नरेंद्र कोहली : साहित्य के माध्यम से पीढ़ी का निर्माण कर उसे संवारने वाले हिंदी के अनूठे पूत
July 10, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम श्रद्धांजलि

नरेंद्र कोहली : साहित्य के माध्यम से पीढ़ी का निर्माण कर उसे संवारने वाले हिंदी के अनूठे पूत

Written byPanchjanyaPanchjanya
Apr 18, 2021, 08:12 pm IST
in श्रद्धांजलि

सच्चिदानंद जोशी

नरेंद्र कोहली जी का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण योगदान था एक पूरी की पूरी पीढ़ी को भारतीय संस्कृति के नायकों से सरल, रोचक और भावपूर्ण शैली में परिचित करवाना। एक तरह से साहित्य के माध्यम से पीढ़ी का निर्माण करना, उसे संवारना। या यूं कहें तो पौराणिक और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर शानदार तरीके से लिखने वाले वे हिंदी के निराले सुपरस्टार लेखक थे

दो अप्रैल की शाम साढ़े सात बजे के लगभग संस्कार भारती कला संकुल के लोकार्पण कार्यक्रम से बाहर निकलते हुए उन्होंने कहा,”अब तो सब हो गया न, अब तो इजाज़त है ?” मैंने कहा, “जी हां। अब जल्द ही आकर मिलता हूँ।” उन्होंने हाथ हिलाया और चले गए।

नरेंद्र कोहली जी से ये मुलाक़ात, उनसे अंतिम मुलाक़ात होगी, ऐसा दूर—दूर तक अंदेशा नहीं था। दरअसल दो अप्रैल के कार्यक्रम में कुछ अति विशिष्ट व्यक्तियों को निमंत्रित करने की जिम्मेदारी मुझे सौंपी गई थी। कोहली जी उनमें से एक थे। उन्हें फ़ोन लगाया, लेकिन नेटवर्क की खराबी के कारण बात बीच—बीच में कट रही थी। कभी वे लगाते कभी मैं। हार कर वे बोले बाकी बातें मैसेज पर कर लेंगे। उन्होंने कार्यक्रम में आने की सहमति का संदेश भेजा, लेकिन ये भी कहा कि लाने ले जाने की व्यवस्था करनी होगी। वह तो वैसे ही करने वाले थे हम लोग।

कोरोना के प्रोटोकॉल के कारण कार्यक्रम विज्ञान भवन की जगह दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर ही करना पड़ा। कार्यक्रम का आकार छोटा हुआ, लेकिन फिर भी कोहली जी उसमें आये और सबसे बड़ी आत्मीयता से मिले। द्वार पर जब मैंने उनका अभिवादन किया तो उन्होंने कहा, “देखो भाई जोशी जी आपका निर्देश था सो आ गया हूँ।” उन्होंने कार्यक्रम का आनंद लिया और मंच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत जी के साथ बैठकर मंच की शोभा भी बढ़ाई।

कोहली जी से परिचय हुआ था लगभग दस साल पहले, जब ग्वालियर में एक कार्यक्रम में उनके साथ मंच साझा करने का अवसर मिला था। जिन्हें युवावस्था से पढ़ रहे हों, ऐसे प्रिय लेखक के साथ मंच साझा करने को मिले तो किसे खुशी नहीं होगी। ‘अवसर’, ‘दीक्षा’,’युद्ध’ ‘अभ्युदय’, ‘महासमर’ और ‘तोड़ो कारा तोड़ो’ जैसी कितनी ही कालजयी रचनाओं के रचयिता से मिलने का उत्साह भी था और कौतूहल भी। मैंने तो रायपुर से उस कार्यक्रम में आने की हामी ही इसलिए भरी थी कि कोहली जी के दर्शन होंगे। मुझे तो लगा कि वे एकदम गंभीर अपने आप में रहने वाले व्यक्ति होंगे, लेकिन मेरी अपेक्षा के विपरीत कोहली जी मिले एकदम सहज, मित्रवत होकर। विश्वास करना कठिन था कि हमारी आस्था के श्रेष्ठतम व्यक्तित्वों को अपनी रचनात्मकता से नई दृष्टि देकर हमारे सामने प्रस्तुत करने वाले नरेंद्र कोहली इतने सरल और सहज हैं। उसी कार्यक्रम में कोहली जी के तेवर भी पहली बार देखने को मिले, जब उन्होंने कार्यक्रम का संचालन करने वाली देवी जी को टोका। देवी जी ने कोहली जी के परिचय में कहा, “आपका जन्म सियालकोट पाकिस्तान में हुआ है।” कोहली जी तुरंत बोले “मेरा जन्म जब हुआ था, तब सियालकोट हिंदुस्थान का ही हिस्सा था। मेरा जन्म हिन्दुस्थान में ही हुआ है।” फिर धीरे से मेरे कान में बोले, “पता नहीं कहां से पढ़ लेते हैं परिचय और वही बोलते रहते हैं।”

