केरल/आतंकी कम्युनिस्ट राजनीतिआक्रोश उफान पर
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केरल/आतंकी कम्युनिस्ट राजनीतिआक्रोश उफान पर

Written byArchiveArchive
Jan 30, 2017, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 30 Jan 2017 16:14:22

केरल में वामपंथियों की अगुआई वाली वाम मोर्चा यानी एलडीएफ सरकार सत्ता में है। हर 5 साल के अंतराल पर वह ही यूडीएफ से सत्ता छीनती रही है। और जब-जब सत्ता में रही है, तारीख गवाह है कि उसकी कम्युनिस्टी हिंसा ने अपना पाश्विक, बर्बर, रौद्र, वीभत्स  रूप दिखाया है। उसने हर उस व्यक्ति को निशाना बनाया है जो उससे इतर विचारधारा का है, या पहले उसके पक्ष में रहकर अब दूसरी विचारधारा को प्रदेश व देश के लिए हितकारी मान उसे अपना चुका है। हिंसक कम्युनिस्ट विचारधारा ने हर उस शख्स को मिटा देने के लिए गुंडई की है, हैवानियत की हर वह हद लांघी है जो सभ्य समाज में किसी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है। वामपंथियों ने बंगाल की तरह 'गॉड्स ओन कंट्री' कहे जाने वाले केरल को भी खून से सनी धरती बनाने में कोई कसर नहीं उठा रखी है। यह सिलसिला 1968 से आज तक बदस्तूर जारी है। 270 का आंकड़ा छू चुका है उनका यह हत्यावादी साम्यवाद। रा. स्व. संघ, भाजपा या अन्य किसी हिंदू संगठन से संबंध रखने वाले युवा, वयस्क या वृद्ध पुरुष या नारी उनके खास निशाने पर रहते हैं। 1968 में तेल्लीशैरी के संघ कार्यकर्ता वाडिक्कल रामकृष्णन की हत्या से शुरू हुआ था यह सिलसिला। उसका दोष सिर्फ इतना था कि वह वामपंथी विचारों के खोखलेपन को पहचान संघ का स्वयंसेवक बना था। पर, हत्यारे साम्यवादियों ने अपने उस वक्त के रूसी, चीनी, कंपूचियाई आकाओं के नक्शेकदम पर चलते हुए रामकृष्णन की देह कई जगह से काट डाली। कम्युनिस्ट बर्बरता बढ़ती गई…कम्युनिस्ट सरकारें सत्ता में आती गईं, अपराधियों के हौसले बढ़ते गए, प्रशासन-पुलिस को लाचार, बेबस बना दिया गया। विडंबना है कि रामकृष्णन की हत्या के मुख्य आरोपी पी. विजयन आज केरल की कमान संभाले है मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के रूप में। सो उनके राज में तो माकपाई गंुडागर्दी परवान चढ़नी ही थी…18 जनवरी 2017 को तेल्लीशैरी में ही मुख्यमंत्री के क्षेत्र अंडलूर में 52 साल के संघ कार्यकर्ता संतोष कुमार को रात 2 बजे उनके घर में घुसकर शराब में धुत वामपंथी तत्वों ने चाकुओं से गोद डाला। सहम गई थी उनकी 12 साल की मासूम बेटी विस्मया। पिता की लाश देखकर विस्मया ने कलम से कागज पर पिता को समर्पित एक कविता रची, जिसका भाव था-
'मुझे मीठी लोरी सुनाकर सुलाने वाले मेरे पापा को क्यों मारा?'
पिनराई इस सवाल का जवाब क्या देंगे? क्या जवाब देगी केरल सरकार, जिसकी शह पर माकपाई गुंडों ने संतोष की जान ले ली। ऐसी गूंगी-बहरी सरकार को सावधान करने और यह याद दिलाने कि अब यह हत्यावाद बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, नई दिल्ली में जनाधिकार समिति ने 24 जनवरी, 2017 को केरल भवन के सामने प्रचंड प्रदर्शन किया। कम समय में आयोजित किए जाने के बावजूद इस विशाल धरने में अपना रोष प्रकट करने समाज के हर क्षेत्र से पुरुष, महिलाएं और बच्चे भारी तादाद में पहंुचे थे। धरने के मंच पर संघ के सह सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले, अ. भा. सह प्रचार प्रमुख जे. नंदकुमार, दिल्ली के प्रांत संघचालक श्री कुलभूषण आहूजा, सह प्रांत संघचालक श्री आलोक कुमार, भाजपा के संगठन महामंत्री श्री रामलाल, सांसद मीनाक्षी लेखी, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी, विश्व हिन्दू परिषद के संयुक्त महामंत्री श्री सुुरेन्द्र जैन, सुप्रसिद्ध नृत्यांगना पद्मश्री सोनल मानसिंह, फिल्म अभिनेता मुकेश खन्ना सहित अनेक विशिष्टजन बैठे थे। वामपंथियों की हिंसाधारित राजनीति के  प्रति आमजन के भीतर उबल रहे रोष को शब्द देते हुए श्री होसबाले ने कहा कि केरल की विजयन सरकार अब भी संभल जाए वरना 'याचना नहीं अब रण होगा, संघर्ष बड़ा भीषण होगा'। सह-सरकार्यवाह ने केंद्र सरकार से मांग की कि केरल सरकार को बर्खास्त कर वहां अविलंब राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। उन्होंने आह्वान किया कि हिंदुस्थान की जनता प्रत्येक माध्यम से केंद्र सरकार से यह मांग करे क्योंकि केरल की वर्तमान सरकार के संरक्षण में माकपा के नरसंहारी कार्यकर्ता आए दिन निर्मम तरीके से इनसानियत का गला घोंट रहे हैं, मासूम जनता के मानवाधिकारों का हनन कर रहे हैं। श्री होसबाले ने चेतावनी दी कि अगर केरल सरकार अब भी उचित कार्रवाई नहीं करती है तो उसे इसका परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।  
उन्होंने आगे कहा कि वामपंथियों के काम का आधार कठोर नफरत है। लेकिन, अब ऐसा नहीं चलेगा। अगर अब मार्क्सवादी कार्यकर्ताओं द्वारा हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के किसी एक कार्यकर्ता का भी खून बहाया गया तो उन्हें कुरुक्षेत्र के मैदान में लाकर कौरवों का 5,000 साल पुराना इतिहास याद दिला दिया जाएगा।  सहसरकार्यवाह ने सवाल किया कि मानवाधिकार आयोग, सर्वोच्च न्यायालय, एससी-एसटी आयोग केरल में मारे जा रहे नागरिकों, जिनमें से अधिकतर दलित हैं, का स्वत: संज्ञान क्यों नहीं ले रहे हैं? और कितनी हत्याओं के बाद इनकी आखें खुलेंगी? उन्होंने कहा कि अब हम केरल के लोगों के मानवाधिकारों की हत्या नहीं होने देंगे। आज का यह विरोध-प्रदर्शन संघ के स्वयंसेवकों का नहीं है, बल्कि इसमें केरल की नरसंहारी वामपंथी सरकार और मुख्यमंत्री पी़ विजयन के खिलाफ देश के बुद्धिजीवियों की हुंकार शामिल है। यह आक्रोश सिर्फ दिल्ली तक ही सीमित नहीं रहने वाला, केरल की पिनरई सरकार ने इस हत्याओं के दोषियों को सजा नहीं दी और इस पर रोक नहीं लगाई तो तिरुअनंतपुरम में सचिवालय सहित पूरे देश में ऐसे धरने आयोजित होंगे। श्री होसबाले ने सीपीएम का नया नामकरण किया-'कांस्पिरेसी पार्टी ऑफ मर्डरर्स'। इससे पहले, धरने की पृष्ठभूमि और केरल में जारी कम्युनिस्ट हत्यावाद के बारे में संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख जे़ नंदकुमार ने कहा कि आज 'गॉड्स ओन कंट्री' यानी भगवान की धरती कही जाने वाली केरल की धरती को कम्युनिस्ट गुंडों ने कसाईखाना बना दिया है। उन्होंने कहा कि केरल में मार्क्सवादी आतंकवादियों ने महिलाओं और बच्चों तक को नहीं बख्शा है। श्री नंदकुमार ने कहा कि  केरल के मुख्यमंत्री तीन दिन से दिल्ली में थे, हम आज उन्हें केरल में हुई हिंसा के खिलाफ ज्ञापन देने वाले थे। लेकिन, वे कल रात ही दिल्ली से गुपचुप चले गए। पी़ विजयन संवाद नहीं करना चाहते। केरल सरकार लोकतंत्र और मानवता विरोधी सरकार है इसलिए हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि केरल सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। आएदिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं पर तथाकथित मुख्यधारा का मीडिया उनकी तरफ से आंखें फेर लेता है। श्री नंदकुमार ने कहा कि इन हमलों में इस्लामिक आतंकवादियों की मदद ली जा रही है। माकपा की विचारधारा 'डिफेक्टिव' है और इसकी कार्यपद्धति 'डेस्ट्रिक्टिव'। वहीं राष्ट्रीय उलेमा फाउंडेशन के अध्यक्ष मौलाना मुर्तजा ने कहा कि केरल की नरसंहारी सरकार को केंद्र सरकार जितनी जल्दी हो सके, बर्खास्त करे।
सांसद मीनाक्षी लेखी ने सवाल किया कि केरल में हो रही हत्याओं का न्यायालय स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई क्यों नहीं करता? वामपंथी दलितों, महिलाओं के हक बात करते हैं, क्या यही उनके द्वारा दिया जा रहा हक है? दलितों की इन निर्मम हत्याओं पर अवार्ड वापसी गैंग की संवेदनाएं क्यों नहीं फूट रही हैं? दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि कम्युनिस्ट हत्यारों ने जिस तरह संतोष कुमार की हत्या की, उसे शब्दों में बताना मुश्किल है। अभाविप के सह संगठन मंत्री श्रीनिवास ने सेकुलरों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कहीं किसी छोटी घटना की आड़ में असहिष्णुता का शोर मचाने वाले केरल में 50 से ज्यादा साल से होती आ रहीं हत्याओं पर चुप रहते हैं, इनका समर्थित मीडिया उन घटनाओं को छुपाता है। हम बंसीधारी कृष्ण के साथ ही चक्रधारी कृृष्ण के भी उपासक हैं। हम बखूबी जानते हैं कि हद पार होने पर शिशुपालों को कैसे मारा जाता है।
विश्व हिन्दू परिषद के संयुक्त महामंत्री श्री सुरेन्द्र जैन ने रोषपूर्ण अंदाज में कहा कि विजयन कल रात भले यहां से चले गए हों, पर वे जहां जाएंगे, विरोध का स्वर गुंजाती ये आवाजें उनका पीछा करेंगी। विजयन के चुनाव क्षेत्र कण्णुर में ही 90 हत्याएं हुई हैं। अब बहुत हुआ, अब इसे और नहीं सहा
जा सकता।      
इनके अलावा धरने को संबोधित करने वालों में पूर्व नौकरशाह एस. पी. राय, अभिनेता मुकेश खन्ना, रा. स्व. संघ, दिल्ली के प्रांत संघचालक श्री कुलभूषण आहूजा, सुप्रसिद्ध नृत्यांगना सोनल मानसिंह, फिल्म कहानीकार अद्वैता काला, कर्नल ध्रुव कटोच आदि प्रमुख थे। धरने के बाद जनाधिकार समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृह राज्यमंत्री श्री हंसराज अहीर को एक ज्ञापन सौंपकर केरल सरकार को बर्खास्त कर वहां राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में श्री दत्तात्रेय होसबाले, श्री नंदकुमार, श्रीमती मीनाक्षी लेखी, श्री सुरेन्द्र जैन, डॉ. अनिल जैन, श्री कुलभूषण आहूजा, श्री आलोक कुमार और श्री श्रीनिवास शामिल थे।
इस धरने में प्रकट हुए आम भारतवासी के रोष को देखकर केरल की वामपंथी सरकार को सचेत हो जाना चाहिए और उन गुंडों पर कार्रवाई करनी चाहिए जिन्होंने संघ, भाजपा कार्यकर्ताओं पर हिंसक हमले किए हैं, उनकी जानें ली हैं। राजनीति में विरोधी स्वरों के प्रति ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं बची है।  -आलोक गोस्वामी  

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