आपातकाल : सत्य का शंखनाद, रायबरेली से वह गवाही जिससे चली गई थी इंदिरा गांधी की सत्ता
July 31, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

आपातकाल : सत्य का शंखनाद, रायबरेली से वह गवाही जिससे चली गई थी इंदिरा गांधी की सत्ता

आपातकाल के साक्षी और पूर्व मंत्री गिरीश नारायण पांडेय बताते हैं कि आपातकाल के बाद जब हम चुनाव प्रचार के लिए जहां भी जाते थे वहां लोग एक ही बात कहते थे कि डिब्बा ताक्यो उहां और इहां चिंता न करयो

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jun 20, 2024, 11:57 am IST
in भारत
आपातकाल के बाद हुए चुनाव में रायबरेली ने इंदिरा गांधी को नकार दिया

आपातकाल के बाद हुए चुनाव में रायबरेली ने इंदिरा गांधी को नकार दिया

सत्ता का नशा कितना क्रूर होता है, भारत ने इसे 1975 में कांग्रेस के शासन में  देखा। 25 जून 1975 को पूरे देश को बंधक बना लिया गया। संविधान का गला घोंट दिया गया। जिस लोकसभा सीट रायबरेली से इंदिरा गांधी ने सत्ता का स्वाद चखा, उसी रायबरेली पर सत्ता की हिटलरशाही भी दिखी। कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी इस चुनाव में संविधान को खतरे में बता रहे थे, उन्हीं के परिवार ने, उन्हीं की दादी इंदिरा गांधी ने संविधान का गला घोंट दिया था।

पूरे 21 महीने देश ने आपातकाल का क्रूर चेहरा देखा। जिस रायबरेली ने उन पर दुलार लुटाया, वह रायबरेली भी सिसक रही थी। यूपी के पूर्व मंत्री गिरीश नारायण पांडेय उन दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तहसील कार्यवाह थे। वह बताते हैं कि 3 जुलाई 1975 की रात 1.30 बजे मैं लालगंज स्थित घर पर सो रहा था। पुलिस का दारोगा दरवाजे  पर आया, उसने कुंडी खटखटाई । घर से नीचे उतरकर आया तो पूछा कि क्या काम है। वह बोला कि एसडीएम साहब बुला रहे हैं, कोई जरूरी काम है। मैंने कहा कि इतनी रात में क्या काम होगा, उनसे कह दीजिए कि सुबह आएंगे। वह बोला कि आप चले चलिए मैं छोड़ जाऊंगा। मैंने कहा कि झूठ मत बोलो, तुम गिरफ्तार करने आए हो। सीढ़ी से नीचे उतरे तो उसने हाथ से कुछ इशारा किया। करीब एक दर्जन पुलिसवाले खड़े थे। उनके पास लाठी और बंदूक थीं। उन्होंने घेर लिया। कहा कि गाड़ी में बैठिये। मैंने कहा कि पैदल चलेंगे। हम पैदल थाने पहुंचे। वहां एसडीएम बैठे थे, शायद सलोन तहसील के थे। उन्होंने कहा कि आप मिल गए तो सांस में सांस आई, डीएम और एसपी ने कहा था कि ये खतरनाक आदमी हैं, अगर पकड़ कर नहीं ला सके तो हम मानेंगे कि आप इनसे मिले हुए हैं। आपको जो असुविधा हो वह बताइयेगा। रात में थाने में रहिये सुबह पहुंचा दिया जाएगा। थाने में फोन आ रहे थे। एक नंबर मिल गया, दो नंबर मिल गया, तीन नंबर नहीं मिला, चार नंबर नहीं मिला, वहां नंबरों से बातचीत हो रही थी। सुबह एक प्राइवेट बस में बैठाकर रायबरेली ले गए। रायबरेली में थाने में संघ के और कार्यकर्ता भी थे। वहां दस बजे से बैठे थे। शाम तीन बजे से वहां से रायबरेली जेल के लिए रवाना किया।

वहां एलआईयू के इंस्पेक्टर मिले, वह घूम-घूमकर एक-एक आदमी को ढूंढ रहे थे। वह बोले कि रॉ वालों ने रिपोर्ट दी है, उस पर कार्रवाई की गई। जेल में चाय तक नहीं दी गई। 24 घंटे अनशन किया तब हम लोगों को नाश्ता और चाय आदि दी गई। जेल में करीब 11 महीने था। हमें यह पता नहीं था कि कहां ले जा रहे हैं। 15 दिन तक घर वालों को पता ही नहीं चला था कि हम कहां है। इतना आतंक था कि कोई आता ही नहीं थी। मिलने पर पुलिस पकड़ लेगी।

ये थी झूठी एफआईआर

जमानत की अपील रायबरेली कोर्ट से भी खारिज हो गई थी। डीएम का सख्त आदेश था कि जब तक शासन नहीं कहेगा तब तक जमानत भी नहीं दी जाएगी। मेरे खिलाफ झूठी एफआईआर लिखाई  गई थी। उसमें लिखा था कि मैं अपने घर के दरवाजे पर मीटिंग कर रहा था और पुलिस एवं फौज के रिटायर्ड लोगों का एक सम्मेलन था। उसमें शासन के खिलाफ भड़काने के लिए हथियार लेकर गए और हथियार बांट रहे थे। शासन के खिलाफ विद्रोह करने के लिए भड़काने की बात लिखी गई।

एक मामला फैजाबाद का आया। एक वकील साहब का एप्लीकेशन आया था। उनका एक ही हाथ था, उन पर अभियोग था कि खंभे पर चढ़कर बिजली का तार काट रहे थे। न्यायाधीश ने कहा कि कोई एक हाथ से कैसे खंभा पकड़ेगा और कैसे तार काटेगा।

इंदिरा गांधी के खिलाफ दी थी ये गवाही

इंदिरा गांधी के खिलाफ राज नारायण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुकदमा दायर किया था। राज नारायण की तरफ से मैं भी अहम गवाह था। इसी गवाही के ग्राउंड पर इंदिरा गाधी के खिलाफ फैसला आया था। मैंने गवाही दी थी कि 1971 के चुनाव में सरकारी साधनों का दुरुपयोग किया गया। इंदिरा गांधी के सचिव थे यशपाल कपूर थे। वह सरकारी कर्मचारी थे, लेकिन वह दौड़-दौड़कर चुनाव का सारा कार्यक्रम देखते थे। मीटिंगों में सक्रिय रूप से भाग लेते थे। एसडीएम-डीएम मीटिंग की व्यवस्था करते थे। सरकारी कर्मचारी चुनाव कार्यक्रमों में भाग नहीं ले सकते थे। सरकारी कागजों का दुरुपयोग किया गया। और भी बातें थीं। हाईकोर्ट में मुझसे डेढ़ घंटे तक जिरह की गई। गवाही न दूं, इसलिए धमकी दी जाती थी।

फैसला लिखने वाले जस्टिस सिन्हा पर था कितना दबाव

गिरीश नारायण पांडेय बताते हैं कि जब मैं मंत्री ( न्याय विधि मंत्री, उत्तर प्रदेश) था तो इलाहाबाद दौरे पर गया था। वहां एक कार्यक्रम में इंदिरा गांधी के खिलाफ फैसला देने वाले  जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा से मुलाकात हुई थी। उन्होंने बताया था कि जब जजमेंट लिख रहा था तो फोन आ रहे थे कि जजमेंट क्या लिख रहे हो। जो भी चाहो वह दे देंगे। हमने कोई जवाब नहीं दिया। फोन आते थे कि कुछ भी ले लो, लेकिन यह बता दो कि जजमेंट पक्ष में करोगे या विपक्ष में। हमने कुछ भी नहीं बताया। जजमेंट पर कोई असर न पड़े, इसलिये अपने सहयोगी से कहा कि दो महीने तक मेरे साथ मेरे घर में अलग रहोगे। किसी से कोई टेलीफोन संपर्क नहीं होगा। मैं जो जजमेंट बोलूंगा वह लिखोगे। सुनवाई के बाद दो महीने तक परिवार में किसी से बात नहीं की। एक कमरे में रहा। कोई फोन नहीं था। एक-आध दिन किसी जरूरी काम से बाहर जाना पड़ता था तो 2 गनर लेकर जाते थे। धमकियां मिलती थीं, लेकिन हम डरे नहीं।

गिरीश नारायण पांडेय बताते हैं कि इमरजेंसी के बाद चुनाव हुआ। इंदिरा गांधी चुनाव लड़ीं। हम चुनाव प्रचार के लिए जहां भी जाते थे वहां लोग एक ही बात कहते थे कि डिब्बा ताक्यो उहां और इहां चिंता न करयो (बैलेट बॉक्स पर नजर रखिये, यहां की चिंता न करें)। चुनाव का नतीजा सबके सामने था। इंदिरा गांधी को रायबरेली की जनता ने नकार दिया।

Topics: राजनारायण केसइंदिरा गांधी के खिलाफ गवाहीआपातकाल और गवाहीगिरीश नारायण पांडेयIndira Gandhi and EmergencyEmergency 1975Rajnarayan Caseपाञ्चजन्य विशेषरायबरेली लोकसभा सीटRae Bareli Lok Sabha seatइमरजेंसी 1975इंदिरा गांधी और आपातकाल
Share7TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

आज का संस्कृत श्लोक – अद्यापि भारतं श्रेष्ठं जम्बूद्वीपे महामुने।

पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी करते हुए स्थानीय लोग

छूटती पकड़, टूटती अकड़

निजी अंतरिक्ष युग का उदय

खेल : युवा शक्ति का जयघोष, लॉर्ड्स पर बेटियों ने रचा इतिहास

गुरु पूर्णिमा पर विशेष :  सर्वज्ञ वेदव्यास

गुरु पूर्णिमा : त्याग, तप और तेज का प्रतिनिधि भगवा ध्वज

Load More

ताज़ा समाचार

आज का संस्कृत श्लोक – अद्यापि भारतं श्रेष्ठं जम्बूद्वीपे महामुने।

आज का राशिफल

31 जुलाई राशिफल: जानें किस राशि के लिए खुलेगा सफलता का द्वार, किसे बरतनी होगी सावधानी

आज का इतिहास

31 जुलाई का इतिहास: भारत-नेपाल संधि से ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र तक, जानें आज की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं

विधानसभा उपचुनाव

बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान संपन्न, जानिये कहां पड़े कितने वोट

संसद में चर्चा के दौरान जवाब देते केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह

राज्य सभा से ध्वनि मत से पारित हुआ एंटी पेपर लीक विधेयक, विपक्ष ने किया वॉकआउट

PM Narendra Modi

विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली की दिशा में बड़ा कदम, संसद ने कठोर कानून वाला विधेयक पारित किया :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

India Nepal Women Conference Uttarakhand

उत्तराखंड में भारत-नेपाल महिला सम्मेलन: दोनों देशों की मातृशक्ति में बढ़ा समन्वय, होंगे संयुक्त कार्यक्रम!

CM Pushkar Singh Dhami Haridwar Sant Ravidas 650th Jayanti Kalash Yatra

हरिद्वार में सिर पर कलश रखकर चले CM धामी: संत रविदास जी की 650वीं जयंती पर दिया समरसता का संदेश!

Jaunsar Bawar Chakrata Rudrasena Memorandum DM Ashish Chauhan Dehradun Panchjanya

जौनसार-बावर में बाहरी लोगों को मिला PM आवास का लाभ? स्थानीय जनजाति समुदाय में भयंकर आक्रोश!

वंदे मातरम

वंदे मातरम को राष्ट्रगान की तरह कानूनी संरक्षण देने वाला विधेयक लोकसभा से भी पारित

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies