कांग्रेस को 'राम' शब्द से आपत्ति है या 'मंदिर' से : सुधांशु त्रिवेदी
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कांग्रेस को ‘राम’ शब्द से आपत्ति है या ‘मंदिर’ से : सुधांशु त्रिवेदी

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने मीरा बाई को ऐसे प्रिय लोगों को भी छोड़ देने का परामर्श दिया था, जो राम और वैदेही यानी माता सीता से प्रेम नहीं करते। इसीलिए देश की जनता भी राम विरोध के चलते कांग्रेस से दूर होती जा रही है

Written byPanchjanyaPanchjanya
Oct 29, 2023, 07:26 pm IST
in मध्य प्रदेश

भोपाल। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस का एक पुराना रोग, जो अक्सर टीस मारता रहता है, वह फिर इन दिनों फिर उभर आया है। कांग्रेस राम मंदिर के विषय को लेकर चुनाव आयोग चली गई है। मैं कांग्रेस के लोगों से यह पूछना चाहता हूं कि उन्हें ’राम’ शब्द से आपत्ति है या ’मंदिर’ से।

त्रिवेदी रविवार को भोपाल में भाजपा मीडिया सेंटर में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राममंदिर का निर्माण कभी नहीं चाहती थी। 22-23 दिसंबर 1949 की रात जब अयोध्या में श्री रामलला का प्राकट्य हुआ, तो उत्तरप्रदेश के तत्कालीन कांग्रेसी मुख्यमंत्री इस मामले को रफादफा करने के लिए फैजाबाद गए, लेकिन जिला मजिस्ट्रेट ने उन्हें रोक दिया। बाद में जब यह विवाद कोर्ट पहुंचा तो 1961 तक मुस्लिम वर्ग इसमें पक्षकार ही नहीं बना। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अगर राम नाम शब्द से आपत्ति है, तो यह शब्द महात्मा गांधी की समाधि पर लिखा है। रघुपति राघव राजाराम उनका प्रिय भजन था और रामराज्य उनका आदर्श था। क्या यह सब सांप्रदायिक है? अगर मंदिर शब्द से आपत्ति है, तो चुनाव के मौसम में कांग्रेस के नेता ही सबसे ज्यादा मंदिर जा रहे हैं, फोटो खिंचवा रहे हैं। अगर कांग्रेस को राम और मंदिर शब्दों पर आपत्ति नहीं है, तो राममंदिर शब्द पर आपत्ति क्यों है? वास्तव में राममंदिर का निर्माण पूरा होते देख कांग्रेस के सीने की आग भड़क उठी है, क्योंकि वह कभी नहीं चाहती थी कि राममंदिर का निर्माण हो।

राजनीतिक फायदे के लिए संविधान का भी किया अपमान

त्रिवेदी ने कहा कि 21वीं सदी में रडार मैपिंग की टेक्नोलॉजी आ गई। कोर्ट ने खुदाई के लिए मना किया था, रडार मैपिंग जैसी तकनीक के प्रयोग पर रोक नहीं थी। इसलिए जब स्व. अटलजी की सरकार ने रडार मैपिंग कराकर उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत की, तो कोर्ट ने खुदाई की परमिशन दे दी। जब सबकुछ निकल आया तो कांग्रेस के ही नेता वकील का चोला ओढ़कर तथाकथित बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी की ओर से कोर्ट में खड़े होते थे। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने 7 दिसंबर, 1992 को कहा था कि हम बाबरी मस्जिद दोबारा तामीर करेंगे। उत्तरप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने विधानसभा में यही बात कही थी। यह लोग सिर्फ जन भावना का ही अपमान नहीं कर रहे थे, सांप्रदायिक वातावरण बिगाड़ रहे थे।

कांग्रेस बताए क्या वह कारसेवकों के हत्यारों के साथ है?

भाजपा प्रवक्ता त्रिवेदी ने कहा कि वर्ष 1990 में जब मध्यप्रदेश में पटवा सरकार थी और यहां से कारसेवक अयोध्या जा रहे थे, तब कांग्रेस के सहयोग से चल रही उत्तरप्रदेश की मुलायमसिंह सरकार ने झांसी से पहले अस्थाई दीवार बनवा दी थी, ताकि कारसेवक वहां से आगे न बढ़ पाएं। पार्टी के नेता ने एक बार कहा था कि हम बाबरी मस्जिद के लिए इससे ज्यादा और क्या कर सकते थे कि हमने 16 हिंदू मरवा दिए थे।

मंदिर निर्माण के साथ ही विश्वगुरु बनने के रास्ते पर बढ़ा भारत

त्रिवेदी ने कहा कि अमेरिका को पीछे छोड़कर इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने वाला पहला देश बन गया है। अनुसूचित जनजाति की द्रौपदी मुर्मू भारत की राष्ट्रपति बन गई है। साढ़े चार करोड़ गरीब लोगों को प्रधानमंत्री आवास मिल चुका है, 11 करोड़ लोगों को शौचालय मिल चुके हैं। सारे गांवों में बिजली और सड़क पहुंच गई है और नलों से पानी पहुंच रहा है। राम मंदिर का निर्माण तब पूरा हो रहा है, जब भारत जी-20 देशों में 7.8 परसेंट की वृद्धि दर के साथ फास्टेस्ट ग्रोइंग इकोनामी बन गया है।

राम के विरोध में कहां से कहां पहुंच गई कांग्रेस

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने मीरा बाई को ऐसे प्रिय लोगों को भी छोड़ देने का परामर्श दिया था, जो राम और वैदेही यानी माता सीता से प्रेम नहीं करते। इसीलिए देश की जनता भी राम विरोध के चलते कांग्रेस से दूर होती जा रही है। सभी ने देखा है कि चार सौ सीटों वाली कांग्रेस पार्टी किस तरह दो बार 50 का आंकड़ा पाने को भी तरस गई।

(सौजन्य सिंडिकेट फीड)

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