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गोतस्करों ने बताया कि गोतस्करी के लिए झारखंड पुलिस को हर गोवंश पर 50 रु. देने पड़ते हैं

Written byअरुण कुमार सिंहअरुण कुमार सिंह
Dec 20, 2021, 03:47 pm IST
in भारत, बिहार
गोरक्षकों के समर्थन में आयोजित एक पंचायत में शामिल लोग

गोरक्षकों के समर्थन में आयोजित एक पंचायत में शामिल लोग

झारखंड के चाईबासा और सिमडेगा जिले के कुछ गोतस्करों ने स्वीकारा है कि गोतस्करी के लिए वे हर थाने में प्रत्येक गोवंश पर 50 रु. देते हैं। यही कारण है कि झारखंड में गोतस्करी चरम पर है और जो लोग इसे रोकने की मांग करते हैं, उन पर ही पुलिस किसी न किसी बहाने कोई मुकदमा दर्ज करवा देती है।

हाल ही में चाईबासा जिले में कुछ गोतस्कर छह गोरक्षकों का अपहरण कर उन्हें अज्ञात स्थान पर ले जा रहे थे, तभी एक गोतस्कर के पास किसी का फोन आया। इसके बाद उस तस्कर ने अपने साथियों से कहा कि बड़ा बाबू का फोन आया है कि गोरक्षकों छोड़ दो। फिर क्या था गोरक्षकों को बीच रास्ते में ही धक्के देकर गाड़ी से उतार कर गोतस्कर भाग गए। बड़ा बाबू यानी उस इलाके का थानेदार। यह घटना है आनंदपुर थाने की। गोतस्कर के कहने का अर्थ तो यही निकलता है कि आनंदपुर के थाना प्रभारी का उसके पास फोन आया। यानी गोतस्करों का मोबाइल नंबर पुलिस के पास है और हो सकता है कि गोतस्करों के पास भी पुलिस का नंबर होगा। इसलिए स्थानीय लोगों का आरोप है कि गोतस्कर पुलिस की देखरेख में गोतस्करी करते हैं। चाईबासा के अनेक लोगों ने बताया कि इस इलाके में यह चर्चा आम है कि गोतस्कर हर थाने को प्रत्येक गोवंश के लिए 50 रु. देते हैं और इसके बाद निडरता से गोतस्करी करते हैं। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि कुछ दिन पहले लोगों ने कुछ गोतस्करों को पकड़ा था। उन लोगों से जब कड़ाई से पूछताछ की गई तो उन्हीं लोगों ने बताया कि वे लोग हर थाने को एक गोवंश के लिए 50 रु. देते हैं। इसके बाद ही वे गोतस्करी कर पाते हैं। 
यानी गोतस्करों को पुलिस की शह मिली हुई है। इस कारण गोतस्कर गोरक्षकों पर हमला करने से भी नहीं चूकते हैं। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले चाईबासा और सिमडेगा जिले के कुछ गोरक्षकों को पता चला था कि गोतस्कर ओडिशा की ओर से लगभग 2,500 गोवंश लेकर झारखंड की ओर आ रहे हैं। इस सूचना के बाद 17 गोरक्षक चाईबासा जिले के बोड़ेसा गांव के पास शाम को पहुंचे। कुछ ही देर में उन्होंने गोवंश के एक बड़े झुंड को देखा। उस झुंड को लगभग 100 गोतस्कर हांक रहे थे। गोरक्षकों को देखकर तस्करों ने उन पर हमला कर दिया। सभी को पकड़ कर बुरी तरह पीटा गया। 11 गोरक्षक किसी तरह उनसे छूट कर भाग गए और शेष छह का उन्होंने अपहरण कर लिया। इसके बाद एक स्कोर्पियों गाड़ी में बैठाकर उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर ले जाने लगे, ताकि उनकी हत्या की जा सकेे। इसी बीच एक गोतस्कर के मोबाइल की घंटी बजी और इसके बाद उन लोगों ने गोरक्षकों को वहीं धक्के देकर गाड़ी से उतार दिया। 
दूसरे दिन स्थानीय लोगों ने गोतस्करों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग प्रशासन से की, लेकिन कई दिनों तक गोतस्करों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे उनका हौसला बढ़ा और कई गोतस्करों ने हिंदू जागरण मंच, झारखंड प्रदेश के परावर्तन प्रमुख संजय कुमार वर्मा को फोन पर जान से मारने की धमकी देना शुरू किया। बता दें कि वर्मा के नेतृत्व में ही गोरक्षकों ने गोतस्करों के विरुद्ध अभियान छेड़ा हुआ है। वर्मा ने इस धमकी के बारे में पुलिस को बताया। इसके बावजूद गोतस्करों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद प्रशासन पर दबाव डालने के लिए सिमडेगा जिले के कुछ संगठनों के कार्यकर्ताओं ने निर्णय लिया कि वे स्थानीय बाजार का बहिष्कार करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि किसी पर बाजार न जाने का कोई दबाव नहीं है। इसे दुकानदारों और अन्य गोभक्तों ने भी समर्थन दिया और बाजार पूरी तरह बंद रहा। लेकिन लोगों का कहना है कि पुलिस ने कुछ दुकानदारों से यह कहवाया कि उन्हें जबरन दुकान बंद करने के लिए कहा गया और कुछ कार्यकर्ताओं पर मुकदमा दर्ज कर लिया। लेकिन बिरदा ओपी के प्रभारी अंशु कुमार झा पुलिस पर लगे आरोपों को सही नहीं मानते हैं। उन्होंने बताया कि कई दुकानदारों ने खुद ही पुलिस से कहा कि वे दुकान बंद नहीं करना चाहते हैं। इसलिए पुलिस ने उन दुकानदारों को दुकान खोलने को कहा। लेकिन आम लोग पुलिस के इस तर्क को नहीं मान रहे हैं। उनका साफ कहना है कि पुलिस ही गोतस्करों को बचा रही है। 
इस कारण पुलिस के विरुद्ध आम लोगों में गुस्सा है। कई स्थानों पर लोगों ने प्रदर्शन किया है। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ निर्मल सिंह कहते हैं कि यदि गोतस्करों के विरुद्ध जल्दी ही कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज हो जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी

अरुण कुमार सिंह
अरुण कुमार सिंह
समाचार संपादक, पाञ्चजन्य | अरुण कुमार सिंह लगभग 25 वर्ष से पत्रकारिता में हैं। वर्तमान में साप्ताहिक पाञ्चजन्य के समाचार संपादक हैं। [Read more]
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