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होम भारत

विदेशों में किससे मिलते हैं राहुल!

पिछले कुछ अरसे से राहुल गांधी ने अमेरिका और यूरोप के शहर दर शहर जिन लोगों और संस्थाओं के साथ कार्यक्रम किये, उनमें से ज्यादातर पाकिस्तान के अमेरिकी और यूरोपीय मुखौटे हैं। आईएसआई, जमात-ए-इस्लामी, जॉर्ज सॉरोस, गुलाम नबी फई, किसी से राहुल ने कोई परहेज नहीं रखा

Written byप्रशांत बाजपेईप्रशांत बाजपेई
Sep 29, 2023, 11:40 am IST
inभारत
ब्रुसेल्स में कांग्रेस नेता राहुल गांधी भारत विरोधी फाउंडेशन दि लंदन स्टोरी के मेहमान बने

ब्रुसेल्स में कांग्रेस नेता राहुल गांधी भारत विरोधी फाउंडेशन दि लंदन स्टोरी के मेहमान बने

पिछले दिनों अमेरिका और यूरोप के शहर दर शहर राहुल ने जिन लोगों और संस्थाओं के साथ कार्यक्रम किये, उनमें से ज्यादातर पाकिस्तान के अमेरिकी और यूरोपीय मुखौटे हैं, जो वर्षों से भारत को नुकसान पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं।

राहुल गांधी विदेश जाकर क्या करते हैं? सच यह हैं कि वह आईएसआई, पाकिस्तान और जमात-ए-इस्लामी, पाकिस्तान की गोद में बैठकर भारत के लोकतंत्र और यहां के समाज को कोसते आ रहे हैं। पिछले दिनों अमेरिका और यूरोप के शहर दर शहर राहुल ने जिन लोगों और संस्थाओं के साथ कार्यक्रम किये, उनमें से ज्यादातर पाकिस्तान के अमेरिकी और यूरोपीय मुखौटे हैं, जो वर्षों से भारत को नुकसान पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं।

औचित्य और अस्तित्व की तलाश

विदेश जाकर भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करना, भारत के हिंदू समाज पर लाल स्याही से छापे गये बदनामी के पर्चे चिपकाना कॉमरेडों का पुराना शगल रहा है। कांग्रेस और कम्युनिस्टों के अलिखित करार के चलते कांग्रेस नेतृत्व ने कॉमरेडों के इस व्यावसायिक शौक पर कभी कोई आपत्ति नहीं की, बल्कि समय-समय पर छद्मयुद्ध के हथियार के रूप में इसका उपयोग किया है।

यह शौक मणिशंकर अय्यर ने भी पाल रखा है, जो राहुल गांधी के वैचारिक उस्ताद कहे जाते हैं। कर्मचारियों और दरबारियों को किनारे कर राहुल ने अब स्वयं मोर्चा संभाल लिया है। पिछले दो दशक से अपने औचित्य और अस्तित्व के संघर्ष में लगे राहुल काफी समय से विदेशी धरती से लगातार देश पर कीचड़ उछालते आ रहे हैं। उन्होंने इसकी शुरुआत की विदेशियों के कानों में ‘हिंदू आतंकवाद’ और ‘हिंदू फासिज्म’ जैसे कांग्रेस-कम्युनिस्ट ब्रांड वाले जुमले फुसफुसाकर की थी। यह राहुल-सोनिया गांधी के मालिकाना हक वाली मनमोहन सरकार का दौर था। सत्ता हाथ से जाने के बाद सारे लिहाज और वर्जनाएं टूट गयीं। और, जब दुष्प्रचार, वोटों के रूप में खाते में जमा नहीं हुआ तो उसे विदेशी धरती से ब्रॉडकास्ट करने का फैसला लिया गया। पिछले कुछ समय से यह सिलसिला जारी है। यूरोप और अमेरिका में राहुल के कार्यक्रम प्रायोजित हो रहे हैं। वे खूब उल्टा-सीधा बोल रहे हैं। राहुल गांधी देश के हितों को ताक पर रखकर मिथ्या बयान दे रहे हैं। विदेश जाकर वे योजनाबद्ध तरीके से भारत के बारे में घोर नकारात्मक वक्तव्य देते हैं।

राहुल गांधी बेशर्मी के साथ देश के हितों को ताक पर रखकर मिथ्या बयान दे रहे हैं। मौका ताककर, अर्थात जब प्रधानमंत्री किसी विदेशी दौरे पर जाने वाले हों, या भारत में जी-20 जैसा कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन हो रहा हो, तब उन्हें विदेश भेजा जाता है। विदेश जाकर वे योजनाबद्ध तरीके से भारत के बारे में घोर नकारात्मक वक्तव्य देते हैं। उनके बयानों में पाकिस्तान निर्मित पटकथा का केन्द्रीय स्वर प्रतिध्वनित होता रहता है, और अब पाकिस्तान के लिए तथा भारत के खिलाफ लॉबिंग कर रहे लोगों, संस्थाओं के साथ राहुल का गठजोड़ कई सवाल पूछ रहा है। ‘गोदी मीडिया’ का शोर मचाने वाले लोग किसकी गोद में बैठे हैं? 

उनकी बातों का सार कुल मिलाकर इतना होता है कि ‘भारत में लोकतंत्र खत्म हो गया है’, क्योंकि पिछले दो चुनावों से भारत की जनता ने कांग्रेस पार्टी को सत्ता से बाहर बिठा रखा है, आगे भी उम्मीद नहीं दिख रही है। दूसरा, भारत में तथाकथित ‘अल्पसंख्यकों पर अत्याचार’ हो रहे हैं, क्योंकि झूठ को सौ बार दोहराने से वह सच हो जाता है। तीसरा, ‘मीडिया की आजादी खतरे में है’, क्योंकि मीडिया का एक हिस्सा विभाजन से लेकर आपातकाल तक, कश्मीर से लेकर कैराना तक, सोमनाथ से लेकर अयोध्या-मथुरा-काशी तक और नेताजी सुभाष व सरदार पटेल से लेकर लाल बहादुर शास्त्री तक, रिपोर्ट और सवाल करने लगा है। बकौल राहुल, ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’, जिसके नाम में ‘राष्ट्र’ है, वह सांप्रदायिक है, लेकिन मुस्लिम नाम से बनी ‘मुस्लिम लीग’ जिसने देश का विभाजन कर पाकिस्तान बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी, वह सेकुलर है।

भारत के दुश्मनों से सीधी सांठगांठ

अमेरिका में राहुल गांधी ने ‘इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल’ और ‘इस्लामिक सर्किल आफ नॉर्थ अमेरिका’ के मंचों का उपयोग किया था

राहुल ने इस सारी बयानबाजी के लिए जिन संस्थाओं के मंचों को चुना है, वह सब कुछ बयान कर देता है। अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान राहुल ने ‘इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल’ (आईएएमसी- संस्थापक शेख उबैद, साल 2002) और ‘इस्लामिक सर्किल आफ नॉर्थ अमेरिका’ (आईसीएनए) के मंचों का उपयोग किया। इसी तरह, सितंबर में ब्रुसेल्स में राहुल ‘फाउंडेशन दि लंदन स्टोरी’ के मेहमान थे।

उपरोक्त दोनों अमेरिकी मुस्लिम संगठन पाकिस्तान के लिए काम करते हैं, इसे दिल्ली से लेकर वाशिंगटन डीसी तक सब जानते हैं। जाहिर है, राहुल और कांग्रेस पार्टी भी जानते हैं। आईएएमसी के कलीम ख्वाजा जैसे कई सदस्य शुरू से तालिबान का खुला समर्थन करते रहे हैं। इन दोनों संगठनों का उपयोग अमेरिका और पश्चिमी जगत में भारत विरोधी दुष्प्रचार के लिए किया जाता है। इन संगठनों के तार जमात-ए-इस्लामी से भी जुड़ते हैं। 2016 में आईसीएनए ने बांग्लादेश में हजारों हिंदुओं के नरसंहार के दोषी मोती उर रहमान निजामी को पुरस्कार दिया। यह संगठन भारत को अमेरिकी संस्था यूनाइटेड स्टेट्स आन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम में ‘अल्पसंख्यकों पर अत्याचार’ करने वाले देश के रूप में नामित करवाने के लिए लंबे समय से अभियान चला रहा है। उसके ये प्रयास मनमोहन सरकार के समय भी जारी थे। आईएएमसी भारत में तथाकथित ‘अल्पसंख्यक उत्पीड़न’, सीएए- एनआरसी और मणिपुर- त्रिपुरा की घटनाओं को लेकर फेक न्यूज भी तैयार करता, फैलाता रहा है। इसके लिए उसने बाकायदा डोटो नामक डेटाबेस तैयार किया है।

बर्मा टास्क फोर्स रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाला संगठन है। 2017 तक इसका नाम ‘बर्मा मुस्लिम्स’ हुआ करता था। बर्मा टास्क फोर्स का संस्थापक है शेख उबैद, जो व्यक्तिगत रूप से भारत, भारत के कुछ पत्रकारों, प्रधानमंत्री मोदी, हिंदू संगठनों और भारत के सुरक्षा बलों के खिलाफ दुष्प्रचार करता रहता है। उबैद का ट्विटर हैंडल (अब एक्स) उसके इरादों और गठजोड़ों की गवाही देता है। इसी शेख उबैद ने फिदेलिस गवर्नमेंट रिलेशन्स को 2018-20 के बीच अमेरिकी कांग्रेस के कुछ सदस्यों को साथ लेकर अमेरिका में भारत विरोधी अभियान चलाने के लिए 2,67,000 डॉलर दिये थे। इन सारी सूचनाओं को जोड़ने से पता चलता है कि बीटीएफ वास्तव में आईसीएनए का ही एक मोर्चा है।

राहुल ‘अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल’ और ‘इस्लामिक सर्किल आफ नॉर्थ अमेरिका’ के सदस्यों से खूब घुले-मिले। इन संगठनों को पाकिस्तान की सेना और आईएसआई नियंत्रित करती हैं। इसका प्रमाण है, आईएएमसी का मुखिया रशीद अहमद, जो इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन आफ अमेरिका नामक एक अन्य संगठन का कार्यकारी निदेशक रह चुका है। इस संगठन का डायरेक्टर आफ आपरेशंस जाहिद महमूद है, जो पाकिस्तान की नौसेना में अधिकारी रह चुका है।

डिस्इंफो लैब के अनुसार इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल वाशिंगटन में भारत के खिलाफ अभियान चलाने के लिए लॉबिंग फर्म फिदेलिस गवर्नमेंट रिलेशन्स (एफजीआर) को मोटी रकम देती रही है। इस काम के लिए आईएएमसी ने अकेले साल 2013-14 में एफजीआर को 40,000 डॉलर दिए थे। इसी फिदेलिस गवर्नमेंट रिलेशन्स को बर्मा टास्क फोर्स ने भी ठेका दिया था। बर्मा टास्क फोर्स रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाला संगठन है। 2017 तक इसका नाम ‘बर्मा मुस्लिम्स’ हुआ करता था।
बर्मा टास्क फोर्स का संस्थापक है शेख उबैद, जो व्यक्तिगत रूप से भारत, भारत के कुछ पत्रकारों, प्रधानमंत्री मोदी, हिंदू संगठनों और भारत के सुरक्षा बलों के खिलाफ दुष्प्रचार करता रहता है। उबैद का ट्विटर हैंडल (अब एक्स) उसके इरादों और गठजोड़ों की गवाही देता है। इसी शेख उबैद ने फिदेलिस गवर्नमेंट रिलेशन्स को 2018-20 के बीच अमेरिकी कांग्रेस के कुछ सदस्यों को साथ लेकर अमेरिका में भारत विरोधी अभियान चलाने के लिए 2,67,000 डॉलर दिये थे। इन सारी सूचनाओं को जोड़ने से पता चलता है कि बीटीएफ वास्तव में आईसीएनए का ही एक मोर्चा है।

इसी संगठन ने आईएसआई एजेंट गुलाम नबी फई की खातिरदारी की थी। वही गुलाम नबी फई , जिसे एफबीआई ने 2011 में पाकिस्तान में 3.5 मिलियन डॉलर हस्तांतरित करने का दोषी पाया था। फई जमात-ए-इस्लामी का सदस्य था और कश्मीर के पाकिस्तानी एजेंडे के तहत कश्मीरी अमेरिकन फाउंडेशन नामक संस्था चलाता था। वह नियमित रूप से पाकिस्तान जाता था और आईएसआई के लोगों से मिलता था। उसके अमेरिका के शक्तिशाली लोगों से संबंध थे। 2011 में अमेरिकी अदालत ने उसे षड्यंत्र रचने और कर चोरी के आरोप में दो साल की सजा सुनायी थी। आईएसआई का प्यादा फई उसके इशारों पर कश्मीरी अलगाववादियों के लिए लॉबिंग करता था।

ये थे मेजबान

‘फाउंडेशन दि लंदन स्टोरी’ के ट्वीट भी उसकी पूरी कहानी कहते हैं। कश्मीर घाटी में तैनात भारतीय सेना के जवानों को खलनायक के रूप में प्रस्तुत करने और हिंदू संगठनों को मुस्लिम विरोधी हिंसक समूह के रूप में चित्रित करने वाली यह संस्था राहुल की मेजबान थी। 4 जून 2023 को न्यूयॉर्क के जेविट्स सेंटर में राहुल का भाषण आयोजित करने वाले ‘भद्र’ पुरुषों की फेहरिस्त दर्शनीय है। कार्यक्रम संयोजकों के नाम, धाम, काम इस प्रकार हैं – तंजीम अंसारी, आउटरीच कमेटी आफ मुस्लिम कम्युनिटी आफ न्यूजर्सी का अमीर, पाकिस्तान से सम्बद्ध। इस कम्युनिटी को चलाता है ऊपर वर्णित आईसीएनए का प्रोजेक्ट डायरेक्टर एक पाकिस्तानी इमाम जवाद अहमद। दूसरा नाम मोहम्मद असलम, आईसीएनए के सहयोगी संगठन मुस्लिम सेंटर आफ ग्रेटर प्रिन्सटन का सदस्य। मिन्हाज खान भारत विरोधी आईएएमसी का सदस्य। आईएएमसी का रशीद अहमद, इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन आफ नॉर्थ अमेरिका का कार्यकारी निदेशक। इस संगठन के संबंध लश्कर-ए-तय्यबा और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े हैं, यह अति गंभीर बात है।

राहुल और सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने कम्युनिस्ट पार्टी आफ चाइना से जिस समझौते पर हस्ताक्षर किये, उसका मसौदा आज भी गुप्त है। राहुल की ‘भारत जोड़ो यात्रा ‘ में जॉर्ज सोरोस के पैसे पर चलने वाले ओपन सोसाइटी फाउंडेशन के वैश्विक उपाध्यक्ष सलिल शेट्टी कदम मिला रहे थे। सुनीता विश्वनाथ के साथ राहुल की फोटो ने भी सुर्खियां बटोरी थीं। मणिशंकर अय्यर पाकिस्तान से यह गुजारिश पहले ही कर चुके हैं कि ‘आप लोग मोदी सरकार को हटाने में हमारी मदद कीजिए।’ राहुल गांधी बेशर्मी के साथ देश के हितों को ताक पर रखकर मिथ्या बयान दे रहे हैं। मौका ताककर, अर्थात जब प्रधानमंत्री किसी विदेशी दौरे पर जाने वाले हों, या भारत में जी-20 जैसा कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन हो रहा हो, तब उन्हें विदेश भेजा जाता है। विदेश जाकर वे योजनाबद्ध तरीके से भारत के बारे में घोर नकारात्मक वक्तव्य देते हैं। उनके बयानों में पाकिस्तान निर्मित पटकथा का केन्द्रीय स्वर प्रतिध्वनित होता रहता है, और अब पाकिस्तान के लिए तथा भारत के खिलाफ लॉबिंग कर रहे लोगों, संस्थाओं के साथ राहुल का गठजोड़ कई सवाल पूछ रहा है। ‘गोदी मीडिया’ का शोर मचाने वाले लोग किसकी गोद में बैठे हैं?

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