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दुष्कर्मी न छूटें
आवरण कथा में श्री जितेन्द्र तिवारी की रपट 'देश दर्द से बेहाल, सरकार बेपरवाह' में सरकार की असफलत कार्यशैली को बड़े ही तार्किक एवं बेबाकी पूर्ण विचारों से उठाया गया है। देश के सत्तारूढ़ नेताओं की कार्यशैली और जुबान पर कोई लगाम नहीं है। उन्हें जनता के दु:ख-दर्द से भी कोई सरोकार नहीं है।
–उदय कमल मिश्र
गांधी विद्यालय के समीप, सीधी
जिला–सीधी-486661 (म.प्र.)
दिल्ली में चलती बस में एक युवती के साथ जो हुआ वह पूरे मानव समाज के लिए शर्म की बात है। राजधानी में जब ऐसी घटना घट सकती है तो फिर दूर-दूराज के गांवों और कसबों में क्या हाल होगा, यह बताने की आवश्यकता नहीं है। दुष्कर्मियों को किसी भी सूरत में न छोड़ा जाए। उन्हें सजा ऐसी हो कि कोई ऐसी घटना करने से पूर्व हजार बार सोचे।
–डा. रवि जवलगेकर
45, लक्ष्मी विष्णु सोसायटी, कुमठा नाका शोलापुर-413063(महाराष्ट्र)
द आज का कथित सभ्य समाज तो उस असभ्य समाज से भी ज्यादा गिरा हुआ है, जिसमें दैत्याकार राक्षस रहते थे। पर वे राक्षस भी किसी स्त्री के साथ ऐसा निर्लज्ज व्यवहार नहीं करते थे। जो समाज अपनी बहन-बेटियों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता है उसे सभ्य कैसे कहा जाए?
–मृत्युंजय दीक्षित
123, फतेहगंज, गल्ला मण्डी
लखनऊ-226018 (उ.प्र.)
द कई नामी-गिरामी महिलाओं ने कहा कि रात के समय घर से बाहर निकलने में डर लगता है। ये महिलाएं महानगरों में रहती हैं। जब भी घर से बाहर जाती हैं तो अपनी गाड़ी से जाती हैं। साथ में चालक या कोई और जरूर होता है। फिर भी ये महिलाएं शाम को ही घर से बाहर निकलने में हिचक रही हैं। यह बहुत ही शर्मनाक स्थिति है। जब खास महिलाओं को डर लगने लगा है तो आम महिलाओं का क्या होगा?
–प्रदीप सिंह राठौर
36-बी, एम.आई.जी., पनकी, कानपुर (उ.प्र.)
द आज नारी के प्रति बढ़ते अत्याचार का एक कारण है उसे कमतर समझा जाना। पुरुष की अपेक्षा नारी शारीरिक रूप से जरूर कमजोर है, पर अन्य मामलों में वह पुरुष से कम नहीं है। वेदों में ऐसे प्रसंग बहुत हैं जिनसे सिद्ध होता है कि हमारे यहां वेदकाल में नारी का स्थान बहुत ऊंचा था। वैदिक कालीन नारी हर क्षेत्र में सिद्धहस्त थीं। किन्तु बाद में बाह्य आक्रमण के कारण भारत में नारी का स्थान गिरता गया। यह क्षरण आज भी है। इसलिए नारी को सिर्फ भोग्या के रूप में देखा जा रहा है।
–डा. चन्द्रशेखर लोखंडे
सीताराम नगर, लातूर-413531 (महाराष्ट्र)
द नैतिकता एवं संस्कारों का सर्वत्र अभाव और पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण का दुष्परिणाम प्रत्यक्ष दिख रहा है। भोगवादी प्रवृत्ति ही सभी कुसंस्कारों की जड़ है। इस कलंक से बचने का एकमात्र उपाय है भारतीयों को नैतिकता एवं त्याग से परिपूर्ण अपनी प्राचीन संस्कृति की तरफ लौटना होगा।
–रमेश कुमार मिश्र
ग्रा.-कान्दीपुर, पो.-कटघरमूसा
जिला–अम्बेडकरनगर (उ.प्र.)
द बलात्कार की बढ़ती घटनाओं के साथ ही यह बहस चल पड़ी है कि दुष्कर्मियों के लिए कड़े कानून बनने चाहिए। केवल कड़े कानून से ऐसी घटनाएं नहीं रुक सकती हैं। हर उस गतिविधि पर रोक लगाने की जरूरत है जिससे कि समाज में गन्दगी फैलती है, एक स्वस्थ मन खराब होता है। उदाहरण के लिए उन विज्ञापनों को ले सकते हैं जिनसे अश्लीलता बढ़ती है। ऐसे विज्ञापनों पर तुरन्त रोक लगे।
–जयन्त देशमुख
पूनम कालोनी, राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)
द समाज में कम उम्र के बच्चे भी दुष्कर्म कर रहे हैं। ऐसा क्यों हो रहा है, इस पर विचार करना चाहिए। आज हमारे यहां दिन-रात खुलेआम ऐसे गाने बजते हैं, जिन्हें शालीन तो बिल्कुल नहीं कहा जाएगा। फिल्मों में अभिनेत्रियां अंग-प्रदर्शन करके करोड़ों कमा रही हैं और युवक उन दृश्यों को देखकर बहक रहे हैं। ऐसी फिल्में बिल्कुल न बनने दी जाएं जिनका दुष्प्रभाव समाज पर पड़ता हो।
–पं. जगदीश लाल शर्मा
बी-48, रघुवीर एन्कलेव, नजफगढ़
दिल्ली-110043
द सामूहिक बलात्कार की घटना ने यह साबित किया है कि दिल्ली में जंगलराज है। और जगह की अपेक्षा दिल्ली में पुलिस वालों की संख्या ज्यादा है। करीब ढाई घंटे तक उस लड़की के साथ दुष्कर्म होता रहा और पुलिस को भनक तक नहीं लगी। क्या इसे कानून का राज कहेंगे?
–हरिहर सिंह चौहान
जंवरीबाग नसिया, इन्दौर-452001 (म.प्र.)
द कोई बलात्कारी को फांसी देने की मांग कर रहा है तो कोई नपुंसक बनाने की। लेकिन समाज में तेजी से बढ़ रही कामुकता, अश्लीलता, नग्नता पर लगाम लगाने की बात कोई नहीं करता। आज युवाओं में जो विकृत सोच और स्वच्छंद कामेच्छा उत्पन्न हो रही है, उसके लिए संस्कारद्रोही-धर्मद्रोही समाचार-पत्र एवं टी.वी. चैनल जिम्मेदार हैं।
–अरुणा जैन
खैराबाद, तह.-रामगंजमण्डी
जि.-कोटा-326529 (राज.)
द चारों तरफ फैली पाश्चात्यकरण, नग्नता, भौतिकता ही जीवन का लक्ष्य बनती जा रही है। सदाचरण व संयम का त्याग किया जा रहा है, जबकि इसी बल पर नैतिकता बढ़ती है। इसी नैतिकता के कारण वीर हिन्दू राजाओं ने भारत के 1 हजार वर्ष के विदेशी आक्रमणकारी इतिहास में भी अपनी शरण में आयी शत्रु पक्ष की स्त्रियों को माता-बहन समझकर वापस कर दिया।
–डा. सुशील गुप्ता
शालीमार गार्डन कालोनी, बेहट बस स्टैण्ड सहारनपुर (उ.प्र.)
अंक–सन्दर्भ थ्30 दिसम्बर,2012
नफरती राजनीति की हार
सम्पादकीय 'राष्ट्रवादी राजनीति की विजय' में कांग्रेस और अन्य छद्म सेकुलर दलों की अच्छी खिंचाई की गई है। गुजरात में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की जीत ने यह दिखा दिया है कि विकास का मुद्दा नफरती राजनीति पर भारी पड़ता है। कांग्रेसी और दूसरे सेकुलर भाजपा की जीत को पचा नहीं पा रहे हैं। यदि कांग्रेस में अब भी थोड़ी-बहुत शर्म बची हो तो वह तुष्टीकरण की राजनीति को छोड़कर विकास की राजनीति करे, अन्यथा उसे हर जगह हार देखनी पड़ेगी।
–गणेश कुमार
पटना (बिहार)
द गुजरात में मिली हार से कांग्रेस को सबक लेना चाहिए। गुजरात में भाजपा को मिली जीत नरेन्द्र मोदी के प्रशासनिक कौशल और विकास की जीत है। कांग्रेस वर्षों से इस देश पर राज कर रही है। पर वह समाज को बांट कर राज करती है। जबकि भाजपा समाज को जोड़कर, विकास कार्यों के आधार पर राजनीति करती है। कांग्रेस विशेष वर्ग के लोगों का विकास करना चाहती है, ताकि उसका वोट बैंक बने, जबकि भाजपा पूरे समाज के विकास पर जोर देती है।
–राममोहन चंद्रवंशी
विट्ठल नगर, टिमरनी, जिला–हरदा (म.प्र.)
द गुजरात में मोदी की जीत ने कांग्रेस का जायका इतना खराब कर दिया कि वह हिमाचल में अपनी जीत का जश्न भी नहीं मना सकी और हार की इसी कुंठा में कांग्रेसी नेता अनाप शनाप बयान देते रहे। चुनाव के दौरान भी जितना अपप्रचार और कुप्रचार कांग्रेस ने किया, उसका नकारात्मक परिणाम ही निकला। गुजरात में लगातार तीसरी विजय पर भाजपा और मोदी निश्चित ही बधाई के पात्र हैं। मोदी जी की शालीनता देखिए कि चुनाव जीतने के पश्चात् वे अपने प्रतिद्वंद्वी केशुभाई पटेल का आशीर्वाद लेने उनके घर गए। मोदी के नाम और काम से जले-भुने बैठे नेताओं को इससे शिक्षा लेनी चाहिए।
–अरुण मित्र
324, रामनगर, दिल्ली-110051
द नरेन्द्र मोदी एक सफल राजनीतिज्ञ हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता है कि वे अन्य लोगों की तरह बेवक्त कुछ बोलते नहीं हैं। पिछले दो दशक से सेकुलर उनके खिलाफ आग उगल रहे हैं। ये सेकुलर अमरीकी प्रशासन को भी नरेन्द्र मोदी के खिलाफ भड़का रहे हैं। पर उन्होंने कभी भी उन सेकुलरों के लिए कोई टिप्पणी नहीं की और अपने काम में लगे रहे। गुजरात के लोगों ने उनकी इस शैली को पसन्द भी किया है। यह जीत उसी का परिणाम है।
–विकास कुमार
शिवाजी नगर, वडा, जिला–थाणे (महाराष्ट्र)
काश, उनकी सलाह मानी गई होती
श्री मुजफ्फर हुसैन ने अपने लेख में करांची में हिन्दुओं के मन्दिरों के ध्वस्त किए जाने के विवरण के साथ वहां रह रहे अल्पसंख्यक हिन्दुओं और ईसाइयों की दुर्दशा से भी अवगत कराया है, जिससे मन व्यथित हुआ। बाबा साहब अम्बेडकर ने 1947 में पाकिस्तान के वंचित समाज के लोगों को सावधान किया था कि वे जो भी साधन मिले भारत चले आएं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि वे कभी अपना धर्म परिवर्तन न करें और कभी भी मुसलमानों और मुस्लिम लीग पर विश्वास न करें। बाबा साहब की सलाह मान ली गई होती तो शायद यह दुर्दशा नहीं होती।
–क्षत्रिय देवलाल
उज्जैन कुटीर, अड्डी बंगला, झुमरी तलैया जिला–कोडरमा (झारखण्ड)
महिलाओं के लिए नरक
आंगन की तुसली स्तम्भ में श्रीमती ममता कोचर ने सऊदी अरब में एक भारतीय महिला सुजेन के साथ घटित घटनाओं को बड़ी मार्मिकता के साथ प्रस्तुत किया है। यह रपट उन लोगों के लिए एक दर्पण है, जो खाड़ी देशों में चाहे-अनचाहे काम के लिए जाते हैं और वहां नारकीय जीवन जीते हैं। सऊदी अरब तो एक कट्टर मुस्लिम देश है। वहां मुस्लिम महिलाओं को भी दोयम दर्जा प्राप्त है। गैर-मुस्लिम महिलाओं के लिए तो वह नरक ही है।
–बी.एल. सचदेवा
263, आई.एन.ए. मार्केट, नई दिल्ली-110023
चीन की गिद्ध दृष्टि
श्री बासुदेब पाल ने पूर्वोत्तर भारत की अनदेखी के खतरों के प्रति सचेत किया है। पूर्वोत्तर भारत में चीन की दखल से खतरे बढ़ते ही जा रहे हैं। पूर्वोत्तर के विद्रोही गुटों को चीन हथियार उपलब्ध करा रहा है, भारत को बांटने का षड्यंत्र रच रहा है। पर भारत सरकार उन खतरों को लेकर तनिक भी सजग नहीं है। अरुणाचल प्रदेश पर चीन की गिद्ध दृष्टि वर्षों से है। वह अरुणाचल को भारत का हिस्सा तक नहीं मानता है। इसके अलावा वह भारत को चारों तरफ से घेरने की कोशिश में है। पाकिस्तान से उसकी दोस्ती छिपी नहीं है। श्रीलंका, म्यांमार, बंगलादेश में भी चीन सक्रिय हो रहा है। यह भारत के लिए चिन्ता की बात है।
–प्रमोद प्रभाकर वालसंगकर
1-10-81, रोड नं.-8 बी, द्वारकापुरम, दिलसुखनगर, हैदराबाद-500060 (आं.प्र.)











