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लोहड़ी : वातावरण को पवित्र  और नकारात्मकता को दूर करने का पर्व

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jan 13, 2022, 02:22 pm IST
in भारत, उत्तराखंड, धर्म-संस्कृति
प्रतीकात्मक चित्र

प्रतीकात्मक चित्र

सूर्य ढलते ही सांझ को घरों के अहाते, मोहल्लों, चौराहे, खलियान में सामूहिक रूप से अग्नि प्रज्वलित कर पहले सर्दियों के मेवे जैसे मूंगफली, तिल, गजक, रेवड़ी, पॉपकॉर्न को अग्नि को समर्पित कर फिर प्रसाद वितरण किया जाता है।

 

डॉ रचना अरोरा

पूस मास की कड़ाके की ठंड, कोहरे के बाद आखिरी दिन और माघ महीने की शुरुआत से पहले यानी 13 जनवरी को खुशियों, उमंग, उल्लास से पंजाबियों का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार लोहड़ी धार्मिक, आर्थिक, सामाजिक एवं कृषि क्षेत्र में भी अपनी एक अलग पहचान रखता है। वैज्ञानिक दृष्टि (भौगोलिक आंकड़ों ) के अनुसार सूरज अपनी कक्षा को बदलकर उत्तरायण में प्रवेश करता है, जिससे पृथ्वी पर सूर्य ग्रह की किरणें ज्यादा प्रभावशाली एवं गर्माहट लिए होने के कारण मौसम-वायु में परिवर्तन लाते हैं और लोग धार्मिक भावनाओं और रीति-रिवाज के चलते घने कोहरे ठंड से निजात पाने के लिए अग्नि एवं सूर्य देवता की पूजा करते हैं। अग्नि प्रज्वलन शीत के साथ कई कीटाणुओं का नाश कर के जीवन एवं स्वास्थ्य के साथ समृद्धि एवं पवित्रता से संबंध माना जाता है। लोहड़ी त्योहार गर्मजोशी उमंगों नाच गाने एवं सामूहिक मेलजोल का प्रतीक है। कई दिन पहले से ही कानों में लोकगीत सुनाई पड़ते हैं एवं प्रथा के अनुसार बच्चे, युवक आसपास पड़ोसियों के दरवाजे थपथपा कर घंटी बजाकर लोहड़ी के गीत गाकर लोहड़ी मांगते हैं और लोहड़ी में मूंगफली रेवड़ी, गजक, तिल- गुड़ एवं पॉपकॉर्न और पैसे एकत्र करके शुभकामनाएं व दुआएं दी जाती हैं।

सूर्य ढलते ही सांझ को घरों के अहाते, मोहल्लों, चौराहे, खलियान में सामूहिक रूप से अग्नि प्रज्वलित कर पहले सर्दियों के मेवे जैसे मूंगफली, तिल, गजक, रेवड़ी, पॉपकॉर्न को अग्नि को समर्पित कर फिर प्रसाद वितरण किया जाता है। अग्नि की परिक्रमा करके मंत्रोच्चारण करके शीतकाल को विदा एवं बसंत की मीठी ऋतु का स्वागत करने के लिए नृत्य, संगीत, भांगड़ा, गिद्दा आदि कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। गांव में खेतों में रबी की फसल कटने के बाद ,आने वाले वर्ष में और हरे भरे खेत फसलों से फलने-फूलने की कामना की जाती है। कई जगह शहरीकरण के कारण एवं विदेशों में भी लोहड़ी उत्सव मेला सह भोज का भव्य आयोजन कर पंजाब की संस्कृति-परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए एवं आपसी सौहार्द के सभी जाति के लोग मिलजुल कर इस त्योहार को अपनी गरिमा में चांद लगा देते हैं।
लोहड़ी विशेषकर नवविवाहित जोड़ो एवं नवजात शिशु, यानी विवाह एवं शिशु के जन्म के बाद परिवार में पहली 13 जनवरी को विशेष रूप से धूमधाम एवं भव्य रूप से मनाई जाती है एवं धन समृद्धि के आशीर्वाद शगुन उपहार दिए जाते हैं। इस पर्व का विशेष एवं लोकप्रिय गीत
 

सुंदरी मुंदरी- होए .
तेरा कौन विचारा -होए दुल्ला भट्टी वाला -होए 
दूल्हे दी धी ब्याई -होए
 सेर शक्कर पाई- होए
 चाचा चूरी कुट्टी- होए 
जमादार लूटी होए 
आदि-आदि सानू दे लोहड़ी
 ते तेरी जीवे जोड़ी 

उपरोक्त गीत युवक लड़के गाते हैं और पैसे उपहार लेकर दुआएं देते हैं। लोहड़ी मनाई जाने के पीछे जो सबसे प्रचलित कथा या कारण है कि जो लोहड़ी में गाए जाने वाले गीतों के माध्यम से हर वर्ष याद किया जाता है कि मुगल साम्राज्य के समय किसी जनजाति में दो अनाथ सुंदरी व मुंदरी थी उसी गांव के एक लुटेरे जिसका नाम दुल्ला भट्टी जो अमीरों को लूटकर गरीबों की मदद करता था। मानवता एवं बहादुरी की मिसाल कायम करते हुए उन दोनों बहनों को पिता की तरह जमीदारों- दबंगों के कहर से बचाकर और सब गांव वालों के साथ मिलकर धूमधाम से विवाह कराकर विदा किया था तभी से हर वर्ष लोहड़ी में दुल्ला भट्टी एवं भाईचारे को याद व धन्यवाद दिया जाता है। कुल मिलाकर अनेक तरह की कहावतों एवं लोकगीतों में बस शुभकामनाएं, दुआएं आशीर्वाद ही छलकते हैं। हंसी ठिठोली अपनापन मेल मिलाप, हर्ष, उल्लास और एक साथ बैठकर मूंगफली, रेवड़ी का लुत्फ उठाना।  'तिल जैसे दिन बढ़े रात घटे'  बोलकर सर्दी को दूर भगाना  और साथ-साथ दिलो दिमाग से नकारात्मकता खत्म करके अगली सुबह मकर संक्रांति के दिन का सूरज की नई किरणों का गर्मजोशी से स्वागत के सारे शुभ कार्यों की शुरुआत करना। मानो लोहड़ी अग्नि ने सारे वातावरण को पवित्र  व गर्म करके नकारात्मकता को दूर करके सबके लिए ऊर्जा एवं शुभ कार्यों के लिए दरवाजे खोल दिए हो क्योंकि 14 जनवरी उत्तरायण से शुभ विवाह, मकान प्रतिष्ठा मुहूर्त आरंभ हो जाते हैं। वक्त के साथ-साथ शहरीकरण व महामारी के चलते इस ऊर्जा से भरे त्यौहार में भी औपचारिकता बढ़ी,  लोकगीत गाकर सांझी लोहड़ी मनाना- मांगना आदि परंपराएं कम हुई परंतु इन सबके बावजूद यह अनूठा त्यौहार लोहड़ी ढेरों दुआएं- शुभकामनाएं, अपनापन, सामूहिक जश्न, सकारात्मक ऊर्जा, गर्मजोशी नयापन लेकर आता है। सभी को लोहड़ी की शुभकामनाएं…. हम सभी महामारी के चलते अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहकर अपनी परंपराओं का निर्वाह करें

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