कहां से आए भेड़िया ! कौन हैं निशाने पर, कैसे बन गए आदमखोर, कहां चले गए?
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कहां से आए भेड़िया ! कौन हैं निशाने पर, कैसे बन गए आदमखोर, कहां चले गए?

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में इनदिनों भेड़ियों का आतंक है। वे झुंड में आते हैं और मनुष्यों और जानवरों का शिकार कर चले जाते हैं। नौ बच्चों समेत दस लोगों को ये अपना शिकार बना चुके हैं

Written byMahak SinghMahak Singh
Sep 6, 2024, 07:10 pm IST
inभारत

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में इनदिनों भेड़ियों का आतंक है। वे झुंड में आते हैं और मनुष्यों और जानवरों का शिकार कर चले जाते हैं। नौ बच्चों समेत दस लोगों को ये अपना शिकार बना चुके हैं। इन भेड़ियों की एक फोटो भी आई थी, लेकिन ये कहां से आते हैं और कहां चले जाते हैं इसका पता नहीं चल पा रहा है। आदमखोर भेड़ियों को पकड़ने के लिए वन विभाग की 25 टीमें मोर्चा संभाले हुए हैं वहीं लोगों की सुरक्षा के लिए 200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। 18 शार्प शूटर भी हैं। बहराइच की महसी तहसील क्षेत्र के 35 गांवों में इन भेड़ियों से लोग सहमे हुए हैं।

ये भेड़िये जंगल बुक वाले मोगली से अलग हैं। ये इंसानों का शिकार कर रहे हैं, खासकर बच्चों का। इन सबके बीच यह बड़ा सवाल है कि ये भेड़िये अचानक आए कैसे, कहां से आए और क्यों आए। इंसानों का शिकार क्यों कर रहे हैं।

यूपी वन निगम के महाप्रबंधक संजय पाठक का बयान मीडिया में आया हैं। वह कहते हैं कि कोई जानवर अपने आप आदमखोर नहीं बन जाता है। उनके क्षेत्र डूब क्षेत्र में हैं। उनमें अगर पानी भर जाए तो उन्हें वापस जाना पड़ता है। उनका यह भी बयान आया है कि भेड़िया में बदला लेने की आदत होती है। अगर किसी ने उनके घर या बच्चों को नुकसान पहुंचाया हो तो वे इंसानों से इसका बदला लेते हैं। बहराइच में जो हमले हो रहे हैं उसमें ज्यादातर बच्चों को ही निशाना बना रहे हैं। अब तक 9 बच्चों की जान गई है। वहीं गांववालों का भी बयान मीडिया में आया है। गांववालों का कहना है कि बाढ़ के पानी में बह जाने से भेड़ियों के बच्चों की मौत हुई होगी। और ये इसके लिए इंसानों को जिम्मेदार मान रहे होगे।

बहराइच के रामुआपुर गांव में उनकी मांद तो मिली है, लेकिन भेड़िये नहीं। गन्ने के घने खेतों के अंदर यह मांद है।

भेड़ियों की उपस्थिति और उनके द्वारा किए गए हमले अक्सर ग्रामीण और जंगली इलाकों में लोगों के लिए चिंता का विषय बन जाते हैं। ऐसे में भेड़ियों के बारे में कुछ और बातें भी जानते हैं।

भारत में इन जगहों में पाए जाते हैं भेड़िये

भेड़िये ऐसे जीव हैं जो प्राकृतिक रूप से जंगलों और घास के मैदानों में रहते हैं। वे मुख्य रूप से उन जगहों से आते हैं जहाँ उन्हें शिकार और सुरक्षित आवास मिलता है। भारत में भेड़िये खास तौर पर मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों के वन क्षेत्रों में पाए जाते हैं। जंगलों के खत्म होने और मानव बस्तियों में वृद्धि के कारण भेड़िये अपने मूल स्थानों को छोड़कर भोजन की तलाश में इंसानी क्षेत्रों के पास आ जाते हैं।

मानव बस्ती में क्यों आते हैं?

भेड़ियों के बस्तियों में आने का एक कारण भोजन की कमी भी है। जंगलों में शिकार की उपलब्धता कम होने पर भेड़िये भोजन की तलाश में इंसानी बस्तियों के पास आते हैं। जंगलों की कटाई, शिकारियों द्वारा वन्यजीवों का शिकार और कृषि क्षेत्रों का विस्तार, इन सभी ने भेड़ियों को उनके प्राकृतिक आवास से विस्थापित किया है। अब वे पालतू जानवरों जैसे गाय, बकरी, और भेड़ का शिकार करने लगे हैं। इनमें बड़ी एकता भी होती है। इनके सदस्य को यदि नुकसान पहुंचाता है तो वे इसका बदला भी लेते हैं।

किसे शिकार बनाते हैं?

भेड़ियों द्वारा इंसानों पर हमले बहुत ही कम होते हैं, लेकिन मवेशियों पर हमले आम हैं। एक ही भेड़ियों के झुंड एक रात में कई जानवरों को शिकार बना सकते हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान होता है, खासकर उन इलाकों में जहां भेड़ियों की संख्या ज्यादा है। भेड़ियों द्वारा हमले की घटनाएं स्थान और समय के आधार पर बदलती रहती हैं, लेकिन ज्यादातर नुकसान मवेशियों को ही होता है।

प्रजाति क्या है?

भारत में मुख्य रूप से भारतीय भेड़िया (Canis lupus pallipes) पाया जाता है। यह भेड़ियों की उप-प्रजाति है, जो दक्षिण एशिया के विभिन्न क्षेत्रों में निवास करती है। यह प्रजाति आकार में अन्य भेड़ियों से थोड़ी छोटी होती है और इनके रंग-रूप में भी विविधता देखी जाती है। इसके अलावा, हिमालय के ऊंचे इलाकों में टिबेटन वुल्फ (Canis lupus chanco) भी पाया जाता है।

Topics: कहां से आए भेड़ियाForestWolves Terrorभेड़ियों का आतंकwolfभेड़ियाBhediya Attackwolvesman-eating wolveswolf newswolves took lifewolf attack
Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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