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होम भारत पश्चिम बंगाल

तृणमूल कांग्रेस और गो-तस्करी का जाल

Written byPanchjanyaPanchjanya
Apr 9, 2021, 02:32 pm IST
in पश्चिम बंगाल

सुमन भट्टाचार्य

पिछले दस साल से तृणमूल कांग्रेस का एक नेता गो तस्करी में लिप्त था और इस स्याह कारोबार को बदस्तूर चला रहा था। इनामुल और उसके साथी कोलकाता में टीएमसी के एक कद्दावर नेता के करीबी रिश्तेदार के साउथ एशियन बैंक के खातों में पैसे भेजते रहे थे। इनामुल उस नेता का बेहद करीबी था। रिश्वत की रकम प्रशासनिक तंत्र के कोने-कोने तक पहुंचाई जाती जिसके बदले तस्करी के कारोबार को राज्य पुलिस का सुरक्षा कवच मुहैया कराया जाता था।
21 नवंबर, 2019 को कोलकाता ने एक अजब नजारा देखा। शहर के मध्य में स्थित एक इमारत से उस समय नोटों की बारिश होने लगी जब राजस्व खुफिया विभाग के अधिकारियों ने हवाला लेनदेन के संबंध में वहां छापा मारा। जिस कंपनी के कार्यालय में छापा मारा गया था, वह अंतरराष्ट्रीय कारोबार करती थी। छापे के वीडियो और उस दौरान पाँच सौ और दो हजार के नोटों की बारिश ने अनगिनत सवाल खड़े कर दिए थे।
लेकिन वह तो एक छोटी-सी झलके मात्र थी। जब पूरी पटकथा से परदा उठा तो तहलका मच गया। बात यह थी कि जिस इमारत से नोटों की बौछार हुई, वहां इनामुल हक के कई कार्यालय मौजूद थे। इनामुल हक बंगाल में गो तस्करी गिरोह का वही कथित सरगना था जिसे केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 6 नवंबर, 2020 को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। उस समय तक किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि इनामुल हक का साम्राज्य इतना बड़ा होगा कि राजस्व खुफिया विभाग की जांच से बचने के लिए उसके कार्यालय के कर्मचारी करोड़ों रुपये हवा में उड़ा देंगे।
इनामुल की तस्करी का जाल पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार के प्रशासनिक संरक्षण और राजनीतिक सांठगांठ के साये में बदस्तूर फलता-फूलता रहा। तस्वीरों के तौर पर मिले सबूतों ने मुर्शिदाबाद जिले के तृणमूल कांग्रेस के नेता और इनामुल और उसके करीबी रिश्तेदार और कारोबारी सहयोगी हुमायूँ कबीर के बीच के अंतरंग संबंधों का खुलासा किया है। 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान इनामुल और हुमायूँ ने टीएमसी के राजनीतिक प्रचार अभियानों को प्रायोजित किया और उनमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इनामुल के अधिकांश कार्यों को हुमायूँ बखूबी पूरा करता रहा। उसने इनामुल के खनन कारोबार को विदेशों तक बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और टीएमसी के मंत्रियों और सांसदों से भी मेलजोल बना रखा था।
तस्वीरों में साफ दिखाई देता है कि हुमायूँ कबीर एक अमीर कारोबारी है जो मुर्शिदाबाद के सीमावर्ती इलाके के कई पेट्रोल पंप, रेस्तरां और होटलों का मालिक है। उसने पुलिस, स्थानीय प्रशासन और राजनेताओं को रिश्वत देने के लिए इनामुल के धन और संसाधनों का इस्तेमाल किया। इस तरह वह मुर्शिदाबाद और मालदा में सत्तारूढ़ पार्टी के गुट का एक प्रभावशाली सदस्य बन गया।
महज दस साल पहले इनामुल स्थानीय ट्रांसपोर्टर के यहां खलासी था। उसने तस्करी, खनन और अन्य गैरकानूनी काम करके पंद्रह हजार करोड़ रुपये का कारोबारी साम्राज्य खड़ा किया जिसकी शाखाएं दुबई और संयुक्त अरब अमीरात तक फैली हैं। इनामुल पर तृणमूल नेताओं की कृपा दृष्टि हमेशा बनी रही जिसकी एवज में उसने तृणमूल के मुर्शिदाबाद और मालदा के राजनीतिक अभियानों पर खुल कर धन लुटाया। सीबीआई और ईडी की पूछताछ में पता चला है कि इस पैसे का एक हिस्सा दक्षिण कोलकाता में टीएमसी के शीर्ष नेता ने भी उठाया। पिछले दस वर्ष से टीएमसी के नेताओं के साये में गो तस्करी का नेटवर्क फल-फूल रहा है। इनामुल और उसके साथी कोलकाता में टीएमसी के एक कद्दावर नेता के करीबी रिश्तेदार के साउथ एशियन बैंक के खातों में पैसे भेजते रहे थे। इनामुल उस नेता का बेहद करीबी था। रिश्वत की रकम प्रशासनिक तंत्र के कोने-कोने तक पहुंचाई जाती थी जिसके बदले में तस्करी के कारोबार को राज्य पुलिस का सुरक्षा कवच मुहैया कराया जाता था।
इनामुल ने रिश्वत के जोर पर न सिर्फ तृणमूल के शीर्ष नेतृत्व पर प्रभाव बनाया, बल्कि सत्ताधारी दल के मुर्शिदाबाद और मालदा क्षेत्र के नेताओं को भी अपनी मुट्ठी में कर लिया था। शीर्ष नेताओं की कृपा, प्रशासनिक तंत्र को पूर्ण सहयोग और भारत-बांग्लादेश की सटी हुई सीमा ने इनामुल के तस्करी के कारोबार को पनपने में भरपूर सहायता दी और करीब एक दशक के अंदर यह एक विशाल साम्राज्य बन गया।
मार्च 2018 में एक मलयाली बीएसएफ अधिकारी को 47 लाख रुपये की कीमत के मवेशियों के साथ दक्षिण भारत के एक रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था। बाद में पूछताछ होने पर उन्होंने इनामुल हक का नाम बताया। इस तरह करीब दो साल पहले इनामुल का नाम पहली बार सबके सामने आया। सीबीआई और ईडी ने इस नेटवर्क पर जांच शुरू की और 2018 में पहली बार इनामुल से पूछताछ शुरू हुई। जांच के दौरान जब्त की गई इनामुल की एक निजी नोटबुक में एक चार्ट मिला जिससे नेताओं के नाम, तारीखों और उन नेताओं को भेजी गई धनराशि की सही जानकारी मिली। जल्दी ही यह भी पता चला कि गो तस्करी में पश्चिम बंगाल के बीएसएफ अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और टीएमसी के नेताओं के हाथ सने हैं। इस तरह उनकी अवैध कारगुजारी से परदा उठा और सीबीआई ने बीएसएफ के वरिष्ठ कमांडेंट सतीश कुमार को गिरफ्तार कर लिया जो इनामुल की तस्करी के नेटवर्क की एक अहम कड़ी थे। सतीश कुमार लंबे समय से पश्चिम बंगाल में तैनात थे और इनामुल और उसके सहयोगियों के साथ उनका बड़ा अच्छा मेलजोल था।
सीबीआई ने सतीश कुमार की संपत्ति भी जब्त कर ली है जिसकी कीमत कई करोड़ रुपये है। उनकी गिरफ्तारी से यह खुलासा भी हुआ कि टीएमसी के नेताओं के हाथ भी इस अपराध में सने हैं जिन्होंने तस्करी के नेटवर्क का भरपूर पोषण किया है। अब समय ही बताएगा कि गो तस्करी के बल पर पनपे
इनामुल के अरबों डॉलर के साम्राज्य को खाद- पानी देने का अपराध करने वाले टीएमसी के कितने नेताओं पर जांच की
गाज गिरेगी।

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