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कांग्रेस के जयपुर चिंतन शिविर में राष्ट्रभक्त हिन्दुओं के विरुद्ध जहर उगलने वाले केन्द्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के बयान से यह साबित हो गया है कि येन–केन–प्रकारेण सत्ता पर अपना वर्चस्व बनाए रखने की कांग्रेसी फितरत बदली नहीं है, चाहे इसके लिए राष्ट्रहित ही क्यों न दांव पर लगाना पड़े। जाति–पंथ भेद उभारकर साम्प्रदायिक– मजहबी ताकतों को संरक्षण देना, सत्ता की राजनीति में उनका लाभ उठाना, वोट राजनीति के लिए समाज को बांटना– आपस में लड़ाना तो कांग्रेस का पुराना शगल रहा है, लेकिन पूरी तरह जन विश्वास खो चुकी कांग्रेस सत्ता हाथ से जाती देख इस कदर बौखला जाएगी कि उसकी सरकार जिहादी आतंकवाद से लड़ने की बजाय देश के बहुसंख्यक हिन्दुओं, हिन्दू संगठनों और यहां तक कि मुख्य विपक्षी दल पर भी आतंकवाद का पोषण करने का लांछन लगाकर पाकिस्तान और उसके आश्रय में पल रहे आतंकवादी सरगनाओं को भारत के खिलाफ ही हथियार थमा देगी, शायद यह किसी ने नहीं सोचा था। इस घटनाक्रम से कांग्रेस के 'हाफिज सईद साहब' और पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को कटघरे में खड़ा करने के उपक्रम में जुट गए हैं। मुम्बई हमलों के 'मास्टर माइंड' खूंखार आतंकवादी सरगना हाफिज सईद का यह कहना कि 'अब पाकिस्तान को चाहिए कि शिंदे के इस बयान को संयुक्त राष्ट्र के समक्ष पेश करे। विश्व समुदाय को शिंदे के इस बयान का संज्ञान लेना चाहिए। भारत ऐसा देश है जो आतंकवाद का पोषण कर रहा है' शिंदे के बयान से भारत को होने वाले नुकसान को इंगित करता है। शिंदे के इस बयान से न केवल हाफिज सईद व जमात–उद–दावा की बांछें खिल गई हैं, बल्कि दारुल उलूम ने तो उन्हें बधाई दी है। इससे स्पष्ट है कि गृहमंत्री ने कांग्रेस के राजनीतिक षड्यंत्रकारी एजेंडे के तहत बेसिरपैर की बयानबाजी कर किस तरह जिहादी आतंकवादी सरगनाओं, पाकिस्तान और कट्टर मजहबी ताकतों का हौसला बढ़ाया है।
इसके विरुद्ध देश में हुई व्यापक प्रतिक्रिया से घबराकर कांग्रेस ने भले ही अपने को शिंदे के बयान से अलग दिखाने की कोशिश की हो, लेकिन संप्रग सरकार के कई मंत्रियों व कई कांग्रेस पदाधिकारियों का यह कहना कि 'शिंदे ने गलत क्या कहा है' कांग्रेसी शरारत को दर्शाता है। लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि गृहमंत्री के पास सबूत हैं तो उस आधार पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? राजनीतिक मंच से यह बोलना तो उनकी गलत मंशा को ही दर्शाता है। भले ही गृहमंत्री के बयान को पुष्ट करने के लिए गृह सचिव से 10 नामों की एक सूची जारी कराई गई हो, लेकिन उनमें से एक भी व्यक्ति पर कोई आरोप साबित नहीं हुआ। स्वामी असीमानंद और साध्वी प्रज्ञा तो राष्ट्रपति को पत्र लिखकर सरकारी साजिश का खुलासा कर चुके हैं कि उन्हें प्रताड़ित कर किस तरह उन पर आरोप मढ़े गए। शिंदे के बयानों की विश्वसनीयता का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि जब उन्होंने आतंकियों का धन शेयर बाजार में लगे होने की बात कही तो उनका मंत्रालय ही इस बात से इनकार कर बैठा। राष्ट्रीय जांच एजेंसी तक ने कभी अपनी किसी रपट में इस तरह का उल्लेख नहीं किया कि संघ और भाजपा के शिविरों में आतंकी प्रशिक्षण दिया जाता है, क्योंकि ऐसे कोई तथ्य उसके या सरकार के पास हैं ही नहीं। वहीं, गृहमंत्री अपनी ही केन्द्रीय जांच एजेंसियों के खुलासों का भी खंडन कर रहे हैं, जिनमें मालेगांव विस्फोट, मक्का मस्जिद कांड और समझौता एक्सप्रेस विस्फोट में पाकिस्तान और उसके गुर्गे जिहादी आतंकवादियों का हाथ बताया गया था।
आखिर इस सरकार की विश्वसनीयता क्या है? शिंदे उसी कांग्रेसी षड्यंत्र को विस्तार दे रहे हैं, जिसे 'भगवा आतंकवाद' का नाम देकर उनके पूर्ववर्ती गृहमंत्री चिदम्बरम ने आगे बढ़ाया था और कांग्रेसी 'युवराज' राहुल गांधी ने 'हिन्दू कट्टरवादियों से देश को खतरा' बताया था। इस तरह की हरकतें शर्मनाक तो हैं ही, हिन्दू समाज का अपमान भी हैं। इसीलिए देशभर में हिन्दू समाज उद्वेलित है, जिसकी गूंज 'शिंदे को बर्खास्त करो' के रूप में दिल्ली में भी सुनाई दी। सोनिया गांधी और उनकी पार्टी को समझ लेना चाहिए कि बहुसंख्यक हिन्दू समाज को इस तरह लांछित और प्रताड़ित कर वह सत्ता के समीकरण नहीं साध सकतीं। जिस तरह कांग्रेस मुस्लिम लीग और एमआईएम जैसे कट्टर मजहबी दलों का सत्ता के लिए सहारा लेकर साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देती रही है, उसी का परिणाम है कि अकबरूद्दीन ओबैसी जैसे मजहबी उन्मादी भरी सभाओं में '15 मिनट में सौ करोड़ हिन्दुओं का खात्मा' करने की खुली चुनौती देते हैं और कांग्रेस मुंह ताकती रहती है, क्योंकि उसे पता है वह इन्हीं मजहबी उन्मादियों की ताकत से सत्ता में है। क्यों शिंदे ने ओबैसी के विरुद्ध एक शब्द भी नहीं बोला, गृहमंत्री ने मजहबी उन्मादियों के साथ गठजोड़ कर सत्ता स्वार्थ साधने और देश को कमजोर करने के खतरों से कांग्रेसियों को क्यों नहीं चेताया, वे कांग्रेस के गृहमंत्री हैं या देश के? उलटे वे संघ जैसे सामाजिक व सांस्कृतिक संगठन, जो युवकों के चरित्र निर्माण, हिन्दुओं के संगठन, देशभक्ति की भावना जगाने व भारत के सर्वतोमुखी उन्नयन के कार्य में निष्काम भाव से लगा है, और भाजपा जैसी राष्ट्रवादी पार्टी व मुख्य विपक्षी दल पर कीचड़ उछाल रहे हैं, यह तो लोकतंत्र की मर्यादाओं का भी हनन है। ऐसे व्यक्ति को एक क्षण भी गृहमंत्री जैसे जिम्मेदार पद पर रहने का अधिकार नहीं है।











