हिमाचल प्रदेश के शिमला स्थित संजौली मस्जिद विवाद पर कट्टरपंथी मुस्लिम अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। यही कारण है कि वे अब तो कोर्ट के फैसले को मानने से इंकार कर रहे हैं। ऑल हिमाचल मुस्लिम ऑर्गनाइजेशन नाम के मुस्लिम संगठन ने संजौली मस्जिद की अवैध तीन मंजिलों को गिराने के कोर्ट के फैसले का विरोध किया है। इसके साथ ही इस्लामिक संगठन ने इसे गलत करार दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम संगठन का कहना है कि वो नगर निगम के फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देगा। मुसलमानों का कहना है कि मस्जिद कमेटी ने दबाव में निगम कोर्ट के सामने मस्जिद के अवैध हिस्से को गिराने के लिए आवेदन किया था। मुसलमानों का कहना है कि निगम के कमिश्नर के फैसले से मुस्लिमों की भावनाएं आहत हुई हैं। उसने कहा कि वो इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी। अवैध निर्माण के आरोपों को बेबुनियाद करार देते हुए दावा किया कि संजौली मस्जिद वक्फ बोर्ड की जमीन पर ही बनाई गई है।
इसको लेकर बुधवार को मुस्लिम संगठन ने एक मीटिंग की कि नगर निगम कोर्ट द्वारा सजौली मस्जिद को लेकर 5 अक्तूबर को लिए गए फैसले का जिक्र किया।
क्या है पूरा मामला
मामला कुछ यूं है कि शिमला के उपनगर संजौली स्थित विवादित मस्जिद के अवैध निर्माण पर शनिवार 5 अक्तूबर को नगर निगम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया था। नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री की अध्यक्षता में मस्जिद के अवैध निर्माण पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आदेश दिया था कि मस्जिद की ऊपर की तीन मंजिलें अवैध हैं और इन्हें गिराना होगा। यह फैसला 14 साल से चल रहे कानूनी विवाद के बाद आया था। मस्जिद कमेटी और वक्फ बोर्ड को दो महीने के भीतर इन तीन मंजिलों को अपने खर्चे पर ध्वस्त करने के निर्देश दिए गए थे। मामले की अगली सुनवाई 21 दिसंबर 2024 को निर्धारित की गई है।
14 सालों से कोर्ट में चल रही थी सुनवाई
संजौली की यह मस्जिद 2007 में बनाई गई थी, लेकिन 2010 में स्थानीय निवासियों ने इसे अवैध बताते हुए नगर निगम कोर्ट में याचिका दायर की। तब से इस मामले की सुनवाई चल रही थी, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया था। मस्जिद के निर्माण पर बार-बार नोटिस जारी होने के बावजूद चार मंजिलों का निर्माण पूरा हो गया था। नगर निगम की लापरवाही का भी आरोप लग रहा है, क्योंकि अवैध निर्माण के बावजूद मस्जिद को बिजली और पानी की सुविधा मिलती रही।
कोर्ट ने दिए तीन मंजिलें गिराने के आदेश
मस्जिद कमेटी ने खुद कोर्ट में अवैध निर्माण को गिराने का लिखित आवेदन दिया था। नगर निगम कोर्ट ने अपने फैसले में मस्जिद की दूसरी, तीसरी, और चौथी मंजिल को अवैध बताते हुए इन्हें दो महीने के भीतर ध्वस्त करने का आदेश दिया है। वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी को इन मंजिलों को गिराने की जिम्मेदारी दी गई है।

















