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Ayodhya Ram Mandir: राम मंदिर का सटीक इतिहास

बाबर के सेनापति मीर बाकी ने बाबर के आदेश का पालन करते हुए अयोध्या में भगवान श्री राम के मंदिर को तुड़वा दिया था, आइए जानते हैं इसके बाद क्या हुआ

Written byMahak SinghMahak Singh
Jan 20, 2024, 08:47 pm IST
in भारत, उत्तर प्रदेश
Ram Mandir History

Ram Mandir History

Ram Mandir History: अयोध्या में श्री राम की जन्मस्थली पर भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होगी लेकिन यह मंदिर बनना इतना आसान नहीं था। इस मंदिर को बनाने में 500 साल का संघर्ष लगा और कई राम भक्तों की जान चली गई। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको राम मंदिर के इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं।

साल 1528 में मीर बाकी ने तोड़वाया राम मंदिर…

यह कहानी 1528 से शुरू होती है, उस समय बाबर ने दिल्ली पर कब्जा कर लिया था और देश में मुगल साम्राज्य की नींव पड़ चुकी थी। इतिहासकारों के अनुसार बाबर के सेनापति मीर बाकी ने बाबर के आदेश का पालन करते हुए अयोध्या में भगवान श्री राम के मंदिर को तुड़वा दिया था। मीर बाकी ने राम मंदिर को तोड़कर वहां एक ढांचा बनवाया और उसे बाबरी ढांचा नाम दिया।

साल 1838 पहली बार सर्वे

ऐसे ही कुछ साल बीत गए और साल आता है 1838, यही वो साल था जब अयोध्या में पहली बार सर्वे किया गया था। सर्वे करने वाले ब्रिटिश अधिकारी का नाम मॉन्टगोमेरी मार्टिन था, जिन्होंने कहा कि बाबरी ढांचे में पाए गए खंभे हिंदू मंदिर से लिए गए हैं। 1838 में पहली बार एक ब्रिटिश अधिकारी के सर्वेक्षण के बाद अयोध्या जी में हंगामा हुआ और हिंदू समुदाय ने दावा किया कि जिस स्थान पर बाबरी ढांचा है ठीक उसी स्थान पर भगवान श्री राम का मंदिर था, जिसे बाबर के सेनापति मीर बाकी ने तोड़वाकर वहां बाबरी ढांचा बनवा दिया था।

साल 1853 में पहली बार दंगा

साल 1853 आता है और पहली बार अयोध्या जी में दंगे होते हैं। विवाद बढ़ने पर मुस्लिम पक्ष ने जिला मिजिस्ट्रेट के यहां अर्जी दाखिल की। 1859 में मिजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ढांचे के अंदर एक दीवार खड़ी की गई। इसके बाद मुसलमानों को ढांचे के अंदर और हिंदुओं को बाहर पूजा करने की अनुमति दे दी गई।

1885 में पहली बार कोर्ट पहुंचा मामला

1885 में पहली बार मामला कोर्ट पहुंचता है, निर्मोही अखाड़ा के महंत रघुवर दास ने बाबरी ढांचा के बगल में राम मंदिर के निर्माण की अनुमति के लिए फैजाबाद अदालत में अपील दायर की लेकिन 1886 में यह अपील खारिज कर दी गई।

साल 1947 में देश हुआ आजाद फिर यहां से राम मंदिर आंदोलन ने जोर पकड़ लिया…

साल 1947 वह समय था जब देश को अंग्रेजों के चंगुल से आजादी मिली थी। आजादी के बाद राम मंदिर आंदोलन ने जोर पकड़ा और दिसंबर 1949 में अयोध्या में 9 दिनों के रामचरितमानस पाठ का आयोजन किया गया।

1949 में प्रकट हुई रामलला की मूर्ति

23 दिसंबर 1949 की रात ढांचे के अंदर भगवान राम की मूर्ति मिलीं। इसके बाद लोग उस स्थान पर पूजा करने लगे। मुस्लिम पक्ष ने हिंदुओं पर विवादित स्थान पर मूर्ति रखने का आरोप लगाया।

साल 1950 में पूजा करने और मूर्तियां रखने के लिए मुकदमा

साल 1950 में फैजाबाद सिविल कोर्ट में दो अर्जियां दाखिल की गईं, जिनमें से एक में रामलला की पूजा की इजाजत मांगी गई थी। दूसरी याचिका विवादित ढांचे में भगवान श्रीराम की मूर्ति रखने की इजाजत मांगी गई लेकिन कोर्ट ने इस अपील को खारिज कर दिया। इस कदम ने राम मंदिर आंदोलन को नई धार दी।

साल 1959 में विवादित स्थल पर मुकदमा

साल 1959 में निर्मोही अखाड़े एक बार फिर विवादित स्थल पर कब्जे के लिए मुकदमा दायर किया। इस बार अखाड़े ने कोर्ट से न सिर्फ राम चबूतरा बल्कि पूरी 2.77 एकड़ जमीन का हक मांगा। दो साल बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी कोर्ट में केस दायर किया। वक्फ ने मुसलमानों के पक्ष में केस दायर कर कहा कि यहां बाबरी ढांचा पहले भी था और अब भी है। इसके बाद करीब 20-25 साल तक ये मामला कोर्ट में चलता रहा।

साल 1986 में हिंदुओं को पूजा की इजाजत मिली

1 फरवरी 1986 को फैजाबाद कोर्ट ने बाबरी ढांचे का ताला खोलने का आदेश दिया और हिन्दुओं को मंदिर में पूजा की इजाजत भी दे दी। लेकिन कोर्ट के इस फैसले से मुस्लिम पक्ष खुश नहीं हुआ और इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंच गया।

साल 1989 में हाई कोर्ट से हिंदू पक्ष को बड़ी राहत मिली

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 14 अगस्त, 1989 को मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। जिससे हिंदू पक्ष को बड़ी राहत मिली।

साल 1990 में कारसेवकों पर चली गोलियां

साल 1990 में 30 अक्टूबर को देशभर से बड़ी संख्या में कारसेवकों को अयोध्या पहुंचने का अनुरोध किया गया था। इस दिन अयोध्या में कर्फ्यू लगा दिया गया था लेकिन इसके बावजूद वहां भगवान श्री राम की भक्ति में लीन कारसेवकों की भारी भीड़ जमा हो गई। स्थिति हिंसक हो जाती है, कारसवेक बाबरी ढांचे पर चढ़ जाते हैं और भगवा झंडा फहराते हैं।

मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का फोन

तभी अयोध्या पुलिस के अधिकारियों को लखनऊ से एक फोन आता है, यह फोन किसी और का नहीं बल्कि यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का था। उन्होंने कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया, आदेश का पालन करते हुए पुलिस ने निहत्थे कारसेवकों पर गोली चला दी, जिसमें कई कारसेवक मारे गए। 2 नवंबर 1990 को फिर ऐसी घटना घटती है, प्रभु श्री राम की भक्ति में लीन कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश फिर लखनऊ से आता है। निहत्थे कारसेवकों पर फिर गोलियां चलाई जाती हैं, जिसमें कई कारसेवक मारे जाते हैं, इसमें कोठारी बंधु भी शामिल थे।

साल 1992 में बाबरी ढांचे का विध्वंस

6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों ने विवादित बाबरी ढांचा ढहा दिया था। इसके बाद राम मंदिर के लिए आंदोलन और तेज हो गया। यूपी में 6 दिसंबर शाम 6 बजे तक राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता है।

साल 2002 गोधरा ट्रेन में आग 

कारसेवकों को लेकर जा रही ट्रेन गोधरा में आग लगा दी गई, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई, इसकी वजह से गुजरात में दंगे हुए और कई लोग मारे गए।

अप्रैल 2003 में कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझा

अप्रैल 2003 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने विवादित स्थल के मालिकाना हक पर सुनवाई शुरू की। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई को वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने का काम दिया गया। एएसआई ने विवादित स्थल पर 6 महीने तक खुदाई की। ASI रिपोर्ट पेश करती है, रिपोर्ट में ASI ने कहा कि खुदाई में 10वीं-12वीं सदी के बीच के हिंदू मंदिरों के अवशेष मिले हैं। खंभे, ईंटें, शिलालेख और अन्य चीजें मिल चुकी हैं और मामला इसी तरह अदालत में चलता रहता है।

साल 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया

30 सितंबर 2010 को हाई कोर्ट ने विवादित स्थल को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच तीन बराबर हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया।

साल 2011 में ‘सुप्रीम कोर्ट’ ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी

इस फैसले से तीनों नाखुश थे और साल 2011 में तीनों ने पहली बार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 9 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने इसे तीन बराबर भागों में बांटने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी।

साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होती है

साल 2018 में 8 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अपीलों पर सुनवाई शुरू की।

साल 2019 में संवैधानिक पीठ का गठन हुआ

जनवरी 2019 में अयोध्या मामले की सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच जजों की संवैधानिक पीठ का गठन किया गया।

साल 2019 में रोजाना सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया

साल 2019 में 6 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले पर रोजाना सुनवाई शुरू हुई और 16 अगस्त 2019 को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया।

साल 2019 में राम मंदिर पर ऐतिहासिक फैसला आया

9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने श्रीराम जन्मभूमि के पक्ष में फैसला सुनाया।2.77 एकड़ विवादित जमीन हिंदू पक्ष को मिल गई।

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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