आपातकाल: अलोकतांत्रिक, असंवैधानिक व कांग्रेस की तानाशाही के अमानवीय अत्याचार का काल
July 27, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्लेषण

आपातकाल: अलोकतांत्रिक, असंवैधानिक व कांग्रेस की तानाशाही के अमानवीय अत्याचार का काल

इंदिरा गांधी को आपातकाल लगाने का सबसे बड़ा बहाना जयप्रकाश नारायण द्वारा बुलाया गया असहयोग आन्दोलन था।

Written byतरुण चुगतरुण चुग
Jun 25, 2024, 12:14 pm IST
in विश्लेषण
emergency imposed by indira Gandhi

भारत संसार का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। विडंबना रही कि भारत को सदियों तक शासकीय प्रताड़ना झेलनी पड़ी। मुगलों के शासन में धार्मिक आधार पर लोगों को प्रताड़ित किया जाता रहा है तो अंग्रेजों के शासन में शोषण के जरिए जनता प्रताड़ित होती रही। देश अंग्रेजी दासता से मुक्त हुआ तो यह उम्मीद जगी कि भारत अब प्रताड़ना के दंश से मुक्त हुआ। लेकिन, देश के आजाद होने के लगभग दो दशक बाद 1975 से 1977 तक जनता को ऐसी प्रताड़ना झेलनी पड़ी, जो प्रताड़ना की पराकाष्ठा थी। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के इतिहास का वह एक काला अध्याय था आपातकाल। 25 जून 1975 से 21मार्च 1977 तक 21 महीने की अवधि में भारत प्रताड़ना की दौर में रहा। स्वतंत्र भारत के इतिहास का यह सबसे अलोकतांत्रिक, असंवैधानिक एवं राजनीतिक अत्याचार का काल था। देश में सभी चुनाव स्थगित हो गए तथा नागरिक अधिकारों को समाप्त कर दिया गया। मानवाधिकारों को कुचल दिया गया।

तत्कालीन कांग्रेसी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के राजनीतिक विरोधियों को जेल में डाल दिया गया। अभिव्यक्ति की आजादी समाप्त कर दी गई, प्रेस की स्वतंत्रता समाप्त कर उसको भी प्रतिबंधित कर दिया गया। कोई भी समाचार पत्र सरकार की अनुमति के बिना कुछ भी प्रकाशित नहीं कर सकते थे। चार न्यूज एजेंसियों को एक कर उसे सरकारी नियंत्रण में ले लिया गया था। लगभग चार हजार अखबारों को जब्त कर दिया गया तथा 327 पत्रकारों को मीसा के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। ढ़ाई सौ अख़बारों का विज्ञापन बंद कर दिया गया तथा सात विदेशी पत्रकारों को देश से निकल दिया गया। दर्जन भर विदेशी पत्रकारों के भारत में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई तो कई को भारत से बाहर निकाल दिया गया। ऐसी अलोकतांत्रिक कार्रवाई करने वाली कांग्रेस पार्टी आज संविधान और अभिव्यक्ति की आजादी की बात करती है तो हास्यास्पद लगती है।

इसे भी पढ़ें: आपातकाल: सत्ता पर बने रहने के लिए कांग्रेस ने पूरे देश को जेल में बदल दिया: पीएम मोदी ने कांग्रेस को घेरा

सरकार के अलोकतांत्रिक गतिविधियों का विरोध करने के लिए राष्ट्रवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को प्रतिबंधित कर स्वयंसेवकों को यातनाएं दी गई। पुलिस इस संगठन पर क्रूरता के साथ टूट पड़ी थी। उसके हजारों कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया। लाखों स्वयंसेवकों ने प्रतिबंध और मौलिक अधिकारों के हनन के खिलाफ शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन में भाग लिया।

कांग्रेस सरकार की तानाशाही ऐसी थी कि सभी विपक्षी दलों के नेताओं और सरकार के आलोचकों के गिरफ्तार करने और सलाखों के पीछे भेजने के बाद पूरा देश अचंभित होने की स्थिति में आ गया था। लोकनायक जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, जननायक कर्पूरी ठाकुर समेत विपक्ष के तमाम नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।

आपातकाल की घोषणा के बाद पंजाब में विरोध मुखर हुआ। सिख नेतृत्व ने भी कांग्रेस के इस करतूत का विरोध किया। अमृतसर में बैठकों का आयोजन किया, जहां उन्होंने “कांग्रेस की फासीवादी प्रवृत्ति” का विरोध करने का संकल्प किया। इस तरह देश के सभी राज्यों में केंद्र सरकार की तानाशाही के खिलाफ आंदोलन मुखर होता गया। राज्य की विधानसभाओं से विपक्षी विधायकों ने इस्तीफा देना शुरू किया।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इंदिरा को ठहराया था अयोग्य

1971 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी की जीत को इलाहाबाद हाईकोर्ट में दी गई चुनौती के बाद से देश में राजनीतिक उथल पुथल का दौर शुरू हुआ। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में माना कि इंदिरा गांधी ने सरकारी मशीनरी और संसाधनों का दुरुपयोग किया। इसलिए जन प्रतिनिधित्व कानून के अनुसार उनका सांसद चुना जाना अवैध करार देकर छह साल तक उनके कोई भी चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई। ऐसी स्थिति में इंदिरा गांधी के पास प्रधानमंत्री पद छोड़ने के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। अदालत ने कांग्रेस पार्टी को नया प्रधानमंत्री बनाने के लिए तीन हफ्तों का समय दिया था। इस समय देश में ‘इंडिया इज इंदिरा, इंदिरा इज इंडिया’ का माहौल बना दिया गया था।

ऐसे माहौल में इंदिरा के होते किसी और को प्रधानमंत्री कैसे बनाया जा सकता था? इंदिरा गांधी अपनी ही पार्टी में किसी पर भी विश्वास नहीं करती थीं। उन्होंने तय किया कि वे इस्तीफा देने के बजाय 3 हफ़्तों की मिली मोहलत का फायदा उठाते हुए इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले पर पूर्ण रोक लगाने से इंकार कर दिया। बिहार और गुजरात में कांग्रेस के खिलाफ छात्रों का आन्दोलन उग्र हो रहा था। बिहार में इस आन्दोलन का नेतृत्व लोकनायक जयप्रकाश नारायण कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अगले दिन यानी 25 जून को दिल्ली के रामलीला मैदान में जयप्रकाश नारायण की रैली थी।

उन्होंने इंदिरा गांधी पर देश में लोकतंत्र का गला घोंटने का आरोप लगाया और रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता के अंश ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ का नारा बुलंद किया था। लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने विद्यार्थियों, सैनिकों, और पुलिस वालों से अपील कि वे लोग इस दमनकारी निरंकुश सरकार के आदेशों को ना मानें, क्योंकि कोर्ट ने इंदिरा को प्रधानमन्त्री पद से हटने को बोल दिया है। महज इसी रैली के आधार पर इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाने का फैसला किया था। इंदिरा गांधी के खिलाफ पूरे देश में जन आक्रोश बढ़ रहा था। इसमें छात्र और सम्पूर्ण विपक्ष एकजुट हो गए थे।

इंदिरा गांधी को आपातकाल लगाने का सबसे बड़ा बहाना जयप्रकाश नारायण द्वारा बुलाया गया असहयोग आन्दोलन था। इसी आधार पर 26 जून 1975 की सुबह राष्ट्र के नाम अपने संदेश में इंदिरा गांधी ने कहा कि जिस तरह का माहौल देश में एक व्यक्ति अर्थात जयप्रकाश नारायण द्वारा बनाया गया है, उसमें यह जरूरी हो गया है कि देश में आपातकाल लगाया जाए। इसके साथ ही तत्कालीन भारतीय संविधान की धारा 352 के तहत आपातकाल की घोषणा कर दी गई।

आपातकाल लागू होने के साथ ही विरोध की लहर और तेज़ होती रही। अंततः प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लोकसभा भंग कर चुनाव कराने की सिफारिश कर दी। चुनाव में आपातकाल लागू करने का फ़ैसला जनता को नागबार लगा। इस अत्याचार का विरोध की अगुवाई करने वाले लोकनायक जय प्रकाश नारायण ने इसे ‘भारतीय इतिहास की सर्वाधिक काली अवधि’ कहा था।

1977 में हुए लोकसभा चुनाव में ख़ुद इंदिरा गांधी अपने गढ़ रायबरेली से चुनाव हार गईं। जनता पार्टी भारी बहुमत से सत्ता में आई और मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने। आजादी के 30 वर्षों के बाद केंद्र में किसी ग़ैर कांग्रेसी सरकार का गठन हुआ। कांग्रेस को उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में एक भी सीट नहीं मिली। इस नई सरकार में जननेता अटल बिहारी वाजपेयी ने विदेश मंत्री के रूप में दुनिया के सामने भारत की जो तस्वीर पेश की, उसे आज भी लोग याद कर रहे हैं। अटलजी ने पहली बार संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में अपना भाषण देकर दुनिया को भारत की भाषा की महत्ता समझाई। सूचना व प्रसारण मंत्री के रूप में लालकृष्ण आडवाणी ने सरकारी संचार माध्यमों को स्वायत्तता प्रदान कर लोकतंत्र को मजबूती प्रदान की।

देश में लगाए गए आपातकाल को भारत के राजनीतिक इतिहास की एक कलंक कथा के रूप में याद की जाती है। जेल में कैद के दौरान भारत रत्न अटलबिहारी वाजपेयी की कविताओं में उस समय की स्थिति का आकलन है :-

अनुशासन के नाम पर, अनुशासन का खून
भंग कर दिया संघ को, कैसा चढ़ा जुनून
कैसा चढ़ा जुनून, मातृपूजा प्रतिबंधित
कुलटा करती केशव-कुल की कीर्ति कलंकित
यह कैदी कविराय तोड़ कानूनी कारा
गूंजेगा भारत माता की जय का नारा।

( लेखक भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री हैं)

Topics: तरुण चुघTarun Chughभारत में क्यों लगा था आपातकालकैसे लगता है आपातकालWhy was Emergency imposed in IndiaRashtriya Swayamsevak SanghHow is Emergency imposedइंदिरा गांधीआपातकालIndira GandhiEmergencyराष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ
Share9TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

पुरी रथ यात्रा के दौरान सेवा कार्य में जुटे रहे RSS के 1800 से अधिक स्वयंसेवक

अमिट अटल : ‘पत्रकारिता में यथार्थ सूचना के पक्षधर थे अटल जी’

लोकतंत्र सेनानी कमला शंकर पांडेय

मोदी-योगी को गाली देने वाले संविधान की बात करते हैं, वे इमरजेंसी का समय कैसे भूल सकते हैं

अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक सम्पन्न, सुनें क्या रही संघ की प्राथमिकताएँ?

देशभर में संघ के 95 प्रशिक्षण वर्ग सफल, 18,842 स्वयंसेवक हुए प्रशिक्षित

इंदिरा गांधी (फाइल फोटो)

शिमला समझौते में इंदिरा गांधी की बड़ी चूक

Load More

ताज़ा समाचार

भारोत्तोलक ऋषिकांता सिंह चानमबम

राष्ट्रमंडल खेल 2026 : भारोत्तोलक ऋषिकांता ने भारत को दिलाया रजत पदक

राजनाथ सिंह, रक्षामंत्री

पाकिस्तान के साथ अब कोई भी बातचीत सिर्फ पीओजेके पर फोकस होगी : रक्षामंत्री राजनाथ सिंह

नंदन नीलेकणि

परीक्षा सुधारों पर पीएम मोदी की बड़ी घोषणा, नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में बना हाई पावर टास्क फोर्स

मीराबाई चानू ने जीता स्वर्ण पदक

राष्ट्रमंडल खेल 2026: मीराबाई चानू ने रचा इतिहास, जीता स्वर्ण, लगाई सोने की हैट्रिक

आस्थावान समाज की सहभागिता से हो मंदिरों का प्रबंधन

स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज

कांवड़ियों से पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज की खास अपील, यात्रा में जरूर रखें इन बातों का ध्यान

तमन्ना ने अपनाया सनातन धर्म

Ghar Wapsi: तमन्ना ने इस्लाम छोड़ अपनाया सनातन धर्म, हुआ वैदिक रीति से घर वापसी संस्कार

आरोपी गिरफ्तार

25 लाख की साइबर ठगी का मास्टरमाइंड बांग्लादेश से गिरफ्तार, फर्जी खातों का बड़ा नेटवर्क बेनकाब

27 जुलाई का पंचांग

27 जुलाई पंचांग: जानें कल की तिथि, नक्षत्र, शुभ योग, ग्रह स्थिति और लग्नारंभ समय

प्रतीकात्मक तस्वीर

CM धामी ने कारगिल विजय दिवस पर शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर कारगिल के अमर बलिदानियों को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies