"अहलन मोदी", वसुधैव कुटुंबकम् का नतीजा! अबू धाबी में मानवता का मंदिर!
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“अहलन मोदी”, वसुधैव कुटुंबकम् का नतीजा! अबू धाबी में मानवता का मंदिर!

2015 में पीएम नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा के दौरान 27 एकड़ भूमि यूएई सरकार ने मंदिर के लिए दी थी।

Written byफिरोज बख्त अहमदफिरोज बख्त अहमद
Feb 15, 2024, 10:37 am IST
inविश्व, मत अभिमत
BAPS temple Dubai Pm Modi

बीएपीएस मंदिर में पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने 14 फरवरी को बीएपीएस स्वामी नारायण भव्य मंदिर का उद्घाटन कर दिया और  “अहलन मोदी” ने अरब संसार में भारत का ठप्पा ठोंक दिया! जिस प्रकार से भारतीय प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में पहले पत्थर वाले हिंदू बीएपीएस स्वामी नारायण मंदिर का उद्घाटन किया तो करोड़ों श्रद्धालुओं को अयोध्या में 22 जनवरी को अयोध्या में हुई मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की याद ताज़ा हो उठी! कुछ श्रद्धालुओं ने तो यहां तक कहा कि अबू धाबी का मंदिर अपने आलौकिक सौन्दर्य में अयोध्या राम मंदिर को टक्कर दे रहा है! दुबई में 45 वर्ष से रहने वाले हिंदी विशेषज्ञ व भाषाविद साहित्य चतुर्वेदी ने कहा कि अबू धाबी का मंदिर, वेटिकन के सेंट बेसिलिका चर्च से भी अधिक भव्यशाली है! हालांकि इस संदर्भ में आस्था स्थलों के बीच उनके सौंदर्य की तुलना ठीक नहीं, मगर इस बात में दम नज़र आता है! हिंदू मंदिर के बारे में अबू धाबी में इसके संयोजक, डॉ मुस्तफा सासा ने कहा, “यह मानवता का मंदिर है!

इस्लामी दुनिया में वैदिक मंदिर

कुछ लोग सोचते हैं कि आख़िर ऐसा कैसे हुआ कि एक इस्लामी देश में स्वामी नारायण मंदिर का निर्माण हो गया! मोदी ने अरब देशाें से किस प्रकार से भारत के रिश्तों को मज़बूत किया है, उसका ही नतीजा था कि कतर से मृत्यु दण्ड दिए गए भारत के जल सेना के पूर्व अफसरों को सुरक्षित भारत पहुंचवाया, ठीक ऐसे ही जैसे पकिस्तान से अभिनंदन कि छुड़वाया था। वास्तव में मोदी के “वसुधैव कुटुंबकम्” और संयुक्त अरब अमीरात के बादशाह शेख़ मुहम्मद ज़ायद-बिन-अल-नाहयान के “लकुम दीनोकुम वेल यदीन” वाले फार्मूले ने यह अंतर्धर्म सद्भावना, समता, समरसता व समभावना का करिश्मा कर दिखाया। दरअसल, मोदी और अल-नाहयान, अब तक सात बार मिल चुके हैं और दोनों इस बात को समझते हैं कि भारत व अरब देशों विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात के साथ प्रगाढ़ राजनीतिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक संबंध हैं और यह कि यहां लगभग 40 लाख भारतीय निवास करते हैं, जॉब्स देश के निर्माण में कार्यरत हैं।