उसके बाद एक बार कोहली जी को रायपुर बुलाया था विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद जी पर भाषण देने। मुख्य भाषण कोहली जी का ही था। लेकिन उनके पहले बोलने वाले विशेष अतिथि उन्हें आवंटित समय से ज्यादा ही बोलते जा रहे थे। कोहली जी थोड़ी देर बाद अस्वस्थ होने लगे। और फिर मुझसे बोले, “अब अगर ये बोलना बंद नहीं करेंगे तो मुझे उठ कर जाना पड़ेगा।” “हाँ कुछ ज्यादा ही बोल रहे हैं।” मैंने खेद प्रकट करते हुए कहा।

“ज्यादा भी और अनर्गल भी। तथ्य भी गलत हैं और कथ्य भी।” कोहली जी के चेहरे पर गुस्से के भाव देखे जा सकते थे। गनीमत थी कि तीसरी बार पर्ची भेजने के बाद वे विशेष अतिथि रुके और कोहली जी का भाषण शुरू हुआ। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत में ही कहा, “मुझे तो लगा कि मुझे यहां सिर्फ सुनने बुलाया गया है।” हम सभी आयोजक दम साधे बैठे थे कि वे और क्या बोलेंगे, लेकिन उसके बाद उन्होंने दिए विषय पर धाराप्रवाह भाषण दिया जो एक यादगार भाषण था।

उनसे परिचय में प्रगाढ़ता आयी दिल्ली आने के बाद, जब उनसे बार—बार मिलना हुआ।

उनके 80वें जन्मदिन का कार्यक्रम आईजीएनसीए में मनाने का सौभाग्य मिला। मित्रवर अनिल जोशी जी और अनंत विजय जी के सौजन्य से। यह कार्यक्रम सीमित संख्या का और बेहद आत्मीय था। उसी में तय ये हुआ कि एक बड़ा कार्यक्रम शीघ्र करेंगे जो उनकी ऊंचाई और गरिमा के अनुकूल होगा। उस दिन मंच से और मंच के परे जो हास्य विनोद का सिलसिला चला वह भी अविस्मरणीय था। उस दिन चर्चा में कई बार उनके लिए “हिंदी में सबसे ज्यादा रॉयल्टी पाने वाले लेखक” विशेषण का प्रयोग हो रहा था, जो मुझे खटक रहा था। नरेंद्र कोहली जी का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण योगदान था एक पूरी की पूरी पीढ़ी को भारतीय संस्कृति के नायकों से सरल, रोचक और भावपूर्ण शैली में परिचित करवाना। एक तरह से साहित्य के माध्यम से पीढ़ी का निर्माण करना, उसे संवारना। जब भी नए दौर में लोगों को अमिष त्रिपाठी और तत्सम लोगों द्वारा मूल अंग्रेजी में लिखी पुस्तकों का हिंदी अनुवाद सगर्व पढ़ते हुए देखता तो बरबस नरेंद्र कोहली जी याद आ जाते। पौराणिक और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर शानदार तरीके से लिखने वाले वे हिंदी के निराले सुपरस्टार लेखक थे।

कोरोना के पहले दौर के बाद अनिल जोशी जी की बिटिया की शादी के रिसेप्शन में उनसे मिलना हुआ। कहने लगे, “लॉक डाउन के बाद पहली बार बाहर निकले हैं हम। ऐसा लगता है सभी चीज़ों का अभ्यास छूट गया है।” उसके बाद मालिनी अवस्थी जी के बेटे के रिसेप्शन में मिले। मैंने कहा, “अच्छा है आपसे जल्दी जल्दी मिलना हो रहा है।” वे छूटते ही बोले, “ऐसा लगता है कैद से छूट कर आज़ाद हो गए हैं। बाहर निकलने का मौका ही ढूंढते हैं।” उन्होंने और मधुरिमा जी ने लगे हाथ मेरी सामयिक सरस्वती में छपी कहानी का जिक्र भी कर डाला। उस दिन चर्चा में दो तीन बार मेरे मुंह से “तोड़ो कारा तोड़ो” का जिक्र आया। तब उन्होंने “पूत अनोखो जायो” का जिक्र किया और पूछा “वह पढ़ी है या नहीं।”

संयोग से मैंने वह पढ़ी नहीं थी। थोड़ी शर्म भी आई। घर वापस आने पर मैंने वह किताब आर्डर की। किताब तीन दिन बाद आ भी गयी। उसे पढ़ना अभी प्रारंभ किया ही था। पृष्ठ 13 पर नरेंद्र गाना प्रारंभ करते है, “रहना नहीं देस बिराना है।” सोचा नहीं था कि ये नरेंद्र भी हमसे यही कहते हुए महाप्रयाण कर जाएंगे, अपने सदगुरू के पास, अपने ठिकाने पर।

“कहत कबीर सुनो भाई साधो
सदगुरू नाम ठिकाना है।”

हिंदी के इस अनोखे पूत की कमी को हम कैसे पूरा कर पाएंगे पता नहीं। अभी तो उनके बिना सब कुछ वीराना ही लग रहा है।

ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

हरित क्रांति की ओर कदम: PM मोदी 17 जुलाई को करेंगे जींद में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ

निदा खान

नासिक TCS केस: निदा खान को जमानत देते समय भगवान कृष्ण का जिक्र, यूजर्स बोले- मूर्ति पूजा करने वालों से नफरत करती है ये

दानिश आजाद अंसारी

यूपी वक्फ बोर्ड का होगा पुनर्गठन, शामिल होंगे 2 हिंदू सदस्य

PM Kisan Yojana: खाते में नहीं आए ₹2,000? जानिए किस वजह से अटक गई आपकी किस्त और कैसे मिलेगा पैसा?

Jammu kashmir library terrorist

जम्मू-कश्मीर : किताबों के जरिए फैलाए जा रहे आतंकवाद पर सख्‍ती, सभी स्कूलों में पुस्तकों की जांच का आदेश

शैक्षिक सत्र का श्रीगणेश करते डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल। साथ में हैं विद्यालय के पदाधिकारी

सीमांचल में सैनिक शिक्षा का शुभारंभ

Load More

ताज़ा समाचार

हरित क्रांति की ओर कदम: PM मोदी 17 जुलाई को करेंगे जींद में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ

निदा खान

नासिक TCS केस: निदा खान को जमानत देते समय भगवान कृष्ण का जिक्र, यूजर्स बोले- मूर्ति पूजा करने वालों से नफरत करती है ये

दानिश आजाद अंसारी

यूपी वक्फ बोर्ड का होगा पुनर्गठन, शामिल होंगे 2 हिंदू सदस्य

PM Kisan Yojana: खाते में नहीं आए ₹2,000? जानिए किस वजह से अटक गई आपकी किस्त और कैसे मिलेगा पैसा?

Jammu kashmir library terrorist

जम्मू-कश्मीर : किताबों के जरिए फैलाए जा रहे आतंकवाद पर सख्‍ती, सभी स्कूलों में पुस्तकों की जांच का आदेश

शैक्षिक सत्र का श्रीगणेश करते डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल। साथ में हैं विद्यालय के पदाधिकारी

सीमांचल में सैनिक शिक्षा का शुभारंभ

प्रतीकात्मक चित्र

नजरूल इस्लाम फर्जी डॉक्टर बन कर रहा था इलाज, क्लीनिक में था मेडिकल ऑफिसर

उज्बेकिस्तान में केरल की हिंदू छात्रा की हत्या

उज्बेकिस्तान: सदरुल अनाम ने इस्लाम अपनाने से इनकार करने पर केरल की हिंदू छात्रा को बेरहमी से मार डाला

पाकिस्तानी ब्यूटी प्रोडक्ट जब्त

महाराष्ट्र: भारत में प्रतिबंधित 60 लाख के 38 पाकिस्तानी ब्यूटी प्रोडक्ट जब्त, FDA और पुलिस की बड़ी कार्रवाई

‘2010 में कांग्रेस सरकार में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम बेचने से कर दिया था मना’, संबित पात्रा ने याद दिलाई घटना

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies