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गोबर के कागज पर हनुमान चालीसा

‘गोकृति’ नामक एक संस्था गोवंश के गोबर से 100 से अधिक उत्पादों को तैयार करती है। गोबर के कागज पर छपी हनुमान चालीसा की 5,000 प्रतियां बिक चुकी हैं

अश्वनी मिश्रअरुण कुमार सिंहWritten byअश्वनी मिश्रandअरुण कुमार सिंह
Apr 22, 2023, 01:36 pm IST
inभारत, संघ @100
गोबर के कागज पर प्रकाशित हनुमान चालीसा दिखाते भीमराज शर्मा

गोबर के कागज पर प्रकाशित हनुमान चालीसा दिखाते भीमराज शर्मा

गोकृति में बने कागज पर हनुमान चालीसा प्रकाशित की गई है। पूरी चालीसा हिंदी, अंग्रेजी और रोमन में है। प्रत्येक चौपाई का हिंदी और अंग्रेजी में अर्थ भी बताया गया है। भीमराज शर्मा के अनुसार अब तक इस चालीसा की 5,000 प्रतियां तो विदेशों में बिक चुकी हैं।

गाय, गोबर, गोमूत्र आदि की बात सुनते ही कुछ लोग भौहें सिकोड़ लेते हैं। ऐसे लोगों को जयपुर स्थित सुदर्शनपुरा औद्योगिक क्षेत्र में ‘गोकृति’ के नाम से चल रही एक इकाई को देखना चाहिए। यहां गोवंश के गोबर से 100 से अधिक उत्पाद तैयार होते हैं। इसके संस्थापक हैं भीमराज शर्मा।

इन्होंने गोबर के माध्यम से स्वावलंबन और सफलता का एक बेजोड़ उदाहरण समाज के सामने रखा है। गोकृति का एक प्रमुख उत्पाद है कागज। इस कागज से डायरियां, फाइल फोल्डर, विवाह आमंत्रण पत्र, शुभकामना लिफाफे, राखियां, छोटे गुलदस्ते, गिफ्ट बॉक्स, टेबल कैलेंडर, चूड़ी बॉक्स सहित कई तरह की सजावटी एवं दैनिक उपयोगी की वस्तुएं बनाई जाती हैं।

गोकृति में बने कागज पर हनुमान चालीसा प्रकाशित की गई है। पूरी चालीसा हिंदी, अंग्रेजी और रोमन में है। प्रत्येक चौपाई का हिंदी और अंग्रेजी में अर्थ भी बताया गया है। भीमराज शर्मा के अनुसार अब तक इस चालीसा की 5,000 प्रतियां तो विदेशों में बिक चुकी हैं। इसके अलावा गोबर से गणेशजी, लक्ष्मी जी आदि देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाई जाती हैं। गोकृति में होली के समय उपहार का पैकेट तैयार होता है, जिसमें गोबर से बनी चीजें होती हैं। यहां गुलाल बहुत ही प्रसिद्ध है। दीपावली में दीए और अन्य सजावटी सामान तैयार किए जाते हैं। रक्षाबंधन के समय कई प्रकार की राखियां तैयार होती हैं।

गोकृति का सालाना कारोबार एक करोड़ रु. से अधिक है। इससे 30 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से सैकड़ों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। यही कारण है कि आज गोकृति की गूंज पूरे देश में सुनी जा रही है। बहुत सारे लोग गोकृति के कार्यों का अध्ययन कर रहे हैं, ताकि वे भी गो उत्पादों पर आधारित कुछ कार्य कर सकें।

इन उत्पादों की सबसे बड़ी विशेषता है कि इनमें पांच तरह के पौधों के बीज होते हैं। उपयोग के बाद इन उत्पादों को किसी गमले में रख देने से उसमें मौजूद बीज से पौधे उग आते हैं। उन पौधों को आप अपनी सुविधा के अनुसार कहीं भी लगा सकते हैं। गोकृति के लिए जयपुर के आसपास के गांवों से 10 रु. प्रतिकिलो गोबर खरीदा जाता है। भीमराज शर्मा कहते हैं, ‘‘इससे गोपालन को बढ़ावा मिल रहा है। लोग बूढ़ी गायों और बूढ़े बैलों को भी नहीं बेचते हैं।

गोकृति गोरक्षा का जरिया बन गई है।’’ उन्होंने यह भी बताया कि गोकृति का सालाना कारोबार एक करोड़ रु. से अधिक है। इससे 30 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से सैकड़ों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। यही कारण है कि आज गोकृति की गूंज पूरे देश में सुनी जा रही है। बहुत सारे लोग गोकृति के कार्यों का अध्ययन कर रहे हैं, ताकि वे भी गो उत्पादों पर आधारित कुछ कार्य कर सकें।

Topics: गोबर से गणेशजीलक्ष्मी जीGokriti GorakshaHoli in GokritiGaneshjiLakshmi jiहनुमान चालीसाidols of gods and goddesses from cow dunghanuman chalisaHanuman Chalisa on cow dung paperदेवी-देवताओं की मूर्तियांगोकृति गोरक्षागोकृति में होली
अश्वनी मिश्र
अश्वनी मिश्र
@kashmirashwaniअश्वनी मिश्र भारत की सबसे पुरानी और व्यापक रूप से प्रसारित राष्ट्रवादी हिंदी साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं. देश के ज्वलंत मुद्दों की ग्राउंड रिपोर्ट करने के साथ ही मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा एवं राजनीतिक मुद्दों के बारे में लिखते हैं. जम्मू—कश्मीर, पश्चिम बंगाल एवं आतंकरोधी घटनाक्रम विशेष रुचि के क्षेत्र हैं. देश की विभिन्न राजनीतिक घटनाओं पर तीक्ष्ण नजर रखते हुए उनका समग्र विश्लेषण पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट स्थान रखता है। भारतीय राजनीति, समाज, खेल, मानवाधिकार क्षेत्र की विशिष्ट विभूतियों से निरंतर साक्षात्कार और चर्चा उनके पत्रकारीय अनुभव को मजबूत बनाती हैं. उनके अनेक आलेखों पर देश के राजनीतिक गलियारों में एक नरैटिव खड़ा हुआ. विभिन्न प्रासंगिक विषयों की रिपोर्ट और आलेखों को संसद के पुस्तकालय में संग्रहणीय तौर पर शामिल किया गया. बंगाल की चुनावी हिंसा की ग्राउंड रिपोर्ट एवं उसके पहले की अनेक हिंसाओं में पीड़ितों के जीवंत साक्षात्कार देशभर में सराहे गए. सोशल मीडिया पर उनकी उपस्थित विशेष दर्जा रखती है. [Read more]
अरुण कुमार सिंह
अरुण कुमार सिंह
समाचार संपादक, पाञ्चजन्य | अरुण कुमार सिंह लगभग 25 वर्ष से पत्रकारिता में हैं। वर्तमान में साप्ताहिक पाञ्चजन्य के समाचार संपादक हैं। [Read more]
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