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आवरण कथा 'बाहर देखा भीतर झांकें' बताती है कि देश को आज बाहर देखने की अपेक्षा भीतर झांकने की अत्यधिक जरूरत है, क्योंकि देश में आंतरिक सुरक्षा के नाम पर जगह-जगह सेंध लगी हुई है। हम अक्सर बाहर से आने वाले दुश्मनों पर ध्यान रखते हैं, लेकिन घर में बैठे दुश्मनों को नजर अंदाज कर देते हैं,जो हमारे लिए घातक सिद्ध होता है। आज हमारे सामने कई ऐसे उदाहरण हैं, जो बताते हैं कि देश के बाहर घमासान तो है ही, लेकिन अंदर उससे ज्यादा घमासान है। हम सबके लिए महत्वपूर्ण यही होगा कि पहले हम अपने घर के भेदियों को परास्त करें।
-बी.एल.सचदेवा
263,आईएनए बाजार (नई दिल्ली)
० आज देश की बड़ी समस्याओं में नक्सल समस्या प्रमुख रूप से है। आये दिन कहीं न कहीं इनके द्वारा उत्पात की घटनाएं प्रकाश में आती हैं। हाल ही में कुछ समाचार ऐसे भी मिले हैं, जिनमें इनके देश विरोधी तत्वों के साथ संबंध उजागर हुए हैं । इसलिए केन्द्र सरकार को नक्सली आंदोलन को हल्के में न लेकर इनके विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, क्योंकि जो देश विरोधी तत्वों के साथ मिलकर काम कर रहा है वह न तो देश भक्त हो सकता है और न ही देश का नागरिक ।
-हरिहर सिंह चौहान
जंबरीबाग नसिया, इन्दौर (म़ प्ऱ)
० देश के पूर्वी राज्यों में बंगलादेशी मुसलमानों की घुसपैठ हमारी सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है। असम,नागालैंड,मणिपुर जैसे राज्यों में हिन्दू समुदाय शनै-शनै अल्पसंख्यक होता चला जा रहा है। इन राज्यों में मजहबी उन्मादी हिन्दू समुदाय के साथ घोर अत्याचार कर रहे हैं। सुरक्षा के नाम पर केन्द्र सरकार और राज्य सरकारें जहां अपने वोट और सत्ता के पाये मजबूत कर रही हैं वहीं हिन्दुओं की दयनीय होती स्थिति से देश की एकता,अखण्डता और राष्ट्र की सनातन संस्कृति दिन-प्रतिदिन कमजोर होती जा रही है। सवाल यह है कि आतंकवादियों के पक्ष में मानवाधिकार की बात कर उनकी वकालत करने वालों को यह हिन्दू उत्पीड़न नजर क्यों नहीं आता? आज सेकुलरवाद के नाम पर पाखंड और दोहरे आचरण करने वाले राजनैतिक दल देश और संपूर्ण संस्कृति के लिए खतरा हैं। ऐसे दल और लोगों से हम सभी को सचेत रहना है।
-श्री कृष्ण सर्राफ
56, शिमला रोड, कोलकाता
० हमारे घर में ही हमारे दुश्मन मौजूद हैं, जो देश की अस्मिता को तोड़ने के लिए रात-दिन प्रयास में लगे हुए हैं। आज हिंसा फैलाने में नक्सलवादियों की क्षमता अत्याधुनिक हथियारों के हाथ में आने के चलते कई गुना बढ़ गई है, जो देश के लिए एक गम्भीर समस्या है, लेकिन कुछ सवाल केन्द्र और राज्य सरकारों से भी हैं कि आखिर क्यों यह समस्या रात-दिन भयंकर रूप लेती जा रही है? कहीं यह क्षेत्रीय लोगों के असंतोष का तो कारण नहीं है।
-शान्ति स्वरूप सूरी
362/1, नेहरू मार्ग, झॉसी (उ़ प्ऱ)
सेकुलर मीडिया
देश में राष्ट्रवाद तथा उसके समर्थकों से सेकुलर मीडिया कितना एलर्जी रखता है इसका उदाहरण गत दिनों सलमान खान की फिल्म ह्यजय होह्ण के हिट होने के बावजूद मीडिया ने उसको बुरी तरह विफल बताया और साथ ही इसका संबंध श्री नरेन्द्र मोदी से जोड़ते हुए ऐसा माहौल बनाने का प्रयास किया कि आगे से कोई भी फिल्म अभिनेता मोदी या किसी भी राष्ट्रवादी विचारधारा के व्यक्ति की प्रशंसा करेगा तो उसका यही हाल होगा। लेकिन सच्चाई इसके ठीक विपरीत है। फिल्म ने 100 करोड़ से ज्यादा की कमाई की है, तो उसे विफल कैसे कहा जा सकता है, क्योंकि फिल्म जगत में 100 करोड़ की कमाई करने वाली फिल्मों को सफल श्रेणी की फिल्म कहा जाता है।
-संजय चतुर्वेदी
पथरमली,आबूरोड (राज.)
किसका मुंह, किसके बोल
प्रशान्त भूषण का कश्मीर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों पर जनमत संग्रह का बयान निश्चित तौर पर राष्ट्रद्रोह है। कश्मीर में जनमत संग्रह की बात ही राष्ट्र को खण्डित करने की सोची समझी चाल है। आआपा के नेता मुस्लिम वोटों के लालच में अलगाववादियों की भाषा बोल रहे हैं। निश्चित तौर पर ऐसी खतरनाक साजिश रखने वाले लोगों का विरोध होना ही चाहिए।
-रमेश कुमार मिश्र
कान्दीपुर,जिला-अम्बेडकरनगर (उ़ प्ऱ)
सत्ता की चाहत
आम आदमी पार्टी का प्रमुख उद्देश्य किसी भी प्रकार सत्ता को पाना है, इसके लिए वह किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहती है। हम सभी ने देख ही लिया कि कैसे सत्ता के लालची अरविन्द केजरीवाल ने जिस कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से मना किया था उसी से समर्थन लेकर सरकार को चलाया । जनता अब सब जान चुकी है कि आआपा ही कांग्रेस का दूसरा रूप है,जो लोगों को बरगलाकर भ्रमित करने के लिए उसके द्वारा तैयार की गई है।
-सूर्यप्रताप सिंहह्यसोनगराह्ण
कांडरवासा (म़ प्ऱ)
राजनीति के अनाड़ी
देश का दुर्भाग्य है कि नेहरू भारत के प्रधानमंत्री बने। सामान्य रूप से आज तक देश उनको अपना प्रधानमंत्री स्वीकार करने से बचता रहा है, क्योंकि उनके चाल-चलन ही कुछ ऐसे थे। वे देश के प्रति कभी भी गम्भीर नहीं रहे और अनाडि़यों जैसी राजनीति करके देश की छवि खराब करते रहे, ठीक उसी तरह कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी हैं, जिन्हें भारत की राजनीति, इतिहास,भूगोल तक का सही ज्ञान नहीं है और बात ऐसी करते हैं कि वे ही भारत के प्रमुख राजनीतिज्ञ हों । लेकिन आज जनता राजनीति के ऐसे अनाडि़यों को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं करेगी, जिनको अपने देश के इतिहास तक का ज्ञान न हो ।
-राममोहन चन्द्रवंशी
टिमरनी जिला-हरदा (म़ प्ऱ)
बंगलादेश में हिन्दू उत्पीड़न
बंगलादेश में हिन्दू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमले निंदनीय है। भारत सरकार का इस मामले में चुप्पी साधे रहना नपुंसकता को दर्शाता है। दक्षिण एशिया क्षेत्र में हिन्दुओं पर बराबर किसी ना किसी रूप में अक्रामण हो रहे हैंे,जबकि भारत में बंगलादेशी घुसपैठियें खुलेआम मौज काट रहे हैं। आज पूरे विश्व में हिन्दू समाज को क्रूरतापूर्वक अमानवीय व्यवहार से गुजरना पड़ रहा है,लेकिन किसी का भी इस ओर ध्यान नहीं जा रहा है। बंगलादेश के मामले में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को हिन्दुओं के साथ हो रहे अमानवीय अत्याचार के संबंध में उनकी सुरक्षा हेतु प्रभावी कदम उठाने हेतु तत्काल बंगलादेश सरकार से वार्ता करनी चाहिए।
-निमित जायसवाल
रामगंगा विहार फेस 1,मुरादाबाद (उ.प्र.)
हिन्दू कहने में संकोच क्यों?
कुछ हिंदुओं की यही एक समस्या है कि उन्हें हिन्दू कहने और हिन्दू बताने में डर लगता है, आखिर क्यों ? लेकिन मुस्लिम और ईसाई अपने मजहब को बताने में गौरवान्वित महसूस करते हैं। 85 करोड़ जनसंख्या होने के बाद भी हमारी बात को सुना नहीं जाता और कुछ मुट्ठीभर लोगों की सभी मांगें मान ली जाती हैं। अगर भारत में सभी भारतीय समान नागरिक हैं, तो फिर भेदभाव क्यों? इसका उदाहरण सभी के सामने है। हाल ही में मुज्जफरनगर दंगे में सभी को केवल पीडि़त मुस्लिम ही दिखायी दिए, जबकि हिंदुओं को कोई पूछने तक नहीं गया ? इस सबके पीछे एक ही कारण है कि हम सभी में एकता नहीं है और हम अपने को निर्बल समझते हैं। लेकिन जिस दिन हम अपनी शक्ति को पहचान लेंगे, उस दिन से हिन्दुओं का स्वरूप ही कुछ और होगा।
-रचना रस्तोगी
वेस्टर्न कचहरी रोड , मेरठ (उ.प्र.)
० बंगलादेश सहित पूरी दुनिया में हिन्दुओं पर हो रहे हमलें और हत्याओं से किस हिन्दुस्थानी का दिल पीड़ा को प्राप्त नहीं होगा। देश सहित पूरे विश्व में हिन्दुओं व हिन्दू संस्कृति को नष्ट करने का दुष्चक्र जारी है। आज के समय पूरे दक्षिण एशिया क्षेत्र में हिन्दू धर्म की छाप मिटाने का कार्य चल रहा है ,तो दूसरी ओर भारत में घुसपैठियों को बसाने का कुचक्र। देश की तुष्टीकरण की राजनीति इन्हीं उन्मादियों को पालने और पोसने का काम कर रही है,जिनसे पूरी दुनिया त्रस्त है। पड़ोसी देश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर हो रहे हमल्ंों भारत सरकार की संवेदनशून्यता पर सवाल खड़ा करती हंै कि यही हमलें मुस्लिमों पर होते तो क्या वह अपना मुंह ऐसे ही बंद रखती?
-हरिओम जोशी
चतुर्वेदी नगर,भिण्ड (म़ प्ऱ)
० मानवाधिकार और उससे जुडे़ विषयों पर जब पूरे विश्व में जागरूकता है तो हिन्दू उत्पीड़न नजर क्यों नहीं आता? पाकिस्तान और बंगलादेश में बसे हिन्दू जिस दहशत और आतंक में जीवन यापन कर रहे हैं, उस पर अब तक गौर क्यों नहीं किया जाता? स्थिति इस कदर खराब है कि मुस्लिम बहुल देशों में हिन्दू अपने परिजनों का दाह संस्कार भी नहीं कर सकते, यह आतंक नहीं तो और क्या है? सेकुलरवाद के नाम पर पाखंड और दोहरे मापदंड अपनाने वाले राजनैतिक दल हिन्दू वेदना पर चर्चा करना चुनावी फायदे का विषय नहीं मानते, इसलिए वे कभी हिन्दू उत्पीड़न या उनके दुख-दर्द से कोई वास्ता नहीं रखते। इन सभी कारणों के पीछे और कोई भी नहीं स्वयं हिन्दू जिम्मेदार है, क्योंकि उसने कभी भी अपनी शक्ति को पहचाना ही नहीं और जब तक हम अपनी शक्ति को नहीं पहचानेंगे तब तक यही हाल रहेगा।
-मनोहर मंजुल
पिपल्या-बुजुर्ग,प़ निमाड (म़ प्ऱ्र)
मुसलमानों पर धन लुटाती सरकारें
2014 के लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे निकट आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे केन्द्र की कांग्रेसनीत सरकार व उत्तर प्रदेश की सपा सरकार मुस्लिमों पर विशेष ध्यान दे रही है तथा देश व प्रदेश का खजाना देश की सुरक्षा को ताक पर रखकर मुसलमानों पर लुटा रही है।
हाल ही में वित्तमंत्री पी. चिदम्बरम ने सेना को दिए जाने वाले 780 करोड़ रुपयों पर रोक लगा दी। यह सब उन्होंने इसलिए किया कि वह यह रुपया विभिन्न योजनाओं के माध्यम से मुसलमानों में बांट सकें और उनके थोक के वोट प्राप्त कर सकें। और तो और इसे मुस्लिम तुष्टीकरण की पराकाष्ठा ही कहेंगे कि कुछ समय पहले केन्द्रीय गृहमंत्री शिंदे राज्य सरकारों एवं पुलिस को आतंकवाद में मुस्लिम युवकों को न पकड़ने की सलाह देते हैं तो वहीं कपिल सिब्बल मजहबी तालीम के साथ मुसलमानों को रोजगार के अवसर देने की बात करते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार समय-समय पर मुसलमानों पर प्रदेश का खजाना लुटाने पर तुली है। चाहे वह दशवीं पास करने वाली सिर्फ मुस्लिम छात्राओं को 30 हजार रुपये देने की बात हो या फिर, कब्रिस्तानों की चाहरदीवारियों का निर्माण या साम्प्रदायिक हिंसा में सिर्फ मुसलमानों को अंधाधुुंध मुआवजा देने की जिद। हद तो तब हो गई जब मुलायम-अखिलेश सरकार ने उर्दू की डिग्री आमिल व फाजिल को स्नातक के बराबर मान्यता देने,मदरसा शिक्षकों जिनके पास परास्नातक व बीएड दोनों की उपाधि है का मानदेय 12 हजार के स्थान पर 15 हजार रुपए प्रतिमाह करने व स्नातक मदरसा शिक्षकों की मौत हो जाने पर उसके आश्रित को उनके स्थान पर नौकरी देने जैसी तथाकथित अनेक घोषणाएं कर डाली हैं।
जिस प्रकार केंद्र व राज्य सरकारें बहुसंख्यक हिन्दुओं के अधिकारों का लगातार हनन करते हुए अल्पसंख्यक मुसलमानों को लाभान्वित कर रही हैं, इससे देश में साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ता जा रहा है। एक तरफ तो सरकारें साम्प्रदायिकता को देश के लिए खतरा बताती हैं, वहीं दूसरी ओर
वह खुद सेकुलरवाद के नाम पर साम्प्रदायिकता को बढ़ावा दे रही हंै। सिर्फ एक मजहब के लोगो को विश्ेाष सुविधाएं एवं आर्थिक सहायता देने के कारण दूसरे पंथ के लोग अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे हैं। वोट बैक की राजनीति के चलते एक मत विशेष को इस कदर पाला-पोसा जा रहा है। यदि सरकारें इसी प्रकार साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देती रहीं तो वह दिन दूर नहीं जब एक बार फिर मजहब के आधार पर देश का बंटवारा हो जायेगा।
-आर.के.गुप्ता
बी-128, शास्त्री नगर
दिल्ली-110052











