बाबा की आड़ में बच्चों से छल
July 15, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

बाबा की आड़ में बच्चों से छल

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के एक करीबी मंत्री हैं राजेन्द्र पाल गौतम। पिछले दिनों इन्होंने हिंदुओं को बौद्ध पंथ की दीक्षा दिलाते हुए हिंदू धर्म के विरुद्ध जो कुछ किया, वह आस्था का विषय नहीं था।

Written byहितेश शंकरहितेश शंकर
Oct 18, 2022, 08:00 pm IST
in भारत, विश्लेषण, मत अभिमत, सम्पादकीय, संघ @100, धर्म-संस्कृति, दिल्ली

विश्व हिन्दू सम्मेलन में बौद्ध मत के सर्वोच्च गुरु परमपावन दलाई लामा शामिल हुए थे।
सर्वोच्च बौद्ध गुरु को महादेव के अभिषेक से समस्या नहीं है, मगर केजरीवाल जी
के मंत्री बौद्ध चीवर को ढाल बना हिंदू देवी-देवताओं को अपमानित करते हैं।

देश में त्योहारों की खुशी एवं उत्साह का वातावरण है। परंतु कुछ लोग इसमें कड़वाहट घोलने के लिए बेताब हैं। आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के एक करीबी मंत्री हैं राजेन्द्र पाल गौतम। पिछले दिनों इन्होंने हिंदुओं को बौद्ध पंथ की दीक्षा दिलाते हुए हिंदू धर्म के विरुद्ध जो कुछ किया, वह आस्था का विषय नहीं था। वह समाज में कड़वाहट घोलने वाला एक भौंडा राजनीतिक प्रदर्शन था। उनकी पार्टी हमेशा से यही प्रदर्शन कर रही है, लेकिन राजेन्द्र पाल गौतम इसमें अब तक सबसे आगे निकल गए हैं, बस।

वर्ष 2014 में नई दिल्ली में संपन्न पहले विश्व हिन्दू सम्मेलन में बौद्ध मत के सर्वोच्च गुरु परमपावन दलाई लामा शामिल हुए थे। सर्वोच्च बौद्ध गुरु को महादेव के अभिषेक से समस्या नहीं है, मगर केजरीवाल जी के मंत्री बौद्ध चीवर को ढाल बना हिंदू देवी-देवताओं को अपमानित करते हैं।

राजेंद्र पाल गौतम और उनके जैसे ‘केवल राजनीति’ सोचने वाले लोग किसी भी धर्म, मत, पंथ संप्रदाय के लिए कलंक हैं। ये कौन-से बौद्ध हैं जो चीवर की आड़ लेकर हिन्दुओं को गाली देने का काम करने वाली राजनीति करते हैं, उस राजनीति को पहचानना आवश्यक है।

यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि इसमें उनके साथ इस्लामी उन्मादी भी दिखायी देते हैं और वामपंथी भी सुर से सुर मिलाते हैं। ये सारा काम वे बाबा साहेब को सामने रखकर कर रहे हैं।

इन लोगों से अवश्य पूछा जाना चाहिए कि वे किन बाबा साहेब की बात कर रहे हैं? कोई भी व्यक्ति बाबा साहेब आंबेडकर को कुनबे को तोड़ने वाली फांस के तौर पर कैसे देख या दिखा सकता है? नाना, बाबा तो परिवार को एकजुट करते हैं, परिवार को बांटते नहीं हैं। उसी दृष्टि से बाबा साहेब को देखना पड़ेगा।

हिंदू समाज में कुरीतियां नहीं पैदा हुईं और ऐसा नहीं है कि कुरीतियां समाप्त करने के लिए समाज ने काम नहीं किया। 1 मार्च, 1930 को जिन पुजारियों ने अस्पृश्यों को कालाराम मंदिर में प्रवेश करने से रोका था, उनके पोतों ने सन 2005 में समरसता यात्रा की शुरुआत भी कालाराम मंदिर से ही करवाई थी। दादा इदाते जी के मार्गदर्शन और डॉ. सुवर्णा रावल के नेतृत्व में समरसता यात्रा मंदिर से शुरू हुई। यह बदलाव 75 साल में आया।

बौद्ध मत का चयन क्यों
यहां यह देखना होगा कि जिन बाबासाहेब के नाम पर कड़वाहट घोलने की कोशिश की गई वे बाबासाहेब हिंदू से बौद्ध मत में गए तो क्यों गए? भारत के पंथ से अलग देश वाले किसी पंथ में क्यों नहीं गए? क्योंकि बौद्ध मत में उन्हें मानवता के लिए वह कड़वाहट नहीं दिखती कि दूसरे को नष्ट कर दो, खत्म कर दो।

बाबासाहेब के पास पोप के प्रतिनिधि भी आए थे, निजाम के लोग भी आए थे। दावत हर तरफ से थी। लेकिन उन्होंने सभी को मना किया। उन्होंने लिखा है कि मैं यदि ईसाइयत में गया या इस्लाम स्वीकार किया तो यह देश एक बड़े खतरे में चला जाएगा। इसलिए मैं उसी रास्ते को अपना रहा हूं, जिससे इस देश के मौलिक तत्व-ज्ञान के साथ मैं जुड़ा रहूंगा।

दलाई लामा बौद्ध और हिंदू, दोनों को आध्यात्मिक भाई बताते हैं। हम छोटे भाई हैं, भारत का हिंदू हमारा बड़ा भाई है। यह किसी राजनीतिक सुविधा-असुविधा का प्रश्न नहीं है। बाल्यकाल में ही मातृभूमि के परित्याग के लिए विवश होने वाले दलाई लामा ने शिव पूजन करके ही उनसे विदा मांगी थी।

डॉ. आंबेडकर ने आर्यों के आक्रमण के सिद्धांत को बहुत दृढ़ता से नकारा। उन्होंने सिद्ध किया कि न तो आर्य कोई नस्लसूचक शब्द था और न ही दास और दस्यु शब्दों का अर्थ द्रविड़ों से जुड़ा था। बाद में मैक्समूलर को भी स्वीकार करना पड़ा कि आर्य भाषासूचक शब्द था, न कि नस्लसूचक। चेहरा, बालों और मानवकाया की बनावट के आधार पर भी आर्यों के भिन्न होने की बात डॉ. आंबेडकर ने गलत साबित की।

वस्तुत: बाबासाहेब को एक सुधारक के तौर पर देखना चाहिए। बाबासाहेब ने कहा भी था, ‘मैं हिंदू समाज सुधारक हूं।’ संघर्ष का स्वरूप स्पृश्यता-अस्पृश्यता का न होकर हिंदू सुधार का था, और वही होना चाहिए। उन्होंने कहा भी था, मैं हिंदू धर्म का शत्रु हूं, विध्वंसक हूं-इस प्रकार मुझे लेकर टिप्पणी होती है, लेकिन एक दिन ऐसा आएगा कि मैं हिंदू समाज का उपकारकर्ता हूं, इन्हीं शब्दों में हिंदू मुझे धन्यवाद देंगे।

उनका कहा आज दिख भी रहा है। ऐसा नहीं था कि हिंदू समाज में कुरीतियां नहीं पैदा हुईं और ऐसा नहीं है कि कुरीतियां समाप्त करने के लिए समाज ने काम नहीं किया। 1 मार्च, 1930 को जिन पुजारियों ने अस्पृश्यों को कालाराम मंदिर में प्रवेश करने से रोका था, उनके पोतों ने सन 2005 में समरसता यात्रा की शुरुआत भी कालाराम मंदिर से ही करवाई थी। दादा इदाते जी के मार्गदर्शन और डॉ. सुवर्णा रावल के नेतृत्व में समरसता यात्रा मंदिर से शुरू हुई। यह बदलाव 75 साल में आया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में बाबासाहेब के मन में बहुत जिज्ञासा थी। वे संघ शिविर में भी गए थे। उन्होंने प्रश्न किया कि इनमें अस्पृश्य समाज के कितने स्वयंसेवक हैं? उन्हें उत्तर दिया गया कि इनमें न कोई सवर्ण है, और न कोई अस्पृश्य। जो हैं, वे सिर्फ हिंदू हैं। बाबासाहेब के लिए यह अनूठा अनुभव था। संघ में अस्पृश्यता का कोई नामोनिशान न देखकर वे प्रसन्न हुए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समस्त स्वयंसेवक एकात्मता स्रोत (ठक्करो भीमरावश्व, फुले नारायणो गुरु:) में हर दिन उनका स्मरण करते हैं। डॉ. आंबेडकर ने अनुसूचित जातियों की नाराजगी को कम्युनिज्म के चंगुल में पड़ने से बचा लिया।

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर

मुस्लिम एवं वामपंथ पर बाबासाहेब
अब बात आती है बाबासाहेब की आड़ में हिंदू समाज को तोड़ने की कोशिश करने वाले तबके का साथ कौन दे रहा है? देखेंगे तो यहां इस्लामिक ताकतों और वामपंथियों का गठजोड़ दिखेगा। परंतु बाबासाहेब की क्या राय थी इन दोनों के बारे में?

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने अपनी पुस्तक ‘थॉट्स आन पाकिस्तान’ में मुस्लिम राजनीति के सांप्रदायिक आधार का विस्तृत वर्णन किया है। इस वर्णन से मुस्लिम राजनीति के दो आयाम दृष्टि-गोचर होते हैं- एक आक्रामकता और दूसरा अलगाववाद।

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने कहा- ‘सरसरी दृष्टि से देखने पर भी यह बात स्पष्ट हो जाएगी कि मुसलमानों के प्रति हिन्दू मनोवृत्ति और हिन्दुओं के प्रति मुस्लिम मनोवृत्ति में एक मूलभूत आक्रामक भाव विद्यमान रहता है। हिन्दुओं का आक्रामक भाव एक नई प्रवृत्ति है जिसे उन्होंने हाल ही में विकसित करना प्रारंभ किया है। मुसलमानों की आक्रामक भावना उनकी जन्मजात पूंजी है और हिन्दुओं की तुलना में बहुत प्राचीन काल से उनके पास है।’

डॉ. आंबेडकर कहते हैं, ‘वे जिहाद केवल छेड़ ही नहीं सकते, उसकी सफलता के लिए विदेशी मुस्लिम शक्ति को सहायता के लिए बुला भी सकते हैं। और, इसी प्रकार यदि भारत के विरुद्ध कोई विदेशी मुस्लिम शक्ति ही जिहाद छेड़ना चाहती है, तो मुसलमान उसके प्रयास की सफलता के लिए सहायता भी कर सकते हैं।’

फरवरी, 1942 में मुंबई वसंत व्याख्यानमाला में डॉ. आंबेडकर ने कहा था, इस झूठी धारणा को न पालें कि पाकिस्तान अपने मुस्लिम साम्राज्य को भारत पर फैलाने में समर्थ होगा। हिंदू उन्हें धूल चटा देंगे। मैं मानता हूं कि कुछ बातों पर हिंदुओं का आपसी झगड़ा है लेकिन मैं आपके समक्ष शपथ लेता हूं कि मैं अपनी मातृभूमि के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दूंगा।

आज कई कम्युनिस्ट आंबेडकर का चित्र लगाकर कहते हैं कि वे वर्ग संघर्ष के पुरोधा थे, जबकि आंबेडकर स्वयं को कम्युनिस्टों का कट्टर दुश्मन कहते थे। उनके अनुसार कम्युनिस्ट राजनीतिक स्वार्थ के लिए मजदूरों का शोषण करते थे। वह श्रमिक, मालिक और सरकार, तीनों को अलग नहीं मानते थे और तीनों के मिलकर कार्य करने के पक्षधर थे।

वाम की कठपुतली आआपा
गुजरात आआपा पूरी तरह वामपंथियों का एक छद्म रूप मात्र है। पार्टी के प्रदेश संयोजक गोपाल इटालिया के वामपंथियों और विदेशी संस्थाओं से संबंध प्रमाणित हो चुके हैं। सीएए से लेकर किसान आंदोलन तक में केंद्र सरकार के खिलाफ एजेंडा चलाने में गोपाल संलिप्त पाए गए हैं। 2018 में अहमदाबाद में इटालिया ने शबनम हाशमी के एनजीओ अनहद के कार्यक्रम ‘डिस्मैंटलिंग इंडिया’ में हिस्सा लिया था।

ये वही शबनम हाशमी हैं जो अक्सर हिन्दू विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाई गई हैं। इनके एनजीओ को ईसाई मिशनरियों से संबंधित कई सारे एनजीओ द्वारा पूर्व में फण्ड मिल चुका है। इस कार्यक्रम में अन्य कई वामपंथी और आल्ट न्यूज की स्वामिनी निर्झरी सिन्हा भी उपस्थित थीं। गुजरात दंगों को लेकर भ्रम फैलाने वाली तीस्ता सीतलवाड़ और विदेशी चंदा पाने वाली मेधा पाटकर भी शबनम हाशमी के साथ काम करती हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में बाबासाहेब के मन में बहुत जिज्ञासा थी। वे संघ शिविर में भी गए थे। उन्होंने प्रश्न किया कि इनमें अस्पृश्य समाज के कितने स्वयंसेवक हैं? उन्हें उत्तर दिया गया कि इनमें न कोई सवर्ण है, और न कोई अस्पृश्य। जो हैं, वे सिर्फ हिंदू हैं। बाबासाहेब के लिए यह अनूठा अनुभव था। संघ में अस्पृश्यता का कोई नामोनिशान न देखकर वे प्रसन्न हुए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समस्त स्वयंसेवक एकात्मता स्रोत (ठक्करो भीमरावश्व, फुले नारायणो गुरु:)में हर दिन उनका स्मरण करते हैं। डॉ. आंबेडकर ने अनुसूचित जातियों की नाराजगी को कम्युनिज्म के चंगुल में पड़ने से बचा लिया।

यही इटालिया प्रधानमंत्री के लिए उलटे-सीधे शब्द बोल रहा है, हिन्दू देवी-देवताओं के लिए बोल रहा है। उसका एजेंडा क्या है? इसी गुट की मेधा पाटकर को आआपा द्वारा गुजरात विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाने की बात चल रही थी। यानी गुजरात में आआपा पूरी तरह से विदेशी इशारों पर नाचने वाले वामपंथियों के कब्जे में है!

अब यह पार्टी बाबा साहेब की आड़ लेकर उनके परिवार को बांटने का काम कर रही है। महापुरुषों को बांटा जा सकता है क्या? बाबा तो पूरे परिवार के हैं। ये उसे वर्ग में बांटते हैं और अपने राजनीतिक हित साधते हैं। कम्युनिस्ट यही करते हैं। मुसलमान अपनी ताकत बढ़ाने के लिए करते हैं। आआपा भी यही काम कर रही है।

आआपा ने राजेंद्र पाल गौतम का जो इस्तीफा लिया है, वह शुद्ध वोट बैंक के कारण लिया है, उनकी अक्षमता या भ्रष्टाचार के कारण नहीं। आआपा के लिए अक्षमता और भ्रष्टाचार मुद्दा ही नहीं है। अगर होता तो इससे पहले सत्येन्द्र जैन, सोमनाथ भारती और न जाने कितनों का इस्तीफा ले लिया गया होता। इनको लगा कि इससे गुजरात में चुनावी खेल पलट जाएगा, तो इस्तीफा लेने का स्वांग किया गया। वरना जिन्हें शह देकर ये लोग भ्रष्टाचार करवाते हैं, सामाजिक आचरण से प्रतिकूल आचरण करते हैं और पार्टी किसी को बाहर नहीं निकालती। एक आदमी जिसका दिमाग काम नहीं करता, उसको मंत्री बना रखा है।

दंगा आरोपी और खतरनाक हथियार एकत्रित करने वाले तो आज भी इनके माननीय बने हुए हैं। क्या इन्हें नौटंकी में इस्तेमाल करने के लिए एक राजेन्द्र पाल गौतम ही मिले? यूज एंड थ्रो?

लिहाजा इन्हें छोड़िए। पर्व मनाएं और कड़वाहट से परे मनाएं। भारत की मिष्ठान और पकवानों की एक सुदीर्घ परंपरा रही है। कई लोगों ने यहां की मिष्ठान परंपरा को चहुंओर फैलाने में, भारतीय मिठाइयों की तूती बुलवाने में अपना जीवन खपा दिया। पाञ्चजन्य ने इस अंक में ऐसे ही दिग्गजों और पकवान परंपरा पर यह आयोजन किया है।
आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

@hiteshshankar

Topics: हिंदू समाज में कुरीतियांRashtriya Swayamsevak Sangh Under the guise of Babaहिंदू देवी-देवताबाबा की आड़ में बच्चों से छलdeceiving childrenआम आदमी पार्टीHindu gods and goddessesAam Aadmi PartyHindus of India our elder brotherडॉ. आंबेडकरGuru His Holiness the Dalai Lamaभारत का हिंदू हमारा बड़ा भाईBuddhist sects to Hindusगुरु परमपावन दलाई लामाAgainst Hinduismहिंदुओं को बौद्ध पंथChief Minister Arvind Kejriwalहिंदू धर्म के विरुद्धIslamic fanaticsमुख्यमंत्री अरविंद केजरीवालDr. Ambedkarइस्लामी उन्मादीevils in Hindu societyराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
हितेश शंकर
हितेश शंकर
हितेश शंकर पत्रकारिता का जाना-पहचाना नाम, वर्तमान में पाञ्चजन्य के सम्पादक [Read more]
Share1TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

Bharat Vikas Parishad Membership Campaign RSS Panch Parivartan Sutra Emerging India Social Service

‘उभरते भारत’ में महासंकल्प को तैयार भारत विकास परिषद! 2 लाख परिवारों तक सदस्यता और घर-घर पहुंचेगा ‘पंच परिवर्तन’ सूत्र

Social worker Nand kishore Goynka passes away

प्रसिद्ध समाजसेवी नंदकिशोर गोयंका का 96 वर्ष की आयु में निधन, RSS ने जताया शोक

IB अधिकारी अंकित शर्मा मर्डर केस: ताहिर हुसैन पर कोर्ट के फैसले का BJP ने किया स्वागत, केजरीवाल-कांग्रेस पर साधा निशाना

देशभर में संघ के 95 प्रशिक्षण वर्ग सफल, 18,842 स्वयंसेवक हुए प्रशिक्षित

बहुमत BJP के पास, फिर भी AAP का मेयर कैसे बना? अबोहर चुनाव पर मचा बवाल

Mohan Bhagwat on Mental Health Nagpur Speech Samarpana Wellness Centre RSS

“मोबाइल नहीं, बातचीत से बनेगा मजबूत मन…” नागपुर में बोले मोहन भागवत जी- बच्चे रोते हैं तो फोन मत थमाओ, संवाद करो!

Load More

ताज़ा समाचार

Uttarakhand Voter List 2026 Draft Publication CEO BVRC Purushottam Election Commission Camp

उत्तराखंड में SIR का प्रथम चरण पूरा: 19 लाख वोटरों के डेटा में मिली गड़बड़ी, जानिए कैसे सुधारें अपना नाम!

Punjab Terror Module ISI Drone Dropped Weapons AK 47 LMG Seized Amritsar Rural Police Delhi Threat

Punjab Terror Module: स्वतंत्रता दिवस से पहले ISI की बड़ी साजिश नाकाम! 2 AK-47, 2 LMG राइफलों और बमों के साथ 3 गिरफ्तार

Punjab Drug Bust Amritsar Counter Intelligence Seizes Heroin DGP Gaurav Yadav Pakistan Border Smuggling

पंजाब में सीमापार तस्करी नेटवर्क ध्वस्त! ₹210 करोड़ की 30 KG हेरोइन के साथ 2 तस्कर गिरफ्तार, विदेशी हैंडलर से जुड़े तार

UP Education Services Selection Commission Prayagraj

यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग ने PGT, TET और अन्य परीक्षाओं को लेकर जारी की चेतावनी

Jagannath Rath Yatra Significance Darubrahma Puri Temple King Indradyumna

पुरी रथयात्रा विशेष: भारत की सनातन आस्था का महामहोत्सव है जगन्नाथ स्वामी का रथयात्रा उत्सव

India on PoJK Pakistan Human Rights Violations External Affairs Ministry New Delhi Global Community

पीओजेके को लेकर भारत सख्त, कहा- ‘PoJK में कुकृत्यों के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराए अंतरराष्ट्रीय समुदाय’

International Court Credibility ICJ ICC Bias Debate Global Justice System National Sovereignty Marco Rubio

क्या अंतरराष्ट्रीय न्यायालय भी जवाबदेही से ऊपर हैं? अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर छिड़ी बड़ी बहस!

Afghan Makeup Trend Viral Video Reels Instagram Women Burqa Protest Social Media

क्या है अफ़गान मेकअप ट्रेंड? और क्यों हो रहा है वायरल? बुर्के के पीछे छिपा है ये हैरान करने वाला सच!

CM Pushkar Singh Dhami Swami Ramdev Acharya Balkrishna Harela Parva Malagram Dhanwantari Dham Herbal World

Uttarakhand Harela Parva 2026: मालाग्राम में सीएम पुष्कर सिंह धामी, स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने किया पौधारोपण

Teejan Bai Passes Away Pandavani Singer Lokmanthan Parivar J Nandakumar Tribute Bhopal 2016

लोकसंस्कृति की अमर साधिका तीजन बाई का महाप्रयाण: लोकमंथन परिवार ने दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies