क्या डूब जाएंगे बैंकों में जमा पैसे, श्रीलंका के लोगों में फिर मची आपाधापी
August 18, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्व

क्या डूब जाएंगे बैंकों में जमा पैसे, श्रीलंका के लोगों में फिर मची आपाधापी

आमजन बैेकों में जमा अपने पैसों को लेकर चिंता में डूबे हैं। इससे कर्ज संकट का आगे क्या हाल होगा, इसी को लेकर भ्रम की स्थिति बढ़ती दिख रही है। जिन आम लोगों ने बैंकों में पैसे जमा किए हुए हैं, वे बैंकों के चक्कर काटने लगे हैं

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jun 10, 2023, 12:30 pm IST
inविश्व
राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे

राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे

श्रीलंका में एक बार फिर आम जनता में डर बैठा हुआ है। इस बार डर का कारण है कि कहीं बैंकों में जमा उनका पैसा न डूब जाए। श्रीलंका से आ रहे समाचारों के अनुसार, वहां रानिल विक्रमसिंघे की सरकार ने उम्मीद व्यक्त की थी कि देश के कर्ज को लेकर गत मई माह के अंत तक कोई योजना बना ली जाएगी। पर कोई योजना सामने न आने के बाद सरकार पर दबाव पड़ गया है।

अधिकांश मामलों में तो सरकार ने कर्जा अपने यहां के बैंकों तथा दूसरे निवेशकों से लिया हुआ है। लेकिन सरकार की तरफ से कर्ज को लेकर कोई योजना प्रस्तुत न किए जाने के बाद बैंकों को भी संशय होने लगा और उन्होंने सरकार से तकादा करना शुरू कर दिया। जबकि अभी श्रीलंका की सरकार विदेश से कर्ज देने वालों का कर्ज चुकाने में छूट मिलने की उम्मीदें पाले इसकी कोशिश ही कर रही है।

ऐसे में देश में कर्ज को लेकर मौजूदा मुश्किलों ने गंभीर रूप अपना लिया है। श्रीलंका के लोगों में बेसब्री हद से पार हो रही है। विक्रमसिंघे सरकार कर्ज को लेकर क्या मसौदा लाएगी अभी इसे लेकर संशय ही बना हुआ है, जबकि आमजन बैेकों में जमा अपने पैसों को लेकर चिंता में डूबे हैं। इससे कर्ज संकट का आगे क्या हाल होगा, इसी को लेकर भ्रम की स्थिति बढ़ती दिख रही है। जिन आम लोगों ने बैंकों में पैसे जमा किए हुए हैं, वे बैंकों के चक्कर काटने लगे हैं, इस डर से कि कहीं उनका पैसा भी हाथ से जाता न रहे। अनेक लोगों ने तो अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया है। श्रीलंका के बैंकों को लेकर भी लोगों में भरोसा नहीं रहा है।

राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे आर्थिक हालत सुधारने में जुटे हैं और इसी वजह से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की सख्त शर्तों को भी मान लिया है। इसके बाद आईएमएफ से देश को नए सिरे से कर्ज मिला है। आईएमएफ की शर्त के अनुसार ही श्रीलंका सरकार अपने विदेशी कर्जदाताओं से छूट पाने को बात कर रही है। लेकिन इधर घरेलू कर्ज के मुद्दे ने विकराल मामले ने रूप धारण करना शुरू कर दिया है।

श्रीलंका की पेशेवर बैंकर्स एसोसिएशन का कहना है कि पैसे को विभिन्न मदों के लिए जमा करने वाले लोगों में भय के चलते हालत और गंभीर हो रही है। आम इंसान का डर समझ भी आता है। श्रीलंका में पिछले साल जो हुआ, उसे देखकर बैंकों से भी भरोसा उठता रहा है।

दरअसल विदेशी कर्ज के संदर्भ में श्रीलंका पिछले साल डिफॉल्टर घोषित किया जा चुका था। मतलब ये कि कर्ज को चुकाने की उसकी सामर्थ्य पर सवालिया निशान लग गया था। इससे जहां देश में विदेशी मुद्रा की कमी हो गई, वहीं आवश्यक वस्तुएं भी बाजार से गायब होने लगीं।महंगाई बेतहाशा बढ़ गई। जनता में इतना असंतोष पैदा हुआ कि लोग राष्ट्रपति भवन तक पर धावा बोलने लगे और अंतत: उस वक्त के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे को देश से पलायन करना पड़ां

उल्लेखनीय है कि वर्तमान राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे आर्थिक हालत सुधारने में जुटे हैं और इसी वजह से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की सख्त शर्तों को भी मान लिया है। इसके बाद आईएमएफ से देश को नए सिरे से कर्ज मिला है। आईएमएफ की शर्त के अनुसार ही श्रीलंका सरकार अपने विदेशी कर्जदाताओं से छूट पाने को बात कर रही है। लेकिन इधर घरेलू कर्ज के मुद्दे ने विकराल मामले ने रूप धारण करना शुरू कर दिया है।

