गत दिनों नेरी, हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश) स्थित ‘ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान’ में ठाकुर रामसिंह जी की 111वीं जयंती मनाई गई। कार्यक्रम में ठाकुर रामसिंह जी की आदमकद प्रतिमा का अनावरण भी हुआ। इस अवसर पर मुख्य वक्ता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सदस्य श्री सुरेश सोनी ने कहा कि ठाकुर रामसिंह जी ने अपने लेखन से न केवल हिमाचल की सांस्कृतिक चेतना को स्वर दिया, बल्कि इतिहास और लोक परंपराओं को नई पहचान भी दिलाई।
भारत की परंपरा रही है कि चुपचाप आओ, अपना योगदान दो और आगे बढ़ जाओ, ठाकुर रामसिंह जी इसी परंपरा के संवाहक थे। उन्होंने एक लंबा समय संगठन योजना से पूर्वोतर भारत में बिताया। वहां के लोग अक्सर कहते हैं कि उनका जैसा स्वभाव था, वैसा उन्होंने काम किया। मुख्य अतिथि और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि 88 वर्ष की आयु में ‘इतिहास संकलन’ जैसे नए प्रकल्प को शुरू करना और उसे पूरा करना ठाकुर रामसिंह जी की दृढ़ इच्छा—शक्ति एवं संगठन कौशल को दर्शाता है।
कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने कहा कि ठाकुर रामसिंह जी ने इतिहास के लिए स्वयं को समर्पित किया था। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि ठाकुर रामसिंह जी का व्यक्तित्व बहुत महान था और इतिहास के लिए उन्होंने जो कुछ किया व स्वयं इतिहास बन गया।
इस अवसर पर संस्थान द्वारा प्रकाशित ‘स्मारिका वार्षिक प्रतिवेदन (2025-26)’, तथा पांच पुस्तकें ‘ऋग्वेद में पश्चिमी हिमालय के संदर्भ’, ‘हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत’, ‘हिमाचल प्रदेश के गांव’, ‘Pastoralists and Forests Under Colonial Rule: The Gujjars of Himachal Pradesh’ और ‘Faith, Economy and Habitat: A Study of Janjati Society in North-west Bharat’ का विमोचन किया गया। शोध संस्थान के अध्यक्ष प्रो. भाग चन्द चौहान ने उपस्थित सभी अतिथियों का धन्यवाद किया।

















