सागर मंथन : ‘मेरा मंत्र है अंत्योदय, ग्रामोदय और सर्वोदय’ - डॉ. प्रमोद सावंत
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सागर मंथन : ‘मेरा मंत्र है अंत्योदय, ग्रामोदय और सर्वोदय’ – डॉ. प्रमोद सावंत

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है। कथित चुनावी पंडित कुछ और ही कह रहे थे, लेकिन पार्टी के बड़े नेता और मेरे जैसे छोटे कार्यकर्ता, जो जमीन पर प्रचार कर रहे थे

Written byहितेश शंकरहितेश शंकर — edited by Rajpal Singh Rawat
Dec 31, 2023, 12:24 pm IST
in धर्म-संस्कृति, गोवा, साक्षात्कार, पाञ्चजन्य इवेंट
युवा मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत

युवा मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत

सागर मंथन के समापन सत्र के मुख्य अतिथि थे गोवा के युवा मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत। पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने आयुर्वेद के गहन जानकार डॉ. प्रमोद सावंत से बातचीत की। उन्होंने कहा कि पुर्तगालियों ने यहां 450 साल तक शासन किया, फिर भी हमने अपनी संस्कृति को बचाए रखा। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश-

दिल्ली में हम राजनीति की कड़वाहट और छटपटाहट देखते हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि आपके राज्य में आने के बाद लोग आनंद में खो जाते हैं। राजनीति में कोई कड़वाहट नहीं दिखती। एक डॉक्टर के नाते आप ऐसी कौन-सी सर्जरी कर देते हैं?
दिल्ली की राजनीतिक कड़वाहट और गोवा के बारे में बात करने से पहले आप यह जान लें कि गोवा का खुशहाली सूचकांक सबसे ऊपर है। इसीलिए यहां पर लोग खुश रहते हैं। चाहे राजनीति हो, सामाजिक क्षेत्र हो या कारोबार, यहां सब कुछ सामान्य रूप से चलता है।

सारे ही आर्थिक पैमानों पर गोवा सबसे ऊपर है। यह मंत्र आप दिल्ली में भी जाकर देते हैं कि उसका सूत्र क्या है?
जी हां, गोवा तो हमेशा से ही हर एक सूचकांक में आगे रहा है। ‘हर घर नल से जल’, स्वच्छता और ‘हर घर बिजली’ के मामले में भी गोवा सबसे ऊपर है। अब हम ‘हर घर फाइबर’ के लिए बातचीत कर रहे हैं। मुझे लगता है कि ‘हर घर फाइबर’ के मामले में भी गोवा सबसे पहले अपने लक्ष्य को पूरा कर लेगा।

लोग आनंद पाने और गम भुलाने के लिए गोवा आते हैं। छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश के चुनावी नतीजों से बहुत सारे लोग गम में हैं? ऐसे लोग गोवा आएंगे तो क्या आप उनका स्वागत करेंगे?
-मैं ऐसे लोगों से यह कहना चाहूंगा कि गोवा आएं और कुछ दिन अवश्य रहें। गोवा के चुनाव के दौरान भी मैंने राजनीतिक पर्यटकों को बड़ी संख्या में देखा था। इसलिए अभी भी अपना गम भुलाने के लिए कोई गोवा आना चाहे तो जरूर आए। वैसे भी 25 से 31 दिसंबर तक गोवा घूमने लायक रहता है।

डॉ. प्रमोद सावंत से बातचीत करते श्री हितेश शंकर

अभी दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक हुई थी। क्या आप उन्हें न्योता देना चाहेंगे? परिणाम आने के बाद जो राजनीतिक पर्यटन होता है, वह हड़बड़ाहट में होता है। ऐसे में पहले ही तैयारियों की बैठकों में आप उन्हें बुलाना चाहेंगे?
जी हां, उन्होंने तो केवल अपना नाम बदला है। इंडिया गठबंधन तो यूपीए वाला गठबंधन ही है। ऐसे में कोई भी राजनीतिक पर्यटक गोवा आता है, तो हमें कोई हर्ज नहीं है।

