केरल : हिंदू आबादी गिरकर आधे पर आई
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होम भारत

केरल : हिंदू आबादी गिरकर आधे पर आई

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jul 21, 2021, 12:23 pm IST
in भारत, केरल

टी सतीशन


केरल में जनांकिकी इस कदर बदल चुकी है कि 300 वर्ष पहले 99 प्रतिशत हिंदू जनसंख्या वाले इस राज्य में 1901 में हिंदू मात्र दो तिहाई रह गए और आज राज्य की जनसंख्या में हिंदुओं की हिस्सेदारी घटकर आधे पर आ गई है। हाल यह है कि व्यवसाय और वित्तीय तंत्र मुस्लिमों के हाथ में चला गया है। जानकार बताते हैं कि कन्वर्जन के लिए इस राज्य के युवाओं पर आईएस की नजर है

हिदुओं के ईसाई और मुस्लिम समुदायों में कन्वर्जन को लेकर हिंदू नेताओं ने हमेशा चिंता व्यक्त की है। वे 'लव जिहाद' और दलित हिंदुओं के ईसाई और इस्लाम में कन्वर्जन का जिक्र करते रहे हैं। बुनियादी रूप से हमारे पास जो आंकड़े हैं, वे 2011 जनगणना के हैं जिसके अनुसार केरल की जनसंख्या 3.5 करोड़ है जिसमें प्रमुख पंथों-मतों-मजहबों के मतावलंबियों का अनुपात इस प्रकार है :

हिंदू 52 प्रतिशत, मुस्लिम 27 प्रतिशत, ईसाई 18-19 प्रतिशत
लेकिन वास्तविक आंकड़ों का रूप बिल्कुल अलग हो सकता है; अधिकांश कन्वर्टिड लोग इसका खुलासा नहीं करते। इसका अहम कारण है जाति आधारित आरक्षण की सुविधा खोने का डर। इसलिए, भले ही पड़ोसियों को किसी के कन्वर्जन के बारे में पता हो, अगर उसने अपना निवास बदल लिया तो उसके कन्वर्टिड होने का राज खुलने का डर खत्म हो गया। अगर वह दूसरे जिले में चला गया तो अपने कन्वर्जन की बात को छिपाना उसके लिए और सुविधाजनक हो जाता है।

केरल में जनगणना करने वालों के साथ मुसलमान सहयोग नहीं कर रहे जिससे जनगणना के सही आंकड़ों को इकट्ठा करना मुश्किल हो रहा है। उदाहरण के लिए, केरल सरकार ने प्रमुख धर्मों के पूजा स्थलों के आंकड़े तैयार करने का फैसला किया था। हिंदुओं और ईसाइयों ने तो इस पहल के साथ सहयोग किया, लेकिन मुसलमानों का रुख उलटा रहा। इसलिए प्रयास सफल नहीं हुआ।
2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता ओमन चांडी ने सदन में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए निम्नलिखित बातों का खुलासा किया था। विभिन्न धर्मों के 6,000 लोग इस्लाम में कन्वर्टिड हुए, 156 ईसाई कन्वर्जन और उसी अवधि में 78 लोगों ने हिंदू धर्म को अपनाया।

मुस्लिम मानसिकता
गौरतलब है कि मुस्लिम समुदाय की मानसिकता के बारे में दुनिया भर ने समान रूप से एक दिलचस्पी महसूस की है। इसे इस तरह समझा जा सकता है :
अगर मुसलमान आबादी के 3 प्रतिशत हैं, तो वे अच्छे, सौम्य और कानून का पालन करते दिखते हैं। अगर वे 3 प्रतिशत से ऊपर हैं, तो अपनी अमीरी का दिखावा करते हैं। अगर उनकी बढ़त 8 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक है, तो वे अपने लिए मजहबी आरक्षण का मुद्दा उठाने के लिए तैयार रहते हैं और जब वे 30-35 प्रतिशत पर पहुंचते हैं तो देश की राजनीति को नियंत्रित करने लगते हैं।

आज भारत में मुस्लिम आबादी काफी प्रभावशाली रूप ले चुकी है। वे वर्चस्व के लिए तेजी से ऊपर की बढ़ने के साथ अपना दायरा भी बढ़ाते जाते हैं। केरल में व्यावसायिक गतिविधियों और वित्तीय क्षेत्रों में प्रमुख लोग मुसलमान हैं। आप किसी भी गली में कदम रखें तो उसमें हर तीसरा पुरुष या महिला मुस्लिम है।
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को ज्यादा समर्थन उन्हीं हिंदुओं से मिल रहा है जो अपनी धार्मिक पहचान और हिंदी भाषा को सच्ची भारतीयता मानते हैं। 2019 के राष्ट्रीय चुनावों में भाजपा को वोट देने वाले 60% हिंदू मतदाता उपरोक्त वैचारिक समूह से ही थे।

केरल में लव जिहाद के 6,000 मामले
हिंदू ऐक्यवेदी (संयुक्त हिंदू मंच) के नेता आर.वी. बाबू ने इस संवाददाता को बताया कि ‘लव जिहाद’ के बावजूद मुसलमान हिंदू समुदाय को संख्यात्मक रूप से कमजोर बनाने में सफल नहीं हुए हैं। ईसाइयों का धर्मांतरण अभियान पेंटेकोस्टल समूहों से है। प्रमुख ईसाई चर्च जैसे रोमन कैथोलिक, लैटिन कैथोलिक आदि  धर्मांतरण कराने में सक्रिय नहीं हैं। केरल में ‘लव जिहाद’ के करीब 6,000 मामले सामने आए, लेकिन, इससे हिंदू समुदाय का संख्यात्मक आंकड़ा अप्रभावित रहा। रा.स्व.संघ,भाजपा, विहिप, हिंदू ऐक्यवेदी आदि की सक्रिय भूमिकाओं ने इस संबंध में हिंदू समुदाय में सकारात्मक जागरूकता पैदा की है।

