उत्तराखंड : कैसे शुरू हुआ लैंड जिहाद ? लोगों को अंधविश्वास के जाल में फंसाकर कब्जा रहे जमीन, दर्ज होगा मामला
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उत्तराखंड : कैसे शुरू हुआ लैंड जिहाद ? लोगों को अंधविश्वास के जाल में फंसाकर कब्जा रहे जमीन, दर्ज होगा मामला

उत्तराखंड में धामी सरकार का बुल्डोजर अवैध मजारों पर जोरदार प्रहार कर रहा है। सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाई गई इन नकली मजारों को ध्वस्त करने का अभियान चल रहा है।

Written byदिनेश मानसेरादिनेश मानसेरा
May 18, 2023, 11:50 am IST
in भारत, उत्तराखंड

देहरादून : उत्तराखंड में धामी सरकार का बुल्डोजर अवैध मजारों पर जोरदार प्रहार कर रहा है। सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाई गई इन नकली मजारों को ध्वस्त करने का अभियान चल रहा है।

खादिम फकीरों के षड्यंत्र
इस बीच कुछ ऐसे भी मामले सामने आए हैं कि कुछ अवैध मजारें निजी जमीन पर भी बना दी गईं हैं और इसके पीछे एक और षड्यंत्र की जानकारी सामने आई है, वो ये कि अवैध मजारों पर बैठे फकीर या खादिम अपने यहां आने वाले उत्तराखंड के हिंदू लोगों को एक योजनाबद्ध तरीके से कहानियां किस्से सुनाकर अपने प्रभाव में लेते है और फिर उन्हें भी अपने मजार जिहाद में शामिल कर लेते हैं। इनमें ज्यादातर वंचित समाज के हिंदू और जनजाति समाज के लोग है।

पिछले दिनों पछुवा देहरादून में ऐसे दो उदाहरण सामने आए थे, जब अवैध मजार ध्वस्त करने गई प्रशासन की टीम निजी भूमि पर मजारें ध्वस्त करने गई। दोनों मामले में जमीन उत्तराखंड के हिंदू वंचित समाज की थी जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने बताया कि हमने मन्नत से ये मजार बनवाई है। ये सुनकर प्रशासन और खुफिया विभाग के अधिकारी भी चौंक गए, जब उनसे विस्तार से जानकारी हासिल की गई तो बताया गया कि वो परेशानी की हालत में एक मजार पर गए थे तो वहां बैठे खादिम ने चर्चा की तो उन्होंने आस्था और मन्नत के कई किस्से कहानियां सुनाकर उनसे कहा कि “आप की इच्छा पूरे होने पर चादर चढ़ाना और अपने जमीन पर बाबा का मजार बनवा देना फिर आपको इतना दूर भी आने की जरूरत नहीं पड़ेगी।”

इसी अंधविश्वास पर उन्होंने ये किया, उन्होंने कहा कि खादिम ने यहां आकर खुद मजार बनवाई और चादर चढ़वाई अब हम ही दीया बत्ती करते हैं, खादिम हर महीने आता है और जो पैसा यहां गोलक में होता है वो निकाल कर ले जाता है। ये दोनों कहानियां दो अलग-अलग अवैध मजार स्थल पर एक जैसी बताई गईं हैं।

एक शख्स ने ये भी बताया कि जिस तरह तुम्हारे गांव में खेत में छोटा मंदिर होता है बस वैसा ही बनाना है और वैसे ही दीया जलाना है, ऐसा भी बताया गया कि खादिम की योजना उक्त अवैध मजार को टीन शेड चबूतरा, एक कमरा बना कर विस्तार देने की है और वो उन्हें और पैसा एकत्र करने के लिए प्रेरित करता रहा है।

बहरहाल, गौर करने वाली बात ये है कि ये मजार के बहाने हिंदू समाज की जमीन कब्जाने का षड्यंत्र नहीं तो और क्या है ? ये ही मजार जिहाद है या कहिए जमीन जिहाद है।

क्या खादिम फकीरों के पीछे भी कोई है ?
इस सूचना के बाद से पुलिस प्रशासन ने ऐसे खादिमों की तलाश भी शुरू कर दी है, जो अपने ठौर ठिकानों से फरार बताए जाते हैं, जानकारी के मुताबिक वे या तो यूपी भाग गए हैं या फिर यहीं कहीं भूमिगत हो गए हैं। वहीं पुलिस और वन विभाग इन खादिमों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी में लगी हुई है।

पुलिस खुफिया विभाग भी इस बात का पता लगाने में जुटा हुआ है कि इन खादिमों, फकीरों के पीछे किसका दिमाग है, क्योंकि ये बात तो तय है कि इस मजार जिहाद का कोई न कोई तो मास्टर माइंड जरूर है।

देहरादून में एक अन्य स्थान पर एक गढ़वाली परिवार द्वारा घर पर मजार बनाकर झाड़ फूंक का धंधा करने के पीछे भी इसी तरह की कहानी बताई गई है। इसी तरह सुदूर पहाड़ों पर बनी मजारों के पीछे भी कुछ इसी तरह का षड्यंत्र मजार जिहादियों का हो सकता है। एक दो स्थानों पर मजार पर सांई बाबा, भोले नाथ 786 पर लिखा हुआ पाया गया है। ऐसी और भी भ्रमित करने वाली मजारें हैं, जिनके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है, अन्यथा देवभूमि में इतनी तेजी से इतनी बड़ी मात्रा में कैसे मजारे बन गई ?

खास बात ये भी है कि इन अवैध सीमेंट की मजारों पर अंधविश्वास का माथा टेकने वंचित और गरीब तबके के हिंदू ही ज्यादा जाते हैं और वहां खादिमों के आदमी दीया, धूप, अगरबत्ती, चादर, प्रसाद का धंधा करते हुए दिखाई देते हैं। ये मजारें किसी पीर-फकीर की नहीं बल्कि “फ्रेंचाइजी” का धंधा बताई जा रही हैं। कालू शाह, भूरे शाह जैसे नाम की एक नहीं दर्जनों मजारें अब सामने आ चुकी हैं जिन्हें धामी सरकार के बुल्डोजर ने ध्वस्त किया है।

जानकारी के मुताबिक निजी भूमि पर बनी इन फर्जी मजारों को बनाने वालों को भी जिला प्रशासन ने नोटिस दे रखा है। सुप्रीम कोर्ट का 20 जून 2009 का एक आदेश है कि कोई भी धार्मिक स्थल बिना जिला कलेक्टर की अनुमति के नहीं बनाया जा सकता है, यदि कोई बनाना चाहता है और उसकी मरम्मत करना चाहता है तो उसे जमीन संबंधी दस्तावेजों के साथ आवेदन करना होगा और कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी एक समिति उस पर सहमति देगी। 2009 के बाद बिना बने सभी धार्मिक स्थलों को ध्वस्त कर इसकी रिपोर्ट हाई कोर्ट में देनी होगी, इसी आदेश प्रक्रिया का उत्तराखंड की धामी सरकार पालन कर रही है।

इस ध्वस्तीकरण अभियान में न सिर्फ साढ़े तीन सौ से अधिक अवैध मजारें तोड़ी गईं हैं साथ ही साथ 39 मंदिर और एक गुरुद्वारे की चार दीवारी भी गिराई गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी कहते आ रहे हैं कि सरकारी जमीन पर कोई भी अतिक्रमण सहन नहीं किया जाएगा, लोग खुद हटा ले अन्यथा बुल्डोजर तैयार है, उनका कहना है कि देवभूमि उत्तराखंड में मजार जिहाद लैंड जिहाद का षड्यंत्र सफल नहीं होने दिया जाएगा।

उधर, सरकार द्वारा नियुक्त इस अभियान के नोडल अधिकारी आईएफएस डॉ. पराग मधुकर धकाते का कहना है, सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा। हम इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि किसके कार्यकाल में अतिक्रमण किए गए, इसके लिए सेटलाइट चित्रों का सहारा लिया जाएगा। धकाते ने बताया की जंगल में आम आदमी का प्रवेश निषेध है फिर कैसे ये मजारें बन गईं इसको लेकर वन विभाग ने भी चिंता जताई है।

Topics: उत्तराखंड समाचारलैंड जिहादमजार जिहादधामी सरकारprivate land surrounded by blind faith of innocent Uttarakhandis
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