एडवोकेटा इंस्टीट्यूट, कोलंबो नाम के एक थिंक टैंक के अनुसार, घरेलू कर्ज को नए सिरे से नया रूप देना आवश्यक है। पहली जरूरत है कि कर्ज को चुकाने लायक सीमा को एक हद में बांधना जरूरी है। दूसरी यह कि कर्जदाताओं से समान बर्ताव किया जाए। थिंक टैंक का कहना है कि कर्ज में छूट देने वाले जो विदेशी कर्जदाता हैं, उनकी भी इच्छा होगी कि श्रीलंका घरेलू कर्ज के संदर्भ में भी ठीक वही नीति अमल में लाए।

देश में घरेलू कर्ज को नया रूप देने का मतलब है सरकार द्वारा बैंकों और निवेश संस्थानों से लिए कर्ज के एक हिस्से को उसके देशी कर्जदाता माफ कर दें और कर्ज वापसी की समय सीमा को भी आगे बढ़ा दें। लेकिन इससे आम जनता में खलबली मचेगी कि उन्हें लगेगा कि बैंक जमा पैसे के बूते सरकार को मियाद में छूट देंगे।

श्रीलंका सरकार पर कुल कर्ज का 55 प्रतिशत घरेलू है। सरकार ने इसमें से ज्यादातर पैसा राजकोषीय बिल और बॉन्ड्स को बेच कर हासिल किया है। सरकार को बॉन्ड्स के माध्यम से 30.9 अरब डॉलर का कर्ज मिला हुआ है तो राजकोषीय बिल के माध्यम से 5 अरब डॉलर कर्ज हासिल है।

Topics: colombogovernmentकर्जआईएमएफकोलंबोimfvikramsingheश्रीलंकाfiscalshrilankapublicdebtfinanacebanksLoandefaultereconomy
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रां के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

G7 में बढ़ता भारत का रुतबा, दुनिया के विकसित देश भी मान रहे भारत का लोहा, समझ रहे भारत का महत्व

Representational Image

Iran War से कमर टूटी जिन्ना के देश की, Munir के फरमान पर अब नहीं मनेगा Republic Day, तेल ने निकाला Pakistan का तेल

ओडिशा ने माओवादी समर्पण नीति कड़ी की, पात्रता मानदंड स्पष्ट

723.77 अरब डॉलर पहुंचा भारत का विदेशी मुद्रा भंडार, ऑल-टाइम हाई का बना रिकॉर्ड

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष अंतोनियो और यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

नई दिल्ली में हुई ‘डील’, US में झटका हुआ ‘फील’! जानिए, India-EU FTA पर क्या कहता है America का मीडिया

प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत AI में दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बन रहा है- क्रिस्टालिना जॉर्जीवा का बड़ा बयान

Load More

ताज़ा समाचार

आयुष्मान मरीजों के इलाज में लापरवाही पर योगी सरकार सख्त, 866 अस्पतालों पर कार्रवाई

सुनीता कोहली

विभाजन की विभीषिका : न रहने का ठिकाना, न खाने का…

हॉकी विश्व कप : भारत-पाकिस्तान की टक्कर कल, सेमीफाइनल की दौड़ में भारतीय टीम को ड्रॉ भी काफी

ओडिशा में बाढ़: 7.85 लाख से अधिक लोग प्रभावित, CM माझी ने नाव और बाइक से जाजपुर-भद्रक का किया दौरा

फ्री रिचार्ज का वायरल दावा निकला फर्जी, PIB फैक्ट चेक ने बता दी सच्चाई

भूकंपरोधी तकनीक से बनेगा ‘सरस्वती शिशु मंदिर’ का नवीन भवन, भूमि पूजन कर रखी गयी आधारशिला

बांग्लादेश की राजधानी ढाका का नामकरण ढाकेश्वरी देवी के नाम पर हुआ है, ले​किन अब ढाकेश्वरी मंदिर टूटा पड़ा है।

विभाजन की विभीषिका : माटी गई, मंदिर गया, बिखर गया मन

Goswami Tulsidas Jayanti: रत्ना के ‘तुलसी’, प्रभु राम के ‘दास’, जन-जन के कवि तुलसीदास

हरिद्वार: गंगा का जलस्तर चेतावनी निशान पार, खतरे के निशान से महज 50 सेंटीमीटर नीचे बह रही गंगा

डॉ. शाम लाल कठपालिया

विभाजन की विभीषिका : ‘हिंदू अपनी बेटियों को मार देते थे’

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies