दीदी और दाग
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दीदी और दाग

एक तरफ सीबीआई पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार के कई मामलों की जांच कर रही है तो दूसरी तरफ ईडी भी मनी लान्ड्रिग से जुड़े मामलों के राज खोलने में जुटा है। दिलचस्प बात यह कि इन सभी मामलों में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं-मंत्रियों और राज्य के प्रशासनिक अफसरों की संलिप्तता खुलकर सामने आ रही

Written byअश्वनी मिश्रअश्वनी मिश्र
Sep 13, 2022, 02:21 pm IST
in भारत, विश्लेषण, पश्चिम बंगाल

अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी में काफी समानताएं हैं। दोनों अत्यंत साधारण दिखते हैं। केजरीवाल जहां सामान्य से कपड़े पहने दिखाई देते हैं, वहीं ममता बनर्जी सूती धोती और हवाई चप्पल पहन लुटियन मीडिया को लहालोट करती रहती हैं। ‘सामान्य सी दिखने वाली देश की ताकतवर महिला मुख्यमंत्री’, ‘दिल्ली को देंगी अब टक्कर’, ‘क्या 2024 का लोकसभा चुनाव मोदी बनाम ममता होगा’

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी में काफी समानताएं हैं। दोनों अत्यंत साधारण दिखते हैं। केजरीवाल जहां सामान्य से कपड़े पहने दिखाई देते हैं, वहीं ममता बनर्जी सूती धोती और हवाई चप्पल पहन लुटियन मीडिया को लहालोट करती रहती हैं। ‘सामान्य सी दिखने वाली देश की ताकतवर महिला मुख्यमंत्री’, ‘दिल्ली को देंगी अब टक्कर’, ‘क्या 2024 का लोकसभा चुनाव मोदी बनाम ममता होगा’, क्या दीदी के सामने टिक पाएंगे मोदी-शाह’ आदि शीर्षकों, टीवी बहसों के जरिए मुख्यधारा मीडिया उनके चेहरे को चमकाता रहता है। लेकिन दिल्ली के ‘कट्टर ईमानदार’ मुख्यमंत्री और बंगाल की ‘सादगी से सुसज्जित’ मुख्यमंत्री के चेहरों से उस समय मुखौटा उतर जाता है, जब इनके अधिकतर साथी नेता भ्रष्टाचार के दलदल में धंसे दिखाई देते हैं। कई जेल की हवा खा रहे हैं तो कई ईडी-सीबीआई के निशाने पर हैं। बावजूद दोनों नेता ईमानदारी के प्रमाणपत्र पर अपने हस्ताक्षर कर खुद को निर्दोष साबित करने का हर करतब करते हैं।

बहरहाल, बात ममता के प्रदेश बंगाल की। बात उस बंगाल की जो भ्रष्टाचार के चलते सुर्खियों में रहता है। शायद ही ऐसा कोई दिन जाता होगा, जब राज्य में ईडी और सीबीआई किसी टीमएसी नेता को निशाने पर ना लेती हो। आंकड़ों की बात करें तो सीबीआई राज्य के करीब आधा दर्जन से अधिक मामलों की जांच कर रही है तो ईडी भी मनी लान्डिंÑग से जुड़े कई मामलों के राज खोलने में जुटा है। लेकिन जिस मामले ने ममता सरकार को सबसे ज्यादा समस्या में डाला, वह है स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के जरिये शिक्षकों की नियुक्ति में धांधली का।

इस मामले में ममता के बेहद करीबी और राज्य के शिक्षा मंत्री रहे पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी टीएमसी सरकार के गले की फांस बन गई है। लेकिन इससे भी ज्यादा समस्या खड़ी की, पार्थ की महिला मित्र अर्पिता मुखर्जी ने। जिनके अलग-अलग फ्लैटों से नोटों का पहाड़, बेशकीमती सोने-चांदी के आभूषण और अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी के बाद जो चौंकाने वाले खुलासे किए, उससे साफ हो गया कि ममता के राज में भ्रष्टाचार किस कदर पनपा है। जांच एजेंसी का दावा है कि यह रकम शिक्षक भर्ती घोटाले से जमा की गई है और पार्थ चटर्जी की ही है।

 

‘ममता की सहमति से हो रहा भ्रष्टाचार’

राज्य की स्थितियों पर मालदा उत्तर से भाजपा सांसद खगेन मुर्मू पाञ्चजन्य से बात करते हुए कहते हैं कि बंगाल में इस समय लोकतंत्र का कोई अता-पता नहीं है। 2010 के बाद से टीएमसी का काडर गलत कामों में इतना डूब चुका है कि कुछ भी ठीक होना मुश्किल है। यह बात ममता बनर्जी को पता भी है। लेकिन सब कुछ जानते भी वह कुछ नहीं कर पा रहीं। क्योंकि भ्रष्टाचार से कमाया गया पैसा आधा सरकार को जाता है। वे कहते हैं,‘आज ईडी और सीबीआई की कार्रवाई से वही डरकर भाग रहे हैं, जिन्होंने कुछ गलत किया है। मेरी मांग है कि इन सभी मामलों में ममता बनर्जी के खिलाफ भी सीबीआई और ईडी जांच करे, क्योंकि बिना उनकी सहमति से भ्रष्टाचार हो ही नहीं सकता।’ वे आगे कहते हैं कि,‘टीएमसी के जो नेता भाजपा नेताओं को चोर कह रहे हैं, उनको इसके सुबूत दिखाने चाहिए। अगर वे सबूत नहीं देते हैं तो इसका मतलब है कि वे खुद चोर हैं। जिन टीएमसी नेताओं के घरों, परिचितों के घर से 50-50 करोड़ रुपयों का पहाड़, सोना चांदी मिल रहा है, वे उसे देखकर क्या कहेंगे? ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का 11 मंजिल का घर है। यहां पर सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इतना पैसा कहां से आया? निश्चित रूप से ये भ्रष्टाचार का ही पैसा है। वे कहते हैं कि राज्य की युवा पीढ़ी को नौकरी नहीं मिल रही है और टीएमसी नेताओं के घर से करोड़ों रुपयों के ढेर के ढेर बरामद हो रहे हैं। इसलिए अब राज्य की जनता सरकार की नियत अच्छी तरह समझ चुकी है। अभी तो टीएमसी के कई बड़े नेता इसमें फंसने वाले हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नाक के नीचे इतना बड़ा घोटाला हुआ कैसे ? हालांकि ममता का दावा है कि उन्हें इस घोटाले या बरामद की गई रकम के बारे में कोई जानकारी नहीं है। लेकिन राज्य की जनता इसे मानने को बिल्कुल तैयार नहीं है। क्योंकि भ्रष्टाचार का यह कोई पहला मामला नहीं है।

क्या है एसएससी घोटाला?
दरअसल साल 2016 में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के तहत शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती के लिए स्कूल सेवा आयोग की ओर से परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा का परिणाम 27 नवंबर, 2017 को आया। नतीजों के आधार पर जो मेरिट सूची तैयार की गई थी, उसमें सिलीगुड़ी की रहने वाली बबीता सरकार ने 77 नंबर पाकर शीर्ष 20 में जगह बनाई थी। लेकिन आयोग ने कुछ दिनों बाद बिना किसी कारण से इस मेरिट सूची को रद्द कर दिया और दूसरी मेरिट सूची तैयार की। गौर करने लायक बात यह थी कि नई मेरिट सूची में बबीता का नाम प्रतीक्षा सूची में चला गया और टीएमसी सरकार में मंत्री परेश अधिकारी की बेटी अंकिता अधिकारी का नाम सूची में पहले नंबर पर आ गया। इससे भी दिलचस्प बात यह रही है कि अंकिता को बबीता के मुकाबले 16 नंबर कम मिले। उसके बाद ही धीरे-धीरे घोटाले से परदा उठने लगा। बबीता के पिता ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में दूसरी मेरिट सूची को चुनौती दी।

अदालत ने याचिका पर सुनवाई की और मामले की जांच के लिए न्यायमूर्ति (सेनि.) रंजीत कुमार बाग की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया। समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में घोटाले में शामिल पांच तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश की। उसके बाद उच्च न्यायालय ने मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया। सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की और शिक्षा राज्य मंत्री परेश अधिकारी से लंबी पूछताछ की। इसकी परतें खुलने पर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने परेश अधिकारी की बेटी अंकिता की नियुक्ति को अवैध करार देते हुए उनसे 41 महीने का वेतन दो किस्तों में वसूलने का आदेश दे दिया। अदालत ने उनकी जगह बबीता को नौकरी देने का भी आदेश दिया। इस घोटाले में आर्थिक लेनदेन की खबरें सामने आने के बाद ईडी ने इसकी जांच का काम अपने हाथों में ले लिया और उसके बाद तो राज्य में राजनीतिक भूचाल आ गया। जांच एजेंसियों के अनुसार इस घोटाले के तहत ऐसे 1002 लोगों को नौकरियां दी गई हैं, जो इसके पात्र नहीं थे।

घोटालों का बंगाल मॉडल

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके करीबी जनता की गाढ़ी कमाई को लूटकर भ्रष्टाचार के सारे रिकार्ड तोड़ रहे हैं

कोयला घोटाला
कोयला तस्करी मामला 1300 करोड़ रुपए की काली कमाई से जुड़ा है। खबर है कि इसका बड़ा हिस्सा राज्य के बड़े नेताओं तक पहुंचा है। सीबीआई ने अपनी पहली चार्जशीट में अनूप मांझी सहित 41 लोगों का जिक्र किया है। मामले में सीबीआई और ईडी ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी, उनकी पत्नी रुजीरा बनर्जी सहित कुछ मंत्री और विधायकों से घोटाले में संलिप्तता को लेकर पूछताछ कर रहा है।

पशु तस्करी घोटाला
राज्य के सीमावर्ती इलाकों से बांग्लादेश को होने वाली गोतस्करी का धंधा 20 हजार करोड़ से अधिक का है। इसमें टीएमसी के नेता, अफसर और पुलिस की मिलीभगत है। सीबीआई ने टीएमसी के नेता अणुब्रत मंडल को शिकंजे में लिया हुआ है। साथ ही मंडल के साथ रहने वाले कुछ अन्य लोग भी सीबीआई के निशाने पर हैं। बता दे ं कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश पर उसने 21 सितम्बर, 2020 को भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध तरीके से पशु तस्करी मामले में कुछ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसके बाद उसने मामले के सरगना मोहम्मद इनामुल हक को गिरफ्तार किया था।

शारदा चिटफंड घोटाला
शारदा चिटफंड घोटाला भी ममता सरकार का पीछा नहीं छोड़ रहा। 2006 में सुदीप्त सेन ने शारदा समूह की स्थापना की थी। उन्हें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बेहद करीबी माना जाता है। 4 साल में इस कंपनी ने करीब 40 हजार करोड़ रुपए की कमाई की। अनुमान है कि करीब 2500 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। इस घोटाले में तृणमूल कांग्रेस से 2 बार सांसद रहे कुणाल घोष और श्रीनजाय बोस, बंगाल के पूर्व डी.जी.पी. रजत मजूमदार, फुटबॉल क्लब के देबब्रता सरकार को गिरफ्तार किया गया।

रोज वैली घोटाला
कोलकाता की रोज वैली कंपनी ने 464 करोड़ रुपए का चिटफंड घोटाला किया। सीबीआई ने करोड़ों रुपए के चिटफंड घोटाले के सिलसिले में, रोज वैली समूह के प्रमुख गौतम कुंडु की पत्नी शुभ्रा कुंडु को गिरफ्तार किया। रोज वैली समूह ने हजारों लोगों को निवेश पर अच्छा लाभ देने का झांसा लेकर उनका धन कथित तौर पर हड़प लिया। रोज वैली समूह ने इन योजनाओं के तहत निवेशकों से 12,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि एकत्र की ।

अम्फान घोटाला
यह मामला 2000 करोड़ रुपयों के हेरफेर का बताया जाता है। घोटाला भी उन पैसों का, जो अम्फान तूफान से प्रभावित हुए गरीबों-पीड़ितों के घर बनवाने के लिए थे। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने तो इसे ‘हाई रिस्क फ्रॉड’ कहा है। ये रुपए मई 2020 से जनवरी 2021 के बीच बांटे गए थे। लेकिन सरकार पर पैसे को सही से ना बांटने का आरोप है। खबर है कि लगभग 1500 मामले ऐसे भी पाए गए, जिसमें मौके पर जांच करने वाली टीम को कोई नुकसान नहीं मिला, जबकि उन्हें 94 लाख रुपए का भुगतान किया गया।

 

जब शुरू हुई परतें उघड़ना
सीबीआई ने जब इस मामले को अपने हाथों में लिया और जांच शुरू की तो धीरे-धीरे इसकी परतें उघड़ने लगीं। उन तमाम अधिकारियों के नाम सामने आने लगे, जिन्होंने ‘नेताजी’ के इशारों पर गोलमाल किया था। बाद में कई बार की पूछताछ के बाद सीबीआई-ईडी ने पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार कर लिया। अपने मंत्री की गिरफ्तारी के बाद टीएमसी सहित ममता बनर्जी को सांप सूंघ गया। कई दिनों बाद टीएमसी ने इस पूरे मामले से खुद को अलग कर यह बयान जारी किया कि जिनके घर से रकम बरामद हुई है, वही इसके स्रोत के बारे में बता सकते हैं। पार्टी के प्रवक्ता कुणाल घोष कहते हैं कि इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए।

ममता सरकार ने कार्रवाई करते हुए उन्हें मंत्रिमंडल एवं पार्टी के तमाम पदों से हटा दिया है। हालांकि भाजपा ममता सरकार पर लगातार हमलावर है। राज्य की राजनीति को करीब से देखने वाले पूर्व राज्यपाल एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता तथागत रॉय कहते हैं कि ममता सरकार भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी है। अब उनकी सरकार की सचाई राज्य की जनता के सामने आने लगी है। वे कहते हैं, ‘टीएमसी का भ्रष्टाचार आज से नहीं, 2011 से जारी है। एक घटना याद आती है, जिसमें भ्रष्टाचार के चलते कुछ आरोपितों को पुलिस थाने ले गई थी। लेकिन ममता बनर्जी खुद उन्हें छुड़ाकर बाहर लाई। उसी समय से पुलिस-प्रशासन समझ गया कि भ्रष्टाचार पर क्या करना है। फिर उसके बाद तो धीरे-धीरे राज्य में एक के बाद भ्रष्टाचार और घोटाले होते चले गए। चिटफंड स्कीम में गरीबों का बहुत पैसा मारा गया। ममता के करीबी इसमें लिप्त पाए गए। वरिष्ठ पत्रकार स्वप्न दास गुप्ता कहते हैं कि राज्य का आर्थिक तंत्र चौपट हुआ पड़ा हुआ है, ऐसी बात विपक्षी दलों के नेता भी बोल रहे हैं।

ऐसी स्थिति में बंगाल सरकार के नेता भ्रष्टाचार से कमाया हुआ पैसा ही उपयोग कर रहे हैं। इन नेताओं का जीवन-यापन भ्रष्टाचार के पैसे से ही हो रहा है। इन्होंने राजनीति की आड़ में पैसा कमाने का एक नया तरीका अपना लिया है। आज बंगाल में जो कुछ भी हो रहा है वह भ्रष्टाचार से ही हो रहा है।’ राज्य की टीएमसी सरकार जनता को गुमराह कर रही है। आज यहां का युवा नौकरी और व्यापार के लिए ठोकरें खा रहा है।

ममता के भतीजे अभिषेक निशाने पर

कोयला तस्करी में अभिषेक बनर्जी कर रहे हैं ईडी की जांच का सामना

इन टीएमसी नेताओं से चल रही पूछताछ

अभिषेक बनर्जी: कोयला घोटाले में अभिषेक और उनकी पत्नी रुजिरा ईडी की जांच का सामना कर रहे

मलय घटक: कोयला घोटाले में सीबीआई ने राज्य के कानून मंत्री मलय घटक के आवास पर छापेमारी की। ईडी ने उन्हें 14 सितंबर को पूछताछ के लिए तलब किया है।

पार्थ चटर्जी: शिक्षा घोटाले में फंसे पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी अपनी महिला मित्र अर्पिता मुखर्जी के साथ जेल में है

माणिक भट्टाचार्य: शिक्षक भर्ती मामले में विधायक माणिक भट्टाचार्य ईडी के निशाने पर हैं

विनय मिश्रा: टीएमसी के यूथ विंग के नेता विनय मिश्रा से जुड़ी कंपनी की 13.63 करोड़ रुपए की संपत्ति को ईडी जुलाई, 2022 में अटैच कर चुका है। इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया गया है।

  • इसके अलावा ममता बनर्जी के करीबी एवं टीएमसी के दिग्गज नेताओं में फिरहाद हकीम, ज्योतिप्रिया मलिक, ब्रत्या बासु, अर्जुन सिंह, गौतम देब, इकबाल अहमद, स्वर्ण कमल साहा, अरूप रॉय, जावेद अहमद खान, अमित मित्रा, अब्दुर रजक मोल्ला, राजीब बनर्जी, सेउली शाहा, सब्यासाची दत्ता, बिमान बनर्जी और मदन मित्रा ज्यादा संपत्ति के मामले में फंसे हैं।

तृणमूल के अनेक नेताओं के साथ ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी सीबीआई और ईडी की जांच का सामना कर रहे हैं। ऐसे में ममता बनर्जी का यह दावा खोखला ही नजर आता है कि टीएमसी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता राजश्री हलधर कहते हैं, ‘ममता सरकार में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है। बिना पैसे के कोई काम नहीं होता। टीएमसी के गुंडे हर जगह काबिज हैं। अधिकारी उनके इशारों पर काम करते हैं। आए दिन घोटाले पकड़े जा रहे हैं। यह बात बताने के लिए काफी है कि राज्य की स्थिति क्या है।’

बेहिसाब बढ़ी विधायकों की कमाई
राज्य के करीब दो दर्जन से अधिक टीएमसी नेता, मंत्री और ममता बनर्जी के करीबी ईडी और सीबीआई के निशाने पर हैं। इसके पीछे कारण साफ है कि सत्ता में आने के बाद से टीएमसी के नेता जनता का पैसा लूटने में लगे हैं। 2017 में कोलकाता के एक अधिवक्ता बिप्लव रॉय चौधरी ने एक जनहित याचिका दायर की थी। उन्होंने इसमें कहा था कि 2011 से 2016 के बीच टीएमसी के 19 विधायकों की संपत्ति बेहिसाब बढ़ी है, जिसकी जांच होनी चाहिए। पार्थ चटर्जी की महिला मित्र के पास मिली अकूत संपत्ति के बाद हाईकोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार कर ईडी को जांच में शामिल करने की बात कही है। ईडी से इस बारे में 12 सितंबर तक जवाब मांगा गया है। पश्चिम बंगाल भाजपा के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी इस बेहिसाब बढ़ी कमाई परकहते हैं कि यह सच है कि टीएमसी नेताओं की संपत्ति कई गुना बढ़ी है। यह सपंत्ति उन्होंने लूटकर, भ्रष्टाचार करके कमाई है। यही वजह है कि एक के बाद एक नेता फंसते जा रहे हैं।

बांग्लादेशियों की नियुक्तियों की आशंका
शिक्षक भर्ती भ्रष्टाचार मामले की जांच करते हुए सीबीआई को जानकारी हाथ लगी है कि कुछ बांग्लादेशियों को भी शिक्षक पद पर नियुक्त किया गया है। बता दें कि इन आरोपियों के तार पहले से ही बांग्लादेश से जुड़े हुए थे, लेकिन अब जो जानकारी निकलकर सामने आ रही है वह चौंकाने वाली है। हालांकि अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है। खबरों के अनुसार सीबीआई अधिकारी मामले में बांग्लादेश की संलिप्तता की जांच कर रहे हैं। इस दौरान सीमावर्ती क्षेत्र में रवींद्र मुक्त विद्यालय के कई दस्तावेज जांचकर्ताओं के हाथ लगे हैं। कुछ समय पहले ऐसी शिकायतें आई थीं कि बांग्लादेशी पैसे के बदले उस स्कूल से सर्टिफिकेट हासिल कर लेते थे। उस दस्तावेज को दिखाकर सीबीआई जांच करेगी कि किसी ने पश्चिम बंगाल में उच्च शिक्षा प्राप्त की है या नौकरी की परीक्षा दी है या नहीं। बहरहाल, ईडी और सीबीआई की कार्रवाई ने ममता बनर्जी और टीमएसी नेताओं के चेहरों से वह नकाब उतार फेंकी है, जिसे लगाकर वह राज्य की जनता को छलते थे। अब उनका सच जनता के सामने है।

Topics: शिक्षक भर्ती भ्रष्टाचारममता के भतीजे अभिषेक निशानेएसएससी घोटाला?दीदी और दागमुख्यमंत्री ममता बनर्जी
अश्वनी मिश्र
अश्वनी मिश्र
@kashmirashwaniअश्वनी मिश्र भारत की सबसे पुरानी और व्यापक रूप से प्रसारित राष्ट्रवादी हिंदी साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं. देश के ज्वलंत मुद्दों की ग्राउंड रिपोर्ट करने के साथ ही मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा एवं राजनीतिक मुद्दों के बारे में लिखते हैं. जम्मू—कश्मीर, पश्चिम बंगाल एवं आतंकरोधी घटनाक्रम विशेष रुचि के क्षेत्र हैं. देश की विभिन्न राजनीतिक घटनाओं पर तीक्ष्ण नजर रखते हुए उनका समग्र विश्लेषण पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट स्थान रखता है। भारतीय राजनीति, समाज, खेल, मानवाधिकार क्षेत्र की विशिष्ट विभूतियों से निरंतर साक्षात्कार और चर्चा उनके पत्रकारीय अनुभव को मजबूत बनाती हैं. उनके अनेक आलेखों पर देश के राजनीतिक गलियारों में एक नरैटिव खड़ा हुआ. विभिन्न प्रासंगिक विषयों की रिपोर्ट और आलेखों को संसद के पुस्तकालय में संग्रहणीय तौर पर शामिल किया गया. बंगाल की चुनावी हिंसा की ग्राउंड रिपोर्ट एवं उसके पहले की अनेक हिंसाओं में पीड़ितों के जीवंत साक्षात्कार देशभर में सराहे गए. सोशल मीडिया पर उनकी उपस्थित विशेष दर्जा रखती है. [Read more]
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कालनेमि हटाओ, बेटी बचाओ

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