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होम भारत

सब हिन्दू हैं सहोदर

सेवा संगम में वाल्मीकि धाम, उज्जैन के पीठाधीश्वर बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज का भी सान्निध्य मिला। प्रस्तुत हैं उनके आशीर्वचन के संपादित अंश

अरुण कुमार सिंहअश्वनी मिश्रWritten byअरुण कुमार सिंहandअश्वनी मिश्र
Apr 18, 2023, 01:39 pm IST
in भारत, संघ @100, मध्य प्रदेश
उज्जैन के पीठाधीश्वर बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज

उज्जैन के पीठाधीश्वर बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज

हमारे समाज में एक वर्ग है जो वंचित, दुर्बल है। उन्हें हम अपने पास लाएं। उनके अंदर के भेदभाव की भावना को समाप्त करें। जब सारे लोग एक साथ होंगे तो ऐसी देश-विरोधी शक्तियों से हम लड़ पाएंगे।

भारतवर्ष पर सदैव से घुसपैठियों की नजर रही है। देश को किसी न किसी तरीके से तोड़ने के लिए बाहरी शक्तियां सदैव तैयार रही हैं। लेकिन हमारे ऋषि मुनियों के त्याग, तपस्या, भजन, पूजन, प्रार्थना ने समाज को ऐसी शक्ति दी, जिससे इन घुसपैठियों को परास्त करने में मदद मिली। लेकिन बीच के कालखंड में भीतर से ही भारत को तोड़ने का काम किया गया।

जब ऐसे तत्वों ने हमारे परिवार को तोड़ने का प्रयास किया तो समरसता का एक बहुत बड़ा आंदोलन चालू हुआ और चीजों में सुधार हुआ। लेकिन फिर से आज यह समस्या दिखाई पड़ती है। इसलिए हमें फिर से इस पर रोक लगानी ही होगी। और यह तभी होगा जब समरस समाज होगा। हमारे समाज में एक वर्ग है जो वंचित, दुर्बल है। उन्हें हम अपने पास लाएं। उनके अंदर के भेदभाव की भावना को समाप्त करें। जब सारे लोग एक साथ होंगे तो ऐसी देश-विरोधी शक्तियों से हम लड़ पाएंगे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समरसता के काम में लगा हुआ है। सामाजिक समरसता के क्षेत्र में संघ की वही सोच है जो हम सब की है। कोई ऊंचा नहीं, कोई बड़ा नहीं, सारे लोग समान हैं, सभी एक ईश्वर की ही संतान हैं। इसलिए सब भाइयों को साथ लाना है। यही हमारा ध्येय होना चाहिए।

दुर्भाग्य हमारा यह रहा कि इस देश में शंख, घंटे-घड़ियाल और नगाड़ों की आवाज सुनाई देना बंद हो गई। और सुनाई क्या देता है सुबह से लेकर शाम तक पांच समय की नमाज। इसकी ध्वनि हमारे काम में बाधक बनी हुई है। यह सब कैसे हुआ? हमारी दादी-नानी कहा करती थीं कि ‘उठो, पांच बज गए हैं। अजान हो गयी है।’ हमें दुख होता है यह सुनकर। हमारी नानी-दादी ये कहें कि ‘उठ जाओ, शंख बज गया है’। और जब शंख बजता है तो इस देश की समस्त गंदगी दूर हो जाती है। वातावरण प्रदूषण मुक्त हो जाता है।

जब ऐसे तत्वों ने हमारे परिवार को तोड़ने का प्रयास किया तो समरसता का एक बहुत बड़ा आंदोलन चालू हुआ और चीजों में सुधार हुआ। लेकिन फिर से आज यह समस्या दिखाई पड़ती है। इसलिए हमें फिर से इस पर रोक लगानी ही होगी। और यह तभी होगा जब समरस समाज होगा। हमारे समाज में एक वर्ग है जो वंचित, दुर्बल है। उन्हें हम अपने पास लाएं। उनके अंदर के भेदभाव की भावना को समाप्त करें। जब सारे लोग एक साथ होंगे तो ऐसी देश-विरोधी शक्तियों से हम लड़ पाएंगे।

सवाल है कि शंख बजना क्यों बंद हुआ? तो इसका उत्तर है कि हमारे बीच में कुछ ऐसे घुसपैठिए आए जो हमारे ही देश के लोग रहे। उन लोगों ने यहां पर एक ऐसा माहौल खड़ा किया, जिससे हमें ही कष्ट होने लगा। हम अपने संस्कार भूलते चले गए। अपने मठ मंदिर को भूल गए। अपनी पूजा-पद्धति, धार्मिक कार्यविधि से दूर हुए। इसका लाभ घुसपैठियों ने उठाया और हमें आपस में ही बांट दिया।

इस देश में जब भक्ति का लोप हो रहा था या यूं कहें कि भक्ति संकट में थी, तब बहुत बड़ा भक्ति आंदोलन हुआ। दक्षिण से शुरू हुए इस भक्ति आंदोलन में कबीर दास जी, रैदास जी, विट्ठल जी, एकनाथ जी सहित अनेक संतों ने अपनी त्याग-तपस्या और भक्ति को साथ लेकर अपना मठ-मंदिर छोड़कर इस देश में भक्ति आंदोलन को चलाया। हम सभी को जानना चाहिए कि हमारे प्रत्येक वर्ग में किसी ना किसी संत का जन्म हुआ। और ये सारे संत समाज को जोड़ने के लिए सदैव तैयार दिखे। लेकिन अब इस देश को किसकी नजर लग गयी! आपस में ही हम लड़ते दिखाई देते हैं। यह मंथन-चिंतन का विषय है।

Topics: नमाजसामाजिक समरसताprayerconch shellशंखघंटे-घड़ियाल और नगाड़ोंवातावरण प्रदूषणराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघSocial harmonyRashtriya Swayamsevak Sanghgongs and drumsअजानenvironmental pollutionazaan
अरुण कुमार सिंह
अरुण कुमार सिंह
समाचार संपादक, पाञ्चजन्य | अरुण कुमार सिंह लगभग 25 वर्ष से पत्रकारिता में हैं। वर्तमान में साप्ताहिक पाञ्चजन्य के समाचार संपादक हैं। [Read more]
अश्वनी मिश्र
अश्वनी मिश्र
@kashmirashwaniअश्वनी मिश्र भारत की सबसे पुरानी और व्यापक रूप से प्रसारित राष्ट्रवादी हिंदी साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं. देश के ज्वलंत मुद्दों की ग्राउंड रिपोर्ट करने के साथ ही मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा एवं राजनीतिक मुद्दों के बारे में लिखते हैं. जम्मू—कश्मीर, पश्चिम बंगाल एवं आतंकरोधी घटनाक्रम विशेष रुचि के क्षेत्र हैं. देश की विभिन्न राजनीतिक घटनाओं पर तीक्ष्ण नजर रखते हुए उनका समग्र विश्लेषण पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट स्थान रखता है। भारतीय राजनीति, समाज, खेल, मानवाधिकार क्षेत्र की विशिष्ट विभूतियों से निरंतर साक्षात्कार और चर्चा उनके पत्रकारीय अनुभव को मजबूत बनाती हैं. उनके अनेक आलेखों पर देश के राजनीतिक गलियारों में एक नरैटिव खड़ा हुआ. विभिन्न प्रासंगिक विषयों की रिपोर्ट और आलेखों को संसद के पुस्तकालय में संग्रहणीय तौर पर शामिल किया गया. बंगाल की चुनावी हिंसा की ग्राउंड रिपोर्ट एवं उसके पहले की अनेक हिंसाओं में पीड़ितों के जीवंत साक्षात्कार देशभर में सराहे गए. सोशल मीडिया पर उनकी उपस्थित विशेष दर्जा रखती है. [Read more]
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