मंदिर से आर्थिक लाभ

दोनों नेता इस बात को भी जानते हैं कि कोई भी धार्मिक व्यक्ति अपने आराध्यों व आस्था स्थलों के प्रति दिल-ओ-जान से समर्पित होता है, तो इस से किसी भी सरकार को टूरिस्ट बिज़नेस भी प्राप्त होता है। बीएपीएस स्वामी नारायण मंदिर की शुरूआत से अबू धाबी को ज़बरदस्त आर्थिक लाभ भी मिलेगा, जैसे राजस्थान सरकार को हज़रत ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती के श्रद्धालुओं द्वारा प्राप्त होता है। इस मंदिर से संयुक्त अरब अमीरात की समृद्धि तो होगी ही, साथ ही साथ इस्लाम का पैगाम-ए-मुहब्बत, अर्थात्,”अल-अहल-ओ-अयालुल्लाह” (पूर्ण विश्व एक परिवार है), भी पहुंचेगा, जिससे इस्लाम का भला होगा, क्योंकि मीडिया ने पहले ही इसे आतंकवाद से जोड़ कर बदनाम कर रखा है। मंदिर उद्घाटन हमें हज़रत मुहम्मद साहब (सल्ललo) का भारत के लिए कहा गया वाक्य याद आता है, “हिन्द की जानिब से आती हैं ठंडी हवाएं! इस बार शेख़ अल-नाहयान के लिए नरेंद्र मोदी ठंडी हवा का झोंका बन कर आए हैं!

मोदी-नाहयान की घनी दोस्ती

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान 2017 में गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के तौर पर भारत पधारे। भारत और यूएई के रिश्तों में गर्माहट तब और ज्यादा बढ़ गई, जब अल नायहान ने 2019 में पीएम मोदी को प्रतिष्ठित ऑर्डर ऑफ जायद से सम्मानित किया। भारत और यूएई के रिश्तों की मजबूती को इसी से समझा जा सकता है कि दोनों नेता अक्सर प्रोटोकॉल को तोड़कर एक दूसरे का स्वावगत करते हैं। इतना ही नहीं, पीएम मोदी हमेशा ही यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को “भाई” कहकर संबोधित करते हैं। जी-20 में भी जब दोनों बगलगीर हुए तो लगा कि कब के बिछड़े हुए भाई मिल रहे हैं!

हालांकि इस उद्घाटन में अल-नाहयान ब्रिटेन प्रधानमंत्री, ऋषि सुनक को भी आमंत्रित कर सकते थे क्योंकि वे भी वैदिक परंपरा के सनातनी हैं, मगर अल-नाहयान उनको बुलाकर मंदिर उद्घाटन के फोकस को बांटना नहीं चाह रहे थे, बल्कि मोदी पर ही केंद्रित रखना चाह रहे थे, जिसका राज़ उनकी और मोदी की मानसिक व रूहानी परफैक्ट केमिस्ट्री में है! यह वसुधैव कुटुंबकम् का ही प्रभाव था कि स्मृति ईरानी, भारत की अल्पसंख्यक मंत्रालय मंत्री, मदीना की मस्जिद में बैगर सर ढांके गईं और किसी को कोई आपत्ति नहीं हुई।

मोदी को मंदिर का तोहफा

दुबई-अबू धाबी शेख जायद राजमार्ग पर अल रहबा के पास, अबू मुरीखा में स्थित बीएपीएस हिंदू मंदिर, अबू धाबी में लगभग 27 एकड़ भूमि पर अल-रहबा पर बनाया गया है और इसे 2019 से बनाया जा रहा है। मंदिर के लिए संयुक्त अरब अमीरात सरकार द्वारा उस समय दान दिया गया था, जब मोदी ने अपने 2015 के यूएई के भ्रमण पर राष्ट्रपति अल-नाहयान से कहा था कि वे वहां एक मंदिर बनाना चाहते हैं और बादशाह ने मोदी से कहा कि जिस ज़मीन पर वे लकीर खींच देंगे, मंदिर वहीं बनेगा। संयुक्त अरब अमीरात में तीन अन्य हिंदू मंदिर हैं, जो दुबई में स्थित हैं और जिनके दर्शन को भी विश्व से लाखों श्रद्धालु आते हैं। संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में पहले पत्थर वाले हिंदू मंदिर के मोदी द्वारा उद्घाटन की तैयारियां कई वर्ष से चल रही हैं। इसी बीच, यहां 100 से अधिक भारतीय स्कूली बच्चे पत्थरों को चित्रित करने में लगे हुए हैं। दरअसल, यह डिजाइनर उपहार मंदिर उद्घाटन में शामिल होने वाले सभी मेहमानों को दिया जाएगा। मेहमानों के लिए उपहार बना रहे मासूम बच्चे तीन महीने से हर रविवार को मंदिर स्थल पर “पत्थर सेवा” कर रहे हैं और अब “छोटे खजाने” कहे जाने वाले उपहारों को अंतिम रूप देने में लग गए हैं।

भारत-अमीरात प्राचीन मित्र:

इसे दोनों देशो के संबंधों में मील के पत्थर की तरह देखा जा रहा है। भारत और यूएई के संबंध सहस्राब्दियों पुराने हैं। मसालों, गहनों, इत्रों और कपड़ों के व्यापार से शुरू हुए ये संबंध अब ऊर्जा, कूटनीति और सामरिक संबंधों तक पहुंच चुके हैं। भारत-यूएई साझेदारी 21वीं सदी के एक निर्णायक गठबंधन के रूप में भी उभरी है। भारत और यूएई के बीच संबंधों में तेजी 2014 के बाद दिखनी शुरू हुई, जब पीएम मोदी ने सत्ता संभाली। 2015 में पीएम मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात की ऐतिहासिक यात्रा भी की, जिसने राजनयिक संबंधों में एक नए युग की शुरुआत की। इसके बाद दौरों, समझौतों और तारीफों का सिलसिला शुरू हुआ, जिसने दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत किया है।

1962 के पहले तक यूएई खजूर, मोती और मछलियों के व्यापार तक सीमित था। लेकिन, जैसे ही यूएई में तेल की खोज हुई, उसने पूरी कहानी ही बदल दी। यूएई ने तेल के कारोबार के जरिए विकास की अद्वितीय गाथा लिखी, जिसने बड़े-बड़ों देशों को पीछे छोड़ दिया। 1990 के दशक में यूएई खाड़ी देशों में एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरा। 1970 तक भारत और यूएई का द्विपक्षीय व्यापार 180 मिलियन डॉलर था, जो 2021-22 में जबरदस्त बढ़त के साथ 73 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। भारत और यूएई के बीच 2022 में व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) को साइन किया गया। दोनों देशों ने अगले पांच साल में द्विपक्षीय व्यापार को वस्तुओं के क्षेत्र में 100 बिलियन डॉलर सेवाओं के क्षेत्र में 15 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का संकल्प लिया है।

अपनी यात्रा के दौरान, मोदी अबू धाबी के जायद स्पोर्ट्स सिटी में भारतीय समुदाय को संबोधित किया। संयुक्त अरब अमीरात में कम से कम 40 लाख भारतीय हैं, जो खाड़ी में भारतीय कार्यबल का हिस्सा हैं। इस मंदिर के रंगारंग शुभारंभ में गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों का दिखेगा संगम। जिस प्रकार से अयोध्या राम मंदिर के दर्शन हेतु भारतीय सरकार ने कुछ विशिष्ट व्यक्तियों को बुलावा भेजा था, उसी प्रकार से भारत के आगृह पर अबू धाबी की ओर से भारत के कुछ विशिष्ट व्यक्तियों को बुलावा भेजा गया है। इस मंदिर के उद्घाटन से पूर्ण विधि में पॉजिटिव वाइब्स, जाएंगी, ऐसा सोचा जा रहा है! जय हिंद! भारत माता की जय!

(लेखक पूर्व कुलाधिपति और भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के वंशज हैं)

Topics: अबू धाबीपाञ्चजन्य विशेषअहलान मोदीAhlan Modiअहलान मोदी यूएईNarendra Modiदुबई बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिरAhlan Modi UAEसनातन धर्मDubai BAPS Swaminarayan Mandirनरेंद्र मोदीSanatan Dharmaabu dhabi
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हैदराबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलाधिपति [Read more]
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