भारत की अर्थव्यवस्था लगातार तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी बीच एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2060 के आसपास वैश्विक जीडीपी में हिस्सेदारी के मामले में भारत चीन को पीछे छोड़ सकता है। यह अनुमान पेरिस स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स की वर्ल्ड इनइक्वालिटी लैब द्वारा जारी रिपोर्ट में लगाया गया है।
पीपीपी के पैमाने पर भारत की बढ़ती ताकत
रिपोर्ट के अनुसार, यह आकलन क्रय शक्ति समता (पीपीपी) के आधार पर किया गया है। पीपीपी एक ऐसा तरीका है, जिससे यह पता लगाया जाता है कि किसी देश की मुद्रा से वहां कितनी वस्तुएं और सेवाएं खरीदी जा सकती हैं। इससे किसी देश की वास्तविक आर्थिक ताकत का अंदाजा लगाया जाता है। फिलहाल चीन वैश्विक अर्थव्यवस्था में बहुत मजबूत स्थिति में है। पीपीपी के आधार पर दुनिया की कुल जीडीपी में उसकी हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में चीन की आबादी लगातार घटेगी। आबादी कम होने से वहां काम करने वाले लोगों की संख्या भी घट सकती है, जिसका असर उत्पादन और आर्थिक विकास पर पड़ सकता है।
इसके विपरीत भारत की आबादी युवा है और देश में कामकाजी लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यही भारत की सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है। इसके अलावा सरकार बुनियादी ढांचे, उद्योग, तकनीक और निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इन प्रयासों से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि भारत विकास की वर्तमान रफ्तार बनाए रखता है और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा रोजगार के क्षेत्र में सुधार जारी रखता है, तो वह आने वाले दशकों में दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियों में शामिल हो सकता है। यही वजह है कि 2060 तक भारत के चीन से आगे निकलने की संभावना जताई गई है। वहीं, विश्व आर्थिक परिदृश्य के अनुसार 2026 में भारत की जीडीपी लगभग 4.15 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है। यह लगातार बढ़ती आर्थिक ताकत का संकेत है। कुल मिलाकर, रिपोर्ट भारत के भविष्य को लेकर काफी आशावादी तस्वीर पेश करती है। यदि विकास की रफ्तार बनी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की सबसे प्रभावशाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सकता है।