आपके समय में गोवा में 315 किलोमीटर राजमार्गों का निर्माण हुआ है और 90 में से 70 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। आप इसे किस तरह से देखते हैं?
गत नौ वर्ष में विभिन्न परियोजनाओं में डबल इंजन की सरकार गोवा में 25,000 करोड़ रु. की राशि खर्च कर चुकी है। हम लोग राष्ट्रीय राजमार्ग का कार्य पूरा कर चुके हैं। केवल एक फ्लाईओवर बचा था। हाल ही में केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने उसकी नींव रख दी है। यह फ्लाईओवर 650 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा है। ग्वारी में 2,500 करोड़ रुपए की लागत से 15 किलोमीटर लंबी सड़क और पुल बनेगा। यह देश का दूसरा सबसे लंबा पुल होगा। इसी के साथ श्री गडकरी ने ‘आब्जर्वेटरी टॉवर’ की नींव रखी है। यह भारत का पहला ‘आब्जर्वेटरी टॉवर’ है। इसके बनने के बाद यहां आने वाले पर्यटकों को 125 फीट की ऊंचाई पर बने रेस्टोरेंट में जाने का मौका मिलेगा। इसमें जाने के लिए कैप्सूल लिफ्ट का इस्तेमाल किया जाएगा।

गोवा के पर्यटन को बढ़ाने के लिए गडकरी जी का ही यह सुझाव था। गोवा ने जो मांगा, उससे अधिक ही प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और गडकरी जी ने दिया है। गडकरी जी ने सड़कों के विकास के लिए 10,000 करोड़ रुपए की धनराशि दी है। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों और मोपा को जोड़ने के लिए उन्होंने एक कंसल्टेंसी फर्म भी बनाई है। गोवा में हम पोर्ट, एयरपोर्ट और रेलवे को पहले से ही राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ चुके हैं। इसलिए अब गोवा सबसे अच्छा ‘लॉजिस्टिक हब’ बनने जा रहा है। बेंगलुरु, दिल्ली और मुंबई के बाद अब गोवा निर्यात का भी बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। मोपा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से कार्गो सुविधाएं शुरू हो चुकी हैं। यद्यपि हमारे पास सबसे अच्छा जल मार्ग संपर्क है।

गोवा एक छोटा राज्य है। क्या इस कारण बड़े लक्ष्य हासिल करना आसान है या फिर डबल इंजन की सरकार है या फिर साफ नीयत। आपकी राजनीति का मंत्र क्या है?
छोटा या बड़ा नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति होनी चाहिए। गोवा जैसे और भी छोटे राज्य हैं, लेकिन उन्होंने इस तरह के लक्ष्य हासिल नहीं किए हैं। मैंने कोरोना के दौरान मुख्यमंत्री का पद संभाला था। उस समय देशभर में ‘लॉकडाउन’ था। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने एक मंत्र दिया ‘आत्मनिर्भर भारत’। उसी मंत्र के साथ हम आगे बढ़े। इसी के तहत गोवा को आगे ले जाने के लिए हमारे अधिकारी काम कर रहे हैं। हर शनिवार को अधिकारी ग्राम पंचायतों में जाकर बैठते हैं और केंद्र और राज्य सरकार की प्रत्येक योजना पंचायतों तक पहुंची या नहीं, इसकी समीक्षा करते हैं। हमारे विकास का केवल एक ही मंत्र है अंत्योदय, सर्वोदय और ग्रामोदय।

गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत और श्री हितेश शंकर के साथ पाञ्चजन्य परिवार

हम इसी मंत्र पर काम करते आए हैं। कांग्रेस जैसी पार्टियों के लिए राजनीति एक व्यापार है। जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी तो इसके नेता इसे एटीएम के तौर पर इस्तेमाल करते थे, लेकिन हमने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को ध्यान में रखते हुए कार्य किया है। भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी जितनी भी योजनाएं ला रहे हैं, वे सभी गोवा में चल रही हैं। गोवा में हर दिन करीब 3,50,000 लीटर दूध की जरूरत होती है, जबकि यहां इसका उत्पादन अधिकतम 60,000 लीटर प्रतिदिन था।

गोवा के लिए सारी चीजें बाहर से आयात की जाती थीं, लेकिन तीन साल के अंदर हमने गोवा में करीब 40 प्रतिशत चीजों का उत्पादन बढ़ाया है। पहले हम लोग केवल सेवा क्षेत्र पर ध्यान देते थे, लेकिन अब हमने कृषि पर भी ध्यान दिया है। किसानों को ‘कृषि क्रेडिट कार्ड’, मछुआरों को ‘मत्स्य कार्ड’ और दूध उत्पादकों को ‘मिल्क फॉर्मर क्रेडिट कार्ड’ दिए गए हैं। इन सभी को बिना किसी गारंटी के कर्ज भी दिए जा रहे हैं।

दक्षिणी गोवा में एक गांव है रेवोना। वहां आईआईटी परिसर के लिए जमीन चिन्हित कर ली गई है। यह कब तक बन जाएगा?
केंद्र सरकार की कई सारी परियोजनाएं गोवा में हैं। एनआईटी, आईआईटी, नेशनल फॉरेंसिक साइंस, इंटरनेशनल स्कूल आफ लॉ, नेशनल वॉटर स्पोर्ट्स, नेशनल इंस्टीट्यूट आफ ओशिनोग्राफी और नेशनल पोलार इंस्टीट्यूट जैसी कई परियोजनाएं गोवा में कार्यरत हैं। नेशनल पोलार इंस्टीट्यूट अपनी तरह का इकलौता संस्थान है। कोकणी में एनआईटी का परिसर तैयार है। नेशनल फॉरेंसिक साइंस के लिए 2 लाख वर्गमीटर जमीन पर भवन बन चुका है। आईआईटी के लिए अगले साल तक जमीन दे दी जाएगी।

चर्चा है कि मोपा हवाईअड्डे के पूरी तरह कार्य करने के बाद दाबोलिम हवाईअड्डा बंद हो जाएगा?
मोपा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा एक साल पहले ही शुरू हो चुका है, लेकिन दाबोलिम से एक भी उड़ान बंद नहीं हुई है। सच तो यह है कि मोपा में अतिरिक्त उड़ानें शुरू हुई हैं। मोपा हवाईअड्डा शुरू होने के बाद गोवा में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। मैं इस बात की गारंटी देता हूं कि मोपा हवाईअड्डे के पूरी तरह चालू होने के बाद भी दाबोलिम हवाईअड्डा बंद नहीं होगा। मैं आपको बताना चाहता हूं कि दाबोलिम हवाईअड्डे पर नागरिक सुविधाएं बढ़ाने के लिए हाल ही में 400 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं।

‘‘लोगों ने मन बना लिया है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को ही लाना है। इस बार भाजपा की सीटें 400 पार हो जाएं, तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। मैंने दक्षिण भारत के कई राज्यों का दौरा किया है। वहां की हवा
भी भाजपा के पक्ष में दिख रही है’’

उत्तरी गोवा में तिरखुल नदी में अवैध खनन की खबरें आती रही हैं, जिससे नदी में कटाव के कारण किसानों के खेत डूब जाते हैं। सरकार इससे निबटने के लिए क्या काम कर रही है?
सरकार किसानों के मुद्दों पर संवेदनशील रही है। हाल ही में एक विधेयक लाया गया है,जिसमें प्रावधान किया गया है कि यहां की कृषि भूमि किसी बाहरी व्यक्ति को नहीं बेची जा सकती। सरकार को तिरखुल नदी में हो रहे अवैध खनन की जानकारी है और हमने उस पर रोक लगाई है।

आपने गोवा में राष्ट्रीय खेलों का आयोजन कराया था? कांग्रेस ने भी एक बार राष्टÑमंडल खेल आयोजित कराए थे? कांग्रेस का कहना है कि खेल कैसे कराए जाते हैं, उसकी जानकारी आपको है ही नहीं। कांग्रेस आप पर भ्रष्टाचार का भी आरोप लगा रही है?

