विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) पर विशेष : बालू के अवैध खनन से मर रही हैं नदियां और ढह रहे हैं पुल
September 12, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) पर विशेष : बालू के अवैध खनन से मर रही हैं नदियां और ढह रहे हैं पुल

Written byरितेश कश्यपरितेश कश्यप
Jun 5, 2021, 11:48 am IST
inभारत, झारखण्‍ड, बिहार

झारखंड में बालू के अवैध खनन से एक दर्जन से भी अधिक नदियां मर चुकी हैं। माफिया, अधिकारी और नेता नियमों की अनदेखी कर बालू की तस्करी करवा कर रहे हैं। पुलों और राजमार्गों के पास से बालू उठाने के कारण सड़कें और पुल भी ढहने लगे हैं आज विश्व पर्यावरण दिवस है। यह अच्छी बात है कि हम प्रतिवर्ष पर्यावरण दिवस मनाते हैं, लेकिन एक सच यह भी है कि पर्यावरण के प्रति हम लोग बहुत ही लापरवाह हो गए हैं या फिर यह कह सकते हैं कि इसके प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं समझ रहे हैं। इस कारण सदा सलिला नदियां भी अब सूखने लगी हैं। वहीं दूसरी ओर नदियों में जारी बालू के अवैध खनन से करोड़ों रु. की लागत से बने पुल भी भरा—भरा कर ढह रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों झारखंड की राजधानी रांची के पास 13 करोड़ रु. की लागत से कांची नदी पर बना एक पुल ढह गया। इसके लिए भ्रष्टाचार तो एक कारण है ही, लेकिन दूसरा एक बड़ा कारण है बालू का अवैध खनन। खनन माफिया ने पुल के स्तंभ के पास से बालू को उठाकर बेच दिया। इस कारण स्तंभ का आधार कमजोर हुआ और वह ढह गया। एक रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में ऐसी दर्जनों नदियां हैं, जिनके अस्तित्व पर गंभीर संकट आ चुका है। बोकारो नदी, दामोदर नदी, जुमार नदी, कारो नदी, उत्तर कोयल नदी, कोयल नदी, शंख नदी, अजय नदी, स्वर्णरेखा नदी, कझिया नदी, हरना नदी, सुंदर नदी, लिलझी नदी, गेरुवा नदी आदि नदियों का अस्तित्व ही मिटता जा रहा है। तीन दशक पहले तक जिन नदियों में सालभर पानी रहता था, अब वे सूख चुकी हैं। यहां तक कि जहां बालू होती थी, वहां घास उग आई है। लगता ही नहीं है कि कभी यहां नदी बहती थी। अवैध खनन से बालू माफिया मोटे हो रहे हैं और नदियां सिकुड़ती जा रही हैं। कई तो बिल्कुल मर चुकी हैं। कुछ नदियों में पानी तो है, पर उनमें प्रदूषण ऐसा है कि पानी से बदबू आती है। हाल ही में झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से स्वर्णरेखा और खरकई नदी के जल में प्रदूषण की मात्रा की जांच की गई। पता चला कि इन नदियों में घुलनशील अशुद्धियां भारी मात्रा में हैं। जल में ऑक्सीजन का स्तर भी कम है। इस कारण इन नदियों में रहने वाले जीव—जंतुओं का जीवन भी खतरे में है। झारखण्ड में बालू, कोयला और अन्य खनिज पदार्थों के अवैध खनन से पर्यावरण का भारी नुकसान हो रहा है। इसके साथ ही सरकार को आर्थिक हानि भी हो रही है। राज्यसभा सदस्य और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश कहते हैं कि बालू तस्करी और अवैध उत्खनन ही वर्तमान झामुमो सरकार की आय का प्रमुख स्रोत है। माफिया अवैध रूप से झारखंड की बालू को पश्चिम बंगाल और बिहार भेज रहे हैं। इससे राज्य सरकार को भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन केंद्र सरकार से हर बार किसी न किसी चीज के लिए पैसे की मांग करते हैं, मगर राज्य को मिलने वाला करोड़ों रु. का राजस्व माफिया डकार रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पूरे राज्य में 13 पुल आज भी चिन्हित हैं जो अवैध बालू तस्करों की वजह से कभी भी धराशाई हो सकते हैं। अनुमान है कि खनन माफिया हर वर्ष सरकार को 250—300 करोड़ रुपये का चूना लगा रहे हैं। पिछले एक साल से झारखंड के 472 बालू घाटों में से 447 पर सरकारी तौर-तरीके से बालू उठाव नहीं हो रहा है मगर अवैध रूप से बालू का उठाव कहीं भी नहीं रुका है। बालू खनन के लिए पर्यावरण विभाग की स्वीकृति आवश्यक होती है। इसके लिए राज्य स्तरीय कमेटी (स्टेट एनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी, सिया) और जिला स्तरीय कमेटी (दिया) को खनन की अनुमति देने का अधिकार है। अब राज्य में जिला स्तरीय कमेटी दो साल से निलंबित है और राज्य स्तरीय कमेटी एक साल से अधिक समय तक भंग रहने के बाद एक महीने पहले ही बनी है। लेकिन इस एक महीने में बालू खनन की अनुमति किसी को नहीं दी गई। झारखंड की नदियां बरसाती हैं। बालू भूमिगत जल को संरक्षित करने का काम करती है। पर्यावरणविद् कहते हैं कि नदियों में बालू की संतुलित मात्रा बनी रहनी चाहिए। लेकिन बालू के अवैध खनन से नदियों का अस्तित्व ही समाप्त होता जा रहा है। नियमानुसार पुल, राष्ट्रीय राजमार्ग आदि से एक किलोमीटर दूर खनन की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन झारखंड में इस नियम का पालन बिल्कुल नहीं हो रहा है। तीन मीटर की गहराई तक ही खनन किया जा सकता है, लेकिन बालू माफिया कहीं—कहीं तो नदियों में कुआं जैसे गड्ढे कर रहे हैं। नदी के किनारे और खनन क्षेत्र के बीच की दूरी नदी की चौड़ाई का 1/4 भाग होना चाहिए जो कि 7.5 किलोमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। क्या कहते हैं विशेषज्ञ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के अनुसार जून से अक्तूबर की अवधि को बारिश का महीना माना जाता है और इस दौरान नदी से बालू नहीं निकाला जा सकता। बारिश के मौसम में बड़ी मात्रा में नदियों की गोद में बालू संग्रहण की प्रक्रिया शुरू होती है। इसे देखते हुए एनजीटी के आदेश का पालन होना चाहिए। —रितेश कश्यप

रितेश कश्यप
रितेश कश्यप
डेढ़ दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। राजनीति, सामाजिक और सम-सामायिक मुद्दों पर पैनी नजर। कर्मभूमि झारखंड।   [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

हमजा बिन लादेन

मौत की खबर के सालों बाद VIDEO में दिखा हमजा बिन लादेन! क्या जिंदा है ओसामा का बेटा?

पाकिस्तान का झूठ दुनियाभर में फिर हुआ उजागर : हिंदुओं के पास न अधिकार और न ही सुनवाई

आतंक के खिलाफ बड़ी कामयाबी: जम्मू-कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद का कमांडर ढेर

ब्रिक्स समिट 2026: नई दिल्ली पहुंचे चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग, PM मोदी से करेंगे मुलाकात

‘हमें घर जाना है…’ पाकिस्तानी कोर्ट के बाहर रोती रहीं 13-14 साल की हिंदू बहनें, धर्मांतरण-निकाह के आरोप से मचा हड़कंप

गणेश जी को मोदक इतना प्रिय क्यों है? इसके पीछे की आध्यात्मिक मान्यता को जानें

Load More

ताज़ा समाचार

हमजा बिन लादेन

मौत की खबर के सालों बाद VIDEO में दिखा हमजा बिन लादेन! क्या जिंदा है ओसामा का बेटा?

पाकिस्तान का झूठ दुनियाभर में फिर हुआ उजागर : हिंदुओं के पास न अधिकार और न ही सुनवाई

आतंक के खिलाफ बड़ी कामयाबी: जम्मू-कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद का कमांडर ढेर

ब्रिक्स समिट 2026: नई दिल्ली पहुंचे चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग, PM मोदी से करेंगे मुलाकात

‘हमें घर जाना है…’ पाकिस्तानी कोर्ट के बाहर रोती रहीं 13-14 साल की हिंदू बहनें, धर्मांतरण-निकाह के आरोप से मचा हड़कंप

गणेश जी को मोदक इतना प्रिय क्यों है? इसके पीछे की आध्यात्मिक मान्यता को जानें

एनआईए (प्रतीकात्मक चित्र)

रांची RSS कार्यालय हमला: पटना के दो फ्लैटों में NIA की छापेमारी, 20 लाख रुपये नकद बरामद

MP Weather

MP Weather: मध्य प्रदेश के 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, अगले 3 दिन ऐसा रहेगा मौसम

यायावर कायनात काजी और लेखक राहुल नील से चर्चा करते हुए तृप्ति श्रीवास्तव

ओडिशा की उड़ान 2.0 : ‘पूरा जीवन कम है भारत को समझने के लिए’

गणेश चतुर्थी कब है

Ganesh Chaturthi 2026: इस दिन होगी गणपति बप्पा की स्थापना

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies