चर्च: पूर्व जज जस्टिस सलदान्हा ने कहा- 'यौन उत्पीड़न का दोषी पूर्व बिशप फ्रेंको मुलक्कल दौलत और सियासी साठगांठ के बूते बचता रहा'
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चर्च: पूर्व जज जस्टिस सलदान्हा ने कहा- ‘यौन उत्पीड़न का दोषी पूर्व बिशप फ्रेंको मुलक्कल दौलत और सियासी साठगांठ के बूते बचता रहा’

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jun 19, 2021, 09:24 pm IST
in केरल

चर्च: पूर्व जज जस्टिस सलदान्हा ने कहा- 'यौन उत्पीड़न का दोषी पूर्व बिशप फ्रेंको मुलक्कल दौलत और सियासी साठगांठ के बूते बचता रहा'
   आलोक गोस्वामी
 

     
 न्यायमूर्ति सलदान्हा ने एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में बलात्कार के दोषी मुलक्कल के बारे में की इस बेबाक टिप्पणी के साथ ही, एक सर्वे के आधार पर कहा कि केरल में 60 हजार ननों का यौन उत्पीड़न हुआ

    जालंधर डायोसिस का पूर्व बिशप, फ्रेंको मुलक्कल आज चर्च के आस्थावानों में एक अजीब सा भाव पैदा करता है। चर्च और उसके अगुआ भले मुलक्कल पर लगे यौन शोषण के आरोपों और चर्च में उसकी मनमानी कारिस्तानियों को आज अनदेखा करके उसके साथ खड़े दिखते हों। लेकिन चर्च के कॉन्वेंटों और समझदार तबके को पता है कि वह कितना 'ताकतवर' है, कि जिसके खिलाफ यौन शोषण का आरोप लगाने वाली केरल की नन लूसी कलूपुरा की 'कॉन्वेंट में रहने देने की अर्जी' को सीधे वेटिकन ने तीन बार खारिज कर दिया, कि जो आज भी चर्च में कितना दबदबा कायम रखे है। भीतरखाने मुलक्कल की हरकतों पर भले कितने ही आस्थावान बोलते हों, लेकिन खुलकर बोलने की हिम्मत किसी में नहीं है। और जिसमें है, उसके साथ वेटिकन भी खड़ा नहीं होता। ऐसा क्या है पूर्व बिशप और सिस्टर लूसी के यौन शोषण के आरोपित फ्रेंको मुलक्कल में? क्या है जिसके कारण वेटिकन भी उसके पाले में खड़ा दिखता है? क्या है जिसने चर्च को ननों की पीड़ा के प्रति असंवेदनशील बना दिया है?

    क्या है आरोप मुलक्कल पर
    पूर्व बिशप मुलक्कल 2018 में जालंधर डायोसिस में था। जून, 2018 में एक 43 वर्षीय नन ने तब केरल पुलिस में भादंसं की धारा 164 के तहत शिकायत दर्ज की थी, कि तत्कालीन बिशप फ्रेंको मुलक्कल ने कोट्टायम में एक कॉन्वेंट में, 2014 से 2016 के बीच 13 बार उसका यौन उत्पीड़न किया था। उसे 'जरूरी बात' करने के बहाने अपने पास बुलाकर उसका बलात्कार किया था। तीन अन्य महिलाओं ने फ्रेंको के खिलाफ दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए थे। मुलक्कल के खिलाफ कार्रवाई तो हुई, पर उसे जमानत मिल गई। अप्रैल 2019 में केरल उच्च न्यायालय ने उस पर आरोप तय कर दिए। इस बीच कभी कोविड, कभी कुछ और बहाने बहाकर दस बार मुलक्कल अदालत में सुनवाई पर नहीं गया। आखिरकार जुलाई 2020 में अदालत ने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है। लेकिन, क्या है, जिसकी वजह से इतने गंभीर आरोप लगने के बाद भी, पूर्व बिशप अदालती कार्रवाई से बचता रहा? क्या है, जिसकी वजह से वह बार—बार अपने पर लगे बलात्कार के आरोप हटवाने की अर्जियां देता रहा, जो बार—बार खारिज की जाती रहीं? क्या है, जिसकी जमानत की अर्जी को सुप्रीम कोर्ट तक ने ठुकरा कर, मामला जारी रखने का निर्देश दिया?

    2018 में ही नन लूसी ने न्यायमूर्ति सलदान्हा को बताया था कि केरल में कई ननों और दूसरे लोगों के मन में सवाल है कि आखिर जांच में मुलक्कल के खिलाफ आपराधिक मामला उजागर होने के बावजूद उसे न गिरफ्तार किया गया, न ही कोई सुनवाई शुरू हुई। क्यों? लोगों की बस यही मांग थी कि यौन शोषण के गंभीर आरोप में लिप्त व्यक्ति के विरुद्ध कोई उचित कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

    ऐसे कई सवालों पर मुलक्कल की असलियत का खुलासा किया है केरल उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति माइकल फ्रांसिस सलदान्हा ने। हाल ही में एक साक्षात्कार में उन्होंने दावा किया है कि बलात्कार के आरोपित पूर्व बिशप मुलक्कल पैसों और राजनीतिक साठगांठ की वजह से आरोपों से बचता रहा है। पूर्व न्यायाधीश सलदान्हा का यह भी कहना है कि आज यह मुद्दा पूरे देश में गूंज रहा है।

    'रिपब्लिक' समाचार चैनल से बात करते हुए उनका कहना था कि 2018 में ही नन लूसी ने उन्हें यह बताया था कि केरल में कई नन और दूसरे लोग इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। उनके मन में सवाल है कि आखिर जांच में मुलक्कल के खिलाफ आपराधिक मामला उजागर होने के बावजूद उसे न गिरफ्तार किया गया, न ही कोई सुनवाई शुरू हुई। क्यों? न्यायमूर्ति सलदान्हा का कहना है कि उस वक्त लोगों की बस यही मांग थी कि यौन शोषण के गंभीर आरोप में लिप्त व्यक्ति के विरुद्ध कोई उचित कानून कार्रवाई होनी चाहिए।

    सर्वे का चौंकाने वाला खुलासा

    एक सर्वे के आधार पर न्यायमूर्ति सलदान्हा ने एक सनसनीखेज जानकारी भी दी है। उनका दावा है कि सिर्फ केरल में ही 60,000 ननों के अलावा देश भर अन्य अनेक लोगों ने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के विरुद्ध आवाज उठाई है। वे कहते हैं कि उक्त सर्वे के बाद, अब यह सिर्फ केरल का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि पूरे देश का मुद्दा बन चुका है। इस बातचीत में न्यायमूर्ति सलदान्हा ने बलात्कार के आरोपित पूर्व बिशप मुलक्कल के विरुद्ध आवाज उठाने वाली नन लूसी को कॉन्वेंट से निकलने का आदेश देने वाले फ्रान्सिस्कन क्लेरिस्ट कॉन्ग्रिगेशन की भी भर्त्सना की है। उल्लेखनीय है कि अर्नाकुलम स्थित इस कॉन्ग्रिगेशन ने वेटिकन से नन लूसी की याचिका तीसरी बार खारिज होने के बाद, उनको कॉन्वेंट खाली करने को कह दिया है। दो साल पहले फ्रेंको मुलक्कल के विरुद्ध मुखर विरोध करने की 'सजा' मिली है नन लूसी को। लेकिन न्यायमूर्ति सलदान्हा के अनुसार, वे नन लूसी की कानूनी जंग में उनके साथ हैं।

 

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