समाज को संगठित रखने का एक अवसर है अमृत महोत्सव : दत्तात्रेय होसबाले
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होम भारत

समाज को संगठित रखने का एक अवसर है अमृत महोत्सव : दत्तात्रेय होसबाले

Written byPanchjanyaPanchjanya
Mar 12, 2022, 08:08 am IST
inभारत, संघ @100, दिल्ली
सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले

सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि देश की आजादी का अमृत महोत्सव भारतीय समाज को एक राष्ट्र के रूप में सूत्रबद्ध रखने का एक अवसर है। इसके साथ ही यह राष्ट्र को भविष्य के संकटों से सुरक्षित रखने के लिए ‘स्व’ पर आधारित जीवनदृष्टि को पुनः स्थापित करने की दिशा में पूर्ण प्रतिबद्ध होने का भी अवसर उपलब्ध कराता है। होसबाले ने कर्णावती में तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के दूसरे दिन शनिवार को जारी बयान में यह बात कही।

 

संघ के सरकार्यवाह ने कहा कि अमृत महोत्सव के अवसर पर यह आवश्यक है कि छात्रों और युवाओं को जोड़ते हुए भारत केंद्रित शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन हो। साथ ही भारत को एक ज्ञान सम्पन्न समाज के रूप में विकसित और स्थापित करते हुए विश्वगुरु की भूमिका निभाने के लिए समर्थ बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि यह अवसर शताब्दियों तक चले ऐतिहासिक स्वतंत्रता संग्राम का प्रतिफल और हमारे वीर सेनानियों के त्याग एवं समर्पण का प्रतीक है। स्वतंत्रता आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता थी कि यह केवल राजनीतिक नहीं, अपितु राष्ट्रजीवन के सभी आयामों तथा समाज के सभी वर्गों के सहभाग से हुआ सामाजिक-सांस्कृतिक आंदोलन था। स्वतंत्रता आंदोलन को राष्ट्र के मूल अधिष्ठान यानी राष्ट्रीय “स्व” को उजागर करने के निरंतर प्रयास के रूप में देखना प्रासंगिक होगा।

सरकार्यवाह होसबाले ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन सार्वदेशिक और सर्वसमावेशी था। स्वामी दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविंद आदि आध्यात्मिक नेतृत्व ने देश के जन और जननायकों को ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध सुदीर्घ प्रतिरोध के लिए प्रेरित किया। महिलाओं, जनजातीय समाज और कला, संस्कृति, साहित्य, विज्ञान सहित राष्ट्रजीवन के सभी आयामों में स्वाधीनता की चेतना जागृत हुई। लाल-बाल-पाल, महात्मा गांधी, वीर सावरकर, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, चंद्रशेखर आज़ाद, भगतसिंह, वेलू नाचियार, रानी गाईदिन्ल्यू आदि ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों ने आत्मसम्मान और राष्ट्रभाव की भावना को और प्रबल किया। प्रखर देशभक्त डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के नेतृत्व में स्वयंसेवकों ने भी अपनी भूमिका का निर्वहन किया।

होसबाले ने कहा कि अंग्रेजों ने भारतीयों के एकत्व की मूल भावना पर आघात करके मातृभूमि के साथ उनके भावनात्मक एवं आध्यात्मिक संबंधों को दुर्बल करने का षड्यंत्र किया। उन्होंने हमारी स्वदेशी अर्थव्यवस्था, राजनीतिक व्यवस्था, आस्था-विश्वास और शिक्षा प्रणाली पर प्रहार कर स्व-आधारित तंत्र को सदा के लिए विनष्ट करने का भी प्रयास किया। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में कतिपय कारणों से ‘स्व’ की प्रेरणा क्रमशः क्षीण होते जाने से देश को विभाजन की विभीषिका झेलनी पड़ी। स्वतंत्रता के बाद इस ‘स्व’ की भावना को राष्ट्रजीवन के सभी क्षेत्रों में अभिव्यक्त करने का सुअवसर कितना साध्य हो पाया, इसका आकलन करने का भी यह उचित समय है।

Topics: आजादी का अमृत महोत्सव
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