पहचान छिपाते कन्वर्टिड लोग
हिंदुओं के दूसरे समुदायों में कन्वर्जन से हिंदू आबादी पर होने वाले प्रभाव के आकलन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कन्वर्टिड लोग अपना नाम बदलने और कन्वर्जन की बात पर मौन साधे रहते हैं। इसके पीछे उनके निहित स्वार्थ हैं जैसे शिक्षा और रोजगार में आरक्षण के लाभ से वंचित होने का संभावित नुकसान,  साथ ही अपने हिंदू रिश्तेदारों और पूर्व धार्मिक और जातिगत समाज के बीच सामाजिक शार्मिंदगी का एहसास।
इसलिए, वे चर्च तो जाते ही हैं, साथ में मंदिर भी जाते हैं। हिंदू, जो मूल रूप से पूरी दुनिया में सबसे सहिष्णु समाज है, बिना किसी आपत्ति इसे स्वीकार कर लेते हैं। चर्च के मठाधीशों ने ईसाइयत को अपनाने वाले नए लोगों को यही हिदायत दे रखी है ताकि उन्हें पूरे हिंदू समुदाय के क्रोध का सामना न करना पड़े।
हालांकि, कन्वर्जन का प्रभाव बाहरी तौर पर बेशक न्यूनतम दिखे, केरल में यह एक चिंताजनक वास्तविकता है। हाल ही में सेवानिवृत्त केरल पुलिस के प्रमुख एल.एन. बेहरा ने अपनी सेवानिवृत्ति की पूर्व संध्या पर मीडिया को बताया कि राज्य में 'लव जिहाद' की खबरें हैं। उन्होंने यह बात स्वीकार करते हुए कहा कि केरल में आईएस सक्रिय है और उसने शिक्षित केरलवासियों पर आईएस ने नजरें गड़ा रखी हैं।
चूंकि आरएसएस और संघ विचारधारा वाले संगठनों का हिंदू समाज पर बड़ा प्रभाव है, इसलिए बुरी ताकतों को हिंदुओं को कन्वर्टिड करने में मुश्किल होती है, जो केरल में पहले उनके लिए आसान था। दलित हिंदुओं के बीच आरएसएस का प्रभाव इतना मजबूत है कि वे सांप्रदायिकतावादी मंसूबों के जाल में आसानी से नहीं फंसते।  ल्ल

केरल की जनांकिकी में यूं हुआ परिवर्तन
केरल भारत का ऐसा राज्य है जहां सबसे पहला चर्च बना और फिर सबसे पहली मस्जिद बनी। इसका राज्य की जनांकिकी पर क्या असर हुआ, यह आंकड़ों की जबानी समझ सकते हैं।

   300 वर्ष पहले राज्य की आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 99 प्रतिशत थी। 1901 में, राज्य की आबादी में हिंदू 68.5 प्रतिशत रह गए। इस दौरान मुस्लिम 17.5 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे नंबर पर थे जबकि तीसरा प्रभावशाली समुदाय ईसाइयों का था, जिनकी आबादी में हिस्सेदारी 14 प्रतिशत थी।
1961 तक, केरल में हिंदू आबादी गिरकर 60.9 प्रतिशत पर चली गई तो  मुस्लिमों की हिस्सेदारी मामूली बढ़कर 17.9 प्रतिशत हो गई। लेकिन, ईसाई आबादी बड़ी तेजी से बढ़ी और 21.2 प्रतिशत पर पहुंच गई। उन्होंने कुल आबादी में मुसलमानों को दूसरे नंबर से बेदखल कर दिया।

   1961 के बाद, यह पैटर्न एक बार फिर बदला, जिसमें इस्लाम राज्य का सबसे तेजी से फैलने वाला धर्म बन गया। 1961-71 के बीच, जहां हिंदू आबादी 23.35 प्रतिशत और ईसाई 25.28 प्रतिशत की दर से बढ़ी, वहीं मुस्लिमों की आबादी में 37.49 प्रतिशत की दर से तेज वृद्धि हुई। 1971-81 के दौरान, हिंदू आबादी 16.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी जबकि मुस्लिमों की आबादी में 29.96 प्रतिशत की वृद्धि हुई, और इस तरह रफ्तार की दर का अंतर 14 प्रतिशत तक बढ़ गया।

   हिंदुओं की वृद्धि दर लगातार गिरती गई और 2001-11 की अवधि में महज 2.29 प्रतिशत पर चली आई, जबकि 1991-2001 में यह 7.28 प्रतिशत थी। इसके साथ ही, 2001-11 के दौरान, मुस्लिमों ने 12.84 प्रतिशत की दर से अपनी आबादी की रफ्तार को बढ़ाना जारी रखा। हिंदू वृद्धि दर 2.29 प्रतिशत है, जो किसी आबादी को बचाए रखने के लिए 2.3 प्रतिशत की अपेक्षित दर से थोड़ी ही अधिक है। इस प्रकार, केरल की जनसांख्यिकी में निश्चित रूप से परिवर्तन हुआ है।
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