चीन का सामना करने के लिए हम पाकिस्तानकी सेनाओं को निमंत्रित नहीं कर सकते
September 16, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

चीन का सामना करने के लिए हम पाकिस्तानकी सेनाओं को निमंत्रित नहीं कर सकते

Written byArchiveArchive
Nov 6, 2017, 12:00 am IST
inArchive

दिंनाक: 06 Nov 2017 22:11:56

इतिहास के पन्नों से  पाञ्चजन्य
वर्ष: 1४  अंक: 10
12 सितम्बर ,1960

आक्रमणग्रस्त अवस्था का दुरुपयोग कर किसी भी कीमत पर पाकिस्तान को तुष्ट करने के प्रयत्न का विरोध होगा
पश्चिमी साम्राज्यवाद तो अंतिम सांस ले रहा है पर हमारे पड़ोस में स्वतंत्रता के आवरण में एक नया घातक साम्राज्यवाद सर उठा रहा है
लोकसभा में विदेश नीति पर श्री अटल बिहारी वाजपेयी की चेतावनी
सभापति जी! कम्युनिस्ट पार्टी के डिप्टी लीडर, प्रोफेसर श्री हीरेन मुकर्जर्ी ने, अपने भाषण में हमारे प्रधानमंत्री को एक चुनौती दी है। मुझे विश्वास है कि उसका उत्तर दिया जाएगा। केंद्रीय सरकार के पास राज्य की सरकारों से और पहाड़ी जिलों से जरूर ऐसी खबरें आयी होंगी। जिनसे यह साबित किया जा सके कि कम्युनिस्ट पार्टी उन जिलों में चीन के आक्रमण के सवाल पर गलत ढंग से प्रचार कर रही है। मैं अपने कम्युनिस्ट दोस्तों का ध्यान इस सप्ताह के बम्बई के ब्लिट्ज  की ओर दिलाना चाहता हूं। बिल्ट्ज पर कोई यह आरोप नहीं लगा सकता है कि वह कम्युनिस्ट विरोधी है। अगर उस पर आरोप लगता है, तो वह यही है कि यह कम्युनिस्टों की तरह काफी झुका हुआ है। लेकिन इस सप्ताह के ब्लिट्ज ने
लिखा है-
''उत्तरी गढ़वाल में चानई और थानई-नानई नाम के गांव हैं। कम्युनिस्टों ने लोगों से कहा है कि ये गांव चीन के हैं, क्योंकि इनके नाम चीनी जैसे मालूम पड़ते हैं।'' अन्य पहाड़ी जिलों में स्थानीय कम्युनिस्ट भारत सरकार पर यह आरोप लगा रहे हैं कि उसने बेकारी तथा महंगाई की ओर से जनता का ध्यान बंटाने के लिए चीनी आक्रमण का हौवा खड़ा कर रखा है। मेरा निवेदन है कि अगर यह खबर गलत है, तो कम्युनिस्ट पार्टी के हमारे माननीय सदस्यों को इस अखबार पर मुकदमा चलाना चाहिए और उसे माफी मांगने पर मजबूर करना चाहिए। लेकिन इस तरह की खबरें और भी मिली हैं। मैं पिछले साल जब अलमोड़ा गया था, तो वहां के लोगों ने मुझे बताया कि कम्युनिस्ट पार्टी से संबंधित एक सांस्कृतिक संगठन है, तो सीमावर्ती क्षेत्रों में नाटक पर अभिनय के द्वारा लोगों को आकृष्ट करता है और उस मंडली ने वहां एक ऐसा नाटक किया, जिसमें चीनी सेना को 'लिबरेशन' आर्मर्ी (मुक्ति सेना) के रूप में भारत में आए हुए दिखाया गया था। मैं चाहूंगा कि कम्युनिस्ट पार्टी के प्रवक्ता इन आरोपों का ठीक तरह से उत्तर दें। सवाल यहां केवल 'न्यू एज' का नहीं है, जिनका उल्लेख प्रधानमंत्री जी ने किया है। लखनऊ से न्यू एज का हिन्दी संस्करण निकलता है, जिसका नाम अनयुग है। उस पत्र ने उत्तर प्रदेश के एक विज्ञापन को छापा था। उत्तर प्रदेश की सरकार ने, जब चीन की आक्रमक गतिविधियां बढ़ने लगीं तो प्रदेश के सभी हिंदी अखबारों को एक विज्ञापन  दिया। मैं उस विज्ञापन को आपको पढ़कर सुनाता हूं:- उत्तर प्रदेश के निवासियो! देश की उत्तरी सीमा की रक्षा का भार विशेष रूप से आप पर है। चीन का सामना और आक्रमक कार्रवाइयों का हम पारस्परिक सहयोग और संगठित प्रयत्न से ही कर सकते हैं। प्रदेश की सरकार पूरे राज्य और विशेषतया सीमावर्तर्ी क्षेत्रों के विकास के लिए योजनाएं चला रही है। इन योजनाओं को सफल बनाकर आप स्वदेश प्रेम का परिचय देने और राष्ट्र की हानि बढ़ाने में सहायक बनेंगे।''

