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Global Investors Summit : निवेशकों को दिखाया गया रोड मैप, सरकार ने कहा- हर सुविधा देंगे लगाएं उद्योग

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि राज्य में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट उत्तराखंड के चौमुखी विकास में मील का पत्थर साबित होगा

Written byदिनेश मानसेरादिनेश मानसेरा
Dec 9, 2023, 05:47 pm IST
inउत्तराखंड

देहरादून।  उत्तराखंड में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन हो रहा है, जिसमें आज टूरिज्म और एविएशन क्षेत्र में राज्य की प्रगति और समृद्धि के विकास विषय पर आधारित द्वितीय सत्र आयोजित हुआ। सत्र में उत्तराखंड राज्य की टूरिज्म क्षेत्र में क्षमताओं के विकास, हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटन विकास में एविएशन की भूमिका, एस्ट्रो टूरिज्म आदि विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि राज्य में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट उत्तराखंड के चौमुखी विकास में मील का पत्थर साबित होगा। जितने भी करार देश के विभिन्न संस्थानों ने राज्य सरकार एक साथ किए है, यह राज्य में रोजगार सृजन कर आर्थिकी को सशक्त करेगी। वहीं, राज्य के साथ हुए सभी करार निवेशकों की राज्य में पारदर्शिता और सुशासन को दर्शाते हैं। आध्यात्मिक, एस्ट्रो, ईको, मेडिकल, धार्मिक, साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास जारी है। यहां आने वाले तीर्थयात्रियों की यात्रा सुलभ, सुगम और सरल हो, इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है। आदि कैलाश और ॐ पर्वत के निकट स्थित गुंजी को शिवनगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। भविष्य में कॉर्बेट के सीताबनी में टोटल एनिमल किंगडम के रूप में विकसित किए जाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि देश के साथ ही विदेशी लोग गंगा आरती, गुरुजनों से मिलने धर्म नगरी हरिद्वार आते हैं।

सचिव पर्यटन सचिन कुर्वे ने राज्य में बढ़ते पर्यटन अवसर पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड पर्यटन का राज्य की जीडीपी में लगभग 15 प्रतिशत योगदान है। वहीं राष्ट्र की जीडीपी में 6 प्रतिशत की भागीदारी है। आज उत्तराखंड वैश्विक स्तर पर टूरिज्म हब बन चुका है। पिछले साल 49 मिलियन घरेलू पर्यटक उत्तराखंड आए। वहीं विदेशों से 55 हजार विदेशी पर्यटक आए। सोलो वूमेन ट्रैवलर के लिए सर्वाधिक सुरक्षात्मक राज्य का खिताब भी उत्तराखंड ने अपने नाम कर लिया है।

सत्र में उद्योग जगत से आए वक्ताओं ने उत्तराखंड में उपलब्ध विविध पर्यटन से राज्य को संवारने की बात कही। कहा कि उत्तराखंड होम स्टे पर्यटन के क्षेत्र में अधिक कार्य किया जाए तो राज्य की विकास दर और रोजगार में भी बढ़ोत्तरी होगी। एस्ट्रो टूरिज्म के क्षेत्र में राज्य में उपलब्ध संभावनाओं पर चर्चा की गई। स्टारस्केप के फाउंडर रामाशीष रे ने बताया कि कौसानी में एस्ट्रो टूरिज्म चल रहा है। पूरे भारत में उनकी 64 ऑब्जरवेटरी इस क्षेत्र में कार्य कर रही है।

राजस एयरोस्पोर्ट्स एंड एडवेंचर लिमिटेड प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ मनीष सैनी ने बताया कि उत्तराखंड शासन और प्रशासन के सहयोग से ऋषिकेश में 2013-14 में एयरसाफरी शुरू की थी। यह इंडिया की पहली एयरसफारी थी जिसमें ऋषिकेश से उत्तराखंड की छिपी हुई सुंदरता को पर्यटकों को दिखाने का कार्य शुरू हुआ था। उन्होंने बताया की इसी माह के अगले सप्ताह में राज्य में जायरो कॉप्टर सेवा की शुरुआत भी की जा रही है, जो की भारत और दक्षिण एशिया की पहला जेयरोकॉप्टर सफारी होगी। सत्र में  इंडियन होटल कंपनी लिमिटेड की एरिया डायरेक्टर कनिका हसरत, लॉकहीड मार्टिन से पार्थ पी राय, टीडब्ल्यूआई ग्रुप ऑफ कंपनीज से डॉ उत्तम सिंघल, अपर सचिव पर्यटन पूजा गर्ब्याल, बृजेंद्र पांडे, सीमा नौटियाल मौजूद रहे।

कौशल विकास क्षेत्र में करेंगे काम

उत्तराखंड में स्टार्ट-अप की ग्रोथ के अवसर पर चौथा सत्र आयोजित हुआ। कौशल विकास और सेवायोजन मंत्री डॉ सौरभ बहुगुणा ने उपस्थित निवेशकों और स्टार्ट-अप उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज उत्तराखंड डेस्टिनेशन स्टार्ट-अप हब के रूप में विकसित हो रहा है। युवाओं के लिए रोजगार प्रदाता के रूप में उभरने के पर्याप्त अवसर हैं। इसके लिए सरकार ने उद्योग नीति 2023 को निवेशकों और उद्यमियों के अनुरूप बनाया है, जिससे निवेशकों के साथ ही स्टार्ट-अप शुरू करने वाले युवाओं को वित्तीय और मार्गदर्शन मिलता रहे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है की 10 पहाड़ी जिलों में फोकस कर विकास किया जाए। आज उत्तराखंड स्टार्ट-अप के क्षेत्र में देश के पांच शीर्ष राज्यों में शुमार हो गया है। जहां 2016 में राज्य में मात्र 4 स्टार्ट अप थे वहीं आज राज्य ने 950 स्टार्ट-अप की संख्या को पार कर दिया है। इनमें से कई स्टार्ट-अप अपनी बुलंदियों पर पहुंचकर नए स्टार्ट-अप की भी मदद कर रहे हैं। नई स्टार्ट अप पॉलिसी 2023 के तहत नए इनक्यूबेशन सेंटर खोलने पर 1 करोड़ तक का सहयोग किया जाएगा। वहीं अवस्थित इनक्यूबेशन सेंटर के विस्तार हेतु 50 लाख तक का सहयोग भी मिलेगा।

सरकार ने ड्रोन के प्रोमशन और प्रयोग की पॉलिसी 2023, डाटा सेंटर उत्तराखंड सर्विस सेक्टर पॉलिसी 2023, आई टी/ आईटीईइस उत्तराखंड सर्विस सेक्टर पॉलिसी 2023 को हाल ही में बनाया है। हमें विश्वास है कि समस्त निवेशकों और उद्यमियों को राज्य में सिंगल विंडो क्लीयरेंस से आसानी होगी। उन्होंने निवेशकों को किसी भी प्रकार की समस्या आने पर शासन-प्रशासन द्वारा हर संभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया। उत्तराखंड किस तरह हब के रूप में विकसित हो रहा है, इस पर पैनलिस्ट ने विस्तार से चर्चा की। कहा कि उत्तराखंड में अच्छा व्यवसाय माहौल, सरकार का सहयोग और ईको सिस्टम है। सरकार वित्तीय सहयोग के साथ ही अपना मार्गदर्शन भी देती है, जो कि कुशल व्यवसाय के लिए जरूरी है। विशेषकर उन स्टार्ट-अप को सहयोग दिया जा रहा है, जो किसी कारणवश चल नहीं पाए। उन्होंने नए स्टार्ट-अप कर्ताओं से अपने प्रोजेक्ट में किसी भी प्रकार का शॉर्ट कट न अपनाने, प्रोजेक्ट की वित्तीय वायाबिलिटी को समझने के गुर दिए। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि जल्द ही देश की इकोनॉमी 4 ट्रिलियन से बढ़कर 10 ट्रिलियन होगी। सत्र में प्राइस वाटर हाउस कूपर्स प्राइवेट लिमिटेड के एसोसिएट प्रोफेसर उदित शर्मा, ग्लोबल एसवीपी से डॉ सुबी चतुर्वेदी, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से डॉ अमन मित्तल, लॉग 9 से अक्षय सिंघल, कमर्शियल काउंसलर अजय सिंह मौजूद रहे।

उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में समृद्ध जैव विविधता से परिपूर्ण और विपुल वन संपदा वाले उत्तराखंड राज्य में इकोनॉमी और इकोलॉजी का बेहतर समन्वय व संतुलन कायम रखते हुए वन एवं इससे जुड़े सेक्टर्स में निवेश को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया। समिट के दौरान इस सिलसिले में आयोजित विशेष सत्र में कहा गया कि वन एवं इससे जुड़े सेक्टर्स राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास का प्रमुख जरिया बनने की पूरी सामर्थ्य रखते हैं। जलवायु परिवर्तन व कार्बन उत्सर्जन की वैश्विक चुनौतियों को नियंत्रित करने में भी यह सेक्टर महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। लिहाजा राज्य में वन सेक्टर में होने वाला पूंजी निवेश देश और दुनिया के लिए भी उपयोगी साबित होगा।

वन क्षेत्र में संभावनाएं

उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के वन एवं इससे जुड़े सेक्टर्स पर निवेश की संभावनाओं पर परिचर्चा के लिए आयोजित सत्र की अध्यक्षता करते हुए राज्य के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड का 71 प्रतिशत भूभाग वनों से आच्छादित है। यहां पर 11230 वन पंचायतें हैं जिनसे 20 लाख लोग जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि वनों के संरक्षण व संवर्द्धन तथा इससे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों में स्थानीय जन-समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित कर वनों से स्थानीय लोगों के परंपरागत लगाव व जुड़ाव को कायम रखने पर सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। वन सेक्टर्स से संबंधित निवेश में भी पारिस्थितिक संतुलन और स्थानीय लोगों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इन्डस्ट्रियल फ्रेंडली वातावरण के साथ ही इकोनॉमी और इकोलॉजी में समन्वय बनाते हुए कार्बन उत्सर्जन को कम करने पर सरकार का विशेष ध्यान है।

वन मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में ईको-टूरिज्म, जड़ी-बूटियों तथा संगंध पौधों के उत्पादन व संग्रहण के साथ ही प्रसंस्करण जैसे वनाधारित परियोजनाओं की व्यापक संभावनाएं हैं। जिसके लिए कई निवेशक आगे आए हैं। योग, वेलनेस टूरिज्म, आयुर्वेद जैसे क्षेत्रों में भी निवेशकों ने काफी रूचि दिखाई है। राज्य में तीन लाख करोड़ से अधिक के पूंजी निवेश के प्रस्ताव मिले हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में किया जाने वाला निवेश पूरी तरह सुरक्षित और बेहतर रिटर्न देने वाला साबित होगा। सरकार निवेशकों को हरसंभव सहयोग देगी। श्री उनियाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उत्तराखंड को वेडिंग डेस्टिनेशन के तौर पर विकसित किए जाने के आह्वान ने राज्य के आर्थिक विकास की नई संभावनाओं के द्वार दुनिया के सामने खोल कर रख दिए हैं। जिससे जल्द ही सार्थक परिणाम सामने आएंगे और उत्तराखंड दुनिया में डेस्टीनेशन वेडिंग के प्रमुख केन्द्र के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत से अपने सीएसआर फंड का उपयोग वनों के संरक्षण में करने का आह्वान करते हुए कहा कि इसके जरिए मानवता की बड़ी सेवा की जा सकती है।

कार्यक्रम में उत्तराखंड के प्रमुख सचिव वन आर.के. सुधांशु ने वन व इसे जुड़े क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कुदरत ने उत्तराखंड को समुद्र के अलावा अन्य तमाम प्राकृतिक संसाधनों से सजाया-संवारा है। इस प्राकृतिक संपदा का राज्य के विकास और राज्यवासियों के कल्याण के लिए बेहतर इस्तेमाल करने के साथ ही देश व दुनिया के पर्यावरणीय सुरक्षा के हित में सदुपयोग करने के लिए उद्योग जगत व निवेशकों के द्वारा की जाने वाली हर एक सार्थक पहल का राज्य सरकार हर पल स्वागत करने को तत्पर है। उद्योग जगत इस दिशा में एक कदम आगे बढ़ेगा तो सरकार चार कदम आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में रहना व निवेश करना प्राकृतिक व आर्थिक दृष्टिकोण से निश्चित तौर पर सुकून भरा सिद्ध हो।

कार्यक्रम में उत्तराखंड वन विभाग के प्रमुख (हॉफ) अनूप मलिक तथा पीसीसीएफ समीर सिन्हा ने निवेशकों का स्वागत और आभार व्यक्त किया। इस मौके पर उद्योग जगत से श्री श्री तत्व के सीईओ तेज कटपिटिया ने समुदाय के स्वामित्व वाले वनों में औषधीय पादपों के उत्पादन हेतु निवेश के बारे में विचार रखे। पूर्व आईएफएस एवं एफएससी के कंट्री डायरेक्टर सुरेश गैरोला ने फॉरेस्ट सर्टिफिकेशन के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में रिन्यू पावर के सीनियर मैनेजर अनूप जकारिया और टेरी के एसोसिएट फैलो वरूण ग्रोवर ने कार्बन क्रेडिट के क्षेत्र में निवेश के अवसरों पर और सेंचुरी पल्प एंड पेपर्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट डॉ. ए.पी. पाण्डे ने प्रकाष्ठ आधारित उद्योगों में उत्तराखण्ड के ग्लोबल इन्वेस्टमेंट हब के तौर पर स्थिति के बारे में विचार रखे।

Topics: investmentGlobal Investors Summitग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट ‘हैपनिंग हरियाणा’उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिटUttarakhand Global Investors Summitउत्तराखंड में निवेशकInvestors in Uttarakhandउत्तराखंड में निवेश की संभावनाUttarakhand NewsInvestment possibility in Uttarakhandउत्तराखंड समाचारनिवेश
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