| दिंनाक: 28 Feb 2015 15:34:28 |
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होली यानी मस्ती और उल्लास का पर्व। इस दिन अगर हुड़दंग नहीं मचाया तो कुछ नहीं किया। वर्षभर के त्योहारों में होली अन्य त्योहारों से खास है। इस त्योहार के आने से पहले ही मन में 'फुल' मस्ती का भाव उमड़ने लगता है और मन उन सभी चीजों को भूलकर सिर्फ आनन्द की प्रतीक्षा करने लगता है जिसका उसे इंतजार होता है। होली के आने से पहले हमारी आंखों के सामने व्यंजनों एवं कुछ और चीजों की एक लंबी श्रृंखला आने लगती है, जिनका हमें पूरे वर्ष भर इंतजार रहता है। होली आए और नए-नए व्यंजन न बनें ऐसा हो ही नहीं सकता। इस त्योहार पर कुछ खास चीजें हैं, जिनके शामिल हुए बिना होली अधूरी सी लगती है। आइये ऐसी ही कुछ चीजों के बारे में हम बात करते हैं और होली का आनंद लेते हैं।
गुझिया
गुझिया का नाम सुनते ही मुंह में पानी आने लगता है और खासकर होली हो और इसका जिक्र न हो यह कैसे संभव है। उत्तर भारत में खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश व राजस्थान में होली के दिन इसकी मिठास से सभी का मुंह मीठा रहता है।
रंग
लाल-पीले-गुलाबी-केसरिया-हरे रंग और होली का हुड़दंग। वैसे होली की मस्ती बिना रंगों के हो ही नहीं सकती क्योंकि यह त्योहार मुख्यत: रंगों का ही त्योहार है। या यूं कहिए होली और रंग एक दूसरे के पूरक हैं। जब होरियारों का हुड़दंग होता तभी इस त्योहार का मजा भी आता है। एक दूसरे के पुते चेहरे, जबरदस्ती रंग लगाने के लिए होरियारों की भागदौड़ अनायास ही होली के त्योहार को दोगुना कर देता है।
भांग और ठंडाई
इस दिन होरियारों की टोलीं भांग और ठंडाई पीकर मस्त होती है और सारी झिझक मिटाकर होली का आनंद लेती है। ठंडाई और भांग भी होली के प्रतीकों में गिने जाते हैं। इस दिन का युवाओं को खास इंतजार होता है, जब वे इसकी मस्ती में झूमते हैं तो सभी पुराने मतभेदों को भुलाकर इस पर्व का आनंद लेते हैं। ऐसे में होरियारों की टोली होली का हुड़दंग दोगुना कर देती है।
फाग
होली पर फाग का राग न हो तो ऐसे लगता है कुछ अधूरा सा रह गया है। क्योंकि यह प्रमुख रूप से 'राग और रंग' का ही पर्व है। राग अथवा संगीत… और रंग तो इस पर्व के प्रमुख केन्द्र में है ही। स्थान-स्थान पर पुरुष और महिलाएं 'आज बिरज में होली रे रशिया, होली रे रशिया वरजोरी रे रशिया' जैसे फाग और धमार गीतों पर उड़ती फूलों की पंखुडि़यों के बीच धुनों पर थिरकते मिल जाएंगे। ल्ल प्रतिनिधि