‘‘हिंदू इतना समर्थ होगा कि कोई टेढ़ी आंख करके देख नहीं सकेगा’’- मिलिंद परांडे
July 22, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

‘‘हिंदू इतना समर्थ होगा कि कोई टेढ़ी आंख करके देख नहीं सकेगा’’- मिलिंद परांडे

थाईलैंड एक ऐसा देश है, जहां भारत से आने वाले लोगों को वीजा नहीं लेना पड़ता है। यह भारत के साथ थाईलैंड के संबंध को दर्शाता है। थाईलैंड भारतवासियों, हिंदुओं का स्वागत करने वाला देश है। यहां के राजवंश को भी राम जैसा माना जाता है।

Written byहितेश शंकरहितेश शंकर
Dec 4, 2023, 01:24 pm IST
in भारत, विश्व, साक्षात्कार

थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के इम्पैक्ट कन्वेंशन सेंटर में वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस के आयोजन के बीच विश्व हिंदू परिषद के महामंत्री मिलिंद परांडे से पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने आयोजन, उसके पीछे के दार्शनिक विचार और हिंदू दर्शन के निष्पादन मॉडल पर विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसके अंश-

वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस जैसे आयोजन के लिए थाईलैंड के चयन के पीछे क्या कारण है?
वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस का पहला कार्यक्रम डॉ. हेडगेवार जी को ध्यान में रखते हुए 2014 में दिल्ली में हुआ। दूसरा कार्यक्रम 2018 में स्वामी विवेकानंद जी के निमित्त शिकागो में और तीसरा कार्यक्रम 2023 में थाईलैंड में। यह कार्यक्रम 2022 में होना था, परंतु कोरोना के कारण एक वर्ष बाद हो रहा है। इससे दक्षिण-पूर्व एशिया सहित सारे क्षेत्र में नए देशों से संपर्क होगा। यहां 61 देशों के लोग आए हुए हैं।

 थाईलैंड की जड़ें भारत से कैसे जुड़ती हैं?
संपूर्ण दक्षिण एशिया या दक्षिण-पूर्व एशिया हजारों वर्षों से हिंदू संस्कृति से प्रभावित रही है। यहां सैकड़ों वर्षों से रामजी, रामायण, हिंदू संस्कृति, बौद्ध तत्व ज्ञान मौजूद है। इसका महत्व बहुत बड़ा है। थाईलैंड एक ऐसा देश है, जहां भारत से आने वाले लोगों को वीजा नहीं लेना पड़ता है। यह भारत के साथ थाईलैंड के संबंध को दर्शाता है। थाईलैंड भारतवासियों, हिंदुओं का स्वागत करने वाला देश है। यहां के राजवंश को भी राम जैसा माना जाता है।

भारत का आंगन कितना बड़ा है? हिंदुत्व के इस आंगन को आप आप कैसे देखते हैं?
हिंदू संस्कृति का प्रभाव अनंत काल से विश्व के बहुत सारे क्षेत्रों में रहा है। जब हिंदू समाज की संगठित शक्ति कम हुई, तो यह प्रभाव भी कम हुआ। पिछले डेढ़-दो हजार वर्षों के कालखंड में हिंदू समाज पर ढेरों आक्रमण हुए। इस कारण भी यह प्रभाव कम हुआ। आज यहां वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस का आयोजन यह बताता है कि विश्व में हिंदू चिंतन, हिंदू समाज, हिंदू संस्कृति और हिंदू धर्म का उत्थान हो रहा है। हम वसुधैव कुटुंबकम् अर्थात् पूरे विश्व को घर मानने वाले लोग हैं। इसलिए इस शक्ति से किसी को नुकसान नहीं होगा। यह कार्यक्रम इसी का प्राकट्य है।

क्या हम रणनीतिक तौर पर विमर्शों का जबाव देने के लिए अधिक बेहतर तरीके से संगठित हो रहे हैं?
देखिए, हमारा भाव कल्याणकारी है। इसलिए हमारी रणनीति किसी के विरुद्ध नहीं है। मगर हिंदू ने संगठित स्वरूप में एकत्र होना शुरू कर दिया है। स्वयं सिद्धि भी शुरू कर दी है, जो विश्व के कल्याण के लिए है। अब हिंदू इतना समर्थ होगा कि कोई भी टेढ़ी आंख करके देख नहीं सकेगा। यही हमारा भाव है। हम अपने लिए सोच रहे हैं, किसी के विरुद्ध नहीं।

हम किसी के विरुद्ध नहीं सोच रहे हैं, लेकिन कुछ लोग हिंदुओं के विरुद्ध सोच रहे हैं क्या?
सभी समस्याओं का उत्तर शक्ति ही है। हिंदू इतना शक्तिशाली बने कि कोई यह प्रयास ही नहीं कर सके, यही हमारा लक्ष्य है।

क्या आपको लगता है कि मूलभूत विषयों पर भारत का जो विचार था, महिला, पुरुष, परिवार, राजनीति आदि जो विषय थे, उन पर चोट की गई ये रणनीतिक या केवल राजनीतिक हमले थे या उससे भी कुछ अधिक?
देखिए, मेरे पास जो कार्ड है उस पर लिखा है: धर्म, द अबोड आफ विक्टरी। यह वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस का घोष वाक्य है, जो सब कुछ दर्शाता है। हम जय और विजय की भी बात करते हैं। जैसे- पूज्यनीय सरसंघचालक जी ने जय के संदर्भ में उद्घाटन सत्र के उद्बोधन में कहा कि हम धर्म की जय चाह रहे हैं। यानी जय में भी धर्म की स्थापना हो, किसी का नुकसान करने वाला नहीं हो।

धर्म के नाम से लोगों को बहुत घबराहट होती है। यह घबराहट इसलिए तो नहीं कि वे ‘रिलीजन’ के खांचे में ही धर्म को समझते हैं?
नहीं, धर्म बहुत व्यापक शब्द है। हम कैसी उपासना करते हैं, यह उसका एक पक्ष है। सबकी उपासना की पद्धति, भगवान की संकल्पना अलग-अलग हो सकती है। धर्म का दूसरा पक्ष है, वह जीवन मूल्य जिससे समाज की धारणा होती है। यह बहुत ही सकारात्मक है। केवल उपासना से इसका संबंध नहीं है। धर्म सबको जोड़ने वाला, सबका कल्याण करने वाला है। हिंदू समाज जिस जय-विजय के बारे सोच रहा है और उसके लिए एक साथ आना चाह रहा है, उससे किसी का भी अकल्याण नहीं होगा। सबको ध्यान में रखकर और सबको जोड़कर हम कैसा कार्य करेंगे, यही संकल्पना है। हमें नष्ट करने, लूटने के लिए कई आक्रमण हुए। लेकिन आक्रमण सहन करने के बावजूद भी हिंदू के मन में किसी के प्रति द्वेष नहीं है।

वोटबैंक के लिए राजनीति हिंदू धर्म को अपने तरीके परिभाषित करती है। क्या दूसरे मजहब, पंथ और उपासना पद्धति को हिंदुत्व से डरने की आवश्यकता है? इसे कैसे समझाएंगे?
देखिए, हिंदू धर्म आक्रामक नहीं है। इसलिए किसी को इससे डरने की आवश्यकता नहीं है। हिंदू समाज का इतिहास भी यही है। जहां-जहां हिंदू धर्म-संस्कृति का फैलाव हुआ, वहां की संस्कृति, अर्थव्यवस्था का कभी नाश नहीं हुआ। जो कुछ भी अच्छा था, वह पुष्ट होता गया और अच्छी दिशा में ही गया। यही हिंदू का इतिहास है। ऐसा इतिहास किसी का नहीं है। इसलिए सबको यही देखना चाहिए कि यह चिंतन फैलने से किसी का नुकसान नहीं होगा। हिंसा भी नहीं होगी। हिंदू समाज हिंसा से कभी नहीं फैला, यही इसकी विशेषता है। यदि कोई राजनीतिक कारणों से इसे गलत तरीके से पारिभाषित करता है, तो उसे पहचानना होगा और लोगों को समझाना भी पड़ेगा। हमारे ऊपर वैचारिक आक्रमण हो रहे हैं, तो उसका उत्तर भी देना पड़ेगा। वह भी आज की भाषा में, आज के तर्कों के आधार पर। इस कार्यक्रम में इस पर भी चिंतन हो रहा है।

आपने कहा कि हिंदू धर्म से किसी को डरने की जरूरत नहीं है। लेकिन क्या हिंदू कार्यकर्ता, इसके विचारक-प्रसारक यह मानें कि बाकियों का स्वभाव भी हिंसक नहीं होगा? समाज के लिए हिंदू होने का अर्थ क्या है?
यह तो जीवन मूल्य है। हम पूरे विश्व को कुटुंब की दृष्टि से देखते हैं। मानवता की दृष्टि से सभी को एक समझते हैं। यानी भगवान का जो अंश मेरे अंदर है, वही सभी के अंदर है। हम यही सोचते हैं। पर स्त्री हमारे लिए मातृवत् है। अर्थात् स्त्री की ओर देखने का हमारा दृष्टिकोण कैसा है? परधन की ओर देखने का हमारा दृष्टिकोण कैसा है? ये सारे जीवन मूल्य हैं। हमारा संपूर्ण चिंतन पर्यावरण हितैषी है। हिंदू चिंतन, हिंदू संस्कृति लाखों वर्षों से चली आ रही है। हमें ‘सेव अर्थ’ कहने की जरूरत नहीं पड़ी, ‘क्लाइमेट चेंज’ कभी नहीं हुआ, ग्लोबल वार्मिंग नहीं हुआ। ये हमारी चिंतन के पहलू हैं, जो पर्यावरण की रक्षा करते हैं, संघर्ष नहीं करते हैं, समाधान देते हैं, सुख देते हैं, कल्याण कल्याण करते हैं और सबको साथ लेकर भी चलते हैं। हिंदू चिंतन की विशिष्ट पद्धतियां हैं- कृतज्ञता का भाव, समन्वय का भाव एवं कर्तव्य का भाव। हिंदू चिंतन अधिकारों की नहीं, कर्तव्यों की बात करता है।

कर्तव्यों के पालन में ही सबके अधिकारों की रक्षा हो जाती है। यह चिंतन प्रकृति, व्यक्ति, समाज और भगवान, इन चारों में समन्वय बैठाकर चलने वाला है। इसलिए इतना व्यापक अर्थ होने के कारण किसी को डरने की आवश्यकता नहीं है। फिर भी दुनिया में कुछ राक्षसी प्रवृत्तियां हैं, जिसके कारण कुछ आक्रमण भी होते हैं। इसलिए मैंने प्रारंभ में ही शक्ति की बात की है। बिना शक्ति के न तो कोई विचार टिक सकता है और न ही स्थापित हो सकता है।

सभ्यताओं के बीच टकराव को आप कैसे देखते हैं? हिंदुत्व की धारा के साथ हम आगे कैसे जाएंगे?
व्यक्ति को टकराव ढूंढने के लिए नहीं जाना चाहिए। जीवन में पर्याप्त समस्याएं हैं। हिंदू समाज इतना सामर्थ्यशाली बने कि यदि कोई उस पर आक्रमण करता है, तो उसका उत्तर देने के लिए पर्याप्त ताकत होनी चाहिए। हिंदू में ताकत और युद्ध में विजयी होने का भाव, दोनों का निर्माण करना हिंदू उत्थान का एक हिस्सा है। यह शक्ति अन्यायकारी नहीं होगी। लेकिन यह शक्ति अन्याय भी सहन नहीं करेगी। इतनी ताकत खड़ी करना इसका लक्ष्य है। स्वयं को सुरक्षित रखने के साथ-साथ विश्व में कोई कमजोर है, तो उसकी रक्षा का दायित्व भी इस शक्ति के पास है। इतनी व्यापक सोच है।

वर्तमान समाज में हिंदू भाव ज्यादा बढ़ता दिखता है या चुनौतियां?
मुझे लगता है कि हिंदुत्व के लिए चुनौतियां और जो विचारधाराएं थीं, जिसमें भोगवाद, पश्चिमी चिंतन, साम्यवाद और कन्वर्जन का षड्यंत्र करने वाली शक्तियां (ईसाई मिशनरियां) होंगी या हिंसक वृत्ति वाले मुसलमानों का वर्ग जो लव जिहाद, पूर्ण विश्वास से हिंसा करता है, ऐसी शक्तियों से अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए हिंदू समाज को सोचना ही पड़ेगा। ये शक्तियां दीर्घ काल से काम कर रही हैं। जागरूक रहकर इनके इको सिस्टम से मुकाबला करना होगा और इन पर विजय पानी होगी। यह पक्ष तो निरंतर रहने ही वाला है। जब तक इन विपरीत शक्तियों को निष्प्रभावी नहीं करते, इनके भाव को ठीक नहीं करते, तब तक ये चुनौतियां रहेंगी। ये तो बाह्य चुनौतियां हैं, हिंदू समाज के अंदर भी विषमताएं, व्यावहारिक दोष और अनेक तरह की सामाजिक कुरीतियां आ गई हैं। इससे भी हिंदू समाज को मुक्त करना है। हिंदू समाज अंदर से निर्दोष बने, विषमता से मुक्त बने, समतायुक्त व्यवहार करे और इतना ताकतवर बने कि कोई भी हमारे मंदिर नहीं तोड़ सके, हमारी बहू-बेटियों पर आक्रमण नहीं कर सके। तब यह देश कभी परतंत्र नहीं होगा। यह देश विश्व में श्रेष्ठ था, इसलिए केवल तत्वज्ञान, समर्पण, त्याग ही आवश्यक नहीं है, हिंदू चिंतन के साथ सामर्थ्य, यश, ऐश्वर्य और वैभव भी खड़ा करना पड़ेगा।

महामंत्री मिलिंद परांडे

पंजाब, जो गुरुओं की भूमि है, जिन्होंने सनातन धर्म को बचाने के लिए प्राणोत्सर्ग किए। गुरुओं की उसी जमीन पर कन्वर्जन की लहलहाती फसल को आप कैसे देखते हैं? गुरुओं की परंपरा में पाकिस्तान पोषित कट्टरवाद भी जड़ें जमा रहा है। इन दोनों विषयों पर आप क्या कहना चाहेंगे?
पंजाब की भूमि में अभी जो थोड़ी बहुत अशांति दिख रही है, वह एक बहुत छोटे वर्ग के कारण है, जो विपरीत दिशा में जाने की सोच रहा है। इसको सामान्य बात नहीं समझना चाहिए, क्योंकि गुरुग्रंथ साहिब का तत्वज्ञान और सिखों की सीख सबको साथ लेकर चलने की है, जिसे मानने वाला पूरा समाज है। इसलिए मुझे यह बहुत अधिक चिंताजनक नहीं लगता है। भले ही उग्र स्वभाव वाले कुछ तत्व आज हावी होते दिख रहे होंगे, लेकिन संपूर्ण समाज की सोच ऐसी नहीं है। यह समाज राष्ट्रभक्त है, यह हम मानते हैं और यह सच भी है। मुट्ठी भर इन उग्रवादी तत्वों का उन्मूलन करना पड़ेगा। शेष समाज उनके प्रभाव में न आए, उसके लिए सिख समाज भी प्रयास कर रहा है।

दूसरी बात, समाज का जो कमजोर वर्ग है और जिस तरह से आज समाज में वैचारिक द्वंद्व चल रहा है, इससे भी समाज कभी-कभी संभ्रमित होता है। जब हमारे समाज के किसी वर्ग के संस्कार कमजोर हो जाते हैं या आपस का संपर्क या संस्कार कमजोर हो जाते हैं, तब कन्वर्जन जैसे विषय प्रभावी होने लगते हैं। हमारा आपस का संपर्क कितना प्रबल है, जीवंत है, संस्कार देने की व्यवस्थाएं कितनी प्रबल हैं, इन बातों में जब कमजोरी आती है, तब गरीबी जैसे अन्य कारण महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इसलिए जब हम इन पक्षों की ओर ध्यान देंगे, तो पंजाब में ईसाई मिशनरियों के व्यापक षड्यंत्र और हिंसा फैलाने वाली शक्तियां, जो बढ़ने का प्रयास कर रही हैं, उनको हम रोक सकेंगे। इस पर अनेक लोग और सिख समाज का बड़ा वर्ग भी काम कर रहा है। इसलिए बहुत जल्द ही इन विषयों पर हम विजय पाएंगे।

जब मंदिरों की बात होती है, तो एक सामाजिक बहस जोर पकड़ने लगती है कि हिंदू समाज के मंदिर आखिर किसके हैं और सरकारी दखल कितनी चलेगी? मंदिरों के बारे में आप क्या सोचते हैं?
विश्व हिंदू परिषद का मानना है कि सरकार या न्यायालय को मंदिरों का संचालन नहीं करना चाहिए। कई मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने भी यही मत रखा है। इसके बावजूद प्रत्यक्ष व्यवहार में दिखाई देता है कि हजारों मंदिर, मुख्य रूप से दक्षिण के पांचों राज्यों में हजारों मंदिर सरकारी नियंत्रण में आ गए। दुर्भाग्य से धार्मिक स्थलों का यह कानून ब्रिटिशों के समय ही बन गया था, जो स्वतंत्रता के बाद भी जारी रहा। पक्षपातपूर्ण तरीके से केवल हिंदुओं के मंदिरों पर ही ये कानून लागू हैं, ईसाइयों या मुसलमानों के किसी भी प्रार्थना स्थल पर सरकारी नियंत्रण नहीं है। जब सरकार को पंथनिरपेक्ष कहा जाता है, तो उसका व्यवहार ऐसा नहीं होना चाहिए। दूसरे, मंदिरों की संपत्तियों के दुरुपयोग और अपव्यय की भी बातें हो रही है।

मंदिर हमारे धर्म और समाज के केंद्र हैं। ये शक्ति के बड़े केंद्र हैं। अपने धर्म में विग्रहों की पूजा करने वाले पंथ-संप्रदायों के लिए मंदिर बहुत बड़ा स्थान होता है। जैसे-जैसे मंदिर समाभिमुख बनेंगे, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार के क्षेत्र में और धर्म के प्रचार में इनकी बहुत बड़ी भूमिका होगी। तब सही अर्थों में जिस प्रकार पूर्व में ये शक्ति के केंद्र थे (बीच के कालखंड को छोड़कर), आज भी बनेंगे। इसलिए मंदिरों की बहुत आवश्यकता है।

दानदाता या भक्त ने जिस काम के लिए दान दिया, उसका उपयोग उस काम के लिए न होकर वैसे लोगों के लिए हो रहा है, जिनकी उस देवता या धर्म में श्रद्धा ही नहीं है। इसलिए यह बहुत बड़ा संकट है। तीसरी बात यह है कि मंदिरों को इससे कैसे मुक्त किया जाए? कुछ संत, विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता, सर्वोच्च न्यायालय के अनेक वकील, उच्च न्यायालयों के सेवानिवृत्त न्यायाधीश आदि मिलकर इस पर चिंतन कर रहे हैं। इस चिंतन से व्यवस्था बन रही है कि यदि सरकार हिंदू समाज को मंदिर लौटाती है, तो उसे कैसे लेना है, उसे कौन लेगा? इसमें दो-तीन बाते हैं। यदि कोई विवाद होता है, तो उसे सुलझाने की पद्धति क्या रहेगी?

ऐसा नहीं होने पर फिर से सरकार के पास या न्यायालय में जाना पड़ेगा। ऐसे हिंदुओं के बीच अलग-अलग विवाद हैं। मतलब मंदिर के न्यासी होंगे, पुजारी होंगे, वेतनभोगी होंगे, संपत्ति के विषय होंगे। पूजा पाठ या संप्रदाय से जुड़ा विषय भी हो सकता है। इसलिए ऐसे सारे विवादों का हल निकालने वाली एक व्यवस्था देनी पड़ेगी। विश्व हिंदू परिषद यह मानती है कि मंदिरों के संचालन में संपूर्ण समाज की सहभागिता होनी चाहिए, जो आज कई जगह पर दिखाई नहीं देती है। इसकी भी एक व्यवस्था बनानी होगी। यह कैसी होगी? क्या होगी? यह दूसरी चुनौती है।

महामंत्री मिलिंद परांडे

जब किसी मंदिर के निर्माण की बात होती है, तो एक बात उठती है कि इतने मंदिर तो हैं, एक और मंदिर क्यों चाहिए? समाज को मंदिर क्यों चाहिए?
मंदिर हमारे धर्म और समाज के केंद्र हैं। ये शक्ति के बड़े केंद्र हैं। अपने धर्म में विग्रहों की पूजा करने वाले पंथ-संप्रदायों के लिए मंदिर बहुत बड़ा स्थान होता है। जैसे-जैसे मंदिर समाभिमुख बनेंगे, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार के क्षेत्र में और धर्म के प्रचार में इनकी बहुत बड़ी भूमिका होगी। तब सही अर्थों में जिस प्रकार पूर्व में ये शक्ति के केंद्र थे (बीच के कालखंड को छोड़कर), आज भी बनेंगे। इसलिए मंदिरों की बहुत आवश्यकता है।

सैकड़ों वर्ष बाद हिंदू समाज को जनवरी 2024 में श्रीरामजन्मभूमि मंदिर वापस मिलेगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री भी रहेंगे, लेकिन उससे पहले वह मथुरा चले गए। इसे आप कैसे देखते हैं?
वह तो आपको उनसे ही पूछना पड़ेगा। पर मैं मानता हूं कि हिंदू समाज का यह संकल्प है कि अयोध्या राम मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर हिंदू समाज को प्राप्त होकर रहेगा। यह हिंदू समाज का संकल्प है और यह सच होकर रहेगा।

Topics: हिंदू कांग्रेसHindu will be so powerful that no one will be able to see with squinted eyes.क्लाइमेट चेंज’पंथहिंदू समाज की संगठित शक्तिमजहबहिंदू धर्म
हितेश शंकर
हितेश शंकर
हितेश शंकर पत्रकारिता का जाना-पहचाना नाम, वर्तमान में पाञ्चजन्य के सम्पादक [Read more]
Share7TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

हिंदू धर्म आधारित संस्कारों की शिक्षा पर न्यायिक मुहर, नजीर बना छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का निर्णय

किन्हें और क्यों अखरता है हिंदुत्व

‘मुसलमानों में राष्ट्रवादी नेतृत्व का अभाव’

1.जापान में सरस्वती को स्वर्ण रथ में सवार राक्षस का वध करने वाली भी कहा जाता है, 2. टोक्यो के ललित कला विश्वविद्यालय में 1212 ई.की आठ भुजाओं वाली सरस्वती की एक पेंटिंग रखी हुई है 3. जापान के सात शुभ देवता, एबिसु, दाइकोकु (शिव, महाकाल), बेंज़ाइटन (सरस्वती), बिशामोंटेन (वैश्रवण या कुबेर), फुकुरोक्यू, होटेल जुरोजिन हैं।

सीमाओं से परे सरस्वती

narasimha jayanti-2026 prahlad story ahobilam miracle

नरसिंह जयंती 2026 : प्रह्लाद की भक्ति और हिरण्यकशिपु के अंत के बाद जानिए अहोबिलम के चमत्कार की अद्भुत कथा

Madras High court RTE

‘नो कास्ट, नो रिलीजन’ सर्टिफिकेट के लिए पहले हिंदू धर्म का त्याग करना होगा : मद्रास हाईकोर्ट

Load More

ताज़ा समाचार

Jantar Mantar Journalists Attack Ravish Kumar Godi Media Debate Chitra Tripathi Panchjanya

जंतर मंतर की भीड़ को पत्रकारों के खिलाफ लिंचिंग के लिए क्या भड़का रहे हैं गोदी मीडिया के जनक

CM Yogi Adityanath Inspection Gorakhpur Goddhoiya Nala Project Jail Bypass Panchjanya

“सपा शासन में भूमाफियाओं ने ठगा, हमने दिया मुआवजा”: गोरखपुर में 495 करोड़ की परियोजना के निरीक्षण पर बोले CM योगी!

सांकेतिक फोटो

दिल्ली जंतर-मंतर प्रदर्शन: CJP के समर्थक क्या इस ऐप से करते हैं एक-दूसरे को मैसेज, बिना इंटरनेट कैसे करता है काम?

Punjab Barnala Sanitation Workers Police Lathicharge Protest AAP Government Panchjanya

पंजाब में SC सफाई कर्मचारियों पर जमकर लाठीचार्ज, AAP सरकार के खिलाफ सड़कों पर आक्रोश

Gorakhnath Mandir Shri Ram Katha 2026 Gorakhpur CM Yogi Adityanath Acharya Shantanu Ji Maharaj Panchjanya

श्री गोरखनाथ मंदिर में कल से गूंजेगी श्रीरामकथा: CM योगी होंगे शामिल, 151 वेदपाठी बटुकों की शोभायात्रा से होगा शुभारंभ!

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास की बैठक सम्पन्न: जानिए दर्शन, पूजा, चढ़ावा और CEO चयन पर बड़ा अपडेट

जंतर-मंतर से ग्राउंड रिपोर्ट

“छात्र आंदोलन की आड़ में अराजकता बर्दाश्त नहीं”: जंतर-मंतर हिंसा पर भड़की ABVP, केंद्र सरकार से की बड़ी मांग!

Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami Releases Seva Vidhi Book RC Lohani Dehradun Panchjanya

“नियम बाधा नहीं, जनकल्याण का मार्ग हैं”: CM धामी ने किया ‘सेवा विधि’ पुस्तक का विमोचन

Yugpravartak Dr Hedgewar Play Review Bhopal Nadbrahma Nagpur Dr Keshavrao Baliram Hedgewar Panchjanya

यह नाटक नहीं, एक युग का अवतरण है”: ‘युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार’ महानाट्य की समीक्षा

जम्मू-कश्मीर: चौथे दिन भी शुरू नहीं हो सकी अमरनाथ-वैष्णोदेवी यात्रा, पहलगाम में 2800 व जम्मू में 6000 से अधिक लोग फंसे

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies