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डिजिटल दुनिया में अब एनएफटी की दीवानगी

किसी अनूठी चीज पर मालिकाना हक साबित करने के लिए एनएफटी का चलन तेज हो गया है। इससे एनएफटी सृजित करने का कारोबार बढ़ रहा

Written byबालेन्दु शर्मा दाधीचबालेन्दु शर्मा दाधीच
Apr 19, 2022, 12:13 pm IST
in भारत, विज्ञान और तकनीक

डिजिटल दुनिया में आजकल नॉन फंजीबल टोकन्स (एनएफटी) की दीवानगी फैल रही है। क्या आपने यह खबर पढ़ी है कि 2 साल के एक बच्चे बेन्यामिन अहमद ने कुछ डिजिटल चित्र बनाकर उन्हें 50 लाख डॉलर में बेचा है जो भारतीय मुद्रा में करीब 38 करोड़ रुपये ठहरता है। उसने वियर्ड व्हील्स (अजीब व्हीलें) के नाम से कुछ डिजिटल चित्र बनाए और फिर उन्हें नॉन फंजीबल टोकन में तब्दील करके करोड़ों रुपये कमा लिए। आजकल ऐसे हजारों युवक नॉन फंजीबल टोकन्स का कारोबार कर रहे हैं जिसमें अरबों के वारे-न्यारे हो रहे हैं। क्या आपने कभी कल्पना की थी कि किसी एक जेपीजी इमेज की कीमत लाखों या करोड़ों रुपये हो सकती है? लेकिन यही हो रहा है। इस तरह के चित्रों और दूसरी डिजिटल चीजों को ब्लॉकचेन पर एक अद्वितीय (यूनीक) पहचान के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

डिजिटल प्रमाणपत्र लिखा-पढ़ी के रूप में नहीं बल्कि किसी डिजिटल इमेज (चित्र), वीडियो आदि के रूप में भी हो सकता है। वही एनएफटी कहलाता है। नॉन फंजीबल मतलब पूरी दुनिया में एक ही, यानी कि अद्वितीय। यह एक ऐसी डिजिटल चीज है जिसे इस तरह गढ़ा गया है

ब्लॉकचेन का मतलब एक ऐसे सिस्टम से है जिसके तहत लेन-देन से जुड़ी सूचनाओं को दुनिया भर में फैले हुए अनगिनत कंप्यूटरों पर सहेजा जाता है। इसे पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली का विकल्प माना जाता है। ब्लॉकचेन के तहत सहेजी गई सूचनाएं हमारी बैंकिंग प्रणाली से भी ज्यादा सुरक्षित हैं क्योंकि उन सूचनाओं की अनगिनत प्रतियां दुनिया भर के कंप्यूटरों पर रखी गई हैं। इतने कंप्यूटरों को कोई हैक नहीं कर सकता।

सूचनाओं को सहजने और प्रमाणित करने के स्वतंत्र जरिए के रूप में ब्लॉकचेन की कामयाबी ने और भी कई कल्पनाओं को जन्म दिया है। इनमें से एक है नॉन फंजीबल टोकन या एनएफटी। यहां भी सूचनाओं को ब्लॉकचेन प्रणाली में ही सहेजा जाता है, खासकर ईथीरियम नामक प्रणाली में। क्रिप्टोकरेंसी को तो हम जानते हैं और यह भी जानते हैं कि अगर हमने क्रिप्टोकरेंसी खरीदी है तो उसका हिसाब-किताब ब्लॉकचेन में रखा जाएगा। लेकिन मान लीजिए कि आपने क्रिप्टोकरेंसी नहीं, बल्कि कोई महंगी मूल कलाकृति, ऐतिहासिक महत्व की कोई चीज या फिर कोई यादगार चीज (जैसे किसी बड़ी हस्ती की पहनी हुई कोई खास पोशाक) खरीदी है। यह ऐसी चीज है जो पूरी दुनिया में एक ही है। अब यह बात कैसे प्रमाणित हो कि आप उस वस्तु के मालिक हैं और वही असली चीज है, उसकी नकली कॉपी नहीं।

फिलहाल इसकी कोई व्यवस्था नहीं है सिवाय इसके कि जहां से आपने उसे खरीदा है, वह संस्थान आपको मालिकाने का प्रमाणपत्र दे सकता है या फिर आप कोर्ट में हलफनामा आदि देकर उस पर ठप्पा लगवा सकते हैं। लेकिन कल्पना कीजिए कि अगर इस तरह की अद्वितीय या यूनीक चीजों के बारे में सूचनाओं को सहेजने और प्रमाणित करने का कोई तकनीकी प्लेटफॉर्म बना लिया जाए तो कैसा होगा। यही प्लेटफॉर्म एनएफटी है।

नॉन फंजीबल टोकन नामक प्रणाली के तहत एक तरह का डिजिटल प्रमाणपत्र जारी किया जाता है कि फलां मौलिक चीज, जो दुनिया में सिर्फ एक ही है, आपके पास है। इस डिजिटल प्रमाणपत्र से कोई छेड़छाड़ नहीं हो सकती। एनएफटी को भौतिक चीजों के साथ-साथ वर्चुअल या डिजिटल चीजों से भी जोड़ा जा सकता है। जैसे कुछ समय पहले ट्विटर के संस्थापक जैक डोरसी ने अपनी पहली ट्वीट को 29 लाख डॉलर में एनएफटी के जरिए बेच दिया है। मगर यह कैसे सिद्ध होगा कि यह वही मूल टिप्पणी है क्योंकि कोई भी उसकी प्रतिलिपि बना सकता है।

एनएफटी इसी बात को प्रमाणित करता है कि जैक डोरसी ने यह टिप्पणी बेची है और अब मलेशिया की एक क्रिप्टोकरेंसी कंपनी के सीईओ इसके मालिक हैं। इस सूचना और प्रमाणपत्र की ही कीमत है। अब इसके नए मालिक के सिवा कोई अन्य इसे नहीं बेच सकता। भले लाखों लोगों ने उस मूल ट्वीट को रिट्वीट किया था लेकिन उसका मालिकाना मलेशियाई शख्स के पास है और सिर्फ उसी के पास मौजूद ट्वीट असली मानी जाएगी, दुनिया भर में मौजूद बाकी लाखों ट्वीट नकल मानी जाएंगी।

यह डिजिटल प्रमाणपत्र लिखा-पढ़ी के रूप में नहीं बल्कि किसी डिजिटल इमेज (चित्र), वीडियो आदि के रूप में भी हो सकता है। वही एनएफटी कहलाता है। नॉन फंजीबल मतलब पूरी दुनिया में एक ही, यानी कि अद्वितीय। यह एक ऐसी डिजिटल चीज है जिसे इस तरह गढ़ा गया है कि उसकी प्रतिलिपि न बन सके और इसीलिए यह सुरक्षित है। प्रमाणपत्र के रूप में ऐसे एनएफटी (चित्र, वीडियो, एनिमेशन, इलस्ट्रेशन आदि) की बड़े पैमाने पर जरूरत है ताकि उन्हें ऐसी डिजिटल संपत्तियों से जोड़ा जा सके। इसीलिए दक्ष लोग एनएफटी बनाने तथा उन्हें बेचने में लगे हैं।
(लेखक माइक्रोसॉफ़्ट में निदेशक- भारतीय भाषाएं और सुगम्यता के पद पर कार्यरत विख्यात तकनीकविद् हैं)

Topics: डिजिटल दुनियाडिजिटल प्रमाणपत्रईथीरियम नामक प्रणालीक्रिप्टोकरेंसीब्लॉकचेन प्रणाली
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