पाकिस्तान एकदम कंगाल हो चुका है। वह जैसे—तैसे कटोरा बढ़ाकर कभी खाड़ी देशों से तो कभी विश्व बैंक से कुछ पैसे पा जाता है और कुछ हफ्ते तक अपनी गुजर कर लेता है। आम पाकिस्तानी खाने की चीजों के आसमान छूते दामों से बेहाल हैं तो सरकारी कर्मचारियों को अगले महीने के वेतन की चिंता सताने लगती है। हालत इतनी बदतर है कि देश के पास सेना के साजोसामान के लिए भी पैसे नहीं हैं। यही वजह है कि अब उसने उपयोग किए जा चुके पुराने माइन हंटर जहाज खरीदने का फैसला किया है। नीदरलैंड की सरकार सेवा से निकाले जा चुके अपने दो माइन हंटर जहाज पाकिस्तान को बेचने को राजी हो चुकी है।
पता चला है कि डच सरकार उपयोग से बाहर हुए अपने दो रॉयल नीदरलैंड नेवी के ट्राइपारटाइट श्रेणी के माइन हंटर्स पाकिस्तान को बेचने जा रही है। साफ है कि डावांडोल अर्थव्यवस्था की वजह से पाकिस्तानी सेना का खर्चा निकलना भारी पड़ रहा है। कंगाल अर्थव्यवस्था से पाकिस्तान की नौसेना के हाल भी खस्ता है, उस पर इसका सीधा असर इस नए सौदे की रोशनी में देखा जा सकता है।
रक्षा विशेषज्ञ डि वैलेरियो फैब्री ने अपने एक लेख में लिखा है कि पाकिस्तान की नौसेना ने अभी कुछ हफ्ते पहले ही नीदरलैंड में उपयोग से बाहर हुए जहाजों को खरीदने की पुष्टि की थी। बताते हैं, ये जहाज फरवरी 2022 में पाकिस्तानी नौसेना के बेड़े से जुड़ जाएंगे। इन माइन हंटर जहाजों को नीदरलैंड, फ्रांस तथा बेल्जियम ने मिलकर विकसित किया है।
रक्षा विशेषज्ञ डि वैलेरियो फैब्री ने अपने एक लेख में लिखा है कि पाकिस्तान की नौसेना ने अभी कुछ हफ्ते पहले ही नीदरलैंड में उपयोग से बाहर हुए जहाजों को खरीदने की पुष्टि की थी। बताते हैं, ये जहाज फरवरी 2022 में पाकिस्तानी नौसेना के बेड़े से जुड़ जाएंगे। इन माइन हंटर जहाजों को नीदरलैंड, फ्रांस तथा बेल्जियम ने मिलकर विकसित किया है, इन्हें अनुसंधान से लेकर बनाने तक का खर्चा मिलकर उठाया था।
इस संबंध में प्रकाशित एक रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान के पास फिलहाल तीन ट्राइपारटाइट श्रेणी के माइन हंटर जहाज हैं, जो फ्रांस से खरीदे गए थे। आगे चलकर इनके नाम बदल दिए गए और नए नाम, मुंसिफ श्रेणी माइंस्वीपर रखे गए।
दरअसल माइन हंटर जहाज वह होता है जो दुश्मनों की माइनों या सुरंगों का पता लगाता है। इस कार्य में दक्ष जहाज 'इमेजिंग सोनार' के माध्यम से लक्ष्य को ढूंढकर उसकी पहचान करते हैं।











