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मुद्दा में – हां, यह हिन्दू राष्ट्र है

Written byArchiveArchive
Aug 23, 2014, 12:00 am IST
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दिंनाक: 23 Aug 2014 15:26:35

आसेतु हिमाचल भूमि एक हिंदू राष्ट्र है, लेकिन इस देश के स्वाधीनता के 68 वर्ष पश्चात भी अगर कोई इस सत्य का उच्चारण करता है तो इस देश का मीडिया ऐसे चिल्लाने लगता है कि जैसे कोई घोर अपराध किया हो। सन 1925 में जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रथम सरसंघचालक को किसी ने पूछा कि, कौन कहता है कि यह हिंदू राष्ट्र है? तब दृढ़तापूर्ण शब्दों में तुरन्त जवाब आया कि, हां, मैं डा. केशव बलिराम हेडगेवार कहता हूं कि यह हिंदू राष्ट्र है न कि केवल अपना नाम जोड़कर उन्होंने यह सत्य कह दिया, लेकिन अपना सारा जीवन इस सत्य को स्थापित करने हेतु समर्पित कर दिया। हिंदुस्थान को अपनी पहचान दिलाने के लिए एक अलौकिक संगठन और एक असाधारण कार्यप्रणाली को जन्म दिया। इसके फलस्वरूप उस घटना के लगभग 90 साल बाद अब हिंदू स्थान में गोवा से, कभी नागपुर से, कभी मुंबई से तो कभी दिल्ली से बार-बार बड़े गर्व से डा़ हेडगेवार जी का वह वाक्य पुन: पुन: गूंज रहा है कि, हां यह हिंदूू राष्ट्र है।
हाल ही में सरसंघचालक मोहन भागवत का विश्व हिंदूू परिषद् के स्वर्णजयंती समारोह में मुंबई में आया वक्तव्य चर्चा का विषय बन चुका है। उन्होंने अधिक सरल शब्दों में राष्ट्रवाद का उच्चारण किया था। अगर इंग्लैंड में रहने वाले लोग इंग्लिश हो जातें हैं, जर्मनी में रहने वाले जर्मन होते हैं तो हिंदुस्थान में रहने वालों की पहचान हिंदू नाम से क्यों नहीं की जाती? कुछ दिन पहले इसी सत्य को गोवा के उपमुख्यमंत्री फ्रान्सिस डिसूजा ने दो टूक शब्दों में कहा था कि इस देश में रहने वाले सभी लोग हिंदू हैं चाहे उनका पंथ कोई भी हो। अपने खुद के बारे में उन्होंने कहा था कि मेरा पंथ ईसाई होने के बावजूद मैं हिंदू हूं- ईसाई हिंदू! इस वक्तव्य पर भी कई लोगों ने आपत्ति जताई, खूब चिल्लाए हिंदूू …हिंदूराष्ट्र, यह नाम सुनते ही चिल्लाना शुरू करने वालों को फ्रान्सिस डिसूजा का यह वक्तव्य तो उनकी नींद उड़ाने वाला था।
वास्तव में डिसूजा ने इस देश के बारे में एक पुरातन, सनातन सत्य को उद्घोषित किया। डिसूजा नामक व्यक्ति ने इसे उद्घोषित किया इसलिए वह ज्यादा महत्वपूर्ण है। क्योंकि जब जब हिंदूराष्ट्र शब्द का उच्चारण होता है तो इस देश के बहुसांप्रदायिक और हिंदुत्वविरोधी चिल्ला-चिल्लाकर एक सवाल पूछते हैं कि, तुम्हारे इस हिंदूराष्ट्र में अहिंदू का क्या करोगे? इस देश के मुसलमान और ईसाइयों को क्या देश के बाहर खदेड़ दोगे या उन्हे मौत के घाट उतारा जाएगा? इस सवाल को पूछने से हिन्दुत्व की बात करने वाले चूप हो जाएंगे ऐसे मान कर यह सवाल किया जाता है। अहिंदू को मौत के घाट उतार देने की इस कल्पना के साथ आलोचना करने हेतु हिटलर का नाम भी जोडा जाता है। फिर तालिबान से तुलना की जाती है। संघ प्रमुख के वक्तव्य के बाद बड़बोले दिग्विजय ने इसी प्रकार से हिटलर का नाम ले कर ट्विटर पर आपत्तिजनक पोस्ट डाल दी। हिंदूराष्ट्र में अहिंदू के साथ क्या करोगे? ऐसा सवालिया निशान लगाने वालों को फ्रान्सिस डिसूजा का वक्तव्य एक करारा जवाब है। अपने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस देश में कुछ भ्रम पहले से तैयार किये गए हैं। जिस में एक भ्रम पंथ और धर्म के बारें में है, दूसरा राज्य और राष्ट्र के बारे में है। उपासना की पद्घति को पंथ कहा जाता है। कोई एक अधिकारी व्यक्ति जब अध्यात्मिक क्षेत्र में निजी उन्नति के लिए उपासना का नया मार्ग दिखाता है तब उस मार्ग पर चलने के लिए कुछ लोग तैयार होते हैं और उनका एक पंथ बन जाता है। पंथ में एक ही गुरु, एक ही ग्रंथ होता है। उपासना की एकही पद्घति का आग्रह होता है। इस्लाम, ईसाई यह ऐसे ही पंथ हैं। लेकिन हिंदू पंथ से उपर उठ कर अलग कल्पना है। हिंदू जीवन पद्घति है। उच्चतम न्यायालय ने भी हिंदूराष्ट्र की परिभाषा करते समय यही कहा है। हिंदू का न तो यीशू या पैगंबर जैसा एक गुरु है न तो बाइविल या कुरान जैसा कोई एक गं्रथ हिंदुस्थान में यह उपासना अपनी-अपनी श्रद्घा के अनुसार करने की स्वतंत्रता है। मूर्तिपूजा का विरोध करने को भी यहां एक नया जीवनदर्शन माना गया है। शैव, वैष्णव लिंगायत, जैन, बौद्घ, सिख ऐसे कई पंथ हिन्दुत्व की परिधि में ही हैं। मूर्ति की पूजा करें या शक्ति की पूजा करें, वेदों को माने या यज्ञ का अनुसरण करें, अस्तिक हों या नास्तिक हों सभी लोग हिन्दुत्व की व्यापक कल्पना में समा जाते हैं। तो ईसाई और मुस्लिम भी इस में अपनी-अपनी उपासना पद्घति और पहचान को कायम रख कर शामिल किए जा सकते हैं। तो किसी के भी मन में यह सवाल आ सकता है कि, यदि ऐसा है तो फिर हिन्दू क्या है? हिंदू एक धर्म है उपासना की पद्घति नहीं। जीवन व्यतीत करने की शैली, जीवन में निहित कर्तव्यों का निर्वहन करने की पद्घति को धर्म कहा गया है। इसका उपासना से कोई संबंध नहीं है।
एक आदर्श नागरिक के नाते, सृष्टि के और परमेष्टी के प्रति उसकी एक बूंद के नाते हर एक व्यक्ति का दायित्व क्या होना चाहिए इस दायित्वबोध के साथ आचरण इसका नाम है हिन्दुत्व। उपासना पद्घति कोई भी होने के बावजूद जो इन मूल्यों को, इस दायित्वबोध को ध्यान में रखते हुए आचरण करता है वह हिंदू है। करनी करें तो नर का नारायण हो जाए इस कहावत में जो करनी अपेक्षित है वह यही है। हिंदुत्व में किसी का द्वेष नहीं, किसी उपासना पद्घति को दूसरे पर थोपना मंजूर नही। जिसको भी अपने निजी कर्तव्यों का बोध हुआ है वह आदमी या कोई भी जीव, जन्तू उसे जो चाहे वह मिले ऐसी कामना हिन्दुत्व श्रेष्ठ विचारधारा में की गयी है। हिंदूराष्ट्र के परमोत्कर्ष का मतलब है मानवता का उत्कर्ष! शिर्डी के साईबाबा जैसे कई उदाहरण इस कड़ी में मौजूद हैं। यहां जैन, बौद्घ, वैष्णव, जैसे ईसाई और मुसलमान भी इसी जीवनदर्शन में अपनी उपासना का मार्गक्रमण कर सकते हैं। उन्हें हिंदू कहना या ुहदू नाम देना भी आवश्यक नहीं है। उन्हे अहिंदू कह कर अलग थलग कर देना भी उचित नहीं है।
किसी भी मार्ग से उपासना करने को मान्यता देने वाले हिंदुत्व का नाम लेते ही यहाँ के सेक्युलरवादी उन्हे जातीयवादी करार देते हैं। इसके विपरीत जो अपने उपासनामार्ग को ही सही मान कर अन्य उपासना का विरोध करते हैं उन्हें मान्यता देने को ये लोग सर्वधर्म समभाव का अनुसरण मानते है। यहां की ऐसी राजनीतिक सोच ने संज्ञा और उनके आचरण को एक दूसरे के विपरीत बना दिया है।
हां यह हिंदू राष्ट्र है क्योंकि यहां किसी पर अपनी उपासना पद्घति थोपने की कोशिश नहीं होती या अलग उपासना पद्घति होने से किसी को देश छोड़कर जाने की नौबत नहीं आती। हां यह हिंदूराष्ट्र है क्योंकि यहां किसी ने अलग विचार प्रस्तुत करनेवाली किताब लिखने पर उसकी हत्या करने का फर्मान नहीं निकलता। हां यह हिंदूराष्ट्र है क्योंकि यहां अपने से जादा दूसरे उपासना पद्घति को अपनाने वालों का ज्यादा ख्याल किया जाता है। यहां अतिथि को देवता माना जाता है। यहां सांप, बैल जैसे जानवर और तुलसी, वटवृक्ष जैसे पेड़ की भी पूजा की जाती है। यहां किसी भी मत को स्विकारने का स्वातंत्र्य है, किसी भी देवता की उपासना अपनी अपनी पद्घति से करने की खुली छूट है। सदाचरण, मावनता, प्राणी, जीव-जंतू का कल्याण यही इस हिंदुत्व का दर्शन है। समूचे मानवता को पावन करने वाला यह जीवन दर्शन है। कोई कितना भी दिशाभ्रम करने की चाहे जितनी कोशिशें करें लेकिन यह हिंदूराष्ट्र है इस सनातन सत्य को नकारा नहीं जा सकता। -दिलीप धारूरकर

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