल निकम, वरिष्ठ वकील, जिन्होंने आतंकी कसाब को दिलाई थी फांसी की सजा

आतंकी अजमल कसाब को फांसी की सजा दिलाने वाले सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने कहा कि उस समय बहुत दबाव था। कसाब अपने बचाव के लिए दांव-पेच आजमा रहा था, जबकि देश के बड़े वकील और जनता ही नहीं, तत्कालीन केंद्र सरकार भी कसाब को जल्दी फांसी पर लटकाना चाहती थी

‘मुंबई संकल्प’ के एक सत्र में ऑर्गनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर अधिवक्ता उज्ज्वल निकम से रू-ब-रू हुए। निकम ने 26/11 आतंकी हमले के दौरान आई मुश्किलों और चुनौतियों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा, ‘‘ हमें आतंकी का चेहरा तो दिखता है, लेकिन उसके पीछे कौन-सी ताकत है और इसे ‘ऑन रिकॉर्ड’ लाना है? मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती थी, आतंकी अजमल कसाब के माध्यम से पाकिस्तान को बेनकाब करना। 26/11 हमले के बाद तत्कालीन केंद्र सरकार की एक राय थी कि कसाब का अलग-अलग तरह से ट्रायल किया जाए, ताकि उसे जल्द से जल्द फांसी दी जा सके। लेकिन क्या कसाब अकेला था? उसके पीछे एक शक्ति थी, जिसने सारा षड्यंत्र रचा। आतंकी हमले की साजिश हमारे देश में नहीं रची गई थी, यह साजिश पाकिस्तान में रची गई थी। अगर उस समय हम इस तरह नहीं सोचते तो शायद दुनिया के सामने पाकिस्तान का चेहरा उजागर नहीं कर पाते।’’

पहले भी पाकिस्तान हुआ बेनकाब

उज्ज्वल निकम ने कहा कि ऐसा नहीं है कि भारत ने पहली बार पाकिस्तान का चेहरा उजागर किया है। इससे पहले 1993 में मुंबई में जो सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे, उसकी साजिश भले ही दुबई में रची गई थी, लेकिन इसके पीछे पाकिस्तान का हाथ था। इस धमाके में दुबई में मौजूद अंडरवर्ल्ड सरगना ने मुंबई के तीन लोगों का इस्तेमाल किया था। तीनों को इस्लामाबाद से 30 किलोमीटर दूर सैन्य छावनी में प्रशिक्षण दिया गया था। उस समय भी मैंने कहा था कि इन अभियुक्तों के विरुद्ध भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने का चार्ज लगाया जाए। भले ही वे हमारे देश के नागरिक थे, लेकिन उन्हें आतंकवाद के लिए प्रोत्साहित किया गया। उसके पीछे कौन लोग थे?

एक बात और, कसाब ने सुनवाई के दौरान जो ड्रामे किए, उसके बारे में सभी जानते हैं। पहले उसने कहा कि वह नाबालिग है। किशोर न्याय अधिनियम के अनुसार, उस पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। तब मैंने अदालत को बताया कि आतंकियों को किस तरह से प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके लिए बाकायदा अलकायदा का मैन्युअल अदालत के समक्ष पेश किया। मैंने अदालत को बताया कि पकड़े जाने पर पुलिस को किस तरह बरगलाना है, अदालत में कैसा व्यवहार करना है और अपने बचाव के लिए क्या करना है, आतंकवादियों को इसका प्रशिक्षण दिया जाता है। इसीलिए अपने खिलाफ सबूत मिलने पर कसाब ने पहले अपना अपराध स्वीकार किया। वह बड़ी चालाकी से आंशिक रूप से अपना अपराध स्वीकार कर रहा था और आंशिक रूप से उसे नकार भी रहा था। उसका कहना था, ‘‘मैंने कुछ नहीं किया।

मेरे साथ अबु इस्माइल ने गोलियां चलाई। मैं तो उसके साथ पाकिस्तान से इसलिए आया, क्योंकि बॉलीवुड में मेरी रुचि थी।’’ इसलिए जब अदालत ने मुझसे पूछा कि क्या मैं कसाब के बयान से सहमत हूं, तो मैंने तत्काल कहा कि सहमत नहीं हूं। हालांकि उस समय जनता का बहुत दबाव था। इसी के साथ मैंने अदालत में साक्ष्य पेश किए। मीडिया में आलोचना शुरू हो गई। बड़े-बड़े वकील टीवी पर बोलने लगे कि फिजूल में जनता का पैसा बर्बाद किया जा रहा है। अगर उस समय मैं दबाव में झुक जाता तो मुंबई आतंकी हमले में पाकिस्तान का नाम कभी नहीं आता। उसके द्वारा रची गई साजिश पर से परदा नहीं उठता। मेरा एक ही उद्देश्य था, कसाब का अपराध साबित करना।

मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी

उन्होंने आगे बताया कि 26/11 आतंकी हमले के सिलसिले में जो 4 सदस्यीय जांच दल पाकिस्तान भेजा गया था, उसमें वह भी थे। इनमें तीन अधिकारी थे। इस्लामाबाद में हमने पाकिस्तान के गृह मंत्री से बात की और उन्हें आतंकी हमले के सबूत दिखाए। हमें यह देखना था कि उन्होंने क्या सबूत इकट्ठे किए हैं। आश्चर्य! उन्होंने कोई सबूत नहीं दिया। यहां तक कि छोटे-मोटे अपराधियों की गिरफ्तारी दिखाकर हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और जकी-उर-रहमान लखवी को रिहा कर दिया। मैंने इस्लामाबाद गृह मंत्रालय में कॉन्फ्रेंस बैठक के दौरान पाकिस्तानी सेना के ब्रिगेडियर से पूछा भी कि इन आतंकियों को आप क्यों गिरफ्तार नहीं कर रहे हैं? उनके खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र रचने का मामला क्यों नहीं दर्ज किया?

मामूली अपराधियों को क्यों गिरफ्तार किया गया है? तब उनकी तरफ से कहा गया कि हमने कोई सबूत ही नहीं दिया है। मैं अचंभित रह गया। उनसे कहा कि साजिश तो आपके यहां रची गई। सबूत भी आपको ढूंढना चाहिए था। तब उनका जवाब था कि भारत ने संयुक्त जांच की अनुमति नहीं दी। इस मामले में मिलकर जांच करने का मतलब क्या है? हमारा काम सबूत देना था, जो दे दिया गया। लेकिन पाकिस्तानी पक्ष इससे भी मुकर गया। इस तरह, आठ दिन वहां रह कर हमने उन्हें सारे सबूत दिए।

निकम ने आगे बताया कि भारत आने के बाद उन्हें पता चला कि डेविड हेडली ने शिकागो अदालत में क्षमा याचिका दाखिल कर अपराध कबूल किया है। आनलाइन माध्यम से मैंने शिकागो अदालत की कार्रवाई पढ़ी। अदालत ने उसकी याचिका स्वीकार कर ली थी। इसमें हेडली ने बताया था कि मुंबई में 26/11 आतंकी के हमले से पहले वह होटल ताज, आॅबरॉय, नरीमन हाउस गया था। जहां-जहां हमले होने थे, उसकी फोटो लेकर उसने पाकिस्तान को भेजे थे। इस आधार पर उसे 35 साल की सजा सुनाई गई थी। उसने एक शर्त पर अपना अपराध कबूला था कि उसे भारत या पाकिस्तान को नहीं सौंपा जाए। लेकिन मुझे उसका बयान चाहिए था, इसलिए उसी रात मैं तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास गया और उन्हें सारी बात बताई। उन्होंने तत्काल जो किया, वह उनकी राजनीतिक इच्छाशक्ति को दिखाता है। उनके सहयोग के बिना हेडली के बयान को रिकॉर्ड नहीं किया जा सकता था। जब तक मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं होगी, तब तक आतंकवाद का खात्मा नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि हेडली को माफी दी गई थी। उसे भारत लाकर अदालत में पेश नहीं किया जा सकता था, क्योंकि अमेरिका के साथ उसका समझौता हुआ था। तब हमने ‘काउंटर टेररिज्म’ की चाल ली। हमने भी उसे माफी दे दी। लेकिन उसे गवाही देने के लिए तैयार कर लिया। उसने हमें बताया कि आईएसआई और लश्कर-ए-तैयबा के बीच किस तरह की सांठगांठ है। हेडली ने बाकायदा आईएसआई अधिकारियों के फोन नंबर दिए, जिसे मैंने अदालत में पेश किया। फिर पूरा साक्ष्य केंद्र सरकार को दिया। सरकार ने वे साक्ष्य राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को दिए, जो बाद में पाकिस्तान को सौंपे गए। लेकिन पाकिस्तान सबूत लेकर चुपचाप बैठ गया।

प्रोपेगेंडा से मुकाबले के लिए तंत्र बने

यह पूछने पर आतंकियों का भी मानवाधिकार हो सकता है, उन्होंने कहा कि बहुत कुछ मीडिया पर निर्भर करता है। कई बार देखने में आया है कि आतंकियों और अपराधियों की मानवाधिकार की दुहाई देते हुए एक इको सिस्टम सक्रिय हो जाता है। महाराष्ट्र के शक्ति मिल सामूहिक बलात्कार मामले में भी यह देखा गया है। चार लोगों ने एक लड़की का बलात्कार किया था। इस मामले में तथाकथित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का रवैया देखकर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ। लड़की के साथ जो मानवाधिकार कार्यकर्ता थी, उसका कहना था कि आरोपियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। लेकिन दूसरे तथाकथित मानवाधिकार कार्यकर्ता इसके खिलाफ थे।

उन्होंने बताया कि 26/11 आतंकी हमले के सिलसिले में जो 4 सदस्यीय जांच दल पाकिस्तान भेजा गया था, उसमें वह भी थे। इनमें तीन अधिकारी थे। इस्लामाबाद में हमने पाकिस्तान के गृह मंत्री से बात की और उन्हें आतंकी हमले के सबूत दिखाए। हमें यह देखना था कि उन्होंने क्या सबूत इकट्ठे किए हैं। आश्चर्य ! उन्होंने कोई सबूत नहीं दिया।

कसाब के मामले में भी यही हुआ था। इसलिए अपराधियों और आतंकवादियों को लेकर उठने वाले मानवाधिकार की दलीलों की अनदेखी करनी चाहिए। साथ ही, इस तरह के ‘गॉब्लस प्रोपेगेंडा’ का मुकाबला करने के लिए हमें एक तंत्र विकसित करना चाहिए। यदि एक झूठ को सौ बार बोला जाए तो आम आदमी उसे सच मानने लगता है। कसाब का मटन बिरयानी का किस्सा सबके सामने है। सबको लगता था कि कसाब ने सचमुच मटन बिरयानी मांगी थी। हालांकि कसाब ने ऐसा कुछ नहीं मांगा था, लेकिन कभी-कभी हमें ऐसा करना पड़ता है। कहने का मतलब यह है कि राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी स्तर पर हमें सतर्क रहना होगा, ताकि देख सकें कि भविष्य में क्या होने वाला है।

अफजल गुरु जैसे आतंकियों के लिए आधी रात को अदालत का दरवाजा खोलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि भारत की न्याययिक प्रक्रिया बहुत ही गड्डमड्ड है। हमें इस तरह के मामलों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कानून में बहुत कमियां हैं। गुलशन कुमार हत्याकांड में भी ये कमियां देखने में आई। इस मामले में नदीम सैफी ने मजहब को आधार बनाकर लंदन की अदालत में याचिका दाखिल की और प्रत्यर्पण से बचने में सफल रहा। समस्या यह है कि हमारे यहां मरते समय कोई कहता है कि मुझे फलां ने मारा है, तो कानून उसे मान लेगा। लेकिन यही बात अगर कोई इंग्लैंड में कहता है तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

भारत की अदालत द्वारा अगर कोई गैरजमानती वारंट जारी किया गया, जिसे इंटरपोल के जरिये प्रभाव में लाया गया तो दूसरे देश की अदालत को प्रथमदृष्टया इसे साक्ष्य मानते हुए स्वीकार करना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं होता। वे हमारे मुकदमों की सुनवाई अपने यहां क्यों करती हैं? विजय माल्या के मामले में भी यही हो रहा है। भारतीय कानून में इस विरोधाभास को ठीक करना होगा। कानून में इन्हीं कमियों के कारण आज तक अपराधियों के प्रत्यर्पण में बाधाएं आती हैं। यही बात आतंकवाद और इसके वित्तपोषण के मामले में लागू होती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दृढ़ता से इस पर विचार करना होगा कि आतंकवाद को वित्तपोषण भी आतंकवाद ही है।

अमेरिका में 9/11 आतंकी हमले के बाद की कोई तस्वीर मीडिया में नहीं आई, लेकिन मुंबई आतंकी हमले की लाइव रिपोर्टिंग करने पर उन्होंने कहा कि सर्वोच्च अदालत ने कई बार कहा है कि मीडिया को आत्मसंयम बरतना चाहिए। 26/11 आतंकी हमले की लाइव रिपोर्टिंग देखकर आतंकियों के सरगना उन्हें लगातार निर्देश दे रहे थे कि फलां जगह से हट जाओ, वहां सेना आ गई है। इस तथ्य को मैंने बाकायदा सबूत के तौर पर अदालत में भी प्रस्तुत किया। राष्ट्रहित में मीडिया को ऐसा नहीं करना चाहिए था। न्यायपालिका में परिवारवाद के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस मामले में कानून मंत्री किरेन रीजिजू ने जो कहा है, उससे मैं सहमत हूं। न्यायपालिका पर मुझे गर्व है, लेकिन मेरे हिसाब से इसमें पारदर्शिता होनी चाहिए।

कार्यक्रम के अंत में अपने काम के प्रति संतुष्टि जताते हुए निकम ने कहा कि उन्हें इस बात की बहुत खुशी है कि उन्होंने मुंबई हमले में पाकिस्तान की भूमिका को उजागर किया। क्योंकि इसी कारण से फाइनेंशियल टास्क फोर्स ने पाकिस्तान को ग्रे सूची में डाला था। दुर्भाग्य से 1993 बम धमाके में सबूत के अभाव में पाकिस्तान का हाथ होने के सबूत नहीं मिले। अबु जिंदाल मामले में भी गवाही लगभग पूरी हो चुकी है। उच्च न्यायालय से उसने स्टे लिया है, इसलिए सुनवाई रुकी हुई है।

(वर्ष 2022 में प्रकाशित, साभार पाञ्चजन्य आर्काइव )

Topics: 26/11 मुंबई हमलाउज्जवल निकमहोटल ताज मुंबई26/11 Mumbai AttackUjjwal NikamHotel Taj Mumbaiपाञ्चजन्य विशेषआतंकी कसाबterrorist kasab26/11 मुंबई अटैक
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

वीर सावरकर

बहुआयामी वीर सावरकर (5) : निबंधकार और कृतिशील समाज-सुधारक

एक दंपति को सम्मानित करते कुछ वरिष्ठ जन

परिवार बचाने की पहल

जर्मनी की एक सड़क का यह है हाल

ठंडा यूरोप उबला

ABVP Foundation Day National Students Day Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad History

ABVP Foundation Day: अल्प बीज से विशाल वटवृक्ष तक… जानिए राष्ट्र-जागरण की अलख जगाने वाले एबीवीपी की गौरवगाथा!

आज का श्लोक : राष्ट्र आराधना में लगे हर व्यक्ति के लिए एक दीपस्तंभ की तरह है ये सूत्र

मुसलमान बने तो आरक्षण नहीं

Load More

ताज़ा समाचार

NEET-PA Notification 2026 Central Sanskrit University Gurukul Students BAMS Ayurvedic Doctor NCISM

संस्कृत और गुरुकुल के छात्रों के लिए ऐतिहासिक मौका: अब NEET-PA के जरिए बन सकेंगे BAMS आयुर्वेदिक डॉक्टर, अधिसूचना जारी

काकभुशुण्डि जी की प्रतिमा का सच; राम मंदिर को बदनाम करने वालों का सामाजिक दायित्व क्या?

India Japan Relations Vedic Gods Benzaiten Narendra Modi Sanae Takaichi Summit 2026

सरस्वती से बेंज़ाइतेन तक… प्राचीन देवकुल से शुरू हुआ भारत-जापान का अटूट रिश्ता, मोदी-ताकाइची युग में रचेगा नया इतिहास

Uttarakhand Agniveer Recruitment Rally Dehradun Major General Manish Kumar Chief Secretary Anand Bardhan

अग्निवीर भर्ती को लेकर बड़ा फैसला! सेना के मेजर जनरल और उत्तराखंड मुख्य सचिव के बीच महामंथन, प्रशासनिक तैयारी तेज

Uttarakhand

उत्तराखंड में मदरसों का सरकारी अनुदान बंद, अब विज्ञान-गणित पढ़ाना हुआ अनिवार्य

Mamta Banerjee

ED ने फ्रीज किए TMC के 3 बैंक खाते, 440 करोड़ हैं जमा… कुल 15 बैंक खातों पर ताला; जानिये क्या है पूरा मामला?

RSS Akhil Bharatiya Prant Pracharak Baithak Belagavi Karnataka Mohan Bhagwat Dattatreya Hosabale

कर्नाटक: बेलगावी में संघ की अ. भा. प्रांत प्रचारक बैठक शुरू, शताब्दी वर्ष और शाखा विस्तार योजना पर होगा महामंथन

आतंकवाद निरोधी दस्ता (प्रतीकात्मक चित्र)

महाराष्ट्र ATS का आतंकवाद पर बड़ा प्रहार: सैकड़ों जगहों पर छापा, 112 से पूछताछ, पाकिस्तानी आतंकी शहजाद भट्टी से कनेक्शन

हिमाचल: हल्की बरसात से भी क्यों दरक रहे हैं पहाड़? भूसख्लन से मार्ग हो रहे बाधित

Uttarakhand CSR Dialogue CM Pushkar Singh Dhami Corporate Groups MoUs Dehradun

उत्तराखंड में लगेगा कॉरपोरेट निवेश का महाकुंभ! कई बड़ी कंपनियों से हुए ऐतिहासिक समझौते

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies