पुलिस वालों ने कहा, ''तुम लोग हिंदू कार्यकर्ताओं को अपने गांव में क्यों आने दे रहे हो!''
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पुलिस वालों ने कहा, ”तुम लोग हिंदू कार्यकर्ताओं को अपने गांव में क्यों आने दे रहे हो!”

झारखंड में मजहब बदलने से पहले संबंधित जिले के उपायुक्त को आवेदन देना पड़ता है, लेकिन इसके बिना ही कुछ लोग लोभ—लालच से भोले—भाले लोगों का कन्वर्जन कर रहे हैं। जब हिंदुत्वनिष्ठ संगठन के कार्यकर्ता इसका विरोध करते हैं, तो पुलिस वाले गांव वालों से कहते हैं, इन्हें अपने गांव में क्यों आने देते हो!

Written byरितेश कश्यपरितेश कश्यप
Jul 4, 2022, 12:34 pm IST
inभारत, झारखण्‍ड
कन्वर्जन के विरोध में आयोजित बैठक में उपस्थित ग्रामीण

कन्वर्जन के विरोध में आयोजित बैठक में उपस्थित ग्रामीण

हाल ही में गुमला जिले के शिवनाथपुर डहूटोली गांव में दो परिवार के कुछ लोग ईसाई बन गए। इसकी जानकारी हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के कार्यकर्ताओं को हुई तो वे लोग वहां पहुंचे और लोगों को समझाया। इसके बाद गांव वालों ने ईसाई बने लोगों से कहा कि वापस अपने मूल धर्म में आ जाओ। लाख मनाने के बाद भी वे लोग नहीं माने तो गांव वालों ने उन लोगों का सामाजिक ​बहिष्कार कर दिया। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंची। पुलिस ने कन्वर्जन कराने वालों के विरुद्ध कोई कार्रवाई न कर, उल्टे गांव वालों को धमकाया। हमारे सूत्रों ने बताया कि पुलिस ने कुछ ग्रामीणों से कहा, ”तुम लोग अपने गांव में हिंदू कार्यकर्ताओं को क्यों आने देते हो!” इसका कुछ ग्रामीणों ने विरोध किया और पुलिस से उनकी बहस भी हुई। एक ग्रामीण ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि जिस पुलिस का काम अवैध कन्वर्जन रोकने का है, वह कन्वर्जन करने वालों को ही बढ़ावा दे रही है।

बता दें कि हाल ही में शिवनाथपुर डहूटोली गांव के दो परिवारों के कई लोगों को ईसाई बनाया गया है। एक परिवार है स्व. जटा उरांव का और दूसरा परिवार है बंधन उरांव का। पता चला है कि स्व. जटा उरांव की पत्नी बिरसमुनि उरांव, उसके 6 बच्चे और बंधन उरांव, बंधन की पत्नी राजमुनि उरांव और उसके 5 बच्चों को कुछ दिन पहले अंधविश्वास और चंगाई सभा के नाम पर ईसाई बना दिया गया। इस बात की जानकारी जब गांव वालों को हुई तो उन लोगों ने एक बैठक कर इन दोनों परिवारों को अपने समाज में वापस आने को कहा। बहुत समझाने और मनाने के बाद भी ये लोग अपने मूल धर्म में वापस होने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद मामला इतना बढ़ गया कि प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा।
29 जून को गांव वालों ने एक बैठक बुलाई, जिसमें प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचल अधिकारी भी उपस्थित हुए। काफी देर तक चली इस बैठक में ईसाई बने दोनों परिवार शामिल नहीं हुए। इसी से आक्रोशित ग्रामीणों ने इन दोनों परिवारों का सामाजिक बहिष्कार करने की घोषणा कर दी। इसके बाद ईसाई बने परिवारों के लोग खुद अपने घरों में ताला बंद कर गांव से बाहर निकल गए।
इसी क्रम एक बार और प्रशासन की ओर से 2 जुलाई को बैठक आयोजित की गई। बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी मनीष चंद्र लाल, इंस्पेक्टर एसएन मंडल, प्रखंड विकास पदाधिकारी सुनीला खलखो, अंचल अधिकारी अरुणिमा एक्का, सिसई थानेदार अनिल लिंडा, पुसो थानेदार मिचराय पाडेया, मुखिया शिवनाथपुर फ्लोरेंस देवी, मुखिया घाघरा इंद्रपाल भगत सहित तीन गांव की ग्रामसभा, पड़हा के राजा, बेल, कोटवार सहित दर्जनों गांवों के हजारों ग्रामीण शामिल हुए। चार घंटे तक चली इस बैठक में ईसाई बने दोनों परिवारों ने गांव वालों की बात नहीं मानी। इस कारण पड़हा समाज भी इन परिवारों का सामाजिक बहिष्कार करने पर डटा रहा। अंततः बैठक विफल हो गई और प्रशासनिक अधिकारी उक्त परिवार के लोगों को अपने साथ सिसई ले गए।

गांव के बंधु उरांव ने बताया कि कन्वर्जन के लिए बहकाने का काम गांव के ही प्रवीण मिंज और उसकी पत्नी सीता मुनि मिंज कर रही थी। सीता मुनि सैंदा गांव की रहने वाली है। उसने सबसे पहले ईसाई बनकर डहुटोली के प्रवीण मिंज से शादी की। उसी के बहकावे में एक वर्ष से दोनों परिवार के लोग चंगाई सभा में जाया करते थे और अब इन्हें दिग्भ्रमित ईसाई बना दिया गया है।

इस पूरे घटनाक्रम में एक और बात पता चली है कि प्रशासन की ओर से दबाव बनाया जा रहा है कि जनजातीय समाज के गांवों में हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के कार्यकर्ताओं को प्रवेश न करने दिया जाए। इन बातों से अब साफ होता जा रहा है कि कैसे प्रशासन इन जनजातीय समाज के लोगों को बरगलाने का काम कर रहा है। घाघरा पंचायत के सोमेश्वर उरांव ने बताया कि एक तरफ तो भोले—भाले जनजातीय समाज के लोगों को ईसाई मिशनरी के लोग भ्रमित करके ईसाई बना रहे हैं, दूसरी ओर जो लोग इनका विरोध कर रहे हैं, उन्हें पुलिस और प्रशासन की ओर से धमकाया जा रहा है। इसका मतलब तो यही निकलता है कि प्रशासन ही कन्वर्जन को बढ़ावा देकर जनजाति संस्कृति को समाप्त करने का काम कर रहा है।

इतना सब कुछ होने के बाद भी स्थानीय प्रशासन का रवैया आश्चर्यजनक है। गुमला के उपायुक्त सुशांत गौरव का कहना है कि इस मामले की जानकारी उन तक नहीं आई है, लेकिन आने पर निष्पक्ष जांच की जाएगी और उचित कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मनीष चंद्र ने बताया कि इन दोनों परिवारों ने स्वेच्छा से ईसाई मत को अपनाया है और ये लोग अपने समाज में नहीं रहना चाहते हैं। इसके बाद भी गांव वालों ने उनके घरों में ताला लगा दिया। प्रशासनिक अधिकारी गांव वालों को समझाने गए थे। उन्होंने गांव वालों को समझाया लेकिन गांव वाले नहीं मान रहे थे। मनीष चंद्र के अनुसार संविधान में बताया गया है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी मत या मजहब को अपना सकता है, इसकी उसे पूरी स्वतंत्रता है। इसके बाद जब उनसे पूछा गया कि झारखंड में तो कानून है कि कोई व्यक्ति मत परिवर्तन करने से पहले उपायुक्त को आवेदन देगा। इसमें तो ऐसा हुआ नहीं है। फिर प्रशासन की ओर से दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है! इस पर उन्होंने कहा कि इसकी जांच हो रही है। जैसे ही इसकी पुष्टि होगी कार्रवाई की जाएगी।

सिसई प्रखंड की प्रखंड विकास पदाधिकारी सुशीला खालको ने बताया कि इन दोनों परिवारों ने बिना सूचना के लोहरदगा के एक चर्च में जाकर मत परिवर्तन किया है। इसकी जांच—पड़ताल की जा रही है और संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
हिंदू जागरण मंच के झारखंड प्रदेश परावर्तन प्रमुख संजय वर्मा ने शिवनाथपुर की घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि पूरे झारखंड में आए दिन कन्वर्जन की घटनाएं हो रही हैं। जिस प्रशासन को कन्वर्जन करवाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए थी, वह उन लोगों की ही बात कर रहा है, जो बहुत ही दुखद है।

Topics: कन्वर्जनगुमलाशिवनाथपुर
रितेश कश्यप
रितेश कश्यप
डेढ़ दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। राजनीति, सामाजिक और सम-सामायिक मुद्दों पर पैनी नजर। कर्मभूमि झारखंड।   [Read more]
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