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बेंगलूरू प्रतिनिधि सभा में श्री मोहनराव भागवत ने कहा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मूलभूत कार्य राष्ट्रनीति यानी देश हित के लिए कार्य करना है। इस उद्देश्य हेतु संघ ने अपनी कार्यपद्धति व्यक्ति निर्माण के सौहार्दपूर्ण तरीके पर आधारित की है। स्वयंसेवकों को हमारे देश में शासन करने के तरीकों को पूरी तरह बदलने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए न कि उन लोगों को बदलने की चिंता करनी चाहिए, जो शासन करते हैं।ह्ण यह कहना था रा. स्व. संघ. के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत का। वे 7-9 मार्च, 2014 को बेंगलूरू में सम्पन्न संघ की अ. भा. प्रतिनिधि सभा के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
श्री भागवत ने आगे कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे प्रेरणा का स्रोत भगवाध्वज है और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण हेतु संपूर्ण समाज को संगठित करना हमारा मुख्य लक्ष्य है। पिछले 10 वर्षों में देश में परिस्थितियां जिस प्रकार बिगड़ी हैं, उससे समाज के सामने यह स्पष्ट हो गया है कि देश का शासन किसके हाथ में नहीं होना चाहिए। हमारी भूमिका यह सुनिश्चित करने की है कि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों के आधार पर 100 प्रतिशत मतदान सुनिश्चित हो। राजनीतिक रूप से हम प्रभावी रहे हैं और इस स्थिति का हम राष्ट्रीय हित में आवश्यकता पड़ने पर प्रयोग कर सकते हैं, लेकिन हमें अपनी सीमाएं भी भलीभांति पता हैं। श्री भागवत ने आपातकाल की परिस्थितियों का उदाहरण सामने रखते हुए कहा, ह्यअगर हमारे सामने अपने लक्ष्य स्पष्ट हैं तो हम यह तय कर सकते हैं कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। माहौल के साथ बहे बिना, हम जानते हैं कि, अपनी सीमाओं में रहकर कैसे कार्य करना है और इस लिए संगठन के रूप में हम भिन्न हैं।ह्ण
राष्ट्र-जीवन में संघ के योगदान पर मार्गदर्शन करते हुए राष्ट्रीय कार्यकारी मंडल के सदस्य श्री मधु भाई कुलकर्णी ने कहा कि संघ स्वामी विवेकानन्द के ह्यव्यवहार रूप वेदान्तह्ण के सिद्धांत पर कार्य करता है। संघ प्रार्थना, भगवाध्वज और सामूहिक नेतृत्व, ये कुछ ऐसी अनूठी चीजें हैं जो हमें परम वैभव के लक्ष्य-पथ पर बढ़ाए रखती हैं। उन्होंने कहा कि यह ईश्वर प्रदत्त मिशन भारत के पुनर्निर्माण के लिए ही कार्य नहीं कर रहा अपितु संपूर्ण मानवता के उत्थान हेतु कार्यरत है। प्रतिनिधि