तीसरी योजना की रूपरेखा :
कुछ आशंकाएं
पं. दीनदयाल उपाध्याय
तीसरी पंचवार्षिक योजना की रूपरेखा का प्रारूप दिनांक 6 जुलाई,1960 को प्रकाशित किया गया। जनमत जानने के जिस उद्देश्य से योजना आयोग ने प्रारूप का प्रकाशन किया उसकी दृष्टि से यह समय अत्यंत अनुपयुक्त था। कारण, केंद्रीय कर्मचारियों की आम हड़ताल का प्रश्न इतना अधिक राष्ट्रीय और सामयिक महत्व का था कि योजना के प्रारूप की ओर स्वभावत: अनेक लोगों का दुर्लक्ष्य हो गया। जो विशेषज्ञ हैं अथवा जिनको इस ओर विशेष रुचि है उनका ध्यान तो अवश्य गया किन्तु जन साधारण, जिससे अपेक्षा है कि वह योजना को पूरा करने के प्रयास में अपना योगदान करे, अछूता ही रह गया। आवश्यकता है कि इस महत्व के प्रश्न पर व्यापक रूप से विचार हो।
संख्या में यद्यपि यह तीसरी योजना है किन्तु योजानात्मक विकास की दृष्टि से इसे दूसरी ही कहना समीचीन होगा, क्योंकि प्रथम योजना तो अपनी अवधि के दो वर्ष बाद सामने आई और दूसरे उसमें विभिन्न राज्यों द्वारा हाथ में लिए गए कार्यकर्मों के संकलन के अतिरिक्त नियोजित विकास के सिद्धान्तों की कोई व्यवहार में लाने वाली रूपरेखा नहीं प्रस्तुत की गई थी। किन्तु दूसरी योजना में इस बात का सैद्धान्तिक विवेचन हुआ और उन सिद्धांतों के आधार पर आगे के कार्यक्रम भी प्रस्तुत कि ए गए। समाजवाद के जिस उद्देश्य को लेकर नियोजित विकास की नीति शासन ने अंगीकार की उसका भी स्पष्टतया उल्लेख किया गया। तृतीय योजना का विचार करने के पूर्व हमें दूसरी योजना की उपलब्धियों का और विशेषकर उन नीतियों का, जिन्हें नियोजन में आधारभूत स्थान दिया गया है विचार कर लेना चाहिए, क्योंकि उनके परिणामों पर ही तृतीय योजना का ढांचा खड़ा करता पड़ेगा। आंकड़ों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि दूसरी योजना के वित्तीय लक्ष्य विनियोजन की दृष्टि से निजी और सार्वजनिक क्षेत्र दोनों को मिलाकर पूरे ही नहीं हो जाएंगे। दूसरी योजना में सार्वजनिक क्षेत्र में 3800 करोड़ रु. निजी क्षेत्र में 2400 करोड़ रु. के विनियोजन का लक्ष्य रखा था। योजना आयोग द्वारा हाल में प्रकाशित अनुमान के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र में 3650 करोड़ रु. तथा निजी क्षेत्र में 3100 करोड़ की पूंजी निर्माण की आशा है। अर्थात् सार्वजनिक क्षेत्र की कमी को निजी क्षेत्र ने पूरा ही नहीं किया, कुछ आगे भी कदम बढ़ाया है।

हम पुजारी सनातन संस्कृति के
''हमें उन लोगों के प्रति सावधान रहना चाहिए, जो प्रत्येक जन-आंदोलन के पीछे कम्युनिस्टों का हाथ देखते हैं और उसे दबाने की सलाह देते हैं। जन-आंदोलन एक बदलती हुई व्यवस्था के युग में स्वाभाविक और आवश्यक है। .. हमें उनके साथ चलना होगा, उनका नेतृत्व करना होगा। जो राजनीतिक, आर्थिक तथा सामाजिक क्षेत्र में यथास्थिति बनाए रखना चाहते हैं, वे इस जागरण से घबराकर आतंक का वातावरण बना रहे हैं। हम अतीत के गौरव से अनुप्राणित हैं, परंतु उसको भारत के राष्ट्र जीवन का सर्वोच्च बिंदु नहीं मानते। हम वर्तमान के प्रति यथार्थवादी हैं, किंतु उससे बंधे नहीं। हमारी आंखों में भविष्य के स्वर्णिम सपने हैं, किंतु हम निद्रालु नहीं, बल्कि उन सपनों को साकार करने वाले कर्मयोगी हैं। अनादि-अतीत, अस्थिर-वर्तमान तथा चिरंतन भविष्य की, कालजयी सनातन संस्कृति के हम पुजारी हैं। विजय का विश्वास है, तपस्या का निश्चय लेकर चलें। ''
  —पं. दीनदयाल उपाध्याय (पं. दीनदयाल उपाध्याय कतृर्त्व एवं विचार, पृ. 105)

Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

Panchjanya This Week: दुनिया डगमगाई, भारत संभला: उत्सव, अर्थव्यवस्था और सुशासन की हर बड़ी बात!

Sabarmati Samvad 2026: New World Order में भारत का दबदबा? Kashmir से Global South तक बढ़ता प्रभाव

बाल विवाह उन्मूलन में बढ़ी भारत की भूमिका

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी मोहम्मद नजीर

लिव-इन पार्टनर का खौफनाक चेहरा! 14 साल की नाबालिग हिंदू बच्ची से दरिंदगी, तबीयत बिगड़ने पर खुला घिनौना सच

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने श्रीहरिकोटा से ईओएस-05 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया

अंतरिक्ष में भारत की ‘तीसरी आंख’

कल का मौसम: 16 सितंबर को 25 राज्यों में ‘मूसलाधार बारिश’, 85 की स्पीड से चलेगी हवा; IMD का बड़ा अपडेट

Load More

ताज़ा समाचार

Panchjanya This Week: दुनिया डगमगाई, भारत संभला: उत्सव, अर्थव्यवस्था और सुशासन की हर बड़ी बात!

Sabarmati Samvad 2026: New World Order में भारत का दबदबा? Kashmir से Global South तक बढ़ता प्रभाव

बाल विवाह उन्मूलन में बढ़ी भारत की भूमिका

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी मोहम्मद नजीर

लिव-इन पार्टनर का खौफनाक चेहरा! 14 साल की नाबालिग हिंदू बच्ची से दरिंदगी, तबीयत बिगड़ने पर खुला घिनौना सच

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने श्रीहरिकोटा से ईओएस-05 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया

अंतरिक्ष में भारत की ‘तीसरी आंख’

कल का मौसम: 16 सितंबर को 25 राज्यों में ‘मूसलाधार बारिश’, 85 की स्पीड से चलेगी हवा; IMD का बड़ा अपडेट

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

50 लाख पार पहुंचा श्रद्धालुओं का आंकड़ा, चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर सीएम धामी ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

किशाऊ बांध परियोजना पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक।

80 साल से अटकी किशाऊ परियोजना पर बड़ा फैसला: अमित शाह की अध्यक्षता में 6 राज्यों के बीच बनी सहमति

सैन्य अधिकारियों ओर रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रक्षा कूटनीति पर ‘रक्षा’  नामक रणनीतिक दस्तावेज जारी करते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

बदलते विश्व में भारत का शक्ति-संकल्प

गोविंद देव गिरि जी, राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव

राम मंदिर ट्रस्ट के CEO जितेंद्र मिश्र साक्षात्कार में हुए थे शामिल, अनुपस्थित बताना गलत: स्वामी गोविंद देव गिरि

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies