आज का इतिहास : सत्यजीत रे को सिनेमा संसार ने किया आखिरी नमन
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आज का इतिहास : सत्यजीत रे को सिनेमा संसार ने किया आखिरी नमन

Written byPanchjanyaPanchjanya
Apr 23, 2023, 08:39 am IST
inभारत

देश-दुनिया के इतिहास में 23 अप्रैल की तारीख तमाम अहम कारण से दर्ज है। यह तारीख को भारतीय सिनेमा के महान फिल्मकार सत्यजीत रे की पुण्यतिथि मनाई जाती है। महान जापानी फिल्मकार अकीरा कुरोसावा कहा करते थे- ‘अगर आपने सत्यजीत रे की फिल्में नहीं देखी तो इसका मतलब है कि आप दुनिया में सूरज या चांद को देखे बिना जी रहे हैं।’ अकीरा बिलकुल सही कह गए हैं। यह सच बात है कि भारतीय सिनेमा को सत्यजीत रे ने ही सारी दुनिया में पहुंचाया। वह ऐसे पहले भारतीय हैं, जिन्हें अकादमी अवार्ड्स की कमेटी ने लाइफटाइम अचीवमेंट का ऑस्कर पुरस्कार कोलकाता में उनके घर पर दिया था।

दो मई 1921 को कोलकाता में जन्मे सत्यजीत रे का शुरुआती जीवन कठिनाई में बीता। पिता की बचपन में ही मौत हो गई थी। प्रेसीडेंसी कॉलेज से अर्थशास्त्र की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह शांति निकेतन गए। पांच साल रहकर फिर 1943 में कोलकाता लौटे। फिर एक विज्ञापन एजेंसी से जुड़े। यहां उन्होंने कई मशहूर किताबों के कवर पेज डिजाइन किए, जिनमें जवाहरलाल नेहरू की ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ भी शामिल है।

इस कंपनी के काम के सिलसिले में सत्यजीत रे को 1950 में लंदन जाने का मौका मिला। यहां उन्होंने कई फिल्में देखीं। इनमें एक अंग्रेजी फिल्म ‘बाइसिकल थीव्स’ भी थी। इसकी कहानी ने उन्होंने काफी प्रभावित किया। भारत लौटते हुए सफर में ही उनके दिमाग में अपनी पहली फिल्म ‘पाथेर पांचाली’ की कहानी तैयार हो चुकी थी। नौसिखिया टीम लेकर 1952 में सत्यजीत रे ने ‘पाथेर पांचाली’ की शूटिंग शुरू की। एक नए फिल्मकार पर पैसा लगाने को कोई तैयार नहीं था, तब खुद के पास जो भी था, उन्होंने इस फिल्म पर लगा दिया। बीवी के जेवर गिरवी रखे, पर उससे मिले पैसे शूटिंग को ज्यादा दिन नहीं खींच सके। सत्यजीत रे पर दबाव बना कि फिल्म में कुछ बदलाव करें। पर वे अड़े रहे। उन्होंने साफ मना कर दिया। आखिर में पश्चिम बंगाल सरकार ने उनकी मदद की और 1955 में पाथेर पांचाली पर्दे पर आई।

‘पाथेर पांचाली’ ने अनेक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते। इसमें कान फिल्म फेस्टिवल का ‘बेस्ट ह्यूमन डॉक्यूमेंट्री’ का सम्मान भी शामिल है। इसके बाद सत्यजीत रे ने करीब तीन दर्जन फिल्मों का निर्देशन किया। इनमें पारस पत्थर, कंचनजंघा, महापुरुष, अपूर संसार, महानगर, चारूलता, अपराजितो, गूपी गायन-बाघा बायन शामिल हैं। 1991 में प्रदर्शित आगंतुक सत्यजीत रे के सिने करियर की अंतिम फिल्म थी।
सत्यजीत रे को लोग चलता-फिरता फिल्म संस्थान कहते थे। वह फिल्म निर्माण की हर विधा से परिचित थे। इनमें पटकथा, कास्टिंग, संगीत, कला निर्देशन, संपादन आदि शामिल हैं। फिल्मकार के अलावा वे कहानीकार, चित्रकार और फिल्म आलोचक भी थे। सत्यजीत रे की बाल मनोविज्ञान पर जबरदस्त पकड़ थी। यह उनकी बच्चों के लिए बनाई गई फेलूदा सीरीज में दिखता है। कैलीग्राफी में भी सत्यजीत रे बहुत कुशल थे। बंगाली और अंग्रेजी में उन्होंने कई टाइपफेस डिजाइन किए थे। उनके दो अंग्रेजी टाइपफेस ने 1971 में एक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी जीता था।

सत्यजीत रे कितना ताकतवर सिनेमा बनाते थे, इसका सबूत यह है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में 36 फिल्मों का निर्देशन किया। इनमें से 32 को राष्ट्रीय पुरस्कार मिले। विदेश में भी कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले। 1978 में बर्लिन फिल्म फेस्टिवल की संचालक समिति ने उन्हें विश्व के तीन सर्वकालिक निर्देशकों में से एक के रूप में सम्मानित किया। 1985 में उन्हें हिंदी फिल्म उद्योग के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1992 में उन्हें ऑस्कर और भारत रत्न दोनों साथ-साथ मिले। इसके करीब एक महीने के भीतर ही 23 अप्रैल, 1992 को दिल का दौरा पड़ने की वजह से उनका निधन हो गया।

महत्वपूर्ण घटनाचक्र
1660 : स्वीडन और पोलैंड के बीच ओलिवा संधि पर सहमति।
1661 : ब्रिटिश सम्राट चार्ल्स द्वितीय का लंदन में राज्याभिषेक।
1908 : जर्मनी, डेनमार्क, ब्रिटेन, स्वीडन, हॉलैंड और फ्रांस के बीच उत्तरी अटलांटिक संगठन संधि पर हस्ताक्षर।
1981 : सोवियत संघ ने भूमिगत परमाणु परीक्षण किया।
1984 : वैज्ञानिकों ने एड्स के वायरस का पता लगाया।
1987 : भारत के सुप्रीम कोर्ट ने विधवाओं को संपत्ति में हिस्से का निर्णय दिया।
1990 : नामीबिया संयुक्त राष्ट्र संघ का 160वां सदस्य बना।
1993 : विदेशी शासन के लंबे इतिहास और दशकों के संघर्ष के बाद पूर्वी अफ्रीका के छोटे से देश एरिट्रिया में इथियोपिया से आजादी के बारे में जनमत संग्रह के लिए मतदान शुरू।
1999 : उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने पर वाशिंगटन में तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन का आगाज।
2002 : पेइचिंग में भारत और चीन के बीच सीमापार आतंकवाद पर वार्ता।
2005 : यूट्यूब की वेबसाइट पर पहला वीडियो अपलोड किया गया।
2013 : क्रिस गेल ने क्रिकेट इतिहास का सबसे तेज शतक जड़ा।

Topics: history of 23 aprilsatyajit rayइतिहासआज का इतिहासhistorytoday history23 अप्रैल का इतिहाससत्यजीत रे
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