छत्तीसगढ़ धर्मांतरण मामला : चर्च के निशाने पर बस्तर, नारायणपुर में जनजाति समाज के सामने अपने को बचाने का संकट
June 25, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

छत्तीसगढ़ धर्मांतरण मामला : चर्च के निशाने पर बस्तर, नारायणपुर में जनजाति समाज के सामने अपने को बचाने का संकट

भगवान राम का नारायणपुर मिशनरी पैठ के बाद खो रहा मूल पहचान, ईसाई आतंक के भयभीत हुआ स्थानीय जनजाति समाज, अस्तित्व बचाने सड़क पर आई लड़ाई

Written byडाॅ. मयंक चतुर्वेदीडाॅ. मयंक चतुर्वेदी
Jan 10, 2023, 09:40 am IST
in भारत, छत्तीसगढ़
जनजाति समाज के लोगों ने पिछले दिनों नारायणपुर में चक्का जाम किया था।

जनजाति समाज के लोगों ने पिछले दिनों नारायणपुर में चक्का जाम किया था।

बस्तर क्षेत्र का जिला नारायणपुर जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट है भगवान विष्णु का वह स्थान जहां उनके भक्त बहुतायत में रहते हैं। छत्तीसगढ़ राज्य में आज का नारायणपुर जिला कभी भगवान विष्णु एवं उनके अवतार श्रीराम की भक्ति में इस तरह डूबा हुआ था कि इसका नाम ही नारायणपुर हो गया। लेकिन अब यह बदला-बदला नजर आ रहा है। यहां का जनजाति समाज चर्च के आतंक से निशाने पर है। स्थिति इतनी भयावह है कि स्थानीय समाज अपने अस्तित्व को बचाए रखने की अंतिम लड़ाई सड़कों पर लड़ता दिख रहा है।

मतान्तरण के खेल में सबसे अधिक प्रताड़ित हो रहे बच्चे

सबसे अधिक संकट कोई झेल रहा है तो वे बच्चे हैं, जिन्हें रात को नींद नहीं और दिन में आराम नहीं। शिक्षा तो जैसे इस संघर्ष के चलते छूट ही गई है। बच्चों का अधिकार क्या होता है, यह यहां के बालकों को शायद ही पता हो! तभी तो बाल अधिकार के अंतर्गत आनेवाली परिभाषा बच्चों को जीवन का अधिकार, भोजन पोषण, स्वास्थ्य, विकास, शिक्षा, पहचान, नाम, राष्ट्रीयता, परिवार, मनोरंजन, सुरक्षा और बच्चों का गैर कानूनी व्यापार के मायने आज उन्हें नहीं मालूम हैं। उन्हें तो यह भी नहीं पता कि चर्च के इस आतंक के कारण उन्हें अभी कितने दिनों तक ऐसे ही खानाबदोश जैसी जिन्दगी बितानी होगी।

बच्चों के साथ हो रहे व्यवहार पर राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) अपनी नजर रखे हुए है। आयोग के अध्येक्ष प्रियंक कानूनगो से इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया है कि पूरे प्रकरण पर नजर बनी हुई है। राज्य सरकार से बच्चों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा जाएगा।

भगवान राम ने सबसे अधिक वनवास का समय यहीं बिताया

इस जिले का इतिहास देखें तो पता चलता है कि भगवान राम ने यहां वनवास काल का सबसे अधिक समय बिताया है। पारंपरिक रूप से यह क्षेत्र रामायण में दंडकारण्य और महाभारत में कोसल साम्राज्य का हिस्सा रहा है। नारायणपुर से 11 किलोमीटर दूर राकस हाड़ा है, श्रीराम ने यहां राक्षसों का विनाश किया था। एक छोटी सी पहाड़ी पर राक्षसों की अस्थियां, पत्थरों के रूप में अब भी मिलती हैं। पत्थर को जब जलाया जाता है या आपस में रगड़ा जाता है तो इनमें हड्डियों जैसी महक आती है। भारत में इस तरह का पाया जानेवाला यह एकमात्र पहला पत्थर है, जिसके जलने से हड्डी की महक आती है। राकस हाड़ा का अर्थ हैं-राक्षस की हड्डियां।

सैकड़ों राक्षसों का वध करने के मौजूद हैं साक्ष्यं

यहां की प्रचलित मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीराम, भैया लक्ष्मण और मां जानकी के साथ सैकड़ों राक्षसों का वध करते नारायणपुर होते हुए छोटे डूंगर पहुंचे थे, यहां से बारसूर, फिर चित्रकूट में चौमास बिताने के बाद इंद्रावती नदी के तट पर बसे गांव नारायण पाल गए। यहां से जगदलपुर होते हुए कूटूबसर की ओर चले गए थे। मतलब यहां के ग्रामीणों के मुताबिक राजा राम के द्वारा इस क्षेत्र में राक्षसों का विनाश किया गया था। फिर आज रामपथगमन के शोधकर्ता भी यही कह रहे हैं । लम्बे समय तक इस क्षेत्र में राम, लक्ष्मण और सीता ने वनवास के दौरान अपना समय गुजारा था।

ईसाईयत से विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक ”मावली मेला” भी संकट में आया

जहां के कण-कण में भगवान राम बसे हैं वहा का जनजाति समाज ईसाई मतान्तरण के विरोध में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने के लिए मजबूर है। प्रचुर वन संपदा और नैसर्गिक सौंदर्य के लिए देश भर में विशेष पहचान रखनेवाले इस नारायणपुर में अपनी संस्कृति को जिंदा रखने के लिए यहां हर साल विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक ”मावली मेला” आयोजित होता है। हजारों साल की इस प्रथा पर भी चर्च के कारण से संकट उत्पन्न हो गया है।

मेले के शुभारंभ के समय रस्म अदायगी में देवी-देवता और आंगादेव के साथ-साथ क्षेत्र के सभी पुजारी बड़ी संख्या में माता मावली के परघाव रस्म अदायगी में शामिल होते हैं और माता मावली का आशीर्वाद लेकर परघाव की रस्म में जुलूस निकालकर बुधवारी बाजार में देवी-देवताओं के मिलन के बाद आड़मावली माता मंदिर के ढाई परिक्रमा की रस्म पूरी करते हैं। शोभा यात्रा के दौरान देवी देवताओ और आंगा देवों का जगह जगह पर मिलन और नाचने गाने का सिलसिला चलता रहता है। इस मेले में यहां की संस्कृति को देखने के लिए महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के कई जिलों के लोगों के साथ ही विदेश से भी लोग आते हैं। मेला क्षेत्र का सबसे बड़ा लोक उत्सव है। लेकिन आज इसी उत्सव को आयोजित करनेवालों का दर्द है कि अब हमारे युवा इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा नहीं ले रहे। घरों में जनसंख्या भले ही बढ़ी हो, लेकिन मेले में आनेवालों की कमी हो रही है। ईसाई मिशनरी के भ्रम एवं जनजाति परम्पयरा से दूर करने की उनकी साजिश में भोला-भाला समाज फंसता जा रहा है। यही कारण है कि आज बस्तर संभाग में ईसाइयों के आतंक के कारण जनजातीय समाज के द्वारा घोषित किए गए बंद एवं चक्काजाम को अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है।

ईसाई छल जारी रहा तो नष्ट हो जाएगी दंडकारण्य संस्कृति

जनजाति समाज ने यूंही किसी घटना के प्रतिकार में बंद का आह्वान नहीं किया, बल्कि इसके पीछे चर्च षड्यंत्रकारियों की वो अनैतिक नीतियां हैं, जिसका बुरा प्रभाव जनजाति समाज पर पड़ रहा है। अब ये इससे पूरी तरह से मुक्त होना चाहते हैं। जनजाति समाज के आज अधिकांश लोग खुले तौर पर यह कहते नजर आ रहे हैं कि जिस तेजी से ईसाई छल एवं मतांतरण का खेल हो रहा है, यदि इसी प्रकार चलता रहा तो हमारी संस्कृति पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। पहले देव उठाने के लिए लोगों की भीड़ लगती थी लेकिन अब लोगों को इसके लिए भी बुलाना पड़ता है। वनवासी समाज हिंसक नहीं है बल्कि उसे अपनी परंपराएं सबसे ज्यादा प्यारी हैं, इसलिए आज वह ईसाई मतांतरण के विरोध में सड़कों पर विरोध करने के लिए मजबूर है।

पहले गरीब और बीमार लोगों को बना रहे शिकार

नारायणपुर में गरांजी गांव निवासी सीताराम पटेल का कहना है कि कोई भी हमारी संस्कृति को नष्ट करने की कोशिश करेगा तो हम उसका विरोध करेंगे । यहां जनजाति समाज का यह भी मानना है कि यदि उनकी जमीन पर गैर वनवासी को दफनाया जाएगा तो उनकी जमीन कलुषित हो जाएगी। देवता नाराज होंगे और उनकी शक्ति भी कम होगी। उनका एक आरोप यह भी है कि चर्च जानेवाले लोगों में एक बात समान रूप से देखी जा सकती कि वह किसी न किसी बीमारी से जूझते नजर आते हैं।

ईसाई मिशनरी सबसे पहले गरीब और बीमार लोगों को ही अपना शिकार बना रही है। लालच देकर बड़े पैमाने पर ईसाई मतांतरण किया जा रहा है। इस साजिश को अंजाम देने के किए ईसाइयों ने जनजातीय किशोरियों, युवतियों को प्रेम जाल में फंसाना शुरू किया है। चंगाई सभा में विभिन्न बीमारियों के ‘ईसाई’ बनने के बाद ठीक हो जाने की बात कही जाती है, जिससे प्रभावित होकर सैकड़ों लोगों ने यहां ईसाई मत अपना लिया है ।

मतांतरित ईसाई बना रहे जनजाति रीति-रिवाजों का मजाक

जनजाति गौरव समाज के अध्यक्ष पुरुषोत्तम शाह का कहना है कि पूरे जिले में ईसाइयों के द्वारा अवैध मतांतरण की गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है, जिससे न सिर्फ समाज में वैमनस्यता बढ़ रहा है, बल्कि मैत्रीपूर्ण संबंध का ताना-बाना भी टूट रहा है। जनजातीय क्षेत्रों में मतांतरित ईसाइयों के द्वारा जनजाति संस्कृति, पूजन पद्धति, परंपरा एवं रीति-रिवाजों का उपहास उड़ाया जा रहा है। आरोप यह भी है कि मूल संस्कृति को मानने वाले जनजाति नागरिकों पर हमला करने के अलावा उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई, जिसके बाद से पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल है।

मूल जनजाति समाज के संरक्षकों का मिशनरी से विरोध स्वाभाविक

सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष बीएस रावते का इस बात पर जोर है कि बस्तर में मतांतरण पहले कभी हिंसक नहीं रहा, जोकि अब होने लगा है। यदि इसी तरह चलता रहा तो बस्‍तर की मूल जनजाति संस्कृीति पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। इसलिए मूल जनजाति समाज के संरक्षकों का मिशनरी से विरोध स्वाभाविक है। सर्व आदिवासी समाज महिला प्रभाग की अध्यक्ष रंजना का चर्च पर आरोप है कि बस्तर संभाग के नारायणपुर जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत एडक़ा के आश्रित ग्राम गौरों में मूल जनजातीय संस्कृति मानने वाले ग्रामीणों पर नव मतांतरित ईसाइयों के समूह ने पादरी के नेतृत्व में प्राणघातक हमला किया। ईसाइयों ने लाठी-डंडों एवं धारदार हथियारों का प्रयोग कर मूल जनजातीय संस्कृति के लोगों के हत्या का प्रयास किया था। बीते 31 दिसंबर और एक जनवरी को ईसाई उपद्रवियों ने आतंक मचाते हुए जनजाति नागरिकों पर जानलेवा हमला किया, जिसमें बड़ी संख्या में जनजाति नागरिक घायल हुए हैं, जिसका कि हम सभी विरोध कर रहे हैं ।

उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद जनजाति समाज ने पुलिस के समक्ष आरोपियों की सूची सौंपी और शिकायत दर्ज कराई। इसके बावजूद पुलिस-प्रशासन ने उचित कार्रवाई नहीं की। इन सभी घटनाक्रमों के चलते जनजाति समाज ने शांतिपूर्ण तरीके से बस्तर संभाग के सभी जिलों में बंद का आह्वान किया, जिसके बाद देखते ही देखते पूरे क्षेत्र में इसका असर दिखाई देने लगा है। वह कहती हैं कि सुकमा एसपी की मतांतरण के संबंध में जारी पत्र को सरकार यदि गंभीरतापूर्वक लेती तो पूरे छत्तीसगढ़ बस्तर संभाग सहित नारायणपुर के भोले-भाले समाज को सड़कों पर नहीं आना पड़ता। जनजाति समाज के हितों की रक्षा करना राज्य सरकार का कर्तव्य है। तत्कालिक एसपी सुकमा ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा था कि स्थानीय आदिवासियों को बहला-फुसलाकर मतांतरण किया जा रहा है। ईसाई मिशनरी मतांतरण के लिए वनवासियों को लगातार प्रेरित कर रहे हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

मतांतरण की अनैतिक गतिविधियां

छत्तीसगढ़ में रोमन कैथोलिक चर्च से जुड़े लोगों की संख्या 2.25 लाख और मेनलाइन चर्च से जुड़े लोगों की संख्या लगभग 1.5 लाख है। इसमें से अधिकांश जनजाति समाज से मतांतरित होकर ईसाई बने हैं। यह लोगों की संख्या आधिकारिक रूप से घोषित ईसाइयों की है जो आधिकारिक रूप से बने चर्चों में जाते हैं। लेकिन राज्य में कई असंगठित पैराचर्च जोकि हर जनजातीय बस्ती में मौजूद हैं। ऐसे असंगठित पैराचर्चों में जानेवाले लोगों की राज्य भर में कुल संख्या 9 लाख है, जिसमें कि बस्तर संभाग के लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। अब ऐसे असंगठित चर्च में रविवार को होनेवाली प्रार्थना सभाओं में गैर-ईसाई जनजातियों को शामिल किया जाता है, जिसके बाद विभिन्न तरीके से उनके मतांतरण की योजना बनाई जाती है। इन असंगठित चर्च के मायाजाल के माध्यम से ही जनजातियों की शुरुआती स्क्रीनिंग होती है, जिसके बाद धन, नौकरी, विवाह, स्वास्थ्य, समाज और अन्य प्रकार के प्रलोभन देकर उन्हें ईसाई बनाया जाता है।

Topics: Conversion Newstribal societyकन्वर्जन समाचारNarayanpur of Lord Ramनारायणपुर में मतांतरणChristians in NarayanpurConversion in Narayanpurचर्च के निशाने पर बस्तरजनजाति समाजभगवान राम का नारायणपुरनारायणपुर में ईसाईबस्तर का नारायणपुरछत्तीसगढ़ समाचारबस्तर समाचारchhattisgarh newsBastar on the target of the church
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदुस्थान समाचार से संबद्ध हैं। [Read more]
Share9TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

आरोपी पुलिस की गिरफ्त में

अकलतरा में पकड़ा गया संदिग्ध ‘स्लीपर सेल’ सदस्य, मोबाइल से मिले पाकिस्तान कनेक्शन के सबूत

प्रतीकात्मक तस्वीर

गाजियाबाद: ईसाई बनने का दबाव’, चर्च ले जाकर किया जाता था ब्रेनवॉश- टीचर का बड़ा आरोप

ईरपानार गांव में आजादी के बाद पहली बार पहुंची बिजली (फोटो- एआई द्वारा निर्मित)

छत्तीसगढ़ के जिस गांव में सूरज ढलते ही छा जाता था अंधेरा, वहां 78 साल बाद पहुंची बिजली, खुशी के मारे नहीं सो पाए लोग

ED raid on Timothy Initiative for illegal foreign funding and tribal conversion in Chhattisgarh

भारत में अमेरिकी डॉलर से जनजाति कन्‍वर्जन : ED की कार्रवाई से बेनकाब ‘चर्च का छल’, 95 करोड़ के सिंडिकेट से चलता था खेल

Lakhpati Didi in Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ का ये छोटा सा गांव बना ‘लखपति ग्राम’, महिलाओं ने चमका दी किस्मत

संस्कृति, आस्था और विज्ञान: कैसे बदल सकता है जनजातीय ज्ञान भारत का भविष्य?

Load More

ताज़ा समाचार

Rajkot Nandini Bosamiya Suicide Case Aslam Hussein Sama Live In Partner Torture Investigation

“पापा मैं जिंदगी की जंग हार गई हूं”: राजकोट में मुस्लिम प्रेमी का टॉर्चर और हिंदू लड़की की मौत, परिजनों को हत्या का शक

Rahul Gandhi

‘कन्फ्यूजन’ या राजनीतिक आरोपों की जल्दबाजी? राहुल गांधी का बयान पर खेद, लेकिन सवाल बरकरार !

Rahul Gandhi

राहुल गांधी ने मानहानि मामले में हाईकोर्ट में लिखित आवेदन देकर बयान पर जताया खेद

50 Years of Emergency India Sunil Ambekar Ram Bahadur Roy Patna Seminar RSS

आपातकाल की सबसे बड़ी सीख : जागरूक समाज ही लोकतंत्र का वास्तविक प्रहरी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

रानी दुर्गावती के नाम पर होगा जबलपुर एयरपोर्ट का नाम, केन्द्र को भेजेंगे प्रस्ताव : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

maharashtra government considers printing bride groom dob on wedding cards

महाराष्ट्र में बाल विवाह पर कड़ा प्रहार: शादी के कार्ड पर छपेगी दूल्हा-दुल्हन की जन्मतिथि! सरकार ला रही नया नियम

israel will not withdraw from southern lebanon defence minister israel katz

‘अमेरिका कहेगा, तब भी नहीं हटेंगे’ : दक्षिणी लेबनान पर इज़राइल का बड़ा एलान

rashtra sevika samiti praveen shiksha varg concludes nagpur shanta kumari

“वैश्विक संघर्षों के बीच हिंदू जीवन-दृष्टि ही दिखाएगी शांति का मार्ग” : प्रमुख संचालिका शांता कुमारी

AAP MLA Chaitar Vasava Bharuch Court Summons Bharuch Police Case Investigation

जेल में बंद AAP विधायक चैतर वसावा की मुश्किलें और बढ़ीं: अब भरूच कोर्ट ने भेजा समन; पुलिस की बदनामी करने का आरोप!

howrah shibpur tmc leader attacks-bjp supporting locality manoj khan

हावड़ा: शिवपुर में TMC नेता की अगुवाई में हुई भारी बमबाजी और फायरिंग, भाजपा नेता थे निशाना, जमकर लगे मजहबी नारे

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies