अंगदान करने वाले भारत सरकार के कर्मचारियों को मिलेगा 42 दिन का अवकाश
September 14, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

अंगदान करने वाले भारत सरकार के कर्मचारियों को मिलेगा 42 दिन का अवकाश

Written byPanchjanyaPanchjanya
Apr 28, 2023, 01:25 pm IST
inभारत
प्रतीकात्मक चित्र

प्रतीकात्मक चित्र

दधीचि देहदान समिति के अनुसार अंग की कमी से प्रतिवर्ष 5,00,000 लोग मरते हैं। इस समय 21,000 किडनी, 5,000 हृदय और 2,00,000 लिवर की आवश्यकता है, लेकिन इनकी उपलब्धता क्रमशः 5,000, 70 और 750 है। भारत सरकार के निर्णय से लोग अंगदान के लिए प्रेरित होंगे, ऐसी आशा की जा सकती है। 

अंगदान पर भारत सरकार ने एक बहुत ही सुन्दर और सराहनीय निर्णय लिया है। इस निर्णय के अनुसार अंगदान करने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 42 दिन का अवकाश मिलेगा। इससे पहले 30 दिन के आकस्मिक अवकाश का प्रावधान था। अब सरकार ने सर्जरी के बाद ठीक होने में लगने वाले समय को देखते हुए यह निर्णय लिया है। कार्मिक मंत्रलय की ओर से जारी एक आदेश में कहा गया है कि अंगदान करने वाले के अंग को निकालने के लिए बड़ी सर्जरी की आवश्यकता होती है। इस कारण अंगदान करने वाले व्यक्ति को स्वस्थ होेने में समय लगता है। इसमें अस्पताल में रहने और बाद में घर पर बिताया गया समय भी शामिल है। यह भी कहा गया है कि अंगदाता के अंग को निकालने के लिए की जाने वाली सर्जरी के प्रकार से परे आकस्मिक अवकाश की अधिकतम अवधि 42 दिन होगी। यह अवकाश सरकार से पंजीकृत किसी भी चिकित्सक की अनुशंसा पर लिया जा सकता है। सामान्यतः यह अवकाश एक बार लिया जा सकता है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर इसे बढ़ाया भी जा सकता है, बशर्ते चिकित्सक की अनुशंसा हो।

भारत सरकार ने यह निर्णय अपने कर्मचारियों को अंगदान के लिए प्रेरित करने हेतु लिया है।  बता दें कि किसी जरूरतमंद को संबंधित अंग के मिलने से उसे नया जीवन प्राप्त होता है। अंगदान समाज के लिए एक चमत्कार सिद्ध हुआ है। प्रत्यारोपण के उद्देश्य से गुर्दे, हृदय, आंऽ, लिवर, छोटी आंत, त्वचा और हिîóयों के टिश्यू, नसों जैसे अंग दान किए जाते हैं। अंगदान करने वाला व्यक्ति इस महान कार्य के माध्यम से अंग प्राप्तकर्ता को एक नया जीवन देता है। अंगदान की प्रक्रिया को पूरे विश्व में प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस कारण अंगदान को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न देशों की सरकारों ने अलग-अलग प्रणालियों को स्थापित किया है। हालांकि उनकी आपूर्ति की तुलना में अंगों की मांग अभी भी काफी अधिक है। इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।

अंगदान तब होता है जब किसी व्यक्ति के शरीर के अंग को उसकी सहमति से हटा दिया जाता है।  अगर वह जीवित है तो उसकी आज्ञा से और यदि उसकी मृत्यु हो गई है तो उसके परिवार वालों के सहमति अंगदान किया जा सकता है। इस तरह के अंगों का प्रयोग किसी अस्पताल में अनुसंधान के लिए होता है या फिर किसी जरूरतमंद के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है। अंग प्राप्तकर्ता को नया जीवन देने के लिए गुर्दे, लिवर, फेफड़े, हृदय, हिîóयों, अस्थि मज्जा, कॉर्निया, आंतों और त्वचा को प्रत्यारोपित किया जाता है।

जीवित अंगदाताओं को अंगदान करने से पहले संपूर्ण चिकित्सा परीक्षणों की आवश्यकता होती है।  इसमें दाता के मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन में यह सुनिश्चित करना भी शामिल है कि क्या वह दान के परिणामों को समझता है और इसके लिए वास्तव में सहमति देना चाहता है।

मृतक दाताओं के मामले में सबसे पहले यह सत्यापित किया जाता है कि दाता मर चुका है या नहीं।  आमतौर पर न्यूरोलॉजिस्ट द्वारा मृत्यु का सत्यापन कई बार किया जाता है तब यह निर्धारित किया जाता है कि उसके किसी भी अंग का दान किया जा सकता है। मृत्यु के बाद शरीर को यांत्रिक वेंटीलेटर पर रऽा जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अंग अच्छी स्थिति में रहें। ज्यादातर अंग शरीर के बाहर कुछ घंटों के लिए ही काम करते हैं और इस प्रकार यह सुनिश्चित किया जाता है कि वे शरीर से हटाने के तुरंत बाद प्राप्तकर्ता तक पहुंच जाएं।

शारीरिक अंगों की मांग दुनियाभर के दाताओं की संख्या की तुलना में काफी अधिक है।  प्रत्येक वर्ष अनेक लोग अंगदान करने वालों की प्रतिक्षा करते हुए इस धरती से चले जाते हैं। उन्हें कोई अंगदाता नहीं मिल पाता है। इसलिए अंगदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए जनता के बीच संवेदनशीलता जगाने की आवश्यकता है। इस ओर सरकार ने कुछ कदम भी उठाए हैं। जैसे टीवी और इंटरनेट के जरिए जागरूकता फैलाना। हालांकि अभी भी मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को समाप्त करने के लिए बहुत कुछ करना बाकी है। भारतीय कानून के अनुसार अंगदान विधि-सम्म्त है। भारत सरकार द्वारा अधिनियमित मानव अंगों के अधिनियम 1994 के अनुसार प्रत्यारोपण, अंगदान की अनुमति देता है और मस्तिष्क की मृत्यु की अवधारणा को वैध करार देता है।

देश में पिछले अनेक वर्ष से ‘दधीचि देहदान समिति’ अंगदान के लिए कार्य कर रही है।  इसके संस्थापक हैं विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष और देश के जाने-माने अधिवक्ता श्री आलोक कुमार। यह संस्था अब तक 377 मृत देहों और 926 आंखों का दान करवा चुकी है।

Topics: vhpअंगदानorgan donationbharat government
Share1
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

भाषा विवाद से मनुस्मृति तक…VHP के सुरेंद्र जैन ने खोल दी ‘टूलकिट गैंग’ की पूरी कहानी!

प्रतीकात्मक तस्वीर

विश्व हिन्दू परिषद के 62 वर्ष: जन्माष्टमी पर जला दीप, आलोकित हुई हिंदू चेतना

माधापुर में कन्वर्जन के आरोप के बाद मौके पर जमा हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता

TCS, विप्रो के बाद हैदराबाद की कंपनी में हिंदू महिलाओं के जबरन कन्वर्जन का आरोप, वीडियो वायरल

बैठक को संबोधित करते हुए श्री आलोक कुमार। साथ में हैं (बाएं से) श्री दिनेश चंद्र, श्री बजरंग बागड़ा, डॉ आर.एन. सिंह आदि अधिकारी

समाज को संगठित करने का संकल्प

vhp shiksha varg prayagraj rajendra saxena

VHP परिषद शिक्षा वर्ग: प्रयागराज में बोले राजेन्द्र सक्सेना- सोशल मीडिया और नैरेटिव की लड़ाई में सजग रहें कार्यकर्ता

प्रतीकात्मक तस्वीर

सड़क पर नहीं होगी नमाज: CM धामी के बयान के बाद नैनीताल में ईद की नमाज को लेकर संशय

Load More

ताज़ा समाचार

आज का श्लोक : वाक्ताडनं प्रमत्तस्य परीवादं रिपोरपि।

t20 match first time vande mataram

भारतीय क्रिकेट में ऐतिहासिक अध्याय: भारत-अफगानिस्तान टी20 मैच में पहली बार राष्ट्रगान के साथ गाया गया ‘वंदे मातरम्’

दुनिया ताकतवर को देखती है: गोटन में RSS सरसंघचालक जी ने कहा- ‘व्यक्ति से लेकर राष्ट्र तक सामर्थ्य अनिवार्य है’

महराजगंज में RSS शताब्दी वर्ष पर भव्य युवा संवाद : दीपक विस्पुते जी ने युवाओं को दिया ‘राष्ट्र प्रथम’ का संदेश

AP Aboobacker Fatwa Muslim Women Samastha Kerala Jam Eyyathul Ulama Panchjanya

“फतवा वापस नहीं होगा”: मुस्लिम महिलाओं पर दिए बयान पर कायम AP अबूबकर, जानिए जमीयतुल उलमा का बड़ा दावा!

वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा जी और गुजरात मुख्यमंत्री के प्रमुख सलाहकार एवं GMDC के अध्यक्ष डॉ. हसमुख अधिया जी

Sabarmati Samvad 2026: “गुजरात कैसे बनेगा भारत का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन? डॉ. हसमुख अधिया जी ने बताई 2047 की पूरी रणनीति”

दुनिया डगमगाई, भारत संभला

Role of Spiritual Leaders in Nation Building Hindu Resurgence Panchjanya

राष्ट्र निर्माण और हिंदू पुनरुत्थान में आध्यात्मिक गुरुओं की भूमिका: जानिए कैसे मिलेगा ‘परम वैभव’!

9/11 बरसी: न्यूयॉर्क मेयर जोहरान मामदानी ने छेड़ा विक्टिमहुड का राग; हँसते हुए असंवेदनशील वीडियो पर बवाल!

प्राकृतिक आपदाएं दे रही हैं चेतावनी: विकास के साथ प्रकृति संरक्षण भी जरूरी, जानिए क्यों बढ़ रहा खतरा!

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies