पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार की हिलती चूलों के बीच एक चर्चा तेजी से चल रही है कि क्या नवाज शरीफ की पाकिस्तानी सियासत में वापसी होने वाली है! और कि, क्या शरीफ फिर से प्रधानमंत्री बनने वाले हैं।
दरअसल इस चर्चा को हवा मीडिया में आईं कुछ रिपोर्ट से भी मिली है कि नवाज शरीफ की लंदन से जल्दी ही वापसी होगी। कहा जा रहा है कि शरीफ और पाकिस्तान की सर्वशक्तिमान सेना के बीच गुपचुप कोई सौदा हुआ है। इस सौदे के तहत उस कानून में फेरबदल कराए जाने की भी संभावना है जिसके तहत शरीफ को पाकिस्तान की संसद से बाहर का रास्ता दिखाया गया था।
बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की सेना संभवत: शरीफ को राजनीति से बाहर करने वाले उस कानून को चुनौती देने की तैयारी कर रही है। पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों से आने वाली हवाएं जहां प्रधानमंत्री इमरान खान और सेनाध्यक्ष कमर जावेद बाजवा के बीच तल्खी बढ़ रही है, वहीं चुनावों की आहट के बीच नवाज शरीफ की सत्ता में वापसी की तरफ संकेत कर रही हैं।
शरीफ को देश के सर्वोच्च न्यायालय ने संसद से जिंदगीभर के लिए बेदखल किया हुआ है। अदालत ने शरीफ को संविधान की धारा 62-1(एफ) के तहत यह सजा सुनाई थी। अब बताया जा रहा है कि सर्वोच्च न्यायालय की बार एसोसिएशन एक मामला दायर करके उक्त धारा के इस प्रकार के इस्तेमाल को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने वाली है।
पाकिस्तान के अखबारों में छप रहे स्तम्भों से साफ है कि पाकिस्तान की सेना इमरान खान की जगह दूसरे चेहरे को ढूंढ रही है। इस बीच में सेना तथा पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच सुलह—सफाई के प्रयास और परवान चढ़ते दिखाई दे रहे हैं। शरीफ को देश के सर्वोच्च न्यायालय ने संसद से जिंदगीभर के लिए बेदखल किया हुआ है। अदालत ने शरीफ को संविधान की धारा 62-1(एफ) के तहत यह सजा सुनाई थी। अब बताया जा रहा है कि सर्वोच्च न्यायालय की बार एसोसिएशन एक मामला दायर करके उक्त धारा के इस प्रकार के इस्तेमाल को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने वाली है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष एहसान भून का कहना है कि इस धारा में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि सांसदों को हमेशा के लिए संसद से बेदखल किया जा सके। भून का यह भी करना है कि इस विषय पर मामला दायर करने का यह अर्थ नहीं है कि इसके पीछे कोई राजनीतिक सूत्र है। लेकिन जानकार मानते हैं कि यह फौज और पूर्व प्रधानमंत्री के बीच बढ़ रही नजदीकी की तरफ इशारा है।
पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार नजम सेठी का कहना है कि इमरान और सेपा प्रमुख के बीच भरोसे की कमी है, जो शरीफ के वक्त भी थी। इधर हाल में हुए निकाय चुनावों में इमरान को अपने ही गढ़ खैबर में जबरदस्त हार का सामना करना पड़ा है, इसके बाद ये अटकलें तेज हो गई हैं कि सेना इमरान का विकल्प देख रही है और शरीफ समीकरण में फिट होते दिख रहे हैं।