मैं इस आयोजन की प्रशंसा नहीं करूंगा। यहां जो खिलाड़ी आए थे, इस संबंध में उनके वीडियो हैं। वे खुद कह रहे हैं कि उन्हें इतनी अच्छी सुविधा कहीं नहीं मिली थी। कांग्रेस और दिल्ली वाले (केजरीवाल) को तो खाने की आदत पड़ चुकी है। वे खुद खाते हैं और दूसरे भी उन्हें वैसे ही लगते हैं।

पहले लोगों ने गोवा की एक छवि बना रखी थी, सन (सूर्य) सैंड (बालू) और सी (समुद्र)। लोगों को लगता था कि गोवा में इन सारी चीजों को लेकर मजे करो और चले जाओ। वास्तव में यह गोवा नहीं है। गोवा में अनेक प्राचीन और विशाल मंदिर हैं। बड़े चर्च हैं। यहां पश्चिमी घाट है। यहां पर चिड़ियाघर है, अभयारण्य है। बारिश में पूरा गोवा देखने लायक होता है। आगे आने वाले दिनों में गोवा की पहचान ‘मेडिकल टूरिज्म’ के रूप में भी होगी

 

आप स्वयं आयुर्वेद के चिकित्सक हैं। गोवा में आयुर्वेद का क्या स्थान देखते हैं?
आयुष को लेकर गोवा पहले से काफी आगे रहा है। केंद्र सरकार को बहुत-बहुत धन्यवाद कि उसने उत्तरी गोवा में आयुर्वेद का एक बड़ा संस्थान शुरू किया है, जो कि मोपा के नजदीक धारगर गांव में है। यहां 250 शैया के अस्पताल के साथ ही शोध, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की शिक्षा भी शुरू हुई है। आयुर्वेद की पढ़ाई करने के लिए विदेशों से लोग गोवा आते हैं।

आने वाले 10 वर्ष में आप गोवा की कैसी छवि देखते हैं?
गोवा में लगभग 150 वर्ष तक अंग्रेजों और 450 वर्ष तक पुर्तगालियों का शासन रहा। गुलामी के दौरान भी हमने अपनी संस्कृति को संजो कर रखा। 350 वर्ष पहले छत्रपति शिवाजी महाराज ने गोवा में सप्तकोटेश्वर मंदिर का निर्माण कराया था। मुझे उसका जीर्णोद्धार करने का सौभाग्य मिला। इसका लोकार्पण भी किया। पहले लोगों ने गोवा की एक छवि बना रखी थी, सन (सूर्य) सैंड (बालू) और सी (समुद्र)। लोगों को लगता था कि गोवा में इन सारी चीजों को लेकर मजे करो और चले जाओ। वास्तव में यह गोवा नहीं है। गोवा में अनेक प्राचीन और विशाल मंदिर हैं। बड़े चर्च हैं। यहां पश्चिमी घाट है। यहां पर चिड़ियाघर है, अभयारण्य है। बारिश में पूरा गोवा देखने लायक होता है। आगे आने वाले दिनों में गोवा की पहचान ‘मेडिकल टूरिज्म’ के रूप में भी होगी।

लोकसभा चुनाव आने वाले हैं। गोवा में लोकसभा की दो सीटें हैं। इनमें से एक आपके पास है। लोकसभा चुनाव को आप कैसे देखते हैं?
हाल ही में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है। कथित चुनावी पंडित कुछ और ही कह रहे थे, लेकिन पार्टी के बड़े नेता और मेरे जैसे छोटे कार्यकर्ता, जो जमीन पर प्रचार कर रहे थे, कह रहे थे कि भाजपा चुनाव जीत रही है। मैंने चुनाव से दो दिन पहले कोल्हापुर विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम में कहा था कि इन तीनों ही राज्यों में भाजपा जीत रही है। मोदी जी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार जो पूरे देशभर में काम कर रही है, सभी लोग चाहते हैं कि डबल इंजन की सरकार उनके राज्य में भी आ जाए। लोगों ने मन बना लिया है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को ही लाना है। इस बार भाजपा की सीटें 400 पार हो जाएं, तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। मैंने दक्षिण भारत के कई राज्यों का दौरा किया है। वहां की हवा भी भाजपा के पक्ष में दिख रही है।

Topics: सागर मंथनSagar Manthanआब्जर्वेटरी टॉवर‘लॉजिस्टिक हबहर घर बिजलीObservatory Tower‘आत्मनिर्भर भारत’'Logistic HubSelf-reliant Indiatap water to every houseराष्ट्रीय राजमार्गelectricity to every houseNational highwayहर घर नल से जल
हितेश शंकर
हितेश शंकर
हितेश शंकर पत्रकारिता का जाना-पहचाना नाम, वर्तमान में पाञ्चजन्य के सम्पादक [Read more